‘तपस्या, सेवा व साधना का अभियान‘पतंजलि योगपीठ संस्थान’जानिए स्वयं पूज्य आचार्य बालकृष्ण जी महाराज के श्रीमुख से
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पतंजलि की गतिविधियों का सम्मुख भाग ही इतना विशाल है कि इसका आँकलन करना कोई आसान कार्य नहीं है। सम्मुख का अर्थ है जो हमारे सामने होता है। तथा पृष्ठ वह होता है जो उसके पीछे रहता है किन्तु किसी को दिखाई नहीं देता, उसका व्यापक प्रभाव समाज, व्यक्ति तथा पदार्थ में दृष्टिगोचर होता है। संभवत: यह दुनिया की इकलौती ऐसी संस्था या संगठन है जो मनुष्य के लिए जितने भी आवश्यक तत्व, धर्म, संस्कृति तथा राष्ट्र के लिए जो भी कार्य और गतिविधियाँ हो सकती हैं, हर गतिविधि और हर कार्य में पूरी तरह से संलग्न है। |
आज पतंजलि योगपीठ के सेवाकार्यों के गौरवमयी २5 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष में हम सब यहाँ एकत्र हुए हैं। पतंजलि तथा पतंजलि योगपीठ परिवार से जुड़े करोड़ों-करोड़ों भाई बहनों के लिए यह महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण है। परम पूज्य स्वामी जी और परम श्रद्धेय गुरुजी यहाँ पर उपस्थित सबको उस इतिहास अतीत से जोड़ते हुए, आपको उससे रूबरू करा रहे हैं। पतंजलि के माध्यम से आपके द्वारा जो सेवा का महान् कार्य किया जा रहा है देश के लोगों को उसका पता चले, इस पर आज हम चर्चा कर रहे हैं। किसी भी चीज के दो भाग होते हैं एक सम्मुख भाग तथा दूसरा पृष्ठ भाग। पतंजलि की गतिविधियों का सम्मुख भाग ही इतना विशाल है कि इसका आँकलन करना कोई आसान कार्य नहीं है। सम्मुख का अर्थ है जो हमारे सामने होता है। तथा पृष्ठ वह होता है जो उसके पीछे रहता है किन्तु किसी को दिखाई नहीं देता, उसका व्यापक प्रभाव समाज, व्यक्ति तथा पदार्थ में दृष्टिगोचर होता है। संभवत: यह दुनिया की इकलौती ऐसी संस्था या संगठन है जो मनुष्य के लिए जितने भी आवश्यक तत्व, धर्म, संस्कृति तथा राष्ट्र के लिए जो भी कार्य और गतिविधियाँ हो सकती हैं, हर गतिविधि और हर कार्य में पूरी तरह से संलग्न है। यदि संलग्नता की बात करें तो मैं यह कह सकता हूँ हम पूरी दृढ़ता के साथ इस बात को कह सकते हैं कि न केवल संलग्न है अपितु प्रथम कोटि के स्तर पर संलग्न है और पतंजलि संस्था बहुत सारे क्षेत्रों में अग्रणी है और प्रथम स्तर पर कार्य कर रही है। जहाँ तक पतंजलि के स्वरूप और इसको समझने की बात, तो इसके विविध कार्यों एवं विभिन्न गतिविधियों के समावेश से इसका विस्तार व्यापक स्तर पर हो गया है। लोग इसका किस तरह मूल्यांकन कर पाएंगे, यह समझ से परे है। वर्तमान में भी हमारे द्वारा बहुत सारे कार्य ऐसे किए जा रहे हैं जो किसी एक व्यक्ति को पता हो, ऐसा संभव ही नहीं है। श्रद्धेय स्वामी जी के द्वारा ऐसे कई कार्य किए जा रहे हैं जिनका मुझे भी पता नहीं और मेरे द्वारा भी ऐसे बहुत सारे कार्य किए जा रहे हैं जिनका भान शायद स्वामी जी को भी नहीं है। कहने का अर्थ यह है कि इसकी व्यापकता और गहराई इसका सम्मुख भाग है जो केवल सामने से दिखाई देता है। तो बाकी लोग इसका मूल्यांकन, इसका आँकलन कैसे कर पाएंगे? कैसे करते होंगे? जिसको जितना समझ में आता है, जिसको जितना लाभ मिलता है, जो पतंजलि से जुड़ाव महसूस करता है, उस दृष्टि से वह पतंजलि के कार्यों का मूल्यांकन करने का प्रयास करता है। हमें प्रसन्नता है कि उस मूल्यांकन में भी वह पतंजलि के प्रति कहीं न कहीं सकारात्मकता, सहानुभूति और अपनत्व महसूस करता है। पूरे देश का जनमानस