देश के अर्थ विश्लेषकों की दृष्टि में पतंजलि अभियान
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गोमुख को देखकर किसी को आंकलन करना कठिन होता है कि हिमालय क्षेत्र से निकल कर भारत के विशाल मैदानी भूभाग के करोड़ों किसानों, गरीबों, असहायों, भक्तों, श्रद्धालुओं को जीवनदान देती और गंगा जल के सामान्य से सागर को गंगासागर की प्रतिष्ठा दिलाने वाली गंगा का मूल यही है। पर इस विशाल प्रवाह के पीछे छिपा है महाराज भगीरथ का कठोर तप, उनकी संकल्पशीलता और उनकी लोक उद्धारक दृष्टि जिनकी शक्ति से हजारों वर्षों से संपूर्ण विश्व उस दिव्य जलधार का अभिसिंचन करता आ रहा है। इसी प्रकार पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज एवं ऋषिकल्प श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज की संकल्पनिष्ठा से उपजे पतंजलि योगपीठ के इस दिव्य अभियान को भी युग भगीरथ के तप पुरुषार्थ का ही युग प्रवाह कहना समीचीन होगा। मात्र २३ वर्ष में ही इस प्रवाह से अनगिनत योगनिष्ठ साधक, स्वास्थ्य संवर्धक चिकित्सक, आयुर्वेद के विशेषज्ञ स्वदेशी के लाखों प्रचारक, भारत स्वाभिमान के करोड़ों राष्ट्रवती दिये हैं। इससे ऋषि प्रणीत भारतीय विधाओं को शक्ति मिली, नयी दृष्टि मिली। साथ ही देश आर्थिक समृद्धि की ओर ऐसा कदमताल करने लगा कि देश के अर्थ विश्लेषकों को इसका विश्लेषण करने हेतु प्रेरित किया। प्रस्तुत है उन्हीं विश्लेषकों की दृष्टि में पतंजलि का स्वदेशी अभियान - सहसंपादक
50 वर्षीय फिटनेस टे्रनर सौदामिनी पाणि कहती हैं- पतंजलि की ओर से आटा, शुगर और दालों के तमाम विज्ञापन दिखाए जाते हैं, लेकिन जब भी हम स्टोर पर पहुँचते हैं, तो ये आइटम आउट ऑफ स्टॉक हो चुके होते हैं। बिस्कुट और जूस जरूर उपलब्ध होते हैं।
बाबा रामदेव की बिजनेस साधना
धमेन्द्र चौधरी, नई दिल्ली- इंडिया टीवी
पूरी दुनियां में अपने योग का लोहा मनवाने के बाद बाबा रामदेव जी महाराज अंतरराष्ट्रीय उत्पाद बनाने वाली कंपनियों को लोहे के चने चबाने जैसी चुनौती दे रहे हैं। स्वामी रामदेव जी महाराज ने साल 2006 में पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड की स्थापना की। आज इसके पास हर्बल चाय और फ्रू ट जूस को लेकर टॉयलेटरीज प्रोडक्ट्स की एक बड़ी श्रृंखला है। पतंजलि आयुर्वेद एमएमसीजी सेक्टर में तेजी से आगे बढ़ रही है और एक के बाद एक नये उत्पाद लांच करके बाजार में अपनी अलग पहचान और जगह बना रही है। कंपनी ने नेस्ले की मैगी को टक्कर देने के लिए 'झटपट पकाओ बेफ्रिक खाओ’ के उद्घोष से 'पतंजलि आटा नूडल्स’ को लांच किया। इसके अलावा पतंजलि ग्लोबल स्पोर्टर्स वियर ब्रांड नाइके और एडिडास को चुनौती देने के लिए योग-वियर कलैक्शन बाजार में उतारने की तैयारी में है। जिसका भारत में एफएमसीजी का सालाना करोबार 2.64 करोड़ रुपये का है।
बड़े ब्रांडो को पतंजलि दे रहा चुनौती:
