भारत में स्वदेशी गाय से फूटेगा स्वास्थ्यवर्धक दूध का स्रोत

भारत में स्वदेशी गाय से फूटेगा स्वास्थ्यवर्धक दूध का स्रोत

डॉ. डी.एन. तिवारी, सेवानिवृत्त वरिष्ठ चिकित्साधिकारी

  देशी गाय और दूध का विज्ञान: इस आश्चर्यजनक तथ्य पर ध्यान देने की जरूरत है कि B.CM-7 Opioid (narcotic) अफीम परिवार का एक मादक पदार्थ है, जो बहुत शक्तिशाली (oxident) आक्सीकरण एजेण्ट के रूप में मानव स्वास्थ्य पर दूरगामी दुष्प्रभाव छोड़ता है। जिस दूध में यह तत्व होता है उस दूध को वैज्ञानिकों ने A-1 दूध नाम दिया है। यह दूध उन विदेशी गायों में पाया जाता है, जिनके में ६७वें स्थान पर प्रोलीन न होकर हिस्टीडीन होता है। प्रारम्भ में जब विशेषज्ञों द्वारा BCM-7 के कारण दूध को बड़े स्तर पर जानलेवा रोगों का कारण पाया गया, तब न्यूजीलैण्ड के सारे डेयरी उद्योग के दूध का परीक्षण आरम्भ हुआ। डेयरी दूध पर किए जाने वाले प्रथम अनुसंधान में दूध BCM-7 से दूषित पाया गया। इस प्रकार यह सारा दूध A-1 कहलाया। तदुपरान्त ऐसे दूध की खोज आरम्भ हुई जिसमें BCM-7 न हो और उस BCM-7 से रहित दूध को A-२ कहा गया। भारतीय देशी गायों के दूध में यह स्वास्थ्यनाशक मादक विष तत्व BCM-7 बिल्कुल नहीं होता।
धुनिक अमेरिकी वैज्ञानिक अनुसंधान से अमेरिका में भी यह पाया गया।कि देशी भारतीय गाय के दूध और दूध से बने पदार्थ मानव शरीर में रोग उत्पन्न नहीं होने देते। आज यदि भारतवर्ष का डेयरी उद्योग हमारी देशी गाय की उत्पादकता का महत्व समझ ले तो भारत सारे विश्व में डेयरी-दूध व्यापार में सबसे बड़ा निर्यातक देश बन सकता है।
रोगों का कारक BCM-7 :
आजकल भारत में ही नहीं अपितु सारे विश्व में जन्मोपरान्त से ही बच्चों में बोध अक्षमता (Autism) और मधुमेह (Diabetes) जैसे रोग बढ रहे हैं उनका स्पष्ट कारण A-1 दूध अर्थात् दूध में BCM-7 पाया जाना है। शरीर से स्वजन्य रोग जैसे- उच्च रक्तचाप, हृदय रोग तथा मधुमेह का भी प्रत्यक्ष सम्बन्ध BCM-7 वाले दूध से स्थापित हो चुका है। यही नहीं बुढापे के मानसिक रोग भी बचपन में A-1 दूध के सेवन संबंधी दुष्प्रभाव के रूप में देखे जा रहे हैं।
मुख्य रूप से यह हानिकारक A-1 दूध होलीस्टन फ्रीजियन (Holstein Friesian) प्रजाति की गाय में ही मिलता है। जो भैंस जैसी दिखने वाली अधिक दूध देने के कारण सारे डेयरी उद्योग की पसन्दीदा गाय है। होलिस्टन फ्रीजियन दूध के ही कारण लगभग सारे विश्व में डेयरी का दूध A-1 टाइप का होता जा रहा है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और रोगों के अनुसन्धान के आंकड़ों के आधार पर यह सिद्ध हुआ है कि BCM-7 युक्त A-1 दूध मानव समाज हेतु विषतुल्य है। जर्सी प्रजाति की गाय के दूध में वे पोषक तत्व नहीं पाये जाते हैं, जो देशी गाय के दूध में पाये जाते हैं।
A-1 एवं A-2 दूध तथा विषाक्ततत्व BCM-7:
1993 में न्यूजीलैंड के वैज्ञानिकों ने टाइप-1 डायबिटीज (इन्सुलिन डिपेन्डेंट), आटोइम्यून डिजीज, कोरोनरी आर्टरी रोग जैसी कई बीमारियों की जड़ यूरोपियन गायों के दूध में BCM-7 तत्व को (Hypothesis) माना गया। इसी दूध को A-1 नाम दिया गया।
यूरोपियन गोवंश में से होलस्टीन फ्रिजियन, जर्सी, स्विसब्राउन आदि के दूध में BCM-7 विषाक्ततत्व होने का मुद्दा उठाने के बाद उन्होंने ऐसी गायों की पहचान के लिए पशु के बालों की जाँच करने की प्रणाली विकसित की और उसे पेटेन्ट भी करा लिया। BCM-7 तत्व पैदा करने वाले दूध के अंश को A-१ बीटा केसीन कहते हैं और उसके पाचन से जो खतरनाक रस निर्माण होता है, उसे BCM-7 कहते हैं। BCM-7 का पूर्ण रूप बीटा-केझो-मारफीन ७ (beta caseo morphine-7) है। इसमें अफीम का मारफीन तत्व होने के कारण अत्यन्त नशीला होता है जो धीरे-धीरे दूध सेवन करने वाले के शरीर को विषाक्त कर देता है।
