संपूर्ण पोषण प्राप्ति का मुख्य आधार ‘पतंजलि ‘न्यूट्रीशन बार’
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डॉ. रश्मि अतुल जोशी
साइंटिस्ट-सी, पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन, हरिद्वार
आदिकाल से ही मानव अपने स्वास्थ्य हेतु भोजन के साथ विभिन्न प्रकार के पोषक तत्वों से भरपूर, कई प्रकार के पदार्थ, जड़ी-बूटीयाँ इत्यादि का सेवन किसी न किसी रूप में करता आ रहा है। आयुर्वेद में संपूर्ण पोषण हेतु ‘पथ्य-अपथ्य आहार-विहार’ ‘सम-विषम पदार्थों’ इत्यादि का पालन करना संपूर्ण स्वास्थ्य हेतु आवश्यक माना गया है। विभिन्न प्रकार से भोजन पकाने की विधि, उन्हें ग्रहण करने के समय का पालन करने से मुनष्य लंबे समय तक निरोगी रह सकता है। भारतीय पाक शास्त्र के इतिहास में आयुर्वेदाचार्यों द्वारा घृत एवं जड़ी-बूटीयाँ मिलाकर बहुउपयोगी लड्डू बनाने का वर्णन है जो कि अनजानवश औषधि बनाते-बनाते बन गया था। तदुन्तर व्यवस्थित रूप से वह बनने लगे जिसमें गुड़, सूखे मेवे, कुछ जड़ी-बूटीयों का स्वास्थ्य लाभ हेतु प्रयोग किया जाने लगा। समयनुसार भारतवर्ष में विभिन्न प्रकार के लड्डू बनाने का प्रचलन बढ़ा, जो कि स्वास्थ्य लाभ के साथ-साथ सम्पूर्ण पोषण में सहायक होते हैं। आज के परिपेक्ष्य में यदि हम इसको देखें तो न्यूट्रिशन बार भी इनका ही नवीन रूप है ऐसा हम समझ सकते हैं (यह लेखिका की अपनी व्यक्तिगत राय है)। हालाँकि ‘न्यूट्रिशन बार’ का प्रावधान पश्चिमी देशों से मध्य इक्कीसवीं सदी से प्रारम्भ हुआ है। 1952 में, यॉर्क बारबेल्स और बॉब हॉफमैन ने अपना स्वयं का सोया-आधारित प्रोटीन पाउडर हाई-प्रोटीन कुकीज़ और ब्रेड बनाकर बेची। जो वीडर, ने 1960 के दशक के अंत में अपना कैंडी फूड बार लॉन्च किया। ‘एनर्जी बार’ पिल्सबरी कॉरपोरेशन की रचना थी, जिसने 1960 के दशक में स्पेस फूड स्टिक की शुरुआत करके राष्ट्रीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की लोकप्रियता का फायदा उठाया था। तब से ‘एनर्जी बार’ एक प्रकार से उनका अपना भोजन बन गए हैं। 1980 के दशक के मध्य में एथलीटों के लिए पहली बार ‘एनर्जी बार’, ‘पावर बार’ की शुरुआत हुई जो कि विभिन्न प्रकार के पोषण तत्वों जैसे ‘व्हे प्रोटीन’, मूँगफली, बादाम, अखरोट, सोया प्रोटीन इत्यादि से बनाई गई थी। आज इन ‘प्रोटीन बार’, ‘एनर्जी बार’ का व्यापार वैश्विक नई ऊँचाईयों को छू रहा है और 2026 तक लगभग यह US $ 2 billion तक पहुँच जाएगा इसका अनुमान है। भारतीय परिपेक्ष कोविड महामारी के दौरान व इसके बाद बहुत बदला है। महामारी के दौरान, लोगों ने स्वस्थ और नियमित जीवन की ओर रुख किया, जिससे सभी उम्र के लोगों का पोषक पूर्ण (Healthy व Nutritious) भोजन की ओर रूझान बढ़ा। इसके फलस्वरूप सुविधाजनक और स्वास्थ्यप्रद भोजन (Snacks) विकल्पों की मांग देश में बढ़ गई। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता, सक्रिय जीवनशैली और कम समय में संपूर्ण पोषक आहार के सेवन के लाभों के बारे में जागरूकता के कारण इन ‘एनर्जी बार’ की खपत बढ़ रही है। भारत में एनर्जी बार मार्केट का व्यापार 2029 तक 20.40 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है, जो पूर्वानुमानित अवधि (2024-2029) के दौरान 13.56% की सीएजीआर (Compound Growth Rate) से बढ़ रहा है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की एनर्जी और प्रोटीन बार कारोबारियों ने अपने कारोबार को ऑनलाइन चैनलों में विस्तारित करना और विभिन्न देशों में निर्यात करना शुरू कर दिया।
