रेनोग्रिट

‘वैंकोमाइसिन’ एंटीबायोटिक से होने वाली किडनी की खराबी में प्रभावशाली

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डॉ. अनुराग वार्ष्णेय

     किडनी हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है, जो रक्त को साफ करने का काम करती है। यह शरीर के विषैले तत्वों यानि toxic substance को मूत्र के रास्ते शरीर से बाहर निकालती है। इसके अलावा, किडनी, रक्तचाप (BP) को नियंत्रित करने, Red Blood Cells को बनाने और शरीर में Minerals तथा Electrolytes का संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाती है।
 
किडनी का कार्य
किडनी कैसे काम करती है यह समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि इसके बिना शरीर में toxic substance जमा होना शुरू हो जाते हैं। किडनी की structural units को Nephrons कहते हैं। इनमें मौजूद प्रॉक्सिमल ट्यूब्यूल्स ग्लूकोज, पानी और अमीनो एसिड जैसे महत्वपूर्ण तत्वों को दुबारा absorb करके बॉडी के लिए उपलब्ध कराते हैं।
लेकिन जब किडनी पर कोई दवा या विषाक्त पदार्थ बुरा प्रभाव डालते हैं, तो यह कार्यप्रणाली बिगड़ जाती है और शरीर में जहरीले तत्वों का स्तर बढ़ जाता है।
 
एलोपैथिक दवाइयों के बढ़ते प्रयोग का दुष्परिणाम
आजकल एलोपैथिक दवाइयों का इस्तेमाल बहुत अधिक हो रहा है। इनका जरूरत से ज्यादा और लंबे समय तक सेवन कई गंभीर समस्याओं को जन्म देता है। किडनी की खराबी भी इन्हीं में से एक है। वैंकोमाइसिन एक एंटीबायोटिक है जो एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी बैक्टीरिया, MRSA के इलाज में दी जाती है। हालांकि, इस दवा का लंबे समय तक इस्तेमाल किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
 
अनुसंधान
एलोपैथिक दवाओं के दुष्प्रभाव का ध्यान रखते हुए पतंजलि अनुसंधान संस्थान ने आयुर्वेदिक औषधिरीनोग्रिटका निर्माण किया है। यह अपामार्ग, कासनी, पाषाणभेद, पलाश, वरुण, पुनर्नवा मूल और गोखरू आदि प्राकृतिक जड़ी-बूटियों के द्वारा आयुर्वेद विधि के अनुसार निर्मित औषधि है जोकि किडनी तथा मूत्र तंत्र की बीमारियों को दूर करने में मदद करती है
 
शोध बताते हैं कि 5-35% मामलों में वैंकोमाइसिन के कारण किडनी के काम करने की क्षमता कम हो जाती है। इससे मरीज को इलाज के लिए अधिक समय तक अस्पताल में रहना पड़ता है, उसका दवाइयों और इलाज का खर्च भी बढ़ जाता है और जान का जोखिम भी बढ़ता है। वैंकोमाइसिन से किडनी को नुकसान मुख्य रूप से तीन कारणों से होता है-
  • पहला, यह शरीर में रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज (ROS) को बढ़ाता है, जो किडनी की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं।
  • दूसरा, यह किडनी के ट्यूब्यूल्स के आसपास सूजन पैदा करता है, जिसे एक्यूट इंटरस्टिशियल नेफ्राइटिस कहा जाता है।
  • तीसरा, सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस की वजह से किडनी की कोशिकाएं नष्ट होने लगती हैं, जिससे किडनी सही से काम नहीं कर पाती।
 
किडनी रोग के लक्षण
किडनी खराब होने के लक्षणों को समझना बेहद जरूरी है ताकि समय रहते इसका इलाज किया जा सके। पेशाब का कम होना, पैरों और टखनों में सूजन आना और कमजोरी या भ्रम की स्थिति पैदा होना इसके मुख्य लक्षण हैं। अगर इन लक्षणों को नजरअंदाज किया गया तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
 
