पतंजलि की नई उड़ान
राष्ट्र निर्माण की पतंजलि की आगामी कार्य योजना
योग -आयुर्वेद एवं स्वदेशी के साथ-साथ पतंजलि देश को आर्थिक गुलामी के साथ, शिक्षा-चिकित्सा की गुलामी से मुक्ति दिलाने का कार्य कर रहा है। इस भारत को दोबारा से परम वैभवशाली बनाना हमारा संकल्प है।
पतंजलि ने अनुसंधान के क्षेत्र में जो कार्य किये हैं, जिसमें वैदिक ज्ञान व आधुनिक अनुसंधान के संगम से नये कीर्तिमान गढ़े हैं। उसी का परिणाम है कि आज विश्व के टॉप के २त्न रिसर्च में श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी के नाम का होना, जो पतंजलि के लिए बड़े गौरव की बात है। श्रद्धेय आचार्य जी ने हमारी सांस्कृतिक, सनातन विरासत के गौरव को व दूसरी तरफ नूतन अनुसंधान के समागम से नवीन अनुसंधान किये हैं जिससे पतंजलि का गौरव गुंजायमान हो रहा है।
पूज्य स्वामी जी की रणनीति से दुनिया आशान्वित होने को मजबूर
आज भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री जी ने भी उद्घोष किया कि अब हमें गुलामी की निशानियों को भी मिटाना है और अपने सांस्कृतिक विरासत के गौरव को आगे बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि यदि इस दिशा में कोई संस्थान काम कर रहा है, वह है पतंजलि।
आज ब्रिटेन सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है, आर्थिक तबाही के दौर से। पूरे यूरोप में मंदी का दौर है, अमेरिका नस्लवाद, घरेलू आतंकवाद, गृह-युद्ध के दौर से गुजर रहा है। पूरे देश मे एक आन्तरिक संघर्ष चल रहा है। भारत में यदि कोरोना काल में पूज्य स्वामी जी और इण्डिया टी.वी. न होता, तो लाखों-करोड़ों लोगों की लाशें बिछ जाती। पूज्य स्वामी रामदेव जी आने वाले 20-25, 50 वर्षों की योजनाओं की बात करते हैं, तो लोगों को लगता है स्वामी रामदेव जी सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, आध्यात्मिक के क्षेत्र मे क्या करने वाले हैं? उसकी रणनीति का खुलासा और आगे की कार्य योजनाओं को दुनियां के सामने रखें, तो लोग आश्ंकित हो जाते हैं कि अब क्या होगा? अब किसकी बारी है? अब क्या नई तैयारी है? पूज्य स्वामी जी कहते हैं कि हम किसी से प्रतिशोध लेने के लिए काम नहीं कर रहे हैं बल्कि इस देश की सनातन संस्कृति को विश्व संस्कृति के रूप में प्रतिष्ठापित करने के लिए सेवा के आयाम गढ़ रहे हैं, इसके साथ-साथ मैं एक उड़ान भर रहा हूँ कि कैसे पूरा विश्व योग, अध्यात्म के आशय से अपनी समस्याओं का समाधान खोजे? सनातन संस्कृति में ही वैश्विक समस्याओं का समाधान है। जिस तरह पूरी दुनिया नशा, वासना, हिंसा, क्रूरता, शोषण, अन्याय, युद्धों के दौर से गुजर रही है उससे पूरी दुनिया में एक बड़ा संकट है कि ये दुनिया कैसे सुरक्षित रहेगी? आज बहुत तरह के प्रश्न हैं। यदि हम एक आरोग्य की बात लें, तो लाईफ स्टाईल डिजीज़, क्रोरोनिक डिजीज़, आज हर दूसरा आदमी मोटा है या पतला है, कोई ओवर वेट है, कोई अंडर वेट है किसी को बी.