पतंजलि योगपीठ में अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन

पतंजलि विश्वविद्यालय में हिन्दी पाठ्यक्रम प्रारम्भ करने एवं अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी केन्द्र स्थापित करने की सिफारिश

पतंजलि योगपीठ में अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन

  • सम्मेलन को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित अमेरिका की हिन्दी विदुषी प्रो0 गैब्रिएला निक इलेवा ने किया सम्बोधित
हरिद्वार - पतंजलि विश्वविद्यालय में अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन में प्रस्ताव पारित कर कुलाधिपति योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज एवं कुलपति आचार्य बालकृष्ण जी के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर और शोध कार्य स्तर पर शिक्षा के लिए हिन्दी पाठ्यक्रम प्रारम्भ करने व पतंजलि विश्वविद्यालय में 'अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी केन्द्रआचार्य बालकृष्ण जी की अध्यक्षता में स्थापित करने का संकल्प लिया गया। साथ ही इस समारोह के मुख्य अतिथि प्रदेश के काबीना मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि आज पूरे विश्व में हिन्दी भाषा का बोलबाला है उन्होंने कहा कि सभी को हिन्दी के प्रति भावना बदलनी होगी तभी हिन्दी का विकास होगा।
पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार एवं हिन्दी संगम प्रतिष्ठान, भारत और अमेरिका के संयुक्त तत्त्वावधान में पतंजलि योगपीठ के दिशा ऑडिटोरियम में आयोजित एक दिवसीय इस सम्मेलन में देश-विदेश से अनेक हिन्दी विद्वानों और भाषाविदों के विचार को भरपूर समर्थन मिला। यह भी विचार हुआ कि परिसर में अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी केन्द्र स्थापित किया जाय जिसका उद्देश्य हिन्दी शिक्षण के लिए संसाधनों का विकास और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षण-प्रशिक्षण और शिक्षा विनिमय कार्यक्रमों का समन्वय आदि करना हो। हिन्दी केन्द्र का तकनीकि सहयोग अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी संगम प्रतिष्ठान करेगा। सभी ने सम्मेलन के प्रमुख वक्ता और जार्ज गिर्यसन पुरस्कार से सम्मानित न्यूयार्क विश्वविद्यालय की हिन्दी प्राध्यापिका प्रो. गैब्रिएला निक इलेवा के इस प्रस्ताव का समर्थन किया कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दी विस्तार के लिए संरचना और वर्चुअल पाठ्य सामग्री का निर्माण अति आवश्यक है।

65

प्रो. इलेवा ने इस बात पर जोर दिया कि हिन्दी संगम प्रतिष्ठान द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी केन्द्रों की स्थापना के अनेक प्रस्ताव पारित किये जा चुके हैं, जिनका सम्मान करते हुए हिन्दी में संसाधन निर्माण के लिए इन केन्द्रों की स्थापना होनी चाहिए।
पतंजलि विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ. वाचस्पति कुलवंत ने भी इस सुझाव का स्वागत किया कि हिन्दी अध्ययन केन्द्र के लिए पतंजलि विश्वविद्यालय परिसर से बढ़कर और कोई स्थान नहीं हो सकता है।

63

गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेन्द्र कुमार ने जोरदार शब्दों में प्रस्तावित किया कि विश्वविद्यालयों में स्नातकोत्तर एवं शोध कार्यों के लिए हिन्दी के लिए शोधकार्य तीव्र गति से बढ़ना चाहिए, जिसके लिए पतंजलि विश्वविद्यालय हिन्दी पाठ्यक्रम के साथ-साथ अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी अध्ययन केन्द्र संचालित करने में पूर्णत: सक्षम है। हिन्दी संगम प्रतिष्ठान के अन्तर्राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अशोक ओझा का सुझाव था कि हिन्दी शिक्षण के संस्थानों का विकास करने के लिए सरकारी नीतियाँ कारगर साबित हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक का प्रयोग करते हुए अर्थपूर्ण शिक्षण सामग्री बनाने का कारगर उपाय तभी सफल हो सकता है जब विभिन्न राज्य सरकारें शिक्षण संस्थानों को आर्थिक सहयोग प्रदान करें।

66

उन्होंने कहा कि प्रतिष्ठान भारत एवं अमेरिका के अनेक विश्वविद्यालयों के साथ हिन्दी शिक्षण-प्रशिक्षण तथा हिन्दी का प्रयोग बढ़ाने के लिए प्रयत्नशील है। यह आवश्यक है कि एक अन्तर्राष्ट्रीय संगठन इन कार्यों का संयोजन करे और उत्तराखण्ड सरकार उन्हें सफल बनाने में मदद करे।
प्रदेश के शहरी विकास मंत्री श्री मदन कौशिक ने अन्तर्राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री ओझा के प्रस्ताव का समर्थन कर वादा किया कि उत्तराखण्ड सरकार प्रतिष्ठान के इस अभियान को आगे बढ़ाने में सहयोग करेगी। सम्मेलन के समन्वयक हिन्दी संगम प्रतिष्ठान के महासचिव यासीन अंसारी ने विश्वविद्यालय व पतंजलि परिवार का सहयोग के लिए आभार जताया।

67

इस सम्मेलन में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. ब्रह्मानन्द जी, डॉ. बाबूराम जी, डॉ. गिरीश रंजन तिवारी, डॉ. दिनेश चमोला, डॉ. नरेन्द्र प्रताप सिंह, साध्वी राधा माता एवं श्री प्रसाद पंवार जी आदि ने भी इस पर अपने विचार रखे। डॉ. विपिन द्विवेदी जी एवं सुश्री जया मिश्रा जी ने कार्यक्रम का संचालन किया।

Related Posts