संगठन के सशक्ति करण व शुद्धिकरण के लिए निरन्तर दिव्य आरोहण

संगठन के सशक्ति करण व शुद्धिकरण के लिए निरन्तर दिव्य आरोहण

राकेश कुमार : मुख्य केन्द्रीय प्रभारी, भारत स्वाभिमान

  किसी भी बड़े परिवर्तन के लिए सबके सामूहिक पुरुषार्थ, दिव्य नेतृत्व एवं विचारधारा का होना आवश्यक है, इन्हीं तीनों के संयोग से संगठन का निर्माण होता है।1947 की आजादी के बाद भारत वर्ष में भी लगातार अंग्रेजों की व्यवस्थाएं चलती रहीं, जो शहीदों ने सपना देखा था वैसा स्वराज्य नहीं आया। भ्रष्ट तंत्र, भ्रष्ट व्यवस्थाएं, अंग्रेजों के कानून तथा अंग्रेजों की व्यवस्थाओं ने सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों को मानसिक रूप से गुलाम बना कर रखा। चन्द लोगों ने देश का धन लूट-लूट कर विदेशों में जमा करवाकर भारत के 120 करोड़ लोगों के हक को लूट लिया था।
देशवासियों ने भी मान लिया था कि भारत की तो अब यही नीयति है कि अब यहाँ कोई आशा की किरण नहीं दिखाई देगी, तो इसी घनघोर अंधकार व निराशा के वातावरण में ईश्वर की प्रेरणा से एक सन्त सिपाही, योद्धा संन्यासी, योगी योद्धा, पूज्य स्वामी जी महाराज ने संकल्प लिया कि भारत को आर्थिक, सामाजिक, मानसिक व राजनैतिक गुलामी से मुक्त करना ही होगा। इसी व्यवस्था परिवर्तन के संकल्प के साथ पूज्य स्वामी जी महाराज एवं श्रद्धेय आचार्य श्री ने 5 जनवरी 2009 में भारत स्वाभिमान संगठन की स्थापना की। भारत स्वाभिमान वर्तमान में सबसे कम आयु (मात्र 6 वर्ष) का विश्व का सबसे विशाल संगठन है। जो कार्य संगठन 100-100 वर्षों में नहीं कर पाते, व्यवस्था परिवर्तन व सत्ता परिवर्तन का विशाल कार्य भारत स्वाभिमान ने पिछले 6 वर्षों में दिव्य नेतृत्व के द्वारा 125 करोड़ लोगों के सहयोग से कर दिखाया। वर्तमान में भारत स्वाभिमान संगठन एवं उसके पाँचों सहयोगी संगठन यथा पतंजलि योग समिति, महिला पतंजलि योग-समिति, युवा भारत व किसान पंचायत आदि मिलकर देश के सम्पूर्ण जिलों व प्रत्येक तहसील में कार्य कर रहे हैं।
भारत स्वाभिमान संगठन देश के 600 से अधिक जिलों, 5000 से अधिक तहसीलों तथा 2 लाख से अधिक गाँवों में सक्रियता के साथ कार्य कर रहा है। संगठन के माध्यम से राष्ट्रहित के मुद्दों पर जैसे काला धन, भ्रष्टाचार पर जन-जागरण के साथ-साथ नि:शुल्क योग शिविर, नि:शुल्क नियमित योग कक्षायें, वृक्षारेापण, पर्यावरण संरक्षण, नशामुक्ति अभियान, रक्तदान, स्वच्छता अभियान, आयुर्वेदिक शिक्षा, जड़ी-बूटी वितरण, आपदा राहत सेवा जैसे (बाढ़ राहत, सुनामी राहत, केदारनाथ राहत सेवा), गौसंरक्षण एवं संवर्धन, गरीब कन्याओं का विवाह, नेत्रदान, देहदान, वस्त्र वितरण, स्वदेशी का प्रचार-प्रसार आदि असंख्य सेवा के कार्य चल रहे हैं।
पूज्य स्वामी जी महाराज एवं श्रद्धेय आचार्य श्री के नेतृत्व में भारत के इतिहास का सबसे बड़ा सत्याग्रह, जन-जागरण अभियान, भ्रष्ट सत्ता को उखाड़कर एक राष्ट्रवादी सरकार को स्थापित करना, यह सब करोड़ों कार्यकर्ताओं के पूर्ण समर्पण, निष्ठा व पुरुषार्थ से भारत स्वाभिमान संगठन द्वारा किया गया।