पी. की, किसी को शुगर की और किसी को कैंसर, आज कैंसर के कारण कई घर-परिवार बर्बाद हो गये, लाखों-करोड़ों रुपये खर्च करके भी लोगों को आरोग्य प्र्राप्त नहीं हो पा रहा है। आज हर 4 आदमियों को फैटी लीवर की समस्या है। भारत में 30 से 40 करोड़ लोगों को फैटी लीवर की समस्या है जो कभी भी लिवर सिरोसिस की गंम्भीर समस्या में बदल सकता है और इस बीमारी को सही करवाने के लिए जायें, तो 40 लाख से 1 करोड़ रुपये तक खर्चा आता है। जिनको हैपेटाइटिस की बीमारी है उनके वायरस को कंट्रोल करने में ही 3 से 5 करोड़ रुपये का खर्च आता है। कहाँ एक व्यक्ति अपने स्वास्थ्य पर करोड़ो रुपये खर्च कर पायेगा? कहाँ लीवर का ट्रांसप्लांट करवायेगा और कहाँ पर हार्ट ट्रासप्लांट करवायेगा? कैसे किडनी ट्रांसप्लांट करवायेगा, कहाँ लग्ंस ट्रांसप्लांट करवायेगा? आज भी देश के अन्दर बहुत बुरे हालात हैं।
योग से मानव जाति के स्वास्थ्य का समाधान
पतंजलि भारत देश ही नहीं, पूरे विश्व को स्वस्थ बनाने के संकल्प के साथ काम कर रहा है। इस पतंजलि के संकल्प को पूरा करने में इण्डिय़ा टी.वी. भी एक बहुत बड़ी भूमिका निभा रहा है। आज कितने लोग रोगमुक्त हुये हैं, कितने लोग नशामुक्त हुये हैं, कितने लोग निराशा, कुण्ठाओं से मुक्त हुये हैं? सिर्फ योग से ही मानवजाति के स्वास्थ्य को लेकर समाधान का रास्ता अग्रसर किया जा सकता है। आज जो योग करेगा, वह रोगमुक्त रहेगा। जो योग करता है, वह नशा व हिंसा से भी दूर रहता है। वह व्यक्ति युद्ध व घृणा भी किसी से नहीं करता। आज युद्धों का दौर है, नशे का दौर है, वासनाओं का दौर है। चारों तरफ अन्याय, घृणा फैली हुई है। आखिर ये मिटेगी कैसे? यदि एक योग लोगों के जीवन में समाहित हो जाये, तो जीवन बदल जाता है। इस कार्य को पतंजलि पूर्ण संकल्प के साथ कर रही है। पतंजलि केवल इन कार्यों को करके रूक नहीं गया है बल्कि पतंजलि ने योग मूलक उद्योगों की स्थापना की है। आज भारत में आत्मनिर्भरता का पर्याय यदि कोई है तो वह पतंजलि है। जिस तरह से आर्थिक गुलामी के दौर से देश गुजर रहा था, शिक्षा की गुलामी, चिकित्सा की गुलामी, संस्कृति वैचारिक गुलामी से देश गुजर रहा था। इस देश को सभी प्रकार की आर्थिक, शिक्षा, चिकित्सा की गुलामी से बाहर निकालकर आत्मगौरव के साथ जीने की दिशा पतंजलि दे रहा है।
करोड़ों लोगों को पतंजलि ने आरोग्य जीवन दिया। जीवन जीने की नई दिशा दी, यह तो एक पक्ष है। मगर दूसरे पक्ष में हमने करोड़ों लोगों को आत्म सम्मान, स्वाभिमान के साथ जीना सिखाया। लाखों लोगों को रोजगार प्रत्यक्ष रुप से दिया, करोड़ों लोगों को आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी। आज 5 लाख लोगों को पतंजलि से रोजगार मिलता है और आने वाले समय में 5 लाख लोगों को पतंजलि रोजगार देने जा रहा है।
