योग क्रांति
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प्रफुल्ल चन्द्र कुंवर ''बागी’’
योग शिविर में कारण पृच्छा, "क्या योग क्रांति है?
यह स्वामी जी का एक शगल या महज भ्रांति है?"
बाबा का प्रति प्रश्न तभी होता था निस्संशय।
"आज के पूर्व कितनों ने देखा था सूर्योदय?"।।1।।
चंद हाथ ही योग शिविर में उठते थे निश्चय।
"प्रथम बार योग शिविर ने लाया है सर्वोदय।।
नित सूर्य देवता का दर्शन प्रथम संक्रांति है।
ब्रह्म-प्रहर में मनुज जागरण ही योग क्रांति है"।। 2।।
"आठ पहर में एक पहर कर मानव तन-नर्तन।
अगले दिन ही देखोगे, अपने में परिवर्तन।।
जीवित मानव में सदा चले सांसों का सरगम।
प्राणशक्ति से ही मानव जीवन रहता कायम"।। 3।।
किसने उसे घर-घर पहुंचाकर अमूल्य बनाया?
जिसके खातिर कितना ही अपना मूल्य चुकाया?
योग धरा पर उलट-पुलट था, तब शीर्षासन में।
योगसूत्र में सफल बांध लाया अनुशासन में।।4।।
योग धरा पर जब था अपना मूल्य खो रहा।
मानव निज कर्तव्य भूल था जभी सो रहा।
गिरि-गह्वर से योगधर्म को मैदां में लाया ।
तेरे सद्प्रयास से ही "योग दिवस" बन पाया।।5।।
योगधर्म को वसुधा पर पुन: बनाया सार्थक।
कुटिल जनों का परिहास सहा नित व्यंग्य निरर्थक।।
धरा पर किया प्रवाहित योग-गंगा की धारा।
युगों-युगों तक दुनिया करेगी स्मरण तुहारा।।6।।
आज विश्व में पतंजलि बना योग का तीरथ।
जटाजूट से उसे निकाला, तुम बने भगीरथ।।
तेरा करतब आज सभी जन लब पर आता है।
जो करता प्रतिकूल आचरण, वह पछताता है।। 7।।
निशदिन तपकर, तन-धन खपकर, गहन प्रयोग कर।
योग चिकित्सा रामबाण-सम हर व्याधि-रोगहर।।
अब दिनचर्या का अंग सभी का योग बना है।
आरोग्य-मंत्र नित बांट रहा अब योग घना है।।8।।
योगपीठ से मनुज पेट को किसने है जोड़ा?
योग शिविर में भारतीय जन-गण को झकझोड़ा?
ले जन-गण का सहयोग, वृहद् उद्योग लगाया।
योगायुर्वेद: वैज्ञानिक शोध-प्रयोग कराया ।।9।।
"आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा व योग, स्वदेशी।
तन-मन-जीवन प्रयोगशाला की प्रकृति परिवेशी।।
वेदकालीन "ऋषि-अर्चन" इसे रिसर्च बताया।
"वसुधैव कुटुबका्" आर्य, आर्ष वचन दुहराया।। 10।।
ऋत्, हित, मितभुक, आहार-विहार-व्यवहार बताया।
भोजन ही औषधि, इसमें ही आरोग्य समाया।।
पतंजलि आयुर्वेद अपूर्व, पूर्व दिव्य फार्मेसी।
बहुराष्ट्रीय दवा-माफिया की कर दी ऐसी-तैसी।। 11।।
नेशन भर में घूम, चलाया योग का सेशन।
भारत स्वाभिमान जगाया, अब भारत रोशन।।
सौ फीसदी निज मत डाल, आए जभी इलेक्शन।
खूब करो जांच-पड़ताल, तभी करो सेलेक्शन।।12।।
हर द्वार पर नित पतंजलि, स्वदेशी आयुष्य का।
स्वास्थ्य का नव संविधान, अब गढ़ रहा भविष्य का।।
कोरोना काल में रखें हम अनुशासन, संयम।
प्राणयाम से फेफड़े भरें ऑक्सीजन भरदम।। 13।।
"योगायुर्वेद, स्वदेशी, शिक्षा का पतंजलि ब्रांड।
तीव्र गति से फैल रहा है, आज सकल ब्रह्मांड।।
भारत स्वाभिमान नायक को काव्य-पुष्प-सम-अर्पण।
पतंजलि के अवतार, भूलोक व्याप्त युग-दर्पण।।14।।
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