बीते साल करीब 2500 करोड़ का राजस्व हासिल करने वाली पतंजलि आयुर्वेद अब FMCG बाजार के बडे प्लेयर्स को टक्कर देने के लिए तैयार है। कंपनी ने राजस्व के मामले में तमाम लिस्टेड एफएमसीजी कंपनियों मसलन इमामी, प्रोक्टर एंड गैम्बल और ज्योति लैब्स को पीछे छोड़ दिया है। मैनेजमेंट कंसल्टेंसी टेक्नोपार्क के डायरेक्टर अरविंद सिंघल ने कहा था कि अगर पतंजलि आयुर्वेद 5000 करोड़ रुपये राजस्व लक्ष्य के हासिल कर लेती है, तो यह देश की टॉप-56 एफएमसीजी कंपनियों की लिस्ट में शामिल हो जायेगी। वह इसे पूरा भी कर चुकी है। वहीं, हाल में किए गये प्रोडक्ट लांच की घोषणा को देखते हुए लगता है कि कंपनी अगले दो से तीन साल के अंदर टॉप-3 में शामिल हो जाएगी।
पतंजलि के पास बड़ा रिटेल चेन:
करीब 1.77 लाख रिटेल स्टोर के जरिये पतंजलि अपने उत्पादों की बिक्री कर रही है। यहीं नहीं, अपने कारोबार का विस्तार करने के लिए पतंजलि ने फ्यूचर ग्रुप के साथ एक समझौता किया। इसके तहत देशभर में फ्यूचर ग्रुप के रिटेल स्टोर बिग बाजार, फूड बाजार, नीलगिरी और फूड हॉल पर पतंजलि के प्रोडक्टस की बिक्री होनी है। 95 से अधिक शहरों में उपस्थिति के साथ फ्यूचर ग्रुप भारत की सबसे बड़े रिटेल ग्रुप में से एक है। ज्ञातव्य कि पतंजलि आयुर्वेद का मुख्यालय हरिद्वार (उत्तराखण्ड) में है, इसकी शुरुआत मात्र 41 करोड़ पूंजी से 2006 में की गई थी।
पतंजलि आयुर्वेद की ताकत:
अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए की रिपोर्ट के मुताबिक पतंजलि की ताकत आम जनता तक सीधे पहुँच है। रिपोर्ट में कहा गया था कि कंपनी अपने प्रोडक्ट को बेचने के लिए पारंपरिक रास्ता अपना रही है और आने वाले वर्षो में इसे और तेज गति से बढ़ाने की तैयारी है। देश की एफएमसीजी कंपनियां आमतौर पर अपनी कमाई का 10-15 फीसदी हिस्सा विज्ञापन पर खर्च करती हैं, जबकि पतंजलि सिर्फ स्वामी रामदेव जी महाराज पर निर्भर है। हालांकि, हाल के दिनों में पतंजलि ने टीवी और अखबार में विज्ञापन देने शुरु किये हैं। सीएलएसए के अनुसार पतंजलि के पास 20 करोड़ लोगों तक पहुँचने की क्षमता है, जो कि डायरेक्ट या इंडायरेक्ट रूप से बाबा रामदेव के योग कार्यक्रम से जुड़े हैं।
देश के करोड़ों किराना स्टोर्स पर पहुँच की दिशा में पतंजलि अभियान
शेफाली भट्ट, नई दिल्ली- इकनॉमिक टाइम्स
पेशे से कॉर्पोरेट टैक्स कंसल्टेंट मुंबई की निवासी चित्रा कार्तिक पिछले साल दिसंबर में जब केरल स्थित अपने अंकल के घर गई थी। उन्होंने देखा कि उनके अंकल ने घर के पहले फ्लोर पर पतंजलि की फे्रंचाइजी शुरु कर दी है। यह पतंजलि के उत्पादों का प्रभाव था कि उन्होंने तत्काल 1000 रुपये के सामान की खरीद कर ली। उन्होंने बहुत ज्यादा आईटम नहीं खरीदे थे, इसलिए वह जल्दी ही समाप्त भी हो गये और दोबारा खरीददारी के लिए उन्हें मुंबई स्थित ग्रॉसरी स्टोर जाना पड़ा।