आज पतंजलि 50 करोड़ घर तक अपनी पहुँच रखता है। यह आजाद भारत में पहला स्वदेशी उत्पाद है, जो इतने घरों में अपनी पहुँच रखता है। आने वाले समय में 100 करोड़ लोगों के घर तक पहुंचने का पतंजलि का लक्ष्य है। इसके साथ ही 100 देशों तक भी हम पहुँच कर दिखायेंगे। हम ‘वोकल फॉर लोकल और लोकल को ग्लोबल’ कैसे बनाया जाता है? यह पतंजलि करके दिखायेगा। सम्पूर्ण राष्ट्र में एक जज्बा जगाने का काम पतंजलि करने जा रहा है।
पतंजलि भविष्य में बहुत बड़े साम्राज्य खड़े करने के प्रति संकल्पित है। अपने पुरुषार्थ से पूर्ण विवेक , पूर्ण निष्ठा के साथ काम, कमजोर लोग जीवन में कभी कोई बड़ा कार्य नहीं कर सकते हैं। ऐसे लोग सिर्फ भीड़ का हिस्सा हो सकते हैं। पतंजलि भारत के हर नागरिक को जगाने का कार्य करेगा ताकि भारत के हर नागरिक इतिहास गढऩे की क्षमता रखें। यह भाव जब व्यक्ति में आयेगा, तभी यह भारत आगे बढ़ेगा।
पतंजलि शिक्षा बोर्ड से जुड़ेंगे 10 करोड़ से ज्यादा विद्यार्थी
पतंजलि शिक्षा बोर्ड गुरुकुलम् व आचार्यकुलम् को ही नहीं जोड़ेगा अपितु भारत के एक लाख विद्यालय को भी जोडऩे का कार्य पतंजलि करेगा, इसके साथ-साथ 10 करोड़ से ज्यादा विद्यार्थियों को राष्ट्र के निर्माण के लिए खड़ा करेंगे। यहां पर हम सभी विद्यार्थियों को वैदिक शिक्षा के साथ आधुनिक शिक्षा भी देंगे, जहाँ सनातन व नूतनता का संगम होगा। इस ज्ञान से उनके भीतर आत्मगौरव का भाव उत्पन्न होगा, जिससे नेतृत्व करने की क्षमता होगी।
आने वाले 15- 20 वर्षों के बाद इस देश का कोई नेतृत्व करेगा, वो पतंजलि से शिक्षा प्राप्त ज्ञानवान बालक होंगे। चाहे वो कार्य पालिका का क्षेत्र हो, न्यायपालिका का क्षेत्र हो या विधायिका का क्षेत्र हो, साथ ही देश के साथ-साथ पूरी दुनिया में भारत के युवाओं का नेतृत्व होगा। आज ऋषि सूनक इसका एक उदाहरण है, ऐसा शौर्य, ऐसा आत्म-विश्वास सिर्फ शिक्षा से ही आ सकता है।
पतंजलि एक लाख से ज्यादा क्षमता वाला ग्लोबल पतंजलि विश्वविद्यालय, जोकि 2 से 3 हजार एकड़ में बनेगा। इस सम्पूर्ण प्रोजेक्ट की लागत 25 से 30 हजार करोड़ की होगी। इसका उद्देश्य भारत की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने का है, जिससे देश के साथ पूरी दुनिया को शिक्षा की नई दिशा मिले, यह सब कुछ संभव है। भारतीय शिक्षा बोर्ड, पतंजलि विश्वविद्यालय और चिकित्सा को नई दिशा देने का कार्य पतंजलि वैलनेस के माध्यम से होगा। आज डब्लू.एच.ओ. पूरी दुनिया को रोगमुक्त करने में असफल रहा है। वो केवल ड्रग्स माफियाओं का गुलाम बनकर रह गया है। आज सारी दुनिया को बताया जा रहा है कि कोई बीमारी सही नहीं हो सकती, बी.