आर्थिक समीक्षा पतंजलि

देश में 8वें स्थान पर पतंजलि आयुर्वेद

आर्थिक समीक्षा पतंजलि

    योग ऋषि पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज की पतंजलि आयुर्वेद को विश्व में ऐसी पहली कंपनी होने का गौरव प्राप्त हो गया है, जो केवल स्वदेशी के बल पर इतने ऊँचे स्थान पर पहुँची है। विश्व की प्रसिद्ध पत्रिका हुरून ने तेजी से बढ़ती संस्थाओं में गत वर्ष पतंजलि आयुर्वेद को 25वां स्थान दिया था। अब देश के उद्यमों में पतंजलि आयुर्वेद का स्थान 8वाँ आँका गया है। हाल ही में घोषित टॉप टेन उद्योगपतियों में श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज का नाम आठवें स्थान पर घोषित किया गया है।
द्भुत है की भारत के आर्थिक सर्वे में चुने गये टॉप टेन उद्योगपतियों में पतंजलि की उपलब्धि गत वर्ष के मुकाबले 173 प्रतिशत अधिक रही है। यहाँ यह बात विशेष उल्लेखनीय है कि जहाँ देश के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी की उद्योग प्रगति केवल 58 प्रतिशत रही। वहीं नोटबंदी और जीएसटी के बावजूद पतंजलि द्वारा यह उपलब्धि हासिल करना महत्वपूर्ण है। इस उपलब्धि पर देश-विदेश से स्वामी जी महाराज तथा आचार्यश्री को बधाइयों के तांते लगे हुए हैं। दुनिया के किसी भी मुल्क में किसी भी उद्योग ने इतने कम समय में इतना ऊँचा मुकाम केवल स्वदेशी के दम पर हासिल किया और देश की बेहद पुरानी आयुर्वेदिक इकाइयां पतंजलि से बहुत पीछे रह गई हैं। नॉनलिस्टिंग कम्पनी होते हुए भी पतंजलि की यह ऊँचाई बड़े-बड़े अर्थ विश्लेषकों को आश्चर्यचकित कर रही है। ऊँची उड़ान भरने के बाद पतंजलि का ख्वाब है कि विशुद्ध सेवा प्रकल्पों के दम पर आगे बढ़ते हुए यह संस्था अगले कुछ वर्षों में देश की नम्बर-वन बन जाए। स्वामी रामदेव जी के अनुसार यह मुकाम पाने के लिए और कड़ा श्रम किया जाएगा। स्वदेशी उद्योगों को देशभर में बढ़ावा देने और विदेशी उत्पादनों का देश से समापन करने के लिए काम शुरू भी हो चुका है। 
अद्भुत है की भारत के आर्थिक सर्वे में चुने गये टॉप टेन उद्योगपतियों में पतंजलि की उपलब्धि गत वर्ष के मुकाबले 173 प्रतिशत अधिक रही है। यहाँ यह बात विशेष उल्लेखनीय है कि जहाँ देश के सबसे बड़े उद्योगपति मुकेश अंबानी की उद्योग प्रगति केवल 58 प्रतिशत रही। वहीं नोटबंदी और जीएसटी के बावजूद पतंजलि द्वारा यह उपलब्धि हासिल करना महत्वपूर्ण है। इस उपलब्धि पर देश-विदेश से स्वामी जी महाराज तथा आचार्यश्री को बधाइयों के तांते लगे हुए हैं। दुनिया के किसी भी मुल्क में किसी भी उद्योग ने इतने कम समय में इतना ऊँचा मुकाम केवल स्वदेशी के दम पर हासिल किया और देश की बेहद पुरानी आयुर्वेदिक इकाइयां पतंजलि से बहुत पीछे रह गई हैं। नॉनलिस्टिंग कम्पनी होते हुए भी पतंजलि की यह ऊँचाई बड़े-बड़े अर्थ विश्लेषकों को आश्चर्यचकित कर रही है। ऊँची उड़ान भरने के बाद पतंजलि का ख्वाब है कि विशुद्ध सेवा प्रकल्पों के दम पर आगे बढ़ते हुए यह संस्था अगले कुछ वर्षों में देश की नम्बर-वन बन जाए। स्वामी रामदेव जी के अनुसार यह मुकाम पाने के लिए और कड़ा श्रम किया जाएगा। स्वदेशी उद्योगों को देशभर में बढ़ावा देने और विदेशी उत्पादनों का देश से समापन करने के लिए काम शुरू भी हो चुका है। 

भारत में टॉप – 10 ब्रांड्स

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