हमारे लिए बड़े गर्व और गौरव से बात करता है, इससे बड़ी कोई बात नहीं हो सकती। कार्यों की इतनी विविधता और वह भी इतनी थोड़े समय में, यह एक अद्भुत उपलब्धि है। इतिहास में जितने भी महापुरुष हुए, जितने भी बड़े-बड़े वीर, शहीद, क्रांतिकारी या अध्यात्म के बड़े महापुरुष हुए हैं, सब हमारे लिए पूजनीय, वंदनीय तथा अनुकरणीय है, परंतु प्रत्येक महापुरुष ने अपना एक कार्यक्षेत्र चयन किया और एक क्षेत्र के लिए उन्होंने अपने जीवन को लगाया। पर यहाँ तो कोई ऐेसा क्षेत्र ही नहीं बचा जो पतंजलि के सेवा कार्यों से वंचित रहा हो। आज लोग पतंजलि योगपीठ को आध्यात्म की साधना स्थली के रूप में देखते हैं, जहाँ वेद, शास्त्र, दर्शन से लेकर, साधना और पठन-पाठन का उदात्त स्वरूप दिखता है। पतंजलि संभवत: देश की पहली ऐसी संस्था है, जहाँ छोटे-छोटे बच्चों से लेकर वेद, शास्त्र पढऩे वाले 70-80 साल के बुजुर्ग अध्ययन कर रहे हैं। सब अनवरत रूप से जुटे हुए हैं। एक ओर गुरुजी व्याकरण पढ़ाते हैं तो ऐसा लगता कि सारा पतंजलि व्याकरण पढ़ रहा है, वहीं पूज्या साध्वी देवप्रिया जी दर्शन पढ़ाती हैं तो ऐसा लगता है कि सारे दर्शन पढऩे में लगे हुए हैं तथा पूज्या साध्वी देवमयी जी बच्चों को हाँककर लाती हैं, तो लगता है सारे संस्कृत पढ़ रहे हैं। हमारे संन्यासी जब जुटते हैं तो ऐसा लगता है कि सारा पतंजलि शास्त्रमय हो रहा है। सुबह-सुबह जब उठते हैं तो यज्ञ चल रहा होता है। लोग एक यज्ञ ही कर लेते हैं तो उसकी इतनी पंपलेट और लीफलेट छापते हैं कि हमारा 21 कुण्डीय यज्ञ है, 11 कुण्डीय यज्ञ है, 5 कुण्डीय यज्ञ है। मैं हिसाब लगा रहा था कि हमारे पतंजलि परिसर में ही हम 21 से 25 स्थानों पर प्रतिदिन हवन करते हैं, तो 25 कुण्डीय यज्ञ तो यहाँ हर रोज चलता है। लाखों रुपए तो यज्ञ सेवा में ही लग रहा है। महर्षि वाल्मीकि आश्रम स्थित संत रविदास जी के नाम पर हमनें लंगर शुरू किया है, जहाँ पतंजलि का अन्नक्षेत्र है। उस अन्नक्षेत्र में प्रतिदिन हजारों लोग भोजन करते हैं। यदि पूरे पतंजलि के सभी परिसरों में देखा जाए तो मध्याह्न में लगभग 30 से 40 हजार लोगों का भोजन प्रतिदिन बनता है। संस्थान में करीब 3.5 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष तो सब्जी पर ही व्यय हो रहा है। राशन की बात करें कई ट्रक रोजाना राशन के चाहिए। 10 से 15 ट्रक तो निरंतर मात्र राशन की आवाजाही में ही लगे रहते हैं। यदि हम संस्थाओं की बात करें तो संस्थाओं की कई सारी शाखाएँ-प्रशाखाएँ होती हैं। हमारी भी कई शाखाएँ हैं, पर अल्प समय में किसी संस्थान का इतना बृहद् स्वरूप स्थापित करना, यह ज्ञात इतिहास में पहली बार हुआ है। इतिहास में शिक्षा के क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित करने वाले महान् विश्वविद्यालयों में तक्षशिला, नालंदा तथा उज्जैनी विश्वविद्यलयों का स्वरूप मिलता है। किन्तु वहाँ भी लगभग 10 हजार विद्यार्थियों का ही वर्णन है। किन्तु पतंजलि विश्वविद्यालय में 30 से 40 हजार विद्यार्थी तो अभी भी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। श्रद्धेय स्वामी जी की एक वैश्विक स्तर के विश्वविद्यालय की कल्पना भी है, जहाँ एक लाख विद्यार्थी एक साथ शिक्षा प्राप्त कर सकें, संकल्पना है तो साकार भी होगी। इस तरह से यह तो शिक्षा व शास्त्र की गतिविधियों की बात हुई। दूसरा विषय है योग। पतंजलि में निरंतर योग कक्षाओं का संचालन होता है, और लोग इन कक्षाओं में सम्मिलित होते हैं तो उन्हें यही प्रतीत