समझें विदेशों के शोध अंश:              
न्यूजीलैंड के वैज्ञानिकों ने जब भारतीय गोवंश की जाँच की तब सभी भारतीय गोवंश, जिसमें पर्वतीय बद्री गाय, गीर गाय, साहीवाल, हरियाणा, कांकरेज, देवणी, थारपारकर आदि। सभी का दूध A-1 मुक्त अर्थात् सुरक्षित एवं स्वास्थ्यवर्धक पाया गया। इन वैज्ञानिकों के अध्ययन से प्रभावित होकर कुछ अमीर व्यक्तियों ने न्यूजीलैंड के नागरिकों के स्वास्थ्य रक्षा हेतु BCM-7 मुक्त दूध का उत्पादन और वितरण करने के लिए सन् 2000 ई. में एक निजीकम्पनी स्थापित की। उस कम्पनी का नाम A-2 कार्पोरेशन रखा गया।
रूस, जापान, पोलेंड, जर्मनी आदि ने A-1 दूध के दुष्परिणामों का अध्ययन किया। उनका कहना है कि क्चष्टरू-7 एक चालाक शैतान तत्व है। वह जब तक रक्तमें नहीं पहुंचता, उससे कोई खतरा नहीं रहता। न्यूजीलैंड के वैज्ञानिकों को रक्त में क्चष्टरू-७ पहचानने की जाँच विकसित करने में सफलता नहीं मिली थी, लेकिन रूस के वैज्ञानिकों ने गाय के रक्त में BCM-7 ढूंढने का तरीका विकसित किया और उसका पेटेन्ट भी करा लिया। रूस के चार अनुसंधान संस्थानों के 12 वैज्ञानिकों ने अपने अनुसंधान के परिणामों से स्पष्ट किया कि जो शिशु (१ वर्ष से कम आयु वाले) A-1 दूध पीते हैं, उनके रक्त में BCM-7 तत्व आ जाता है। १२५ करोड़ आबादी वाले भारतीयों के स्वास्थ्य का करीबी संबंध इस विषय से है। ये सब इस संकट से अनजान हैं।
जबकि भारत की स्थिति:
भारत में विगत 60-90 के दशक में चलाए गए नस्ल सुधार अभियान ने यूरोपियन गोवंश के वीर्य क्षेत्र में पशुपालन विभाग ने करोड़ों A-2 (अच्छी) गायों को A-1 (विषैला) बना दिया है। हम जब बाजार में थैली में दूध लेते हैं, वह कई A-1 गायों के दूध का मिश्रण होता है। वही पीकर हम और हमारे बच्चे बड़े हो रहे हैं। अब बार-बार यह कहा जा रहा है कि भारत में टाईप-1 डायबिटीज दिल की बीमारियाँ, ऑटोइम्यून आदि रोग बढ़ रहे हैं। भारत इन बीमारियों की वैश्विक राजधानी हो गया है।
आज भारत में A-1 दूध (स्वास्थ्यवर्धक) A-1 (विषैले) दूध के साथ मिलाकर बेचा जा रहा है। यदि हम A-2 दूध स्वतंत्र रूप से बेचें, उपलब्ध कराये तो भारत की आने वाली पीढ़ियाँ जहरीले दूध A-2 से बच सकती हैं। इसके लिए A-2 दूध के लिए एक कार्पोरेशन की स्थापना की जानी चाहिए।
इसके विपरीत जब न्यूजीलैंड के नागरिकों को A-2 दूध की आवश्यकता महसूस हुई तो उन्हें इस दूध को पाने के लिए 10 वर्ष तक इंतजार करना पड़ा। उन्हें भारत से A-2 गोवंश का वीर्य या A-2 सांड मंगवाने पड़े, फिर उनसे भारतीय नस्ल की गायें बनीं और A-2 दूध देने लगीं। हमारे देश के सभी राज्यों में अभी सैकड़ों गोपालक हैं, जो शुद्ध A-2 भारतीय गायों को सैकड़ों की संख्या में पाले हुए हैं।
भारत सरकार के करनाल स्थित राष्ट्रीय पशु जेनेटिक अनुसंधान संस्थान ने 2009 ई. में भारतीय गो एवं भैंस वंश की जेनेटिक जाँच की थी। दोनों में A-2 जींस पाया गया।
हम A-2 दूध का निर्यात कर अरबों रुपये कमा सकते हैं। इसके लिए हमें कुछ नीतियाँ बनानी पड़ेंगी। जैसे-
  • भारतीय गोवंश के सांड और उनके वीर्य को देश के बाहर ले जाने पर प्रतिबंध लगाया जाए।
  • भारतीय गोवंश के दूध की A-1 तथा A-2 स्थिति परीक्षण के लिए राज्य सरकारें जिला स्तर पर जेनेटिक जाँच प्रयोगशालाएं स्थापित करें।
  • A-2 दूध बेचकर आने वाली राशि से A-2 दूध के मानवीय स्वास्थ्य पर होने वाले स्वास्थ्यवर्धक परिणामों के अनुसंधान हेतु चिकित्सा महाविद्यालयों एवं डेयरी दुग्ध अनुसंधान संस्थानों को प्रेरित किया जाना चाहिए।
इन प्रयोगों से ही देशी गाय सुरक्षित होगी और देश में पुन: स्वास्थ्यवर्धक दूध का स्रोत फूटेगा।
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