पी. का निदान नहीं है, जबकि आयुर्वेद इन सभी बीमारियों का स्थाई समाधान करने में सफल रहा है। उसी प्रकार शिक्षा के क्षेत्र में भी अब क्रान्तिकारी बदलाव आने वाले हैं। जब पतंजलि विश्वविद्यालय में 200 से अधिक बच्चे यहाँ पर आकर वेद मंत्रो के पाठ करेंगे, भगवद् गीता का पाठ करेंगे एवं योग करेंगे, तब होगी सनातन विश्व विजय की यात्रा। आज सनातनी संस्कृति के नाम पर देश में जो तनातनी का माहौल है, वह इस देश के विकास के लिए सही नहीं है। आज भारत में कुछ लोग मजहबी आंतकवाद फैला रहे हैं, इन सभी आंतकवाद का समाधान है आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, राष्ट्रवाद और मानवतावाद, यह है पतंजलि का सपना।
पतंजलि आज ऐसे सपने के साथ काम कर रही है, जहाँ पूरा विश्व एक परिवार की तरह जुड़ जाये। सभी प्रकार के गम, कुण्ठाओं से बाहर निकालना ही हमारा उद्देश्य है। आज राजनीतिक रूप में जो साहस चाहिए, वह साहस आज की सरकार में है। सत्ता, सनातनी संस्कृति, वैश्विक प्रतिष्ठा के अनुकूल कभी भी सनातनी संस्कृति का गौरव पूरी तरह से प्रतिष्ठापित नहीं कर सकतीं। सत्ताएं उसको गौरव देने के लिए सामूहिक रूप से अवसरों पर आगे आ सकती हैं। भारत की आजादी के 75 वर्षों के इतिहास में पहली बार प्रधानमंत्री रहते हुये किसी ने गंगा में स्नान किया है। भारत ने पहली बार ऐसा प्रधानमंत्री देखा है जो माथे पर तिलक लगाता हो और अपना माथा शिव के आगे नवाता हो। यह सनातन का गौरवकाल है।
पतंजलि का सपना हर परिवार हो योगमय
यदि आज भारत का एक-एक व्यक्ति सोच ले कि मुझे अपने गांव को योगमय बनाना है। मैं आज एक-एक परिवार को योगमय देखना चाहता हूँ तभी संम्पूर्ण भारत योगमय होगा। पूज्य स्वामी रामदेव जी का सबसे बड़ा सपना है जो योग करेगा, वह तेजस्वी होगा और जो योग करेगा वह निरोगी रहेगा।
आज पतंजलि का सपना है कि विश्व की आधे से ज्यादा जनसंख्या योग करे। आज संसार संख्याओं के गणित से मूल्यांकन करता है। उन मजहबी आतंकवाद फैलाने वालों के सपने धरे के धरे रह जायेंगे, जो इस्लाम को विश्व पर थोपना चाहते हैं, क्योंकि सनातनियों ने कभी किसी चीज को किसी पर नहीं थोपा, सनातनी सदैव सत्य की राह पर चलता है, न्याय के मार्ग पर आगे बढ़ता है। सत्य और त्याग को ही हमारे यहाँ धर्म कहा जाता है। भारत का जो बल है, वह योग बल है। भारत की जो ताकत है उसके मूल में अध्यात्म है। जिसे पूरी दुनिया सोफ्ट पॉवर के नाम से जानती है। आज भले ही भारत का रुपया गिर रहा हो, क्योंकि कुछ देश की ताकत के कारण पूरा विश्व डॅालर में व्यापार कर रहा है। आज हमें संकल्प लेने की आवश्यकता है कि हम दुनिया के अन्य देशों में भी रुपये के साथ व्यापार करेंगे, तभी भारत के रुपये की ताकत बढ़ेगी। जब ताकत बढेगी, तो भारत के पड़ोसी देश भी भारत की शरण में आने में देर नहीं लगायेंगे। महाराज रणजीत सिंह के शासनकाल में भारत का राज अफगानिस्तान तक था। आज यह सब संभव हो जाये तो इसमें आश्चर्यचकित होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह सब कुछ संभव होगा अध्यात्म की ताकत के आगे।
