कैसे पहचानें? कपूर असली है या नकली

कैसे पहचानें? कपूर असली है या नकली

राकेश कुमार, मुख्य केन्द्रीय प्रभारी, पतंजलि योग समिति

चरक संहिता में महर्षि चरक ने कपूर के 100 से ज्यादा प्रयोग कपूर के बताये हैं। कपूर के औषधीय गुणों को देखकर कहा गया कि कपूर के धुंऐ में एण्टी बैक्टिरियल, एण्टी फंगल, एण्टी वायरल गुण होते हैं। कपूर जलाने से वातावरण शुद्ध होता है और नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होकर हमारा घर पवित्र बन जाता है। यज्ञ से भी इसी प्रकार पवित्रता आरोग्य का वातावरण बनता है। आयुर्वेद में कहा गया है कि यदि शुद्ध कपूर को यदि शरीर से बांध भी लिया जाये तो त्वचा के स्पर्श मात्र से बहुत सी बीमारियों से बचाव होता है। शुद्ध कपूर यदि कहीं रख लिया जाये तो वहाँ कीड़े, मकोड़े, मच्छर आदि नहीं आते। कपूर केवल खाने में ही नहीं, खुशबू से भी असर करता है। लेकिन दु:खदायी बात यह है कि आज भारत के बाजार में 90 प्रतिशत कपूर नकली है और जो कपूर हम अपने घर पूजा की थाली में जलाते हैं, वह नकली होने के कारण रोग भगाने की अपेक्षा, रोग पैदा करने का काम करता है।
जैसे हिटलर ने यहूदियों का सर्वनाश किया था, यहूदियों को मारने के लिए हिटलर उनको हजारों की संख्या में एक गैस चैम्बर जैसे बंद कमरे में कैद करके जरहरीली गैस छोड़ देता था। उस गैस चैम्बर की जहरीली गैस से हिटलर यहूदियों की हत्या करता था। वैसे ही जब हम नकली कपूर घर में जलाते हैं तो हमारा घर एक गैस चैम्बर की तरह बन जाता है। जिसका जहर हमारी बीमारी दूर करने की जगह हमें बीमार बनाने का काम करता है।

नकली कपूर

आजकल बाजार में मिलने वाले नकली कपूर में एक हानिकारक कैमिकल होता है। जिसको हैक्जामीन या हेक्जा मिथाईलीन भी कहते हैं। यह पूरी तरह से ऐसा जहरीला कैमिकल है। जो गम्भीर साँस के रोग तथा फेफड़ों की बीमारियाँ भी पैदा करता हैं। अमेरिका में हेक्जामीन की फूड एण्ड सेप्टी डाटा शीट कहती है यह हेक्जामीन देखने में पारदर्शी कपूर जैसा होता है, सफेद होता है, क्रिस्टल क्लियर होता है, इसका अपना कोई रंग नहीं होता है। कपूर जैसा बनाने के लिए इसमें नकली गंध मिला दी जाती है जो मैटेरियल शेप्टी डाटा शीट है। वह कहती है कि जब इसके वर्कर इसको आदान-प्रदान या पैकिंग के लिए कार्य भी करते हैं तो दस्तानों को पहनकर इसको हैण्डल करें और अगर गलती से सांस में गलती से भी इसकी फ्यूम चली जाये तो तत्काल मेडिकल ट्रीटमेन्ट करने भी जरूरत पड़ती है। इसको रखते हुए भी एयर टाईट कंटेनर में रखने के लिए निर्देश हैं। यदि गलती से इसको खुला छोड़ दिया जाये, खुले में इसकी सांस ली जाये तो सबसे पहले स्किन में इरिटेशन/खुजली/जलन होती है। आँखों में जलन होती है। सांस लेने में दिक्कत होती है और लगातार हेक्जामीन के या नकली कपूर के सम्पर्क में रहा जाये तो, दमा, अस्थमा जैसे गम्भीर रोग पैदा होते हैं और आगे जाकर फेफड़ों का कैंसर भी बन सकता है। वर्तमान में बाजार में मिलने वाला पूजा के कपूर में 90 प्रतिशत कपूर नकली है।

नकली कपूर की पहचान कैसे करें

पानी के द्वारा
नकली कपूर पानी में डूब जाता है, जबकि शुद्ध कपूर पानी में तैरता रहता है। कपूर के टुकड़े को किसी कटोरी या गिलास में पानी में डालकर हम असली नकली कपूर की पहचान कर सकते हैं।
जलाकर
जलाने पर असली कपूर की लौ या फ्लेम सुन्दर तरीके से लम्बाई में देर तक जलती है, जबकि नकली कपूर कि लौ या फ्लेम ठीक से नहीं जलता और जल्दी बूझ जाता है। शुद्ध या असली कपूर के जलाने पर कोई अवशेष नहीं बचता, अर्थात् पूरी तरह से जल जाता है, जबकि नकली कपूर के जलाने पर सफेद पाउडर या अवशेष बच जाते हैं।

असली कपूर कहाँ से आता है?