होता है कि हम योग के सबसे बड़े संस्थान में योग का अभ्यास कर रहे हैं। आप सब जानते हैं कि योग के लिए यहाँ पर प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में लोग आते हैं तथा नि:शुल्क भोजन, आवास और योग प्रशिक्षण लेकर वे पूरे देश और दुनिया को योगमय बनाने का कार्य करते हैं। यदि स्किल डेवलपमेंट के क्षेत्र में देखा जाए तो पतंजलि के माध्यम से एक बड़ा कार्य किया गया है। इस क्षेत्र में सरकार को बड़े स्तर पर प्रयास करना चाहिए, लेकिन स्किल डेवलपमेंट में सरकारी आँकड़ों के अनुसार अभी तक मुश्किल से करीब 62 लाख लोगों को स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत ट्रेनिंग दी गई है। यहाँ तो करोड़ों लोग विविध क्षेत्रों में ट्रेनिंग प्राप्त करके जा चुके हैं। पतंजलि योग समितियों के माध्यम से ही करीब एक लाख योग कक्षाओं का संचालन किया जा रहा है, यह एक बहुत बड़ा कार्य है। इसी तरह से यदि आयुर्वेद की बात करें तो आयुष मंत्रालय का गठन वर्ष 1995 में हुआ था, इसी समय ट्रस्ट की भी स्थापना हुई थी। एक ही सेवाकाल में आज यदि कार्यों की तुलना करते हैं तो पूरा आयुष मंत्रालय जिन-जिन गतिविधियों को संचालित करता है, जिन-जिन गतिविधियों में उनकी सहभागिता है, उन सभी गतिविधियों में पतंजलि भी कार्यरत है। स्वतंत्र रूप से कार्यों का मूल्यांकन किया जाए तो आयुष मंत्रालय से 4 गुना कार्य पतंजलि के द्वारा किया जा रहा है। मैं यह सब बातें ऐसे ही नहीं कह रहा हूँ, हमनें इस पर अनुसंधान किया है। सीसीआरए से रिसर्च के लिए, पब्लिकेशन के लिए अनेकों संस्थाएँ हैं परंतु पतंजलि एकमात्र ऐसी संस्था है जिसने एकल प्रयास से रिसर्च व पब्लिकेशन का बृहत कार्य किया है। कई लोग पतंजलि को मात्र दवाई बनाने व बेचने के दृष्टिकोण से देखते हैं। मैं जानकारी देना चाहता हूँ कि आयुर्वेद की स्थापना के लिए सरकार के द्वारा जो कार्य नहीं हो रहा है, उस पर प्रतिवर्ष पतंजलि हजारों करोड़ रुपया खर्च कर रही है। पतंजलि के प्रयासों से अभी कुछ वर्षों में आयुर्वेद को लेकर लोगों में अभिरुचि और जागरूकता बनी है। आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार को लेकर सरकारी नीतियाँ जो पहले थी, आज भी वैसी ही हैं, बहुत ज्यादा बदली नहीं हैं, बल्कि वर्तमान में तो और भी ज्यादा जटिल हो गई हैं। क्योंकि सरकारी तंत्र में सब गोल-गोल घूम रहे हैं। पतंजलि ऐसी संस्था है जो सीधे आगे बढ़ रही है, आगे चल रही है, बहुत सारा काम हो रहा है, चाहे वह योग पर रिसर्च की बात हो, आयुर्वेद पर रिसर्च की बात हो या चिकित्सा पर रिसर्च की बात हो, पतंजलि तेजी से आगे बढ़ रही है। चिकित्सा में भी पतंजलि ही ऐसी संस्था है, जहाँ पर हम रोगियों को नि:शुल्क चिकित्सा परामर्श प्रदान करते हैं। सरकारी हॉस्पिटल में भी 10 रुपए की पर्ची बनती है। पतंजलि प्राइवेट संस्था होने के बाद भी श्रद्धेय स्वामी जी के तप से प्रतिदिन लगभग 50 हजार रोगियों को नि:शुल्क चिकित्सा परामर्श प्रदान करती है। यदि एक रोगी से हम परामर्श शुल्क के रूप में 100 रुपए भी लें, तो यह राशि 50 लाख रुपए प्रतिदिन हो जाएगी। हम मात्र पर्ची बनाने से ही 10 से 15 करोड़ रुपए प्रतिमाह प्राप्त कर सकते हैं, परंतु यह पतंजलि की दृष्टि नहीं है। यह एक बड़ी बात है कि इतनी बड़ी चिकित्सा सेवा जो सरकारों को करनी चाहिए, वह पतंजलि के द्वारा सहज रूप से नि:शुल्क प्रदान की जा रही है। उसके लिए प्रतिमाह करोड़ों रुपए खर्च करना होता है। वैद्यों का वेतन, हास