विगत 2 दशक पहले पूज्य स्वामी जी ने श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी के साथ योग-आयुर्वेद, स्वदेशी एवं ऋषि ज्ञान परम्परा को आगे बढ़ाने के लिए देवभूमि हरिद्वार से यह अनुष्ठान शुरू किया था। परम पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज ने देश व दुनिया के लगभग 20 करोड़ लोगों को प्रत्यक्ष रूप से योग सिखाकर तथा मीडिया के माध्यम से योग को कन्दराओं व महलों से बाहर निकालकर, घर-घर तक योग पहुँचाकर वर्तमान युग में योग को पुन: प्रतिष्ठा दिलवाई है। पतंजलि योगपीठ एवं माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी के पुरुषार्थ से आज 177 देशों के समर्थन के साथ संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी 21 जून को 'विश्व योग दिवसघोषित करके योग की वैज्ञानिकता, सार्वभौमिकता एवं भारतीय ऋषि संस्कृति का लोहा माना है।
राष्ट्रसेवा, मानवता सेवा के लिए संगठन के नेतृत्वकर्त्ता पूज्य स्वामी जी महाराज ने भारत की ऋषि परम्परा की तरह योग, आयुर्वेद, स्वदेशी व व्यवस्था परिवर्तन की महाक्रान्ति के बाद अब आचार्यकुलम् के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में महाक्रान्ति अर्थात् ज्ञान-क्रान्ति का लक्ष्य रखा हैं। पूज्य स्वामी जी महाराज कहते है भविष्य में समृद्धि का आधार ज्ञान अर्थात् बौद्धिक सम्पदा के आधार पर तय होगा, ज्ञानवान ही धनवान है, ज्ञान ही धन है, जिसके पास बौद्धिक सम्पदा होगी वही विश्व का नेतृत्व करेगा।
जैसे वर्तमान में पतंजलि योगपीठ द्वारा योग, आयुर्वेद को विश्व पटल पर स्थापित किया गया है, वैसे ही हमारी प्राचीन वैदिक संस्कृति, वैदिक ज्ञान विज्ञान को आधुनिक शिक्षा के साथ सम्पूर्ण विश्व पटल पर स्थापित किया जायेगा।
ज्ञान क्रान्ति के साथ-साथ संगठन को देश के 6 लाख 36 हजार 365 गाँवों तक विस्तार करना तथा योग के साथ-साथ आयुर्वेद व स्वदेशी के वर्तमान स्थापित तंत्र में कोई न्यूनता या अपूर्णता है उसे पूर्ण करना।
प्रत्येक जिले में प्रथम चरण में 5-5 आदर्श ग्राम स्थापित करना तथा धीरे-धीरे भारत के सभी गाँवों को आदर्श बनाना, प्रत्येक जिले में आचार्यकुलम् खोलना तथा प्रत्येक ग्राम स्तर तक, देश के अन्तिम व्यक्ति को स्वस्थ बनाने के लिये योग  कक्षा स्थापित करना, युवा पीढ़ी को नशे से बचाकर राष्ट्रनिर्माण में उपयोगी बनाना, कुदरती खेती का अन्तिम किसान तक प्रचार करके रासायनिक खादों के जहर से किसान के खेतों को बचाने तथा  भारतवासियों को बीमारियों से बचाना, स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत भय-भूख-बीमारी मुक्तराष्ट्र का निर्माण करना ये वह विराट लक्ष्य हैं, जो केवल सत्ता या सरकारें नहीं कर सकती है। सरकारें सहयोग कर सकती हैं, परिवर्तन का वातावरण निर्मित कर सकती हैं, लेकिन चरित्र-निर्माण, व्यक्तित्व निर्माण का कार्य कोई दिव्यतायुक्त समर्थ योग्यगुरु ही कर सकता है। दिव्य गुरुदेव पूज्य स्वामी जी महाराज एवं श्रद्धेय आचार्य श्री के मार्गदर्शन में भारत स्वाभिमान संगठन का आगामी लक्ष्य इन बड़े राष्ट्रीय दायित्वों का निर्वहन करना है, जिसके लिए निरन्तर हमें संगठन व स्वदेशी के स्थापित तंत्र के सशक्तिकरण एवं शुद्धिकरण की आवश्यकता है। संगठन के शुद्धिकरण व सशक्तिकरण से ही संगठन व राष्ट्र का दिव्य आरोहण होगा।
