पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज का विदेश प्रवास

विदेशों में सेलिब्रेट हुआ तृतीय अंतर्राष्ट्रीय'योगदिवस सप्ताह’

पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज का विदेश प्रवास

पूज्य योगऋषि के सानिध्य में हेल्थ, प्रास्पेरिटी एण्ड पीस के संकल्प के साथ

  • अमेरिका, कनाडा के मिसगेन, अटलांटिक सिटी सहित सैकड़ों शहरों में पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज ने हजारों महिला-पुरुषों को कराया सामूहिक योगाभ्यास
  • अमेरिकन एसोसिऐशन ऑफ फिजीसियन ऑफ इंडियन ओरिजिन, स्वामी नारायण मंदिर टोरंटो आदि विविध संगठनों एवं स्थानीय मीडिया ने पूज्यवर के साथ योग, ध्यान, प्राणायाम, भारतीय संस्कृति पर किया डिस्कशन
तंजलि योगपीठ के अधिष्ठाता पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज ने अपनी विदेश यात्रा के दौरान अमेरिका, कनाडा के 100 से अधिक शहरों में सैकड़ों योगशिविर सम्पन्न कराये। इस दौरान हजारों लोगों ने पूज्य स्वामी जी महाराज के सानिध्य में योगाभ्यास कर योग, ध्यान, प्राणायाम एवं भारतीय संस्कृति के महत्व को आत्मसात किया। इस अवसर पर अमेरिका एवं कनाडा के मिसगेन, अटलांटिक, टोरंटो सहित अनेक स्थानों पर लगे सभी शिविरों में पूज्यवर के साथ शिविरार्थियों ने हेल्थ, प्रास्पेरिटी एवं पीस के साथ जीवन जीने का संकल्प व्यक्त किया।
अनेक संगठनों ने पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज एवं पतंजलि अभियान का अपनी सांस्कृतिक परम्पराओं के साथ स्वागत किया तथा अपने कार्यकर्ताओं के बीच विशेष सेमीनार आयोजित कर योग, ध्यान, प्राणायाम, आयुर्वेद एवं भारतीय वैदिक संस्कृति विषय पर पूज्यवर के साथ चर्चायें कीं। इसमें अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ फिजीसियन ऑफ इंडियन ओरिजिन संगठन द्वारा आयोजित योग विज्ञान सेमीनार में भारी संख्या में प्रवासी एवं स्थानीय मूल निवासी सहभागीदार बनें। वहीं टोरंटो के स्वामी नारायण मंदिर परिसर में भारी संख्या में कार्यकर्ताओं ने पूज्यवर के योगविज्ञान परक सूत्रों को आत्मसात किया। मिसिगेन के इंटरनेशनल सेंटर, अटलांटिक सिटी के विश्वधर्म फेस्टिवल में पूज्यवर के साथ अनेेक भारतीय संतगणों ने हिस्सा लेकर भारतीय योग एवं भारतीय संस्कृति को वैज्ञानिक संस्कृति बताते हुए इसे जन-जन में पहुंचाने का उद्घोष किया।
पतंजलि योगपीठ के महामंत्री श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने पूज्यवर के विदेश प्रवास से अब तक वहां संपन्न हो रहे योगविज्ञान शिविरों को विश्व जनमानस का भारतीय योग एवं ऋषि संस्कृति के प्रति बढ़ रहे विश्वास का परिणाम बताया।

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