शाश्वत प्रज्ञा
परम पूज्य योग- ऋषि श्रद्धेय स्वामी जी महाराज की शाश्वत प्रज्ञा से नि:सृत शाश्वत सत्य ...
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ओ३म
हमारे सपनों का भारत
1. सच्चे सनातनी बनें - हम सभी ऋषि-ऋषिकाओं की सन्तानें वंशधर सनातन धर्म के मूल मूल्यों को मानें-जीयें एवं बढ़ायें। सनातन संस्कृति जोकि शाश्वत है उसे विश्व कल्याण हेतु युग धर्म के रूप में स्थापित करने हेतु कुछ कालजयी कार्य करें, पुरुषार्थ करें। मात्र बात करने बात नहीं बनेंगी। हमें जमीन पर बड़े रचनात्मक कार्यों के कीर्तिमान घड़ने पडे़ंगे। बड़ी भूमिका तय करें, उसे 100 प्रतिशत निभायें।
2. आत्म मूल्यांकन - भारत की मुद्रा करेंसी की वैश्विक स्थिति, हमारे पासपोर्ट की वैल्यु एवं वैश्विक संगठन एवं सस्थाओं में हमारी हैसियत क्या है? ये बातें बहुत गंभीर हैं। सुरक्षा, राष्ट्रीय एकता एवं देश के नागरिकों का जीवन स्तर सभी संदर्भों में क्या? इसे समग्रता से कैसे उन्न्त बनाना है?
3. झूठा मायाजाल - विभिन्न क्षेत्र के शक्तिशाली लोगों ने कुछ दंभयुक्त झूठे मापदंड घड़ लिए कि आपके पास ऐसा घर, ऐसी गाड़ी, इतने पैसे आदि हैं तो आप बड़े नही ंतो छोटे तुच्छ दीन-दरिद्र? ये तो न्यायपूर्ण व सत्य बात नहीं है। भौतिक विकास व पारमार्थिक उत्थान दोनों को हमें एक साथ लेकर चलना होगा।
4. स्नातन के एक संन्यासी की ताकत- विश्व की सारी मायावी शक्तियां भयाक्रान्त हैं। पोलपट्टी खुल गई है। झूठ का पर्दाफाश हो रहा है। अब सत्यमेव जयते योग धर्म जयते यतो धर्मस्ततो जयः ही होगा।
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