चित्रा कार्तिक कहती हैं कि कई सतह तक मैंने अपने घर के पास मौजूद रिटेल आऊटलेट्स पर पतंजलि के 'दंतकान्ति’ टूथपेस्ट की खोज की। लेकिन यह कहीं नहीं मिला और आखिर मुझे हिमालय कंपनी के टूथपेस्ट से ही संतोष करना पड़ा। उन्होंने कहा वास्तव में दंतकांति मंजन काफी अच्छा है, मेरी सास भी इसे पंसद करती है, लेकिन हमारे पास इसकी तलाश करने के लिए वक्त नहीं होता है।
चित्रा ऐसी अकेली नहीं हैं, तमाम लोग हैं जो पतंजलि के उत्पादों का इस्तेमाल करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें यह उपलब्ध नहीं हो पाते। 50 वर्षीय फिटनेस टे्रनर सौदामिनी पाणि कहती हैं- पतंजलि की ओर से आटा, शुगर और दालों के तमाम विज्ञापन दिखाए जाते हैं, लेकिन जब भी हम स्टोर पर पहुँचते हैं, तो ये आइटम आउट ऑफ स्टॉक हो चुके होते हैं। बिस्कुट और जूस जरूर उपलब्ध होते हैं, लेकिन मेरा सवाल है कि जब आप डिमांड पूरी नहीं कर सकते तो इतने प्रचार की क्या आवश्यकता है।
इस पर श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज बताते हैं कि 1200 पतंजलि चिकित्सालयों, 2500 आरोग्य केन्द्रों और 7,000 स्टोर गांव में होने के बाद भी हम सप्लाई नहीं दे पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारी टीम टियर-1 और शहरों-शहरों में 250 मेगा स्टोर खोलने की तैयारी में है। इसके अलावा पतंजलि बिग बाजार, रिलायंस रिटेल, हाइपरसिटी, स्टार बाजार, डी-मार्ट, स्पेंसर्स, मोर, अपोलो फार्मेसी जैसे रिटेलर्स से भी करार करने की तैयारी में है। इनके जरिए पतंजलि को देशभर के 4,500 स्टोर्स तक अपनी पहुँच बनाने में सफलता मिल सकती है। इसके अलावा ऑनलाइन खरीददारी की सुविधा भी है।
मल्टीनेशनल कम्पनियों की नींद हराम:
एफएमसीजी इंडस्ट्री के अनुमानों के मुताबिक पतंजलि के उत्पाद फिलहाल देशभर की करीब दो लाख किराना दुकानों पर उपलब्ध हैं। यद्यपि हिन्दुस्तान यूनिलीवर के मुकाबले यह 1/30 ही है। क्योंकि यूनिलीवर के प्रोडक्टस करीब 60 लाख किराना स्टोर्स पर मिल रहे हैं। लेकिन पतंजलि की ओर से लगातार बन रही पैठ से मल्टीनेशनल कंपनियों की नींद हराम हो गई है। कोलगेट और नेस्ले की बात करें तो जिन्हें स्वामी रामदेव जी महाराज ने हाल ही में पछाडने की बात कही थी, इनके प्रोडक्टस क्रमश: 47 लाख और 35 लाख स्टोर्स पर मिलते हैं। ऐसे में यह आसानी से समझा जा सकता है कि पतंजलि इन्हें पछाडऩे के लिए किराना स्टोर्स पर पहुँच का अभियान चला सकती है।

उद्योग जगत में बदलाव का नया ट्रेंड पतंजलि
किरण सोमवंशी- इकानॉमिक टाईम्स
एक दशक पहले मॉर्डन ट्रेड ने भारतीयों की खरीदारी का तरीका बदल दिया था। इसके बाद ईकामर्स और ऑनलाइन शॉपिंग का जमाना आया। अब पतंजलि आयुर्वेद बदलाव का नया टे्रंड लेकर आई है। इसने ब्रांडेड कंज्यूमर गुड्स सेक्टर में हलचल मचा दी है। पतंजलि की बढ़ती लोकप्रियता और उसके दमदार ब्रांड ने भारतीय एफएमसीजी सेक्टर को कुछ अहम सबक सिखाए हैं, वे हैं-
ब्रांड प्रीमियम की जरुरत नहीं?
