मानव जाति की जीवन रक्षा में पतंजलि का अभुतपूर्व योगदान

मानव जाति की जीवन रक्षा में पतंजलि का अभुतपूर्व योगदान

कपिल कुमार,

योग संदेश विभाग, पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार

गत वर्ष कोरोना मानव जाति के लिए काल का गाल बनकर सामने आया। चीन के अंधाधुंध विनाशकारी अनुसंधान के परिणाम के रूप में कोरोना वायरस लाखों लोगों का जीवन लील गया। इस पूरे घटनाक्रम में जहाँ पूरा विश्व त्राहिमाम करता नजर आया वहीं भारतीय ऋषि-मुनियों की प्राचीन चिकित्सा पद्धति योग आयुर्वेद ने अपना लोहा मनवाया। पूरा विश्व योगोन्नमुख नजर आया तथा आयुर्वेद की स्वीकार्यता का ग्राफ तेजी से ऊपर की ओर गया। आयुर्वेद के घरेलु नुस्खों से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की मानो होड़ सी लग गई। पहली बार डब्लू.एच.. के द्वारा भी योग आयुर्वेद की पैरवी की गई।
अभी पिछले वर्ष कोरोना की पहली वेव से देश संभला भी नहीं था कि इसकी दूसरी वेव ने दस्तक दे दी है। कोरोना की दूसरी लहर और भी भयावह है। इसमें किसी लक्षण के बिना भी व्यक्ति जाँच में संक्रमित पाया जा रहा है। इसमें कई लक्षण ऐसे देखने में रहे हैं जिन्हें आम आदमी बेहद सामान्य मानकर नजरअंदाज कर रहा है। बेचैनी, पेट में दर्द, दस्त, कमजोरी गर्मी के मौसम में सामान्य सी बात हैं। ये सभी लक्षण कोरोना संक्रमित रोगी में भी देखने में रहे हैं।

कोरोना का नया स्ट्रेन है पहले से ज्यादा खतरनाक

कोरोना का नया स्ट्रेन पहले की तुलना में बहुत खतरनाक है। यह केवल श्वसन प्रणाली को प्रभावित कर रहा है अपितु अलग-अलग मरीजों पर अलग-अलग तरह से विभिन्न लक्षणों के साथ हमला कर रहा है। रोगी में खांसी, सर्दी, श्वास संबंधी लक्षणों के अलावा भी कई लक्षण पाए जा रहे हैं। ऐसे में किसी भी लक्षण को हल्के में नहीं लिया जा सकता है। ऐसे मरीज जिन्हें कोरोना के साथ निमोनिया भी हो रहा है, उन्हें ठीक होने में सामान्य से ज्यादा समय लग रहा है। संक्रमण तथा मृत्यु दर भी पिछले वर्ष से ज्यादा ही है। केंद्र तथा राज्य सरकार फिर से लॉकडाऊन के विषय में सोचने को मजबूर हैं। कई राज्यों में तो सख्ती, आंशिक लॉकडाउन तथा कहीं-कहीं पर पूर्ण लॉकडाउन कर भी दिया गया है। ऐसे में सरकार की गाइडलाइंस का पालन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। वैक्सीनेशन, मास्क का प्रयोग तथा सोशल डिस्टेंसिंग ही सहारा है।

देश में कोरोना के लगातार बढ़ते मामले

देश में कोरोना तेजी के साथ फैल रहा है। महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश में हालात बेहद खराब होते जा रहे हैं। यूपी में वायरस ने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। छत्तीसगढ़ भी कोरोना के प्रकोप से अछूता नहीं रहा। यहाँ भी कोरोना के मरीज लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां एक-एक दिन में 4 हजार से ज्यादा मरीज मिल रहे हैं।