हमारे ऋषि-मुनियों के ज्ञान को संचित कर कुछ औषधियों एवं अन्य पोषक सामग्रियों जैसे- गुड़, शहद इत्यादि को एकत्र कर पतंजलि द्वारा विभिन्न प्रकार के न्यूट्रीशन बार विकसित किए गए। पतंजलि की न्यूट्रीशन बार श्रेणी को सभी उम्र के वर्गों के पोषण की जरूरत को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। Patanjali Immunity bar, Patanjali Classic herbal protein bar, Patanjali Herbal health food bar, Patanjali Energy bar with Choco chips, Patanjali Orange peel Energy bar, गहन रिसर्च एवं FSSAI (Food Saftey and Standards Autority of India) के मानकों के अनुरूप सम्पूर्ण पोषण के लिए वैश्विक स्तर पर लाया गया है। Patanjali Immunity bar में प्रमुख रूप से विभिन्न औषधीय गुणों से भरपूर वनस्पतियों का उपयोग किया गया है जो कि आयुर्वेदाचार्यों द्वारा विभिन्न व्याधियों में उपयोग किए जाते रहे हैं (तालिका 1)। न्यूट्रिशन बार का सेवन तत्काल उर्जा की आपूर्ति के लिए अनुकूल विकल्प है जिसके कारण इसकी मांग भी बढ़ रही है। दूसरा मुख्य कारण इसकी डिस्पोजेबल पैकेजिंग है जो इसको सीधे हाथों को छूने से रोकता है, इस प्रकार न्यूट्रिशन बार और हाथ दोनों को साफ रखता है।
(*अन्य पारम्परिक चिकित्सा पद्धति)
मीठे स्वाद के लिए इसमें गुड़ व शहद का उपयोग किया गया है। भारत में गुड़ प्रमुखत: गन्ने के रस से तैयार किया जाता है हालाँकि इसको ताड़ के रस इत्यादि से भी बनाया जाता है। गुड़ गन्ने के रस को लोहे के बर्तन में सांद्रित करके तैयार किया जाता है। गुड़ में मुख्यत: आयरन (लौह) व अन्य खनिज लवणों के अंश होते हैं जो गन्ने के रस से आते हैं। गुड़ फेफड़े, पेट, आंत, अन्न प्रणाली और श्वसन पथ को साफ करता है। जो लोग अपने दैनिक जीवन में धूल का सामना करते हैं उन्हें गुड़ की दैनिक खुराक लेने की अत्यधिक सलाह दी जाती है। यह उन्हें अस्थमा, खांसी-जुकाम, छाती में जमाव आदि से सुरक्षित रख सकता हैं। इसी प्रकार सदियों से भारत व अन्य सभ्यताओं में शहद का मीठे के रूप में व औषधीय गुणों के लिए प्रयोग किया जाता रहा है। शहद का उपयोग उदर विकार, त्वचा की जलन और अल्सर जैसी विभिन्न बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है। प्राचीन काल से मनुष्य अपने आस-पास की वनस्पतियों का उपयोग अपने स्वास्थ्य लाभ हेतु करता आ रहा है। आयुर्वेद के अलावा विश्व की कई अन्य पारम्परिक चिकित्सा पद्धतियों में जई, कोका बीन, मूँगफली पाउडर का उपयोग किया गया है। मूंगफली प्रोटीन का प्रचुर स्रोत है इसके अलावा इसमें और अन्य पोषक अत्व पाए जाते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि मूंगफली वजन घटाने के लिए भी उपयोगी हो सकती है और हृदय रोग से सुरक्षित रख सकती है। ओट्स (जई) में भी प्राकृतिक रूप से कई महत्वपूर्ण यौगिक पाए जाते है, जो वैज्ञानिकों के शोध का विषय है एवं आज ओट्स को एक बेहतरीन पोषक अन्न समझा जाता है एवं इसका उपयोग विभिन्न प्रकार के पोषक आहार बनाने के लिए किया जाता है। पतंजलि न्यूट्रीशन बार में कोकाबीन (Cocoa bean) का उपयोग समयानुसार माँग के अनुरूप स्वाद के लिए किया गया हे। कोकाबीन का मूल स्थान अमरीका का Amazon है। पारंपरिक अमेरिकी लोक चिकित्सा (American Folk Medicine) में इस Cocoa को फ्लू, सूजन (inflammation) उच्च रक्तचाप, खाँसी के उपचार हेतु सहायक माना गया है। इसके अलावा अन्य न्यूट्रीशन बार में किशमिश, खजूर, आरेंज पील, कार्न फ्लेक्स, बादाम, ‘व्हे प्रोटीन’ सोया प्रोटीन, गोंद, अखरोट इत्यादि का भी प्रमुख रूप से उपयोग किया गया है। आज पूरे विश्व के वैज्ञानिक इन वनस्पतियों में पाए जाने वाले पोषक तत्व, विभिन्न रसायनिक यौगिक इत्यादि की खोज करने में लगे हुए है। इन शोधों के द्वारा हमारी प्राचीन आयुर्वेद विद्या को और बल मिलता है एवं भारतीय ज्ञान परंपरा को वैश्विक स्तर पर पूर्ण रूप से मान्यता प्राप्त हो पाती है। अपनी इसी गौरवशाली आयुर्वेद की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए पतंजलि ने नवीन मानको (FSSAI इत्यादि) के अनुसार संपूर्ण पोषण के लिए स्वाद के साथ सेहत को भी चरित्रार्थ किया है और भविष्य में भी करता रहेगा।
।। ऊँ सर्वे भवन्तु सुखिन: सर्वे सन्तु निरामया।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दु:ख भाग्भवेत् ।।
1- Source:https://www.mordorintelligence. com/industry-reports/india-energy-bar market
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