कंज्यूमर्स पर दमदार असर छोडऩे के लिए ब्रांड का प्रीमियम वसूल करना जरुरी नहीं है। क्योंकि पतंजलि के प्रोडक्टस दूसरी कंपनियों के उसी कैटेगरी के प्रोडक्टस से सस्ते हैं। इक्रीएट वैल्यू एडवाइजर्स के फाउंडर और मैरिको के फॉर्मर सीएफओ मिलिंद सरवटे कहते हैं, 'ब्रांडस का प्रीमियम वसूल करने और उस प्रीमियम का इस्तेमाल करके ज्यादा विज्ञापन देने के लॉजिक को पतंजलि ने उलट-पुलट कर दिया है।‘
प्रोडक्टस की क्वालिटी ही USP
पतंजलि ने एक बार फिर से फोकस प्रोडक्ट की क्वालिटी पर ला दिया है। प्रोडक्टस के लिए जरुरी है कि वे विज्ञापनों के शोर से ऊपर उठकर कंज्यूमर्स को वैल्यू प्रोवाईड करें। पतंजलि के दो सबसे पॉपुलर ब्रांडस में घी और टूथपेस्ट हैं, जबकि इस सेगमेट में पहले से ही देसी-विदेशी कॉम्पिटिटर्स हैं। स्पार्क कैपिटल की हालिया सेक्टर रिपोर्ट के मुताबिक मार्केट में मची उथल-पुथल शॉर्ट टर्म में मुश्किलें पैदा करने वाली होगी, लेकिन इससे संपूर्ण एफएमसीजी प्रोडक्टस की गुणवत्ता पर फोकस बढ़ेगा।
मजबूत ब्रांड अंबेसडर:
योग गुरु बाबा रामदेव जी महाराज खुद हर्बल और ऑर्गेनिक पतंजलि प्रोडक्टस को प्रमोट करते हैं। इससे साबित होता है कि सेलेब्रिटी के एंडोर्समेंट से प्रोडक्टस को तभी फायदा होता है जब प्रोडक्टस के साथ उनका गहरा जुड़ाव हो। यही कारण है कि बाबा रामदेव जी के प्रति जन श्रद्धा का लाभ पतंजलि को मिलता है, जबकि पिछले साल मैगी के नूडल्स पर रोक लगने के बाद उसके ब्रांड अंबेसडर्स की भी कड़ी आलोचना हुई थी।
ग्राहक देवता है:
पतंजलि के उभार ने एफएमसीजी कंपनियों को होशियार कर दिया की वह कंज्यूमर्स को कम कीमत पर बेहतर प्रोडक्टस मुहैया कराए। इसने एफएमसीजी कंपनियों को याद दिला दिया कि ग्राहकों की कीमत पर लंबे समय तक मोटा मार्जिन नहीं बनाया जा सकता।
पतंजलि ने यह साबित कर दिया है कि इंडस्ट्री में किसी भी वक्तनया ट्रेंड शुरु किया जा सकता है। मार्केट में बहुत ज्यादा भीड़ होने और कमजोर डिमांड होने के बावजूद पतंजलि के प्रोडक्टस अपनी जगह बनाने में कामयाब रहे हैं। इंडस्ट्री टै्रक करने वाले एनालिस्ट ने कहा, इससे पता चलता है कि इंडस्ट्री में हमेशा नया करने का मौका होता है।
इसको दोहराना और कॉम्पिटिशन देना आसान नहीं है।
मैनेजमेंट का अहम रोल:
पिछले कुछ साल में पतंजलि बड़ी तेजी से ५००० करोड़ रुपये की एफएमसीजी कंपनी बन गई, जबकि दूसरी कंपनियों को यहां तक पहुँचने में कई साल लगे। इस संदर्भ में सरवटे कहते हैं, 'फॉर्मल मैनेजमेंट स्ट्रक्चर बहुत ज्यादा जटिलता के चलते कई बार बिजनेस ग्रोथ को सुस्त बना देती है।’
यह राज है पतंजलि की कामयाबी का
अतुल सेठी, नई दिल्ली- इकनॉमिक टाइम्स
