पतंजलि की नई उड़ान
हमारी संस्कृति व परम्परायें कभी यह नहीं कहती कि सारी दुनिया मेरे लिये है, जबकि हम यह कहते हैं कि हम संसार के लिए हैं और इस संसार को क्या दे सकते हैं? इस भाव को पूर्ण करने के लिए सेवा संकल्प के प्रण को हृदय में धारण करके हमें अपना कर्म करना है। यह समय इतिहास गढऩे का है, पूज्य स्वामी जी के नेतृत्व में एक नया इतिहास बन रहा है। जब इतिहास बनता है तब कुछ लोग कंधे से कंधा मिलाकर साथ में खड़े होते हैं, उन सभी को इतिहास याद रखता है लेकिन कुछ इस इतिहास में दर्शक मात्र बनकर रह जाते हैं। उनकी आने वाली पीढिय़ां यह जरूर कहती हैं कि उस कालखण्ड में हमारे कुल, वंश व खानदान के लोग भी हुआ करते थे। तीसरे वह लोग हैं जो इस इतिहासिक परिवर्तन को हजम नहीं कर पाते, अज्ञानता से या स्वार्थ से वह लोग कभी-कभी उस मार्ग में विघ्न बनने का कार्य करते हैं। विध्नकर्ता भी कभी-कभी इतिहास बनने में गति देने का कही कार्य करते हैं, इसलिए उनकी भी जीवन में बहुत उपयोगिता है। बस हमको यह तय करना है कि हमारी भूमिका क्या रहेगी, किस रूप को हमें अपना योगदान देना है? हमें अपनी मातृभूमि के लिए अपना क्या योगदान देना है? एक समय ऐसा भी था, जब देश स्वतंत्र नहीं था। उस समय देश के लिए मरने-मिटने की आवश्यकता थी। प्राणों की आहूति देने की आवश्यकता थी, पर आज देश को आवश्यकता है देश के लिए जीने की, संस्कृति व परम्परा को पुन: स्थापित करने की।
संकल्प से सृजन की उड़ान
जब हम साधन विहीन थे, तब भी यह यात्रा सृजन की ओर लगातार बढ़ रही थी। यह संस्था साधन से सृजित नहीं है अपितु यह संस्थान संकल्प से सृजित स्थान है। इसलिए यदि हमें बड़े लक्ष्य की प्राप्ति करनी है तो सभी को साथ चलने की आवश्यकता है। सभी को एक भाव, विचार से साथ रहना होगा। अत: जो लक्ष्य, भाव, विचार हमारे हैं उन्ही विचारों को श्रद्धेय स्वामी रामदेव जी के विचारों से मिलाना होगा और उनके लक्ष्य को अपना लक्ष्य बनाने की आवश्यकता है। यदि किसी लक्ष्य में कई प्रकार के विचार बन जाते हैं तो वह लक्ष्य ही नहीं रह जाता। यदि आपको कोई बड़ा लक्ष्य हासिल करना है तो हमें अपने विचार, स्वभाव, व्यवहार, हमारे सभी कार्य उस लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए लगा देने चाहिए, तो वह लक्ष्य व्यापकता के साथ-साथ प्रमाणिक होकर पूर्ण होता है। इसी लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए आज सभी देशवासियों की आवश्यकता है। जब पूज्य स्वामी जी और हम तप, साधना में लीन थे तब हमने विचार किया कि इस देश को, इस समाज को विदेशी षड्यंत्रों से शिक्षा, चिकित्सा को दैनिक उपयोग में प्रयोग होने वाले उत्पादो पर जो हमारी पराश्रिता है, उसको समाप्त करने के लिए हमें अवश्य कुछ करना है। ये संकल्प राष्ट्र के उत्थान के लिए हमने लिया।