भारत में हजारों सालों से परम्परागत रूप से शुद्ध कपूर बनाने का विज्ञान रहा है महर्षि चरक ने, सुश्रुत ने हमारे ऋषियों ने इसकी बनाने की पूरी शास्त्रीय परम्परा लिखी है। शुद्ध कपूर एक पेड़ से प्राप्त होता है जिसका बोटानिकल नेम- सीनामोमम-कैमफोरा तथा इसको अंग्रेजी में कैम्पूर बोलते हैं। संस्कृत में कर्पूर बोलते हैं तथा हिन्दी में कपूर बोलते हैं। इस पेड़ की पत्ते, जड़, छाल को जब प्रोसेस करके डिस्टिल करते हैं तो उससे शुद्ध कपूर प्राप्त होता है। इसी पराम्परागत प्रोसेस से असली कपूर बनता है। कपूर का पेड़ है, भारत के साथ-साथ चीन, ताईवान, जापान, वर्मा और सुमात्रा में भी पाया जाता है। अर्थात् पूरी एशिया में पुराने हजारों सालों से यह कपूर का पेड़ पाया जाता है। लाखों सालों से हमारे पूर्वजों को पता है कि कपूर को कैसे बनाया जाये, इसके कौन-कौन से औषधीय गुण हैं, और कपूर को दवाओं की श्रेणी में आयुर्वेद ने रखा गया है।

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भारत के बाजार में नकली कपूर क्यों?

शुद्ध कपूर की कीमत 1200 से लेकर 1800 रुपये प्रति किलोग्राम होती है। प्राकृतिक तरीके से पौधों से प्राप्त कपूर इससे सस्ता बाजार में उपलब्ध नहीं हो सकता। लेकिन मुनाफा कमाने वाली ज्यादातर कम्पनियाँ हैं वो अपने फायदे के लिए 100 से 150 रुपये का सिन्थेटिक मैटेरियल हेक्जामीन लेकर उसको कपूर की तरह टिक्की की शेप में बनाकर, उस पर कपूर लिखकर पैकिंग कर बेचते हैं।
दु: की बात है कि वर्तमान में भारत भारत सरकार के नियमों में कपूर की गुणवत्ता को लेकर कोई कड़े मापदण्ड नहीं हैं। क्योंकि कपूर तो खाने, कोस्मेटिक और ही दवाओं की श्रेणी में आता। अत: बाजार में सरकारी विभाग द्वारा कपूर के अलग-अलग ब्राण्डों की टेस्टिंग सामान्यत: नहीं की जाती। इसकी शुद्धता के लिये हमें ही विशेष सावधानी रखनी पड़ेगी। जब हम यज्ञ करते हुए उसमें अग्नि प्रज्जवलित करते हैं तो अग्नि प्रज्जवलित करते हुए यज्ञ कुण्ड में यदि हमने नकली कपूर की एक टिक्की भी जलाने से हमारे पूरे घर के वातावरण को जहरीला कर देती है, जैसे गैस चैम्बर में कोई जहरीली गैस छोड़ते हैं, वैसा ही घर का वातावरण बन जाता है। जो यज्ञ पूजा का लाभ मिलना चाहिए वह लाभ नहीं मिल पाता, बल्कि हानि होती है। पूज्य स्वामी जी महाराज को जब पता लगा कि बाजार का अधिकांश कपूर नकली है। तो विकल्प के रूप में पतंजलि आस्था ब्राण्ड पूजा सामग्री कपूर उपलब्ध करवाया है।