बाबा रामदेव ने योगगुरु से लेकर ऐक्टिविजम और बिजनेस तक का लंबा सफर तय किया है। इन दिनों वह राजनीतिक बयानबाजी से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं, लेकिन पतंजलि और बिजनेस को लेकर उनकी ढेरों योजनाएं हैं। पतंजलि की कामयाबी से वह काफी खुश भी हैं और इस सफलता की वजह बिजनेस में पारदर्शिता और जिम्मेदारी को बताते हैं।
प्रोडक्ट क्वालिटी को लेकर जिम्मेदार हूँ:
वह कहते है मल्टी नेशनल कंपनियां (MNCs) विज्ञापनों पर बहुत ज्यादा खर्च करती हैं। वे सिलेब्रिटीज को बै्रंड एंबैस्डर बनाती हैं और इसके एवज में उन्हें करोड़ों रुपये देती हैं। मैं सिर्फ कैमरे के सामने खड़ा होता हूँ और अपने प्रोडक्टस के बारे में बोलता हूँ। लोगों को मालूम है कि मैं प्रोडक्ट्स की क्वालिटी को लेकर जिम्मेदार हू। उन्होंने मुझे २०-२५ साल से संघर्ष करते हुए देखा है। उन्हें मालूम है कि बाबा रामदेव जमीन पर सोते हैं और उन्हें अपने लिए कुछ नहीं चाहिए। क्या किसी एमएनसी का सीईओ कैमरे के सामने खड़े होकर अपने प्रोडक्टस की जिम्मेदारी लेगा?
स्वामी रामदेव जी महाराज के मुताबिक लोग उनके बैंरड में भरोसा करते हैं। उन्होंने कहा हम अपने प्रतिस्पर्धियों से कमतर नहीं बल्कि बेहतर टेक्नॉलजी का इस्तेमाल करते हैं। इसीलिए पतंजलि देश में काम कर रही कंपनियों से कहीं ज्यादा गुणवत्ता देने में सफल है। जल्द ही हम दुनियां भर में कामयाबी हासिल करेंगे।
लाभ नहीं चेरिटी:
हमारा मकसद बिजनस से मिले प्रोफिट को चैरिटी के लिए इस्तेमाल करना है, खासतौर पर शिक्षा के लिए। मैं चाहता हू कि हमारे प्रोफिट का ८०% हिस्सा शिक्षा में जाए। फैसले आचार्य बालकृष्ण ही लेते हैं। स्वामी रामदेव जी महाराज का मानना है कि अगर फैसला लेने वाले लोगों की संख्या ज्यादा हो तो योजनाएं कभी ठीक से लागू नहीं हो पाएंगी। उन्होंने कहा-पतंजलि को कभी कोई परिवार नहीं चलाएगा। हमारे पास ५०० से ज्यादा योगियों की टीम है। मेरे गुरु ने उन्हें इसी तरह प्रशिक्षित किया है जैसे उन्होनें मुझे किया था। हम कम से कम ५ हजार योगियों को टे्रनिंग देंगे जो आगे चलकर पतंजलि का कामकाज संभाल सकें।
मूल में तप और कर्म योग:
अपनी दिनचर्या के बारे में बताते हुए बाबा रामदेव जी महाराज ने कहा कि मैं आमतौर पर सुबह चार बजे से पहले जग जाता हूँ। साढ़े चार बजे तक मैं योग कर रहा होता हू। दो घंटे तक योग और ध्यान करने के बाद मैं पतंजलि आयुर्वेद में बिताता हूँ। इसके बाद चार-पांच घंटे लोगों से बातें करता हूँ। मैं बहुत हल्का खाना खाता हूँ। सुबह नाश्ते में अंजीर या जूस लेता हूँ, लंच-डिनर में सब्जियां खाता हूँ। १८ साल का वक्त मैंने सिर्फ दूध और फल के सहारे बिताया है। अब मैं दूसरी चीजें भी खाने लगा हूँ।
स्वामी रामदेव जी महाराज को खाली वक्त बहुत कम मिलता है। वह चाहते है कि लोग उन्हें एक कर्मयोगी संन्यासी के तौर पर याद करें। पतंजलि की प्रगति का राज भी उनके इन कथनों में ही छिपा है।
