देश के जननायकों की दृष्टि में पतंजलि का आयुर्वेदिक अनुसंधान अभियान

ऋषिद्वै के अनुसार पतंजलि का आयुर्वेदिक अनुसंधान संस्थान उद्घाटन समारोह

देश के जननायकों की दृष्टि में पतंजलि का आयुर्वेदिक अनुसंधान अभियान

तंजलि रिसर्च सेंटर के उद्घाटन के बहाने हमें  आप सबके बीच आने का सौभाग्य मिला, हां जो सरप्राइज स्वामी जी ने दिव्य भावनाओं के साथ हमें दिया, उससे मैं सम्पूर्ण पतंजलि परिवार का एवं स्वामी जी व आचार्य श्री का अंत:करण से आभारी हूँ। मैं समझता हूँ कि सम्मान देकर यह संदेश भी दिया गया है कि आप इन मानकों से आगे पीछे न हों, अपितु उन्हें पूरा करें। वास्तव में मुझे क्या काम करने चाहिए, स्वामी जी ने मेरे सामने वह दस्तावेज रख दिया है। वास्तव में मुझे अपने पर उतना भरोसा नहीं जितना मुझे आप जैसे संतो एवं देश के सवा सौ करोड़ भारतीयों के आशीर्वाद पर भरोसा है। यह आशीर्वाद हमें देश के लिए सतत श्रेष्ठ करते रहने की प्रेरणा और ताकत देता है। यहाँ पतंजलि आयुर्वेदिक रिसर्च अनुसंधान संस्थान के उद्घाटन अवसर पर मैं यहाँ पतंजलि परिवार के सदस्य के रूप में आया हूं, और एक परिवार के सदस्य के रूप में अपने को अनुभव कर रहा हूँ। मैं यहां आकर यह भी अनुभव कर रहा हूँ कि स्वामी जी किस प्रकार संघर्षों के बीच अपने सतत पुरुषार्थ के बल पर दुनियां के सामने उभर कर आते गये। मैं दुनियां पर नजर डालता हूँ तो देखता हूं कि भारत किस प्रकार दुनियां में शीर्ष पर छाया हुआ था, पर अनेक ने हमारी उस श्रेष्ठता को ध्वस्त किया, आजादी के बाद जो कुछ बचा उसे विश्व के सामने हम श्रेष्ठता से प्रस्तुत कर सकते थे, परन्तु वह न हो सका। परिणामत: हमारी तीन-तीन पीढ़ियां भ्रमित होती रहीं। इस संदर्भ में मैं स्वामी जी का अभिनन्दन करता हूँ कि इन्होंने योग से लेकर उन सभी भारतीय विधाओं  को गौरवांवित करने वाले अभियानों को सतत बनाये रखा। अब हमें जरूरत है विविध क्षेत्रों में इनोवेशन परम्परा को बनाये रखने की। पतंजलि का यह रिसर्च इंस्टीट्यूट इस दिशा में एक महत्वपूर्ण और चिकित्सा जगत के लिए अनोखा कदम है। इसके लिए मै पतंजलि परिवार, स्वामी रामदेव जी व आचार्य बालकृष्ण को हृदय से धन्यवाद देता हूँ।
श्री नरेन्द्र मोदी
प्रधानमंत्री, भारत सरकार
पतंजलि के इस आयुर्वेदिक रिसर्च अनुसंधान संस्थान से निकले निष्कर्ष चिकित्सा जगत के लिए प्रखर दस्तावेज साबित होंगे। क्योंकि इसके रिसर्च प्रक्रिया में देश की प्राचीनतम चिकित्सा परम्परा के साथ-साथ विज्ञान के आधुनिकतम अंतरराष्ट्रीय मानकों को समाहित किया जा रहा है। जिस प्रकार स्वामी रामदेव जी व आचार्य बालकृष्ण ने योग-आयुर्वेद के क्षेत्र में नये मापदण्ड स्थापित कर देश व दुनियां को इस संदर्भ में नयी सोच ही है, ठीक उसी प्रकार इस संस्थान के प्रयोगों से निकले निष्कर्ष चिकित्साजगत के मानकों में आमूलचूल परिवर्तन लाने में सफल हों तो कोई आश्चर्य नहीं। मैं व्यक्तिगत तौर पर स्वामी रामदेव, आचार्य बालकृष्ण व विराट पतंजलि परिवार को इस ऐतिहासिक प्रयास के लिए कोटि-कोटि बधाई देता हूँ।
डॉ.कृष्णकांत पाउल
राज्यपाल, उत्तराखण्ड सरकार
पतंजलि का आयुर्वेदिक रिसर्च अनुसंधान संस्थान भारत के साथ-साथ विश्वमानव की चिकित्सा के लिए नये युग की शुरुवात है। इसमें होने वाले प्रयोगों से चिकित्साजगत को नयी दृष्टि मिलेगी तथा औषधि जगत को सेन्थेटिक औषधियों के निर्माण से निजात मिलेगा तथा अपने ही परिवेश में उगने वाली जड़ी-बूटियों में समाहित आरोग्यता के अनुपम स्रोत से चिकित्सा जगत व आम समाज से लेकर बौद्धिक भारत को जुड़ने का सौभाग्य मिलेगा। पतंजलि ने इस दिशा में अपने अभियान के प्रारम्भिक दिनों में तब ही प्रथम कदम बढ़ा दिया था, जब श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण व पूज्य स्वामी रामदेव जी ने मिलकर हिमालय की दुर्गम कन्दराओं में दुर्लभ औषधीय जड़ी-बूटियों की खोज का प्रथम प्रयास प्रारम्भ किया था। इस अनुसंधान केंद्र से अब उन खोजी गयी वनौषधियों का परीक्षण कर उन्हें औषधीय प्रमाणिकता मिलेगी।
श्री त्रिवेन्द्रसिंह रावत
मुख्यमंत्री,  उत्तराखण्ड सरकार