कपूर के औषधीय प्रयोग

पूज्य आचार्य जी पूज्य स्वामी जी महाराज कपूर के औषधीय प्रयोगों के बारे में समय-समय पर बताते हैं कि यदि किसी को पुराना और भयंकर डैण्ड्रफ है। ऐसा फंगल इन्फेक्शन जो केमिकल वाले शैम्पू से भी दूर नहीं हो पा रहा, उसमें यदि नारियल के तेल में शुद्ध कपूर मिलाकर उसको जड़ों में लगाने से कुछ दिन इसको प्रयोग करने से भयंकर डैण्ड्रफभी दूर हो जाता है। कपूर को दक्षिण भारत में खाने में भी प्रयोग किया जाता है। जिनको पेट दर्द होता है पेट दर्द में कपूर को अजवाइन के साथ लेने से पेट दर्द दूर होता है। फटी एडिय़ों, मुँह की दुर्गन्ध, दाँत के दर्द, पेट में कीड़े के उपचार आदि के लिए भी कपूर का प्रयोग किया जाता है। शुद्ध असली कपूर को पोटली में बाँधकर बच्चे के हाथ में बाँधा जाता है। कपूर में एण्टीसेप्टिक, एण्टीइन्फ्लेमेन्ट्री, एण्टीबैक्टिरियल और एण्टीवायरल चार प्रकार के गुण पाये जाते हैं। लेकिन बााजार में मिलने वाला 100 से 850 रुपये किलो के कपूर में ऐसे कोई औषधीय गुण नहीं होते।
हमारे पूर्वजों ने कहा है कि कपूर का एक गुण है कि जब उसे जलाते हैं तो हमारे दोनों नथुने खुल जाते हैं। कपूर हमारे नर्वस सिस्टम को री-एक्टिवेट करता है और हमारे तनाव को दूर करता है। कपूर को जलाने से ध्यान करने में आसानी रहती है तथा वातावरण शुद्ध हो जाता है तथा बैक्टिरिया, जीवाणु विषाणु खत्म हो जाते हैं।

सिन्थेटिक कपूर

बाजार का सिन्थेटिक कपूर या पूर्णत: केमिकल वाला कपूर मिलता है उसको जलाते हुए जहर पैदा करता है, जैसे सिन्थेटिक कपूर को 10 दिन पूजा की थाली में कपूर जला दिया तो घर के वातावरण को जहरीला बन जाता है और आजकल शहरों के छोटे-छोटे बन्द घरों में खिडक़ी, दरवाजे नहीं होते हैं और घर के अन्दर की हवा एक्सचेंज नहीं हो पाती। नकली कपूर से जो गैस फैलती है उसी में छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक दिन भर उसी गैस को साँस के माध्यम से लेते हैं। इस नकली कपूर के जलने से पैदा होने वाली हानिकारक गैसों को प्यूरीफाई करने का काम एयर फिल्टर भी नहीं कर पाता है। एयर फिल्टर भी केवल डस्ट पार्टिकल को ही रिफाइन/फिल्टर करता है, जहरीली गैसों को नहीं।

कपूर का विकल्प

प्राकृतिक कपूर का कोई विकल्प नहीं है, अत: अपने घर को शुद्ध बनाने के लिए जहर से बचने के लिए जब भी लें, केवल शुद्ध कपूर लें। यदि शुद्ध कपूर नहीं मिलता है तो आप कपूर के स्थान पर पूजा में देशी घी का दीपक जला दीजिये। तिल के तेल का दीपक जला दीजिए। उससे चाहे लाभ कम मिलें लेकिन नुकसान नहीं होगा। हमें कभी भी खाने-पीने में तथा पूजा की सामग्री में अशुद्ध चीजें प्रयोग नहीं करनी चाहिये। दु:खदायी बात यह है अपने देश में कोई जाँच करने की एजेंसी नहीं है। कोई एफ.डी.. जैसी मजबूत शुद्धता की जाँच एजेंसी नहीं बनी हुई है। अधिकांश मामलों में मिलावट पकड़ी नहीं जाती और यदि कोई मामला पकड़ में आता भी है तो उस पर कोई सख्त कार्यवाही नहीं की जाती है। बाजारू, नकलीहेक्सामिनके कपूर को हाथ लगाने के लिए भी दास्ताने पहनने के लिए भी आवश्यकता है। सोचिए यदि उसके धुंऐ में साँस ली जाये तो कितना नुकसान होगा?

असली कपूर कहाँ से प्राप्त करें

मिलावट के जहर से बचाने के लिए पतंजलि ने 100 प्रतिशत शुद्ध कपूर उपलब्ध करवाया है। क्योंकि पतंजलि का कपूर 100 प्रतिशत शुद्ध है इसलिए प्रारम्भिक तौर पर देखने में बाजार के नकली कपूर से महंगा लगेगा लेकिन यदि गहराई से देखें तो लागत मूल्य पर पूर्णत: प्राकृतिक 100 प्रतिशत शुद्ध कपूर उपलब्ध करवाया जा रहा है। आप अपने नजदीकी किसी भी पतंजलि चिकित्सालय, पतंजलि मेगा स्टोर से प्राप्त कर सकते हैं। कुछ चीजें महंगी नहीं बल्कि सस्ती हैं तो उसका कारण केवल यही है कि वह असली नहीं है।
पतंजलि कपूर महंगा जरूर है लेकिन स्वास्थ्य के लिये हानिकारक नहीं है। कड़े क्वालिटी कन्ट्रोल के मापदण्डों के साथ, इस संकल्प के साथ कि हमें अपने देशवासियों के साथ पूजा की सामग्री में भावनाओं के साथ कोई खिलवाड़ हो उपलब्ध करवाया है। आप जब भी कपूर लें तो असली कपूर ही लें।

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