भारत को अब 140 करोड़ लोगों के हाथों को सृजन के कार्य में लगाकर इसे आर्थिक दृष्टि से ताकतवर बनाना है जिससे भारत का रुपया डॉलर और पौंड से ज्यादा हो जाये। तब भारत अखण्ड भारत बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
पतंजलि ने सपनों को साकार करने का पुरुषार्थ किया
पतंजलि सपना दिखाने वाली संस्था नहीं बल्कि पतंजलि ने सपनों को धरती पर साकार करके दिखाने वाली संस्था है। जिन सपनों को हमारे पूर्वजों ने देखा था उन सपनों को भी पतंजलि साकार करने का पुरुषार्थ कर रही है। यदि आप में प्रतिभा है तो आप पूरी दुनिया में नये झण्ड़े गाड़ सकते हैं, नये-नये साम्राज्य गढ़ सकते हैं। हमें समर्थ भारत बनाने की आवश्यकता है। योग का बल वो हमारी संस्कृति की मूल आत्मा है। इसी संकल्पना के साथ हमें आगे बढऩा है। यही सब कार्य पतंजलि कर रही है। 30 सालों में पतंजलि ने इसी आधारशिला को खड़ा किया है। हमें आगे राष्ट्र निर्माण व युग निर्माण का भवन खड़ा करना है। साधु वो शब्द है जो जंगल में भी मंगल बना सकता है। साधु सबका मंगल ही करता है। विश्व मंगल में ही उसकी धारणा होती है। महात्मा गांधी भारत दर्शन के लिए यात्रा किया करते थे, उससे भारत का बोध होता था। तभी पता चलता है कि भारत को कैसे उन्नत बनाना है।
भारत का उद्धार करने के लिए अब कोई नया अवतार नहीं होगा कोई महात्मा, कोई देवात्मा, कोई महापुरुष नहीं होगा। अब भारत का उद्धार आपको, हमको एवं सबको एक होकर करने की आवश्यकता है।
जो लोग कम्फर्ड जीवन को महत्ता देते हैं वह लोग कभी भी दुनिया में बड़े कार्य नहीं कर सकते। इसलिए पतंजलि आह्वान करता है उन सभी 20-25 करोड़ लोगों का, जो रिटायर होकर घर बैठे हैं, सेवा निर्मित बैठे हैं, वो राष्ट्र धर्म के लिए आगे बढ़े। अपनी आहूति राष्ट्र के निर्माण में दें। भारत भूमि की साधना करने के लिए मेरा जन्म हुआ है, इस भाव से कार्य करें। भारत व भारतवासी किसी को डराने की भावना नहीं रखते, उसी प्रकार किसी से डरने की भावना भी भारतवासियों में नहीं हैं।
उसी प्रकार भारत के इतिहास में पढ़ाया जाता है कि भारत 200 साल से गुलाम रहा है जबकि हकीकत यह है कि भारत षडय़ंत्रों का शिकार हुआ था। अंग्रेजो ने भारत के राजाओं के साथ संधि की हुई थी इसलिए गुलामी की बात तो कहीं से सही भी नहीं। भारत कभी भी पूर्ण गुलाम नहीं रहा। भारत सदैव से संघर्षरत रहा है इतिहास में जब बच्चों को गुलामी का पाठ पढ़ाया जाता है उससे बच्चों के मन में आत्मग्लानी की भावना आती है। यह भी सच है उस समय की पीढ़ी जातीय उन्माद में उलझ गई थी, जिस कारण अंग्रेजो ने अत्याचार कर लिया मगर आज हमें नये भारत को, नये युग को गढऩे की आवश्यकता हैं। विश्व की चिकित्सा को नई दिशा देनी है मेडिकल आतंकवाद से मानव जगत को बचाना ही हमारा उद्देश्य है। जब इस देश का संन्यासी और देश का शासक जब अपरिग्रह से जीयेगा, तब राष्ट्र वैभव को प्राप्त होगा।