पतंजलि का कैमिकल मुक्त पूजा सामग्री सेगमेंट
पतंजलि आयुर्वेद 'पतंजलि आस्था’ नाम से नये बै्रंड के प्रोडक्ट्स में अगरबत्ती, धूप, सामग्र्री, तांबे का दीया वगैरह शामिल हैं। पतंजलि आयुर्वेद के मैनेङ्क्षजग डायरेक्टर श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने ईटी से कहा हम एक नया ब्रैंड आस्था तैयार कर रहे हैं। रिसर्च से पता चला है कि कई जमी-जमाई कंपनियां अगरबत्ती,धूप जैसे उत्पादों में कैमिकल का इस्तेमाल कर रही है, जिससे कंज्यूमर को नुकसान हो रहा है। इस सेगमेंट में प्राकृतिक उत्पाद की जरुरत है।
पतंजलि के खादी में होगी महात्मा गांधी कीपूर्ण राजनीति चिंतनधारा
रत्ना भूषण, नई दिल्ली- इकनॉमिक टाइम्स
योग गुरु रामदेव की क्लोदिंग सेक्टर में उतरने और 'खादी’ कपड़ों की मैन्युफैक्चरिंग की योजना को टेक्सटाइल इंडस्ट्री के बड़े नामों से पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिला है। इंडस्ट्री के कुछ नामों ने अपने प्रोडक्ट्स के साथ पतंजलि से संपर्क किया है।
सूत्रों ने बताया है कि इस सप्ताह की शुरुआत में रेमंड ग्रुप की एक टीम ने अपने प्रोडक्ट के सैंपल पतंजलि के एग्जिक्यूटिव्स को दिखाये थे। अहमदाबाद की टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरर अरविंद लिमिटेड ने भी बिजनेस की संभावनाओं को तलाशने के लिए पतंजलि से बातचीत की है
योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज की 'खादी’ के प्रोडक्शन में बड़े स्तर पर उतरने की योजना है। स्वामी जी महाराज ने कहा है अगर हमारे देश में फैब इंडिया जैसी विदेशी कंपनियां खादी प्रोडक्टस बेच रही हैं तो यह महात्मा गांधी और उनकी राजनीतिक विचारधारा की हत्या है। पतंजलि की क्लोदिंग सेक्टर के लिए बड़ी योजनाएं हैं। लंगोट से लेकर कोट तक हर चीज बनाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि भारतीयों को पूरी तरह स्वदेशी बनना चाहिए।
बाबा रामदेव जी महाराज ने बताया कि इंडस्ट्री के कुछ नामों ने उनसे संम्पर्क किया है। कुछ मीटिंग हुई हैं। हम इसमें टेक्सटाइल इंडस्ट्री को साथ लेकर चलेंगे और यह एक सामूहिक कोशिश होगी।
क्वालिटी प्रोडक्ट हमारा लक्ष्य:
पतंजलि डायबिटीज, मोटापे और अन्य बीमारियों से पीडि़त लोगों के लिए ऑर्गेनिक क्लोदिंग मैन्युफैक्चर करने के विकल्प भी तलाश रही है। पतंजलि के सीईओ श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी ने ईटी को बताया हम प्योर नेचुरल, ऑर्गेनिक और हर्बल क्लादिंग की मैन्युफैक्चरिंग के लिए नेचुरल डाइज का इस्तेमाल करना चाहेंगे।