 

जिसमें देश के सवा सौ करोड़ भारतीय अपना गौरव देखते हैं, वह देश का गरीब हो, अमीर हो, किसान, मजदूर कोई भी क्यों न हो, ऐसे हैं हमारे देश के तेजस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी। उनके द्वारा देश के प्रतिष्ठित एवं सर्वाधिक लोकप्रिय पतंजलि अभियान के इस नवीन प्रकल्प 'पतंजलि आयुर्वेदिक रिसर्च अनुसंधान संस्थानका उद्घाटन अपने में गौरवान्वित करने वाला है।
देश का राजधर्म व राष्ट्रधर्म अब सशक्त हाथों में है, देश बदल रहा है, विश्व अब भारत का लोहा मानने लगा है अत: अब हमारी एवं हमारे अभियान की भूमिका भी विश्व के लिए दिव्य मानव निर्माण की दिशा में स्थित हो रही है। और इसके लिए योग, आयुर्वेद, शिक्षा और संस्कार को हमने अपना लक्ष्य बनाया है। पतंजलि आयुर्वेदिक रिसर्च अनुसंधान संस्थान इस दिशा में महत्वपूर्ण स्तम्भ साबित होगा। इस अनुसंधान संस्थान के संकल्प से यदि देश को नोबुल पुरस्कार तक प्राप्त होने का गौरव मिले तो आश्चर्य नहीं।
महर्षि अरविन्द, महर्षि दयानन्द, स्वामी विवेकानन्द के स्वप्नों का भारत बनाने की हमारी प्रतिबद्धता है, इसके लिए देश में छायी दो प्रकार की दरिद्रता को मिटाना होगा, प्रथम वैचारिक दरिद्रता, दूसरी आर्थिक दरिद्रता। पतंजलि ने आर्थिक दरिद्रता मिटाने के अभियान के साथ लाखों लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार से जोड़ा है, आगे शीघ्र ही इस माध्यम से देश के लगभग 05 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार व 05 करोड़ किसानों को प्रत्यक्ष खुशहाली का अवसर मिलेगा।
चूंकि मोदी जी पूरी भारतीयता को प्रजन्ट करते हैं, इसलिए उन्हें योग व आयुर्वेद के ब्रांड एम्बेस्डर भी कह सकते हैं। मोदी जी दिल से फकीर हैं, जबकि पूरे हिन्दुस्तान की तकदीर हैं। ये ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो स्वयं योगमय, धर्ममय जीवन जीते हैं और अपने धर्म, संस्कृति व परम्परा पर गौरव करते हैं।
योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज
परमाध्यक्ष, पतंजलि योगपीठ
तंजलि का यह अभियान गरीबों, किसानों की पीड़ा के बीच से जन्मा है, यही कारण है कि महान विस्तार के बावजूद भी यह देश के सवा सौ करोड़ भारतीयों की संवेदनाओं के प्रति समर्पित है। पतंजलि के अभियान ने लाखों  लोगों को रोजगारोन्मुख बनाया तो लाखों किसानों को अपनी कृषि गरिमा से जोड़ने में सफल रहा।
श्रद्धेय स्वामी जी अहर्निश एक ही पीड़ा से प्रेरित रहते हैं कि देश को किस प्रक्रिया से गौरवान्वित किया जाय तथा देश के लाखों गरीबों, किसानों, मजदूरों को कैसे शक्ति मिले, यह सब हो भी रहा है। आज पतंजलि के अभियान से देश के हजारों युवाओं के हाथ काम है, तो लाखों परिवार इससे पेट भरने में समर्थ हो रहे हैं।
संस्कारवान, स्वस्थ, समर्थ, शक्तिशाली भारत का निर्माण हमारा स्वप्न है, प्रत्येक भारतीय को समृद्धि से जोड़कर राष्ट्र को आर्थिक दृष्टि से समर्थ तथा आत्मनिर्भर बनाना पतंजलि अभियान की प्राणचेतना है। हमारे सम्माननीय प्रधानमंत्री जी ने जिस पतंजलि आयुर्वेदिक रिसर्च सेंटर का उद्घाटन किया, उसमें देश ही नहीं सम्पूर्ण विश्वस्तर पर स्वास्थ्य जगत के लिए नवीन संदेश छुपा है कि बहुत हो चुकी सेन्थेटिक व कैमिकल आधारित दवाइयां, इससे न देश से बीमारी गयी, न ही किसी बीमार को स्थाई उपचार मिला। क्योंकि इसने हमें जहां एक प्रकार से जीने का सहारा दिया, वहीं हमें अपने प्राकृतिक प्रयोगों से भी दूर किया। जबकि हमारी जड़ी-बूटियों में सशक्त आरोग्य स्रोत भरा पड़ा है, पतंजलि अयुर्वेदिक रिसर्च सेंटर अपने प्रयोगों से चिकित्सा जगत को नया आयाम देगा, वहीं विश्व मानवता को प्रकृति के वरदानों से भी जोड़ेगा। संपूर्ण देश पुन: ऋषियों की प्राचीन परम्परा पर गौरवान्वित कर सकेगा।
श्रद्धेय आचार्य  
बालकृष्ण जी महाराज
महामंत्री, पतंजलि योगपीठ

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