पतंजलि में आत्मीय भावुकता के दिव्य क्षण, जब पीएम हुए राष्ट्रऋषि उपाधि से सम्मानित
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हरिद्वार - नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए देश में सत्ता परिवर्तन की अलख जगाने वाले योगऋषि पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज और श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी ने पतंजलि योगपीठ पधारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को नई उपाधि 'राष्ट्रऋषि’ से नवाजा। पतंजलि योगपीठ के मंच पर इस उपलक्ष्य में मंगलाचरण और मंत्रोच्चारण के साथ सभी पारंपरिक औपचारिकताएं पूरी की गईं। पतंजलि के योगाचार्यों, आचार्यकुलम् के बच्चों के मंत्रोच्चारण के बीच योगऋषि पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज और श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने जब प्रधानमंत्री को शॉल ओढ़ाया और स्मृति चिन्ह भेंट किया, तो पूरा सभागार भारत माता की जय और वंदेमातरम के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज के मार्गदर्शन में सभागार में उपस्थित हजारों योग प्रशिक्षार्थी, आचार्यकुलम् के विद्यार्थी, देशभर से पधारे पतंजलि परिवार के हजारों सदस्यों ने एक साथ एक पत्रक पर छपे संस्कृत भाषा के राष्ट्रऋषि सम्मान श्लोकों का जब वाचन किया और पतंजलि योगपीठ के महामंत्री श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण ने उसके हिन्दी अनुवाद द्वारा उसकी गरिमा परिभाषित की, तो संपूर्ण वातावरण आत्मीय भावुकता से भर उठा। इस अवसर पर आचार्यश्री ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व की किन खूबियों के कारण उन्हें यह सम्मान प्रदान किया जा रहा है। सम्मान के प्रत्येक पद के साथ पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा।
स्वामी रामदेव जी महाराज ने कहा कि नरेंद्र मोदी का पूरा व्यक्तित्व एक राष्ट्रनिष्ठ ऋषि की तरह है। वे हमेशा देश के लिए ही सोचते और अहर्निश कार्य करते हैं। मोदी में पूरी दुनिया का नेतृत्व करने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रऋषि की उपाधि से नवाजते हुए पतंजलि परिवार खुद को भी गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
सम्मान पाकर अभिभूत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूज्य स्वामी जी, आचार्य श्री व पतंजलि परिवार का आभार जताया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री महोदय ने कहा कि जब भी कोई सम्मान मिलता है, तो वह नई जिम्मेदारी का अहसास भी कराता है।
पूज्य स्वामी रामदेव जी और श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी की ओर से राष्ट्रऋषि का दर्जा प्राप्त होने पर पीएम श्री नरेन्द्र मोदी जी ने कहा कि मुझे तो यह पता ही नहीं था, स्वामी जी ने सरप्राइज दे दिया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के बीच मेरा लालन-पालन हुआ, उनसे मैंने सीखा है कि सम्मान मिलने का मतलब उन्हें आपसे अपेक्षाएं हैं। चूंकि स्वामी जी, आचार्यश्री का सम्पूर्ण अभियान राष्ट्र को समर्पित है। अत: अपेक्षायें भी राष्ट्र को गौरवांवित करने वाली ही होंगी। मैं इनपर अधिक खरा उतरने का प्रयत्न करता रहूँगा। |
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01 Mar 2025 17:58:05
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