वर्ल्ड हर्बल इनसाइक्लोपीडिया में समाहित आयुर्वेदिक औषधीय ज्ञान: मोदी
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हरिद्वार इन दिनों देश के लाखों मस्तिष्क में एक नाम तैर रहा है, वह है श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण रचित वर्ल्ड हर्बल इनसाइक्लोपीडिया अर्थात् विश्व भैषज संहिता। विश्लेषक इसे सभी चिकित्सा पद्धतियों की प्रेरक पुस्तक व आयुर्वेद का वरदान मानते हैं। इसमें विश्व की विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों में उपयोगी अनेक औषधीय पौधों (68 हजार) का प्रचलित नामों और गुणों सहित वर्णन है। इस वजह से यह आयुर्वेद के साथ-साथ अन्य चिकित्सा पद्धतियों के लिए भी बेहद लाभदायक मानी जा रही है। दुनिया को इसका अधिकाधिक लाभ मिले इस निमित्त पतंजलि प्रतिबद्ध है। इसे वैश्विक जनमानस के बीच पहुंचाने को दुनिया की 120 भाषाओं में प्रकाशित किया जा रहा है।
पतंजलि योगपीठ के महासचिव आयुर्वेदाचार्य श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी ने बताया कि इस समय विश्व में लगभग 60 चिकित्सा प्रणालियां प्रचलित हैं। इन सभी में औषधीय पादपों (पौधों) को बड़ी मात्रा में उपयोग किया जाता है। कहीं दवा के माध्यम से तो कहीं सीधे। इसी तरह दुनिया में पौधों की विभिन्न प्रजातियों की संख्या करीब साढ़े चार लाख है, इसमें से 68 हजार के करीब पौधे औषधीय गुणों से युक्त हैं। इनमें से भारत में 15 से 20 हजार औषधीय पौधे उपलब्ध हैं। यह पुस्तक विश्व भर की औषधीय वनस्पतियों का समुच्चय है। आचार्य जी ने कहा कि इसकी रचना हेतु वर्तमान में उपलब्ध शोध, खोज, विभिन्न स्रोत से जुटाए डेटाबेस, प्रकाशित-अप्रकाशित ग्रंथ-पुस्तकें, हस्तलिखित दुर्लभ पांडुलिपियों से एकत्र जानकारियों, जनश्रुतियों का योगदान है ही। साथ ही हमारे मार्गदर्शन में कार्यरत लगभग 200 शोधकर्ताओं का अहर्निश पुरुषार्थ भी है। उन्होंने कहा पतंजलि के शोधकर्ताओं समूह के वर्षों तक किए गए गहन अध्ययन और खोज का परिणाम है, वर्ल्ड हर्बल इनसाइक्लोपीडिया (विश्व भैषज संहिता)। संहिता में पौधों के 25,000 जीवंत चित्र व कैनवास चित्र तथा 35,000 रेखाचित्रों को भी प्रकाशित किया गया है। इस प्रकार विश्वभर के 4.5 लाख जड़ी-बूटियों वाले औषधीय पौधों वाली इस पुस्तक का माननीय प्रधानमंत्री द्वारा लोकार्पण किसी वैश्विक व ऐतिहासिक मिसाल से कम नहीं है।
श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने बताया कि विश्व भेषज संहिता विश्व स्तर पर विभिन्न चिकित्सा पद्धति में उपयोगी अनेक औषधीय पादपों का विशालकाय सर्वांगीण संग्रह है, जो आयुर्वेद के साथ अन्य चिकित्सा पद्धतियों में भी लाभदायक है। उन्होंने बताया कि विश्व स्तर पर विभिन्न जड़ी-बूटियों की संख्या लगभग 4.5 लाख तक है। इनमें से लगभग 68000 जड़ी-बूटियों का प्रयोग औषधि के रूप में किया जाता है। इनमें 15,000 से 20,000 जड़ी-बूटियाँ केवल भारत में पायी जाती हैं। इस प्रकार वर्ल्ड हर्बल इनसाइक्लोपीडिया में विश्वभर में पाई जाने वाली जड़ी-बूटियों की जानकारियों को संग्रहित कर लोकार्पित किया गया है।
पतंजलि योगपीठ अनुसंधान केन्द्र के उद्घाटन के मौके पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण द्वारा लिखित अनुसंधान ग्रंथ 'वर्ल्ड हर्बल इनसाइक्लोपीडिया का विमोचन कर इसे आयुर्वेद जगत का ऐतिहासिक गौरव बताया, वहीं योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज ने बताया कि पुस्तक में 70 हजार से अधिक जड़ी-बूटियों पर अनुसंधान कर उनकी जानकारियों को साझा करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद में अपनी तरह का यह खास ग्रंथ है। इसका लोगों को खासा लाभ मिलेगा। विमोचन के दौरान मंच पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी, श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी, उत्तराखण्ड के राज्यपाल डॉ. के.के. पाल, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, आचार्य प्रद्युम्न जी आदि ने सहभागिता की। |
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01 Mar 2025 17:58:05
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