कोरोना से लड़ाई में संसाधनों की किल्लत

कोरोना के बढ़ते मामलों में संसाधनों की किल्लत भी बड़ी वजह है। महाराष्ट्र तथा दिल्ली के अस्पतालों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। देश की राजधानी में सरकार संसाधनों के अभाव में जूझती नजर रही है। ऐसे में अस्पताल, बेड, वेंटीलेटर्स तथा जीवनदायीनी ऑक्सीजन की किल्लत सरकारों के लिए चुनौति है। आम आदमी चिकित्सकीय सुविधाओं के लिए दर-बदर भटक रहा है। ऐसे में केंद्र सरकार तथा राज्य सरकारों के बीच समन्वय बहुत महत्वपूर्ण है।

 कोरोना से लड़ाई में विटामिन-सी का सेवन आवश्यक

वैज्ञानिक अनुसंधान में पाया गया है कि कोरोना में विटामिन-सी अत्यंत लाभकारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आप मास्क, सैनेटाइजर को लेकर थोड़े भी लापरवाह हुए कि इसकी गिरफ्त में चले जाते हैं। जरूरी है कि हम अपनी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करें। हम अपने खाद्य पदार्थों में ऐसी वस्तुओं को शामिल करें जिनमें विटामिन-सी प्रचुर मात्रा में हो। अभी तो गर्मियों का मौसम है। संतरे आसानी से उपलब्ध हैं, उनका सेवन करें। संतरा विटामिन-सी का मुख्य स्रोत है।

गिलोय के प्रयोग से बढ़ाएं रोग प्रतिरोधक क्षमता

किसी भी तरह के बुखार तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में गिलोय अत्यंत लाभकारी औषधि है। कोरोना की पिछली वेव में पतंजलि ने हर घर गिलोय अभियान के तहत नि:शुल्क गिलोय वितरण कार्यक्रम संचालित किया था जिसमें पतंजलि योग समितियों के माध्यम से गिलोय के लाखों पौधों का वितरण किया गया। कोरोना से लड़ाई में जीत तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने में गिलोय का काढ़ा अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहा है। अपनी काढ़ा पीने की आदत को बनाए रखें, यही कोरोना पर विजय का मूलमंत्र है।