किडनी रोगों के उपचार हेतु पतंजलि के गहन अनुसंधान से निर्मित औषधि रीनोग्रिट
एलोपैथिक दवाओं के दुष्प्रभाव का ध्यान रखते हुए पतंजलि अनुसंधान संस्थान ने आयुर्वेदिक औषधि रीनोग्रिट का निर्माण किया है। यह अपामार्ग, कासनी, पाषाणभेद, पलाश, वरुण, पुनर्नवा मूल और गोखरू आदि प्राकृतिक जड़ी-बूटियों के द्वारा आयुर्वेद विधि के अनुसार निर्मित औषधि है जोकि किडनी तथा मूत्र तंत्र की बीमारियों को दूर करने में मदद करती है।
रासायनिक विश्लेषण से ज्ञात हुआ कि इसमें गैलिक एसिड (Gallic acid), बर्जेनिन (Bergenin), मिथाइल गैलेट (Methyl gallate), क्वेरसेटिन (Quercetin), बोइराविनोनबी (Boeravinone B), ब्यूट्रिन (Butrin), मोनोस्पर्मोसाइड (Monospermoside) और ब्यूटिन (Butin) जैसे घटक हैं जो किडनी के लिए लाभदायक हैं।
पतंजलि अनुसंधान संस्थान द्वारा रीनोग्रिट की प्रभावशीलता की पुष्टि के लिए आधुनिक तकनीकों के माध्यम से दो अलग-अलग परीक्षण किए गए।
हमारे शरीर के अंग थ्री-डाइमेंशनल यानि त्रि-आयामी होते हैं।
पहले शोध के लिए मनुष्य की किडनी के प्रॉक्सिमल ट्यूब्यूलर कोशिकाओं से बनी थ्री-डाइमेंशनल संरचनाएं (स्फेरॉइड्स) विकसित की गई और उसमें वैंकोमाइसिन induced किया गया।
तत्पश्चात, ‘इन-विट्रोपरिक्षण के लिए रीनोग्रिट का प्रयोग इन्हीं थ्री-डाइमेंशनल संरचनाओं पर किया गया, जिसमें इस औषधि ने किडनी को हानि पहुंचाने वाले मार्कर्स को कम किया।
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चूहों पर सफल प्रयोग
  • दूसरे शोध मेंइन-वीवोपरिक्षण के अंतर्गत चूहों को भी वैंकोमाइसिन दिया गया और उनकी किडनी पर शोध किया गया।
  • जिसमें रक्त यूरिया नाइट्रोजन, सीरम क्रिएटिनिन और उनकी निकासी को नापा गया।
  • अनुमानित ग्लोमेरुलर फिल्ट्रेशन रेट, शरीर और किडनी के वजन का अनुपात, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और gene expressions का भी विश्लेषण किया गया।
  • इसमें भी रीनोग्रिट ने disease related parameters को normalise किया।
  • पतंजलि की रीनोग्रिट औषधि ने यह सिद्ध कर दिया है कि आयुर्वेद में वह क्षमता है जो आधुनिक चिकित्सा की चुनौतियों का समाधान कर सकती है।
  • यह औषधि न केवल किडनी को वैंकोमाइसिन जैसे एंटीबायोटिक्स के दुष्प्रभाव से बचाती है, बल्कि किडनी को स्वस्थ और मजबूत बनाने में भी सहायक है।
  • यह आयुर्वेदिक समाधान हमारे प्राचीन ज्ञान पर आधारित है और पूरी तरह प्राकृतिक होने के कारण सुरक्षित भी है।
  • रीनोग्रिट का उपयोग किडनी स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई क्रांति का संकेत देता है और यह भरोसा दिलाता है कि आयुर्वेदिक चिकित्सा हमारे स्वास्थ्य के लिए एक सशक्त और प्रभावी विकल्प है।

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