थायरॉइड

लक्षण, कारण , बचाव

थायरॉइड

डॉ. अरुण पाण्डेय

पतंजलि आयुर्वेद कॉलेज, हरिद्वार

   थायरॉइड का प्रमुख कारण अस्वस्थ खान-पान और तनावपूर्ण जीवनशैली है। इससे हार्मोनल असंतुलन की स्थिति बनती है, जो एक बड़ी समस्या है। इससे उत्पन्न तनाव, शरीर में आयोडीन की कमी, वायरल संक्रमण आदि के कारण महिलाओं में विभिन्न प्रकार की समस्याएं पैदा होती हैं।
घरेलू उपचार व निवारण
 थायरॉइड एक आम बीमारी है जो वर्तमान में तेजी से अपने पैर पसार रही है। इसका प्रमुख कारण अस्वस्थ खान-पान और तनावपूर्ण जीवनशैली है। इससे हार्मोनल असंतुलन की स्थिति बनती है, जो एक बड़ी समस्या है। इससे उत्पन्न तनाव, शरीर में आयोडीन की कमी, वायरल संक्रमण आदि के कारण महिलाओं में विभिन्न प्रकार की समस्याएं पैदा होती हैं। थायरॉइड उन्हीं में से एक है। मेडिकल की भाषा में कहें तो जब थायरॉइड हार्मोन यानी ट्राईआयोडोथायरोनिन या थायरोक्सिन के स्तर में असंतुलन होता है, तो उसे थायरॉइड कहते हैं। यह महिला और पुरुष दोनों में समान प्रभाव दिखाता है लेकिन पुरुषों की तुलना में यह महिलाओं में आम रोग है।
आयुर्वेद के अनुसार, वात, पित्त व कफ के असंतुलन के कारण थायरॉइड होता है। जब शरीर में वात एवं कफ दोष हो जाता है तब व्यक्ति को थायरॉइड होता है। आयुर्वेदीय उपचार द्वारा वात और कफ दोषों को सन्तुलित किया जाता है। अच्छी बात तो यह है कि घरेलू उपचार से भी थायरॉइड को ठीक किया जा सकता है।
थायरॉइड ग्रन्थि (Thyroid gland) को अवटु ग्रन्थि भी कहा जाता है। यह मानव शरीर में पाई जाने वाली सबसे बड़ी अतस्रावी ग्रंथियों में से एक है।
यह द्विपिंडक रचना हमारे गले में स्वर यंत्र के नीचे Cricoid Cartilage के लगभग समान स्तर पर स्थित होती है। शरीर की चयापचय क्रिया में थायरॉइड ग्रंथि का विशेष योगदान होता है। यह ग्रन्थि Tri–iodothyronin (T3) और Thyrocalcitonin नामक हार्मोन स्रावित करती है। ये हार्मोन शरीर के चयापचय दर और अन्य विकास तंत्रों को प्रभावित करते हैं। थायरॉइड हार्मोन हमारे शरीर की सभी प्रक्रियाओं की गति को नियंत्रित करता है। इसके दो प्रकार हैं-
1)     थायरॉइड ग्रंथि की अतिसक्रियता - हाइपरथायरॉइड (Hyperthyrodism)
2)     थायरॉइड ग्रंथि की अल्पसक्रियता - हाइपोथायराइड (Hypothyrodism)
हाइपरथायरायडिज्म की स्थिति में थायरॉइड हार्मोन का निर्माण अधिक मात्रा में होता है और हाइपोथायरायडिज्म में हार्मोन का उत्पादन कम होता है। जब भी हमारे शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगड़ता है, तो हमारे शरीर के वजन में भी काफी उतार चढ़ाव देखने को मिलता है। जिससे थायरॉइड की समस्या उत्पन्न होती है।
थायरॉइड का क्या पैमाना है?
थायरॉइड की नार्मल रेंज महिलाओं और पुरुषों में एक समान ही होती है। दोनों में ही नार्मल रेंज 0.4 mU/L से 4.0 mU/L के बीच होती है। नॉर्मल रेंज में फर्क सिर्फ उम्र का होता है। 18 से 50 साल के लोगों में थायरॉइड का स्तर करीब 0.5 - 4.1 mU/L के बीच होता है। वहीं दूसरी तरफ 51-70 साल के लोगों में यह स्तर 0.5 से 4.5 mU/L के करीब होता है।
 