वैश्विक आपदा के समय पतंजलि एक बार फिर बना सहारा

पतंजलि ने भी अपने अनुसंधानात्मक प्रयोगों को वैज्ञानिक आधार प्रदान कर कोरोना से लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। पतंजलि द्वारा निर्मित औषधि कोरोनिल को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का सर्टिफिकेशन भी मिल गया है। अब इस औषधि का प्रयोग 158 देशों में कोरोना के उपचार में किया जा रहा है। यह एक ऐतिहासिक घटना है जब ऋषियों के प्राचीन ज्ञान को विज्ञान-सम्मत बनाने में हमनें सफलता हासिल की है। क्योंकि जब तक औषधि की प्रामाणिकता सर्वमान्य नहीं होती तब तक उसका आंकलन सही प्रकार से नहीं किया जाता। विश्वकल्याण के लिए यह दवा अत्यंत लाभकारी साबित हो रही है। आज देश ही नहीं विदेशों में भी कोरोनिल की भारी माँग है।
पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट के सैकड़ों वैज्ञानिकों ने अहर्निश अथक पुरुषार्थ करके पहले क्लिनिकल केस स्टडी तथा बाद में कंट्रोल्ड क्लिनिकल ट्रायल करके, औषधि अनुसंधान (Drug Discovery) के सभी प्रोटोकॉल्स का अनुपालन करते हुए कोरोना के सम्पूर्ण उपचार के लिए सफल औषधिकोरोनिलतथाश्वासारि वटीकी खोज की है। 
पूरे विश्व की अनुसंधान इकाइयाँ इस महामारी की औषधि तलाशने में लगी थी। ऐसी विपरीत परिस्थितियों में इस विश्वव्यापी महामारी की सफल औषधि बनाने का चुनौतिपूर्ण कार्य सर्वप्रथम पतंजलि ने पूर्ण किया। पूज्य आचार्य जी महाराज के दिशानिर्देशन में पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट के सैकड़ों वैज्ञानिकों के अथक पुरुषार्थ से पहले क्लिनिकल केस स्टडी तथा बाद में कंट्रोल्ड क्लिनिकल ट्रायल करके, औषधि अनुसंधान (Drug Discovery) के सभी प्रोटोकॉल्स का अनुपालन करते हुए कोरोना के सम्पूर्ण मैनेजमेंट उपचार के लिए सफल औषधिकोरोनिलतथाश्वासारि वटीकी खोज की गई। यह औषधि कोरोना संक्रमण से बचाव तथा इसके प्रबंधन दोनों में लाभकारी सिद्ध हुई। इन औषधियों में, अश्वगंधा में निहित शक्तिशाली कम्पाउण्ड विथेनॉन, गिलोय के मुख्य कंपोनेंट टिनोकॉर्डिसाइड, तुलसी में पाए जाने वाले स्कूटेलेरिन, तथा दिव्य श्वासारि वटी की अत्यंत प्रभावशाली जड़ी-बूटियों जैसे- काकड़ाशृंगी (Pistacia integerrima), रुदंती (Cressa cretica), अकरकरा (Anacyclus pyrethrum) के साथ-साथ सैकड़ों फाइटोकैमिकल्स या फाइटो मेटाबोलाइट्स तथा अनेक प्रभावशाली खनिजों का वैज्ञानिक सम्मिश्रण है, जो कोरोना के लाक्षणिक (Symptomatic) एवं संस्थानिक (Systemic) चिकित्सा से लेकर रोगी की व्याधिक्षमत्व (Immunity) बढ़ाने में प्रामाणिक वैज्ञानिक रूप से महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
गिलोय, तुलसी, अश्वगंधा तथा अन्य आयुर्वेदिक औषधियों की संयुक्त एवं उचित मात्राओं तथा दिव्य अणु तैल के संयुक्त प्रयोग से कोरोना पॉजिटिव रोगियों को मात्र 3 से 5 दिन में निगेटिव कर पतंजलि ने ऐतिहासिक सफलता हासिल की।
कोरोना की पहली वेव के समय हमने इस दवा का रेंडमाइज्ड प्लेसिबो कंट्रोल्ड क्लिनिकल ट्रायल 100 कोरोना संक्रमित रोगियों पर किया जिसमें 3 दिन में 69 प्रतिशत रोगी कोरोना नेगेटिव पाए गए थे जबकि 7 दिन में ही 100 प्रतिशत रोगी नेगेटिव हो गए थे। तथा एक भी रोगी की मृत्यु नहीं हुई थी। यह कोरोना के प्रबंधन के लिए विश्व में आयुर्वेदिक औषधियों का पहला सफल क्लिनिकल ट्रायल रहा। 100 प्रतिशत रिकवरी तथा 0 प्रतिशत मृत्यु दर प्रमाणित करती है कि कोरोना का प्रबंधन आयुर्वेद में ही संभव है।
जब तक औषधि की प्रामाणिकता सर्वमान्य नहीं होती तब तक उसका आंकलन सही प्रकार से नहीं किया जाता। भविष्य की रूपरेखा को समझाते हुए पतंजलि ने इन औषधियों की साइंटिफिक रिसर्च के सन्दर्भ में इन्टरनेशनल रिसर्च जर्नल्स में रिसर्च पेपर के रूप में प्रकाशित कराया है।
इन औषधियों पर क्लिनिकल केस स्टडी तथा रेंडमाइज्ड प्लेसिबो कंट्रोल्ड क्लिनिकल ट्रायल (RCT) किया गया। जिसके लिए इंस्टीट्यूश्नल एथिक्स कमेटी के अप्रुवल से लेकर CTRI (Clinical Trial Registry of India) के रजिस्ट्रेशन आदि तथा क्लिनिकल कन्ट्रोल ट्रायल की सभी अर्हताएं कोरोनाकाल की पहली वेव के दौरान ही पूर्ण कर ली गईं थी।