संगठन के सशक्तिकरण के लिए 100-100 जिलों के सभी प्रान्त, मण्डल, जिला व तहसील स्तरीय दायित्वधारियों की संगठन कार्यशाला नवम्बर व दिसम्बर माह में संगठन मुख्यालय पतंजलि योगपीठ में आयोजित की गई। संगठन कार्यशाला में लक्ष्य रखा गया कि अब संगठन का सशक्तिकरण व शुद्धिकरण करके संगठन व स्वदेशी के तंत्र को विस्तार दिया जायेगा। विगत चार वर्षों तक संगठन लगातार आन्दोलनों में संलग्न रहा, निरन्तर संघर्ष चलते रहे। एक के बाद एक अभियान चलते रहे। अब संगठन ने परिवर्तन का एक लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। अब अनुशासन के साथ शुद्ध ज्ञान, शुद्ध उपासना, शुद्ध कर्म से अपनी 100त्न शक्तियों को जाग्रत करके, पूर्ण योगी बनकर सम्पूर्ण दुनिया का नेतृत्व करना है।
संगठन कार्यशाला में उपस्थित कार्यकर्ताओं के लिए पूज्य स्वामी जी महाराज ने सात सर्वोच्च प्राथमिकतायें तय की- (1) व्यक्तिगत जीवन में निरन्तर साधना व निष्काम सेवा को सर्वोच्च  प्राथमिकता देना, कम से कम 1 से 2 घण्टा ध्यान, स्वाध्याय, मौन व 1 घंटा योग करना। (2) 10 प्रकार के योग शिविरों का आयोजन करना (3) योग कक्षाओं का विस्तार करना, सभी प्रभारियों के लिए योग कक्षा लगाना अनिवार्य है। (4) स्थापित ग्राम समितियों को सक्रिय रखना व पाँचों संगठनों को जिला, तहसील, ग्राम स्तर तक विस्तार करना। (5) संगठन व संस्थान को आदर्श स्थिति में लाना, स्थापित तंत्र की अपूर्णताओं को दूर करके उसका शुद्धिकरण व सशक्तिकरण करना। (6) आदर्श जीवन जीना- यथार्थ ज्ञानपूर्वक 10 प्रकार का व्यवहार करना-वाणी, व्यवहार, आचरण, अभ्यास, स्वभाव, कर्म, प्रवृत्ति, पुरुषार्थ, तप, सेवा। (7) प्रत्येक जिले में आचार्यकुलम् स्थापित करना। इसके साथ ही पूज्य स्वामी जी ने  साधनाकाल ''योग, स्वाध्याय, ध्यान’’ व व्यवहारकाल के योग ''सेवा’’ का विशेष प्रशिक्षण दिया और कहा कि योग को आधार बनाकर ही हम यहाँ तक पहुँचे हैं तथा योग के साथ ही इस अभियान को हम आगे बढायेंगे।
संगठन कार्यशाला में मुख्य केंद्रीय प्रभारी भाई डॉ- जयदीप आर्य जी द्वारा स्वच्छता अभियान, आदर्श ग्राम निर्माण योजना, दान, सेवा, सहयोग आदि विषयों को प्रस्तुत किया गया। मुख्य केंद्रीय प्रभारी राकेश जी ने ग्राम समितियों का विस्तार, कार्यालय प्रबन्धन, नशामुक्ति, सोशल मीडिया तथा बहन आचार्या सुमन जी द्वारा स्वभाव में परिवर्तन, योग कक्षाओं व योग शिविरों का आयोजन 10 प्रकार के योग शिविरों के आयोजन से सम्बन्धित प्रशिक्षण दिया गया। संगठन कार्यशाला में संगठन विस्तार के साथ-साथ वैयक्तिक जीवन में अनुशासन के साथ, दिव्य कर्म करने अर्थात् भागवत कर्म व निष्काम सेवा पर विशेष बल दिया गया।
संगठन कार्यशाला में सम्पूर्ण भारत से कार्यकर्ताओं ने उत्साह के साथ भाग लिया, जम्मू-कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक तथा राजस्थान से लेकर नोर्थ ईस्ट के प्रत्येक प्रान्त से बड़ी संख्या में भागीदारी रही। अण्डमान निकोबार से 10-10 दिन की यात्र करके कार्यकर्ता संगठन कार्यशाला में भाग लेने पहुँचे। केरल, कर्नाटका, आन्ध्र प्रदेश व मणिपुर के साथ-साथ नागालैण्ड, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, सिक्किम आदि से भी बड़ी संख्या में भागीदारी रही।
सभी कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि अब हम चरैवेति चरैवेति, पापो निषद्वरो जन: इन्द्र इच्चरत: सखा। (एतरेय ब्राह्मण) निरन्तर पूर्ण-पुरुषार्थ से भगवान को, गुरु को, सत्य, धर्म व न्याय को केन्द्र में रखकर राष्ट्रसेवा, मानवता सेवा जैसे कार्य बिना किसी अहंकार के, निष्काम सेवा के साथ, योग को केन्द्र में रखकर इस अभियान को आगे बढ़ायेंगे।
 

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