यौगिक प्रणाली से करें चिंता प्रबंधन

यौगिक प्रणाली से करें चिंता प्रबंधन

डॉ. शरली टेल्लस एवं राम कुमार गुप्ता

पतंजलि अनुसंधान संस्थान, हरिद्वार

   चिंता एक ऐसी अवस्था है जिसे हम सभी अपने जीवन में कभी ना कभी महसूस करते है। Board Exam. के परिणाम एवं साक्षात्कार से पहले की अवस्था चिंता का ही उदाहरण हैं। सामान्यत: चिंता का अर्थ भय या किसी आशंका के दुख-भाव से होता है। यद्यपि भय एक सामान्य स्तर तक ठीक रहता है, परन्तु यदि भय अनावश्यक रूप से बढ़ जाये तो हमारी दिनचर्चा को प्रभावित कर सकता है। इसी अवस्था को चिंता विकृति कहा जाता है। सतत् चिंता के कारण शारीरिक एवं मनोवैज्ञानिक स्तर पर नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न होते हैं, जिससे किसी भी कार्य के प्रदर्शन में कमी आने लगती है, अथवा कार्य उस रूप में पूर्ण नहीं हो पाता जैसा कि उसे वास्तव में होना चाहिये था। शायद इसलिए ही चिंता को चिता के समान माना गया है।
चिंता के कुछ लक्षण:
  • सतत् घबराना एवं भय महसूस करना।
  • बैचेनी महसूस करना।
  • अभिघातक (Tramatic) अनुभवों के बारे में अनियंत्रित रूप से लगातार सोचते रहना ।
  • किसी दुस्वप्न के कारण अचानक नींद खुल जाना।
  • अनिद्रा।
  • हाथ एवं पैरों में अनावश्यक पसीना आना।
चिंता के मुख्य कारण:
आत्म विश्वास एवं कुशलता में कमी, भय का अधिक आकलन, अपनी क्षमताओं का कमतर आंकना, आनुवांशिक कारण, स्वायत्त अस्थिरता आदि चिंता के कारणों में आते हैं।
प्रबंधन एवं चिकित्सा:
चिंता में औषधीय चिकित्सा एवं मनोचिकित्सा दोनों ही लाभदायक हैं। औषधि में मरीज को मनोचिकित्सक द्वारा Anti Anxiety दवाईयाँ दी जाती हैं, जिसका Side Effect भी शरीर पर पड़ता हैं।
इसके अलावा मनोविश्लेषण पद्धति, व्यवहार पद्धति, Modelling इत्यादि विधियों द्वारा भी चिंता का प्रबंधन किया जाता है।
चिंता एक ऐसा विकार है जिससे शारीरिक एवं मानसिक दोनों ही स्तर प्रभावित होते हैं, मनो-शारीरिक चिकित्सा के रूप में योग एक बहुत ही प्रभावी पद्धति के रूप में माना जाता है, क्योंकि योग उपचार मात्र एक पद्धति न होकर एक जीवन शैली है, जिसमें सम्पूर्ण मानव जीवन का उपचार किया जा सकता है। नियमित योग अभ्यास हमें शान्त एवं स्थिर बनाने के लिए दैनिक जीवन की कठिनाईयों से बिना विचलित हुए सामना करने की शक्ति प्रदान करता हैं।
योग प्रक्रियाएं/ आसन, प्राणायाम श्वास को नियन्त्रित करती हैं, शरीर व मन को तनाव से मुक्त कर शिथिल एवं स्थिर करती हैं। जिसके फलस्वरुप चिंता विकार से मुक्त हो व्यक्ति जीवन में स्वास्थ्य, आनन्द, सकारात्मकता एवं शक्ति प्राप्त करता है। वैज्ञानिक शोधों के अनुसार सतत योग करने वाले व्यक्तियों में GABA, Serotomin, Doparmine एवं Endorphin नामक मस्तिष्क रसायनों (Neurotransmittcod) की मात्रा में वृद्धि पाई गई जो मस्तिष्क के सही कार्य करने एवं आन्तरिक शरीर की शान्ति, प्रसन्नता एवं आनन्द के लिए उत्तरदायी होते हैं।
संभावित योग प्रक्रिया:
आसन :- धनुरासन, मत्स्यासन, सेतुबन्ध आसन, मार्जरी आसन, पश्चिमोत्तानासन, हस्तपादासन, शवासन, प्राणायाम, कपालभाति, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी प्राणायाम चिंताग्रस्त मनुष्य के लिए वरदान है।
फिर भी जीवन में जो भी चुनौतियां आती रहती हैं, उनका सकारात्मक रूप से सामना करना चाहिए। साथ ही हमें अपने कार्य असफलता के भय के साथ प्रारम्भ ना करके, अपितु अपने पूरे मन, क्षमता एवं सकारात्मकता के साथ करना चाहिये। यदि हम ऐसा करने में समर्थ हुए तो परिस्थिति एवं मन: स्थिति बदलने में देर नहीं लगेगी। जो हमारे चिंता निवारण का प्रत्यक्ष प्रमाण सिद्ध होगी।

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