यह पूछने पर कि क्या पतंजलि क्लादिंग को बेचने के लिए रिटेल आउटलेट्स खोलेगी। तो आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि इस पर अभी विचार किया जा रहा है। प्रत्येक चीज सर्वे, रिसर्च और डिवेलपमेंट प्रोसेस के बाद की जाएगी। उनका कहना था कि पतंजलि यह सुनिश्चित करेगी कि ग्राहकों के लिए क्वालिटी प्रोडक्टस पेश किए जाएं।
स्टाइल, डिजाइन, फैब्रिक में पूर्ण भारतीय होगी पतंजलि की 'स्वदेशी जीन्स’
वसुधा वेणुगोपाल, नई दिल्ली-इकनॉमिक टाइम्स
तेल, घी, अचार, बिस्किट, टूथपेस्ट और शैम्पू जैसे तमाम उत्पाद लॉन्च करने के बाद योगऋषि बाबा रामदेव जी की कंपनी पतंजलि अब जीन्स लांच करने की तैयारी कर रही है। पतंजलि की यह स्वदेशी जीन्स महिलाएं एवं पुरुषों दोनों के लिए होगी।
यह स्वदेशी जीन्स भारतीय संस्कृति एवं परम्परा के मुताबिक होगी। इकनॉमिक टाइम्स से बातचीत में पतंजलि के सीईओ बालकृष्ण ने कहा, यह जीन्स भारतीय महिलाओं के लिए लूज-फिट कंफर्टेबल होगी और यह अन्य भारतीय परिधानों की तरह ही दिखेंगी।
श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने कहा जीन्स पश्चिमी कॉन्सेप्ट है और हम इसके साथ दो चीजें कर सकते हैं या तो इसका बॉयकाट कर दें या फिर इसे अपना लें। दूसरा तरीका ये है कि अपनी जरुरत के हिसाब से इसे कस्टमाइज कर लिया जाए, जिससे हमारे टै्रडिशन के मुताबिक ढल जाए। श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने कहा कि भारतीय समाज में जीन्स की लोकप्रियता खासी बढ़ गई है, ऐसे में इसे अलग नहीं किया जा सकता है।
आचार्य बालकृष्ण जी ने स्वदेशी जीन्स को लेकर कहा यह जीन्स अपने स्टाइल, डिजाइन और फैब्रिक में पूरी तरह भारतीय होगी। महिलाओं के लिए हमारी जीन्स थोड़ी लूज होगी ताकि वह भारतीय परम्परा के मुताबिक हो और आरामदायक भी हो। भारतीय परिवार हमारे स्वदेशी जीन्स के कॉन्सेप्ट को बेहद आरामदायक पाएंगे।
योग गुरु के मुताबिक पतंजलि पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरह के कपड़ों की मैन्युफैक्चरिंग करेगी। स्वामी रामदेव जी महाराज के मुताबिक यह प्लान कंपनी को ग्लोबल मार्केट में स्थापित करने के लिहाज से बेहद महत्त्वपूर्ण है।
2020 तक पतंजलि का एक लाख करोड़ का प्रोडक्शन लक्ष्य:
नवभारत टाइम्स
एक मीडिया इवेंट में योगऋषि स्वामी रामदेव जी ने कहा कि पतंजलि ने 2020 तक अपने उत्पादन को 1 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। पतंजलि बीते 4 साल में लगातार 100 प्रतिशत की ग्रोथ हासिल की है। इस साल भी हम इसी रफ्तार से आगे बढ़ रहे हैं। अगले दो से तीन साल में हमारा लक्ष्य इन हाउस प्रोडक्शन को 50,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाने का है। हम 2020 तक अपने प्रोडक्शन को 1,00,000 करोड़ तक बढ़ाना चाहते हैं।
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01 Mar 2025 17:58:05
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