आयुर्वेद की पुन: प्रतिष्ठा से ड्रग माफियाओं का पर्दाफाश

भारत ही नहीं अपितु पूरे विश्व में कोरोना के प्रकोप को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया। इसका इतना भय बनाया गया कि मुम्बई दिल्ली सहित देश के कई राज्यों श्रमिकों का पलायन भी बड़ी संख्या में हुआ। दवा कम्पनियों के लिए पैसा कमाने का यह एक सुनहरा अवसर था। उन्होंने तो अरबों की योजनाएँ भी बना ली थी। किन्तु पतंजलि के अनुसंधानात्मक प्रयोगों को मिली अपार सफलता ने इनके मनसूबों पर पानी फेर दिया था। ऐसे में उनमें खलबली मचना स्वाभाविक ही था। किन्तु पतंजलि ने पूरे वैज्ञानिक तथ्यों के साथ कोरोनिल श्वासारि को आम नागरिकों को न्यून मूल्य पर सुलभ कराया।
अब तो कोरोनिल किट को डब्लू.एच.. से भी स्वीकार्यता मिल गयी है। इस पर भी दवा माफियाओं ने कुचक्र रचने का प्रयास किया तथा दुष्प्रचार करने का कोई अवसर नहीं छोड़ा। पतंजलि ने आयुष मंत्रालय, भारत सरकार को अपने क्लीनिकल कंट्रोल्ड ट्रायल की सभी डाक्यूमेंट्स उपलब्ध करा दिए हैं। डब्लू.एच.., आयुष मंत्रालय तथा पतंजलि में अब इस विषय पर कोई भी असहमति नहीं है।
पतंजलि के लगभग 500 से अधिक वरिष्ठ वैज्ञानिक पतंजलि रिसर्च सेन्टर योग एवं आयुर्वेद के विकास के अनुसंधान में संलग्न हैं। पतंजलि ने इस सेवा में 10 हजार करोड़ से ज्यादा की सेवा राष्ट्र के नाम समर्पित की है।
पूज्य स्वामी जी महाराज पूज्य आचार्य जी महाराज ने हमेशा कहा है कि हम भारत की ऋषि परम्परा के प्रतिनिधि हैं। हमने देशहित को सर्वोपरि माना है। सेवाधर्म, मानवधर्म एवं राष्ट्रधर्म ही हमारा परम धर्म है। धन अर्जित करने के लिए कभी झूठे प्रपंच पाखण्ड का सहारा नहीं लिया। लाभांश को सेवाकार्यों में लगाकर देशवासियों को जीने की नई राह दिखाई है।
कुछ दवा माफिया, बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ तथा देश विरोधी ताकतें हमें बदनाम करने की नाकाम कोशिशें करते रहे हैं। किन्तु हमारे संकल्प बल के सामने उन्हें सदा हार का सामना करना पड़ा है। जब-जब पतंजलि पर आक्षेप लगाकर दबाने का प्रयास किया गया देश की जनता की अपार स्वीकार्यता ने उन्हें मुहतोड़ जवाब दिया।
पूज्य स्वामी जी महाराज ने देश की जनता से आह्वान किया है कि वे कोरोनिल किट को लेकर ज्यादा हाहाकार मचाएँ। हमारे पास पर्याप्त मात्रा में कोरोनिल किट है। कोरोना के इस महासंकट में विदेशी कंपनियों की लूट से बचें और श्रद्धेय आचार्य जी के पुरुषार्थ से निर्मित स्वेदशी-एपऑर्डर-मीके माध्यम से घर बैठे कोरोनिल किट पतंजलि की सभी प्रामाणिक औषधियों को मंगा सकते हैं।

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