पिट्यूटरी ग्रंथि रोग का इतिहास, थायरॉयड कैंसर का इतिहास, गर्भावस्था व वृद्धावस्था जैसी स्थितियों में टीएसएच को एक एंडोक्रिनोलॉजिस्ट द्वारा निर्देशित एक अलग श्रेणी में रखा जाता है।
थायरॉइड ग्रंथि की अतिसक्रियता (Hyperthyroidism)
थायरॉइड ग्रंथि की अतिसक्रियता के कारण T4 और T3 harmone का आवश्यकता से अधिक उत्पादन होने लगता है जिससे शरीर ऊर्जा का उपयोग अधिक मात्रा में करने लगता है। इसे ही हाइपरथायरायडिज्म (Hyperthyroidism) कहते हैं। इसमें थायरॉइड हार्मोन (Thyroid harmone)  की अधिकता के कारण शरीर में चयापचय यानी मेटाबोलिज्म (Metabolis) बढ़ जाता है, और हर काम तेजी से होने लगता है।
·         बालों का पतला होना एवं झडऩा।
·         अनिद्रा
·         घबराहट
·         चिड़चिड़ापन
·         अधिक पसीना आना
·         हाथों का काँपना
·         मांसपेशियों में कमजोरी एवं दर्द रहना
·         दिल की धडक़न बढऩा
·         वजन घटन
·         महिलाओं में मासिक धर्म की अनियमितता
·         इसके कारण ओस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) हो जाता है, जिसकी वजह से हड्डी में कैल्शियम तेजी से खत्म होता है।
थायरॉइड ग्रंथि की अल्पसक्रियता (Hypothyrodism)
थायरॉइड की अल्प सक्रियता के कारण हाइपोथायरायडिज्म (Hypothyrodism) हो जाता है। इसके सामान्य लक्षण निम्र प्रकार हैं-
·         अवसाद (Depression)
·         हमेशा थकान बना रहना।
·         धडक़न की धीमी गति।
·         कब्ज
·         चेहरे और आँखों में सूजन।
·         बार-बार भूलना।
·         सर्दी के प्रति अधिक संवेदनशील होना।
·         मेटाबोलिज्म धीमा पडऩे के कारण वजन बढऩा।
·         नाखूनों का पतला होना एवं टूटना।
·         त्वचा में सूखापन आना और खुजली होना।
·         जोड़ों में दर्द और मांसपेशियों में अकडऩ होना।
·         बालों का अधिक झडऩा।
·         कन्फ्यूज रहना, सोचने-समझने में असमर्थ होना।
·         मन में नकारात्मक विचार का आना।
·         मासिक धर्म में अनियमितता होना।
·         खून में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ जाना।
·         महिलाओं में इसके कारण बांझपन आ सकता है।
थायरॉइड के कारण
·         अधिक तनावपूर्ण जीवन जीने से थायरॉइड हार्मोन की सक्रियता पर असर पड़ता है।
·         आहार में आयोडीन की मात्रा कम या ज्यादा होने से थायरॉइड ग्रंथियाँ विशेष रूप से प्रभावित होती हैं।
·         यह रोग अनुवांशिक भी हो सकता है। यदि परिवार किसी सदस्य को यह समस्या रही हो, तो अन्य सदस्यों को भी यह समस्या हो सकती है।
·         महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान थायरॉइड हार्मोन्स में असंतुलन देखा जाता है, क्योंकि इस समय महिलाओं के शरीर में कई हार्मोनल बदलाव आते हैं।
·         भोजन में सोया उत्पादों का अधिक इस्तेमाल करने के कारण।
·         हाशिमोटो रोग थायरॉइड ग्रंथि के किसी एक भाग को निक्रिय बना देता है।
·         थायरॉइड ग्रंथि में सूजन आने के कारण भी थायरॉइड होता है। शुरुआत में इसमें थाइरॉइड हार्मोन का अधिक उत्पादन होता है, और बाद में इसमें कमी आ जाती है। इस कारण हाइपोथायरायडिज्म हो जाता है।
·         आहार में आयोडिन की कमी के कारण हाइपोथायरायडिज्म हो जाता है, इसलिए आयोडिन युक्त नमक का इस्तेमाल करना चाहिए।
·         ग्रेव्स रोग व्यस्क लोगों में हाइपोथायरायडिज्म होने का मुख्य कारण है। इस रोग में शरीर की रोग प्रतिक्षा प्रणाली ऐसे एंटीबायोडिट्स का उत्पादन करने लगती है जो ञ्जस्॥ को बढ़ाती है। यह अनुवांशिक बीमारी है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चलती है।
·         यह बीमारी गण्डमाला या घेंघा रोग के कारण भी हो सकती है।
·         विटामिन बी12 के कारण भी हाइपोथायरायडिज्म हो सकता है।
महिलाओं में थायरॉइड के साइड इफेक्ट्स
थायरॉइड ग्रंथि के महिलाओं के प्रजनन तंत्र में बहुत बड़ी भूमिका निभाती है, इसके निम्र दुष्परिणाम हो सकते हैं-
·         थायरॉइड विकारों के कारण मासिक धर्म असामान्य हो सकता है। थायरॉइड हार्मोन का असामान्य रूप से अधिक या कम होना हल्का या हेवी मासिक धर्म, अनियमित मासिक धर्म, मासिक धर्म की अनुपस्थिति (एमेनोरिया) का कारण बन सकता है।
