पतंजलि योगपीठ एवं गुजरात सरकार के संयुक्ततत्वावधान में आयोजित अहमदाबाद अन्तर्राष्ट्रीय योगदिवस

रोग, व्यसन व हिंसा मुक्ति का अभियान है योग

पतंजलि योगपीठ एवं गुजरात सरकार के संयुक्ततत्वावधान में आयोजित अहमदाबाद अन्तर्राष्ट्रीय योगदिवस

योगऋषि स्वामी रामदेव
दि कोई भी व्यक्ति सात्विक आहार लेता है और कपालभाति, प्राणायाम करता है, तो वह  सदैव स्वस्थ रहेगा ही। मैं कहता हूं कि जीवन में प्राण की प्रतिष्ठा आवश्यक है, जो योग से सम्भव है। वास्तव में विद्यार्थियों के लिए प्राण नॉलेज है। प्राण विद्या है। रोगियों के लिए प्राण-औषधि है। योगियों के लिए प्राण ब्रहम है। इस संदर्भ में हमने योग का प्रयोग किया लाखों-करोड़ों लोगों पर और सिद्ध हुआ कि योग वह सब कुछ प्राप्त कराता है, जो तुम चाहते हो। प्राणायाम से सब रोग मुक्त , तनाव मुक्त , हिंसापरक आचरण से मुक्त , सब प्रकार की बुराईयों से, अज्ञान, अभाव व अकर्मणता से मुक्त हो जाते हैं। बीमारियों पर संपूर्ण दुनियां में 100 लाख-करोड़ रुपये प्रति वर्ष खर्च हो रहे हैं। इसी प्रकार 100 लाख करोड़ बुराईयों पर खर्च होता है, अर्थात शराब, बीड़ी, सिगरेट, नशा जैसी बुराईयों पर इतना ही धन खर्च होता है। जबकि योग-रोग मुक्ति, व्यसन मुक्ति, हिंसा मुक्ति का अभियान है।
लोग कहते हैं मोदी जी पूरे देश को अशांति, अनार्किकी, अपराध, अराजकता मुक्त करें, पर मैं कहता हूँ शासन किसी का क्यों न हो, बिना योगानुशासन के धरती पर वह श्रेष्ठ शासन नहीं ला सकता। हमें देश व विश्व में हर बच्चों के अंदर योग के प्रति उत्साह पैदा करना है। मैं कहता हूं कि हमें मेरी माता ने जिस रूप में पैदा किया, योगाभ्यास के कारण आज भी वही नूर हमारे चेहरे पर है। मैं योग एवं कर्म योग को अपना धर्म मानकर कार्य करता हूँ। इस योग को आज राजनैतिक दृष्टि से आजादी के 70 वर्ष बाद अन्तर्राष्ट्रीय गौरव मिला। मैं मानता हूँ योग, आसन, प्राणायाम की आवश्यकता हर किसी को है, पर  जीवन में अहिंसा, अस्तेय, अपरिग्रह आदि का जागरण भी योग ही है, हमें राष्ट्रहित व जीवनहित की इस धारा से योग को जोड़ना व  अपनाना है।
देश में योग को प्रामाणिकता से स्थापित करने के लिए प्रधानमंत्री को बधाई
आचार्य बालकृष्ण
मैं अनुभव करता हूँ जब प्रारम्भ के दिनों में गंगोत्री में हम श्रद्धेय स्वामी जी के साथ चिंतन करते थे कि भारतीय ऋषियों की विरासत को दुनियां में कैसे पहुँचा सकते हैं। इन्हीं दिनों उस गंगोत्री में हम दोनों के सानिध्य में लोग आते थे और साधना के लिए योग करते थे। देखते ही देखते वे स्वस्थ होने लगे और योग की वह यात्रा आज संपूर्ण विश्व में प्रवाहित हो उठी।
पूरी दुनियां के सामने योग एक उदाहरण है कि कोई भी विधा राजाश्रय पाकर कैसे विस्तार पा सकती है। पहले भी अधिकारी, राजनेता हमारे यहां योग करने आते थे। पर योग शिविर में योग करने पर वे सोचते थे कि कब नोटिस आ जाय कि तुम योग क्यों करते हो। क्योंकि इसे सम्प्रदाय के दायरे में जो देखा जाता था। स्वामी जी कहते थे कि देश में धर्म, जाति से लेकर न जाने कितनी दीवारे पैदा थीं, पर इन दीवारों को यदि किसी ने तोड़ा है, तो वह है योग। यही नहीं एक तरफ करोड़ों-करोड़ों की दवाईयों को दिखाकर हमें स्वास्थ्य के नाम पर भयभीत किया जाता था। शरीर को हमें मेडिकल स्टोर बनाने हेतु विवश किया जाता था, पर योग ने इस भय से भी हमें मुक्त किया है। अब हम योग से ही स्वस्थ हो जाते हैं। योग किसी सीमा का विषय नहीं है, यह दुनियां के सौभाग्य का मार्ग है। हम कहते है| यदि कोई ईसाई होगा तो योग उसे सच्चा ईसाई बना देगा, मुस्लिम को यह सच्चा मुसलमान बना रहा है। वास्तव में योग ऋषियों की विरासत है, सबकी भलाई का आधार है। योग करने वाला व्यक्ति शारीरिक, मानसिक प्रदूषण से मुक्त रहता ही है, वह दूसरों को भी इससे मुक्त करता है। इस महान परम्परा को संवारने, जन-जन तक पहुँचाने का प्रचण्ड प्रयास जो स्वामी जी कर रहे हैं, उससे आप भी जुड़ें तथा इसे जन-जन तक पहुँचाने का पुण्य प्राप्त करें। हम इसे देश में प्रामाणिकता के साथ स्थापित करने के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी को बधाई देते हैं। योग से हम रोग मुक्त ही नहीं होते, अपितु यह संपूर्ण समस्याओं का अंत भी है। मैं देखता हूँ बीमार व्यक्ति योग से ही ठीक हो जाते हैं, पर जो बीमार नहीं हैं, उनमें भी तरह-तरह का भय व्याप्त रहता है, पर यह योग लोगों को भय व घबराहट से मुक्ति भी दिला सकता है। जो स्वस्थ हैं उन्हेें स्वस्थ रखने के लिए योग महत्वपूर्ण  है। स्वस्थ रहने के लिए अपनी दिनचर्या और आहारचर्या को सुधारिये, योग की शरण में रहिये। इस प्रकार तन और मन से जब हम ठीक होंगे तो सुंदर देश व विश्व का निर्माण भी कर सकते हैं। इस तृतीय अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर अहमदाबाद के इस आयोजन से दुनियां योग को याद ही नहीं करेगी, अपितु दुनियां योग का अभ्यास करने के लिए भी प्रेरित होगी।
 
 

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