जब इस विचार को मूर्त रुप देने की बात हुई, तो हमारे पास कोई विकल्प ही नहीं था। इसलिए हम हरिद्वार चले आये पूज्य शंकरदेव जी के आश्रम में शरण ली। यहाँ पर सन 1995 से हमने अपने संकल्प की यात्रा का प्रारम्भ किया। यही वह वर्ष था जब हमने दिव्य येाग मंदिर ट्रस्ट की स्थापना की, जोकि बीज रूप में था। तब यह किसी को दिखता नहीं था। आज श्रद्धेय स्वामी जी के तप का ही परिणाम है, जो यह बीज आज वृक्ष बनकर सब को शीतल छाया दे रहा है और इसका फल समाज व संसार के लिए है। हमने कभी साधन को साध्य नहीं बनाया।
पतंजलि स्वदेशी की अवधारणा
भारतवर्ष में कितने महापुरुष हुए, जिन्होंने स्वदेशी का विचार रखा। कितने आंदोलन हुए, विदेशी वस्तुओं के खिलाफ कितने लोगों ने इसमें अपना योगदान दिया और काम किया मगर दैनिक उपयोग की जरूरत पडऩे वाली वस्तुओं के लिए एक साधु ने स्वदेशी वस्तुओं का वह विकल्प खड़ा किया। आज बड़े-बड़े विदेशी घराने धराशायी हो गये। राष्ट्र निर्माण में पतंजलि ने अपनी आहूति दी। आज पतंजलि के खिलाफ रोज षड्यंत्र रचे जाते हैं। वह आम घटनाओं में नहीं आते, आज विदेशी ताकतें पतंजलि की ज्वाला को पानी से बुझाना चाहती हैं, उसके प्रकाश को छुपाना चाहती हैं, मगर ऐसा होना अब संभव नहीं है। यह स्वदेशी की अवधारणा बन गई है। पूज्य स्वामी जी ने इस देश के हर घर को योग सिखाया, हर घर में पूज्य स्वामी जी की पहुँच हुई, जिस कारण पतंजलि के स्वदेशी उत्पाद हर घर की पहली पंसद बन पाये, क्योंकि हर भारतवासी ने पूज्य स्वामी जी पर अपना विश्वास जताया है। इसी कारण पतंजलि के उत्पादों को भी आज भारत ही नहीं विश्व के हर देश अपना रहे हैं। उसके पीछे उसकी विश्वसनीयता है। आज दुनिया के लिए स्वदेशी का मॉडल पतंजलि है। पतंजलि के माध्यम से प्रत्यक्ष रूप से लगभग एक लाख और परोक्ष रूप से लगभग एक करोड़ से ज्यादा परिवारों को जीवन निर्वहन का साधन मिल रहा है।
वेद, आयुर्वेद की शरण में विदेशी कंपनी
जिन विदेशी कम्पनियों ने हमारी परम्पराओं को, हमारी विद्याओं, हमारी जड़ी-बूटियों को, हमारे आयुर्वेद का खूब उपहास उड़ाया और हमारे देश के सीधे सच्चे जनमानस के मन में जहर घोलने का काम किया और उन्हें प्राकृतिक चीजों से दूर कर दिया। इस देश के भोले-भाले लोगों को केमिकल के बीच में लाकर खड़ा कर दिया है। जिन विदेशी कंपनी के टूथपेस्ट को आप थोड़े दिन पहले किया करते थे, वह पशुओं की हड्डियों के चूरे के कारण आपको मांसहारी बना रहे थे। विकल्प न होने के कारण देश उस स्थिति में जीने को मजबूर था। तब पतंजलि वह पहला संस्थान था जिसने जड़ी-बूटियों के माध्यम से टूथपेस्ट बनाकर खड़ा कर दिया, ताकि आपके दांतों को सही में सुरक्षित रखा जा सके। जब लोगों को इस टूथपेस्ट को करने से लाभ प्राप्त हुआ तो तब इन विदेशी कम्पनियों की जड़ें हिल गईं। तब इन विदेशी कम्पनियों वालों को भी कहना पड़ा कि ‘आपके टूथपेस्ट में नमक है, नीम है। यही वह विदेशी कम्पनियां थी जो कल तक इसी नमक, नीम का उपहास उड़ाया करती थी। आज जिन विदेशी कम्पनियों को वेद का क,ख,ग नहीं पता, वह