·         अगर महिला को अंडरएक्टिव थायरॉइड है तो ओवरी में सिस्ट विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है।
·         अंडाशय से अंडा रिलीज होने की प्रक्रिया को ओवुलेशन कहते हैं। थायरॉइड ओवुलेशन की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है या पूर्ण रूप से रोक सकता है।
·         गंभीर हाइपोथायरायडिज्म ओव्यूलेशन के रुकने और स्तन में दूध उत्पादन का कारण बन सकता है।
·         थायरॉइड हार्मोन की कमी गर्भपात, समय से पहले प्रसव, स्टिलबर्थ (प्रसव से पहले या प्रसव के दौरान शिशु की मृत्यु), पोस्टपार्टम हेमरेज (प्रसवोत्तर रक्तस्राव) का कारण भी बन सकता है।
·         गर्भावस्था के दौरान ओवरएक्टिव थायरॉइड से पीडि़त महिला को गंभीर मॉर्निंग सिकनेस का खतरा अधिक होता है।
·         थायरॉइड विकार रजोनिवृत्ति (मेनोपॉज) की शुरुआत का कारण बन सकता है।
·         ओवरएक्टिव थायरॉइड विकार के कुछ लक्षणों को गलती से मेनोपॉज का शुरुआती लक्षण समझा जा सकता है। इसमें शामिल हैं माहवारी की कमी, हॉट फ्लैशेज, नींद की कमी (इंसोम्निया) और मूड में बदलाव।
·         हाइपरथायरायडिज्म का इलाज करना कभी-कभी प्रारंभिक रजोनिवृत्ति के लक्षणों को कम कर सकता है या प्रारंभिक रजोनिवृत्ति को होने से रोक सकता है।
महिलाओं में थायरॉइड का इलाज
·         महिलाओं में थायरॉइड का इलाज रोगी महिला की उम्र और थायरॉइड की गंभीरता पर निर्भर करता है। थायरॉइड के उपचार में एंटी-थायरॉइड दवाइयाँ, रेडियोएक्टिव आयोडीन उपचार, लेवोथायरोक्सिन, बीटा ब्लॉकर्स और सर्जरी आदि शामिल हैं।
·         उपचार के सभी माध्यम असफल हो जाने या थायरॉइड की स्थिति गंभीर हो तो डॉक्टर सर्जरी का सुझाव देते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान उन उत्तकों को आंशिक रूप से बाहर निकाल दिया जाता है जो अधिक हार्मोन का उत्पादन करते हैं।
थायरॉइड रोग का घरेलू उपचार
·         मुलेठी थायरॉइड में अति उपयोगी है। मुलेठी में पाया जाने वाला प्रमुख घटक ट्रीटरपेनोइड ग्लाइसेरीथेनिक एसिड थायरॉइड कैंसर सेल्स को बढऩे से रोकता है।
·         दो चम्मच तुलसी के रस के साथ आधा चम्मच ऐलोवेरा जूस मिलाकर सेवन करने से थायरॉइड खत्म होता है।
·         हरा धनिया थायरॉइड में सर्वाधिक उपयोगी औषधि है। हरे धनिया के प्रयोग से थायरॉइड की बीमारी को ठीक किया जा सकता है। इसे बारीक पीस लें और रोजाना पानी में घोल कर पिएं। इससे थायरॉइड की बीमारी नियंत्रित हो जाती है।
·         थायरॉइड के रोगियों को आयोडीन युक्त आहार का सेवन करना चाहिए। प्याज, लहसुन और टमाटर आदि में आयोडीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
·         नारियल पानी भी थायरॉइड को नियंत्रित करने में बहुत सहायक है। थायरॉइड रोगी को इसका सेवन अवश्य करना चाहिए।
·         हल्दी में करक्यूमिन नामक तत्व पाए जाते हैं, जो थायरॉइड को नियंत्रित करने में सहायक हैं।
·         थायरॉइड की बीमारी से निजात पाने के लिए रोज सुबह खाली पेट लोकी का जूस पिएं। यह गुणकारी औषधि है।
उपयोगी खाद्य पदार्थ
·         आयोडीन युक्त आहार लें।
·         भोजन में ज्यादा से ज्यादा फलों और सब्जियों को शामिल करें।
·         दूध और दही का सेवन ज्यादा करें।
·         प्रोटीन, फाइबर और विटामिन से भरपूर साबुत अनाजों का सेवन करें।
·         अपने आहार में कैल्शियम और विटामिन-डी से युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करें।
·         कम वसा वाला आहार करें।
थायरॉइड में पतंजलि का उपचार
·         पतंजलि ने गहन शोध व आधुनिक वैज्ञानिक मापदण्डों की कसौटी पर परखकर तथा पूरे तथ्यों केसाथ गुणकारी औषधिथायरोग्रिटका निर्माण किया है। थायरॉइड के रोगियों पर इसके चमत्कारी परिणाम देखने को मिले हैं। इसके अतिरिक्त थायरॉइड में मेधावटी, कांचनार गुग्गुल भी लाभप्रद है। विशेष रूप से महिलाओं में नारी कान्ति का उपयोग अत्यंत प्रभावकारी है।
·         अणु तैल का प्रतिमर्श नस्य के रूप में प्रयोग करना लाभकारी है।
·         उज्जायी प्राणायाम थायरॉइड में अत्यंत उपयोगी है।

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