अपने उत्पाद का नाम वेदशक्ति रखते हैं। यह विदेशी कम्पनियां सिर्फ पूज्य स्वामी जी के संकल्प की शक्ति के कारण इतनी मजबूर हो गयी कि आज भारत को दोनों हाथों से लूट नहीं पा रही हैं। देश का धन अब देश के विकास में लग रहा है। भारत की नई पीढिय़ों को इन विदेशी उत्पादों से होने वाले कैंसर के वायरस से बचाया है। यह सब देन पतंजलि के आयुर्वेदिक उत्पादों की बदौलत है। आज से पहले यह विदेशी कंपनी अपने उत्पादों के मूल्य को लेकर कभी भी भयभीत नहीं थी मगर पतंजलि के उत्पादों के कारण, उसकी गुणवत्ता के कारण व पतंजलि के उत्पादों का मूल्य कम होने के कारण, इन विदेशी कंपनियों को अपने उत्पादों के मूल्यों को कम करना पड़ रहा है। आज से पहले इन विदेशी कम्पनियों के उत्पादों का भारत पर एकाधिकार था। यह अपनी मनमानी करते थे, अपने भाव पर चीजों को बेचते थे। उन्हें कोई टोकने वाला नहीं था। पतंजलि ही वह अकेली संस्था थी जिसने अपनी गुणवत्ता व अपने मूल्यों से इन विदेशी कंपनी के विस्तार का रोका।
आज आयुर्वेदिक औषधि बनाने के लिए सबसे बड़ी व प्रमाणिक संस्था के रूप में दिव्य फार्मेसी है। इसमेंं किसी भी प्रकार का कोई सरकारी सहयोग नहीं लिया गया है। आज पतंजलि के द्वारा निर्मित आयुर्वेदिक दवाईयां सबसे ज्यादा विश्वसनीय व किफायती हैं।
टॉप रिसर्च में पतंजलि
आज वल्र्ड के टॉप रिसर्च में भी पतंजलि की गणना शुरू हो गयी है। आज यदि विश्व आयुर्वेद को स्वीकार कर रहा है तो उसमें भी पूज्य स्वामी जी का तप व पुरुषार्थ हैं। आज पूरे देश में एग्रीकल्चर में जो डिजिटलाईजेशन का काम हो रहा है और जो भी पी.एम.फंड के माध्यम से जो किसानों को धन दिया जा रहा है। इस पूरे प्रोजेक्ट के पीछे जो संस्था कार्य कर रही है वह पतंजलि हैं। आज पतंजलि जैविक कृषि पर कार्य कर रही है जो भी एस.ओ.पी. व स्टैंडर्ड बन रहे हैं और जो भी मॉडल बन रहे हैं। वह पतंजलि के द्वारा ही किये जा रहे हैं। आज पतंजलि देशहित के लिए एक दिशा में नहीं अपितु कई दिशाओं में कार्य कर रही है परन्तु इन विभिन्न क्षेत्रों में भी पतंजलि किसी कंपनी की लाईन के पीछे नहीं खड़ा बल्कि कई कम्पनियां पतंजलि के पीछे खड़ी है।
गौ-संरक्षण, संवर्धन एवं अनुसंधान
पतंजलि गौ-संरक्षण, संवर्धन तथा देसी गाय को बढ़ावा देने के लिए पूरे देश में अभियान चला रही है। यह सब करने की ताकत पतंजलि के अन्दर ही है, अन्य किसी संस्था में नहीं। आप सभी इसे एक लाईन से समझता चाहते हैं तो सिर्फ इतना ही है कि पतंजलि वह कार्य कर रही है जिसे भारत का हर नागरिक होते हुए देखना चाहता था। यह सपना पूज्य स्वामी जी को बैचेन रखता है इसलिए पतंजलि के लिए राष्ट्र उत्थान सर्वोपरि है। राष्ट्र का हर व्यक्ति पतंजलि का सदस्य है, उसका परिवार है। पतंजलि भविष्य में जो भी कार्य करेगी वह राष्ट्र के नागरिकों को ध्यान में रखकर ही करेगी। पतंजलि का आंदोलन रूकने वाला नहीं है, क्योंकि पतंजलि को नई उड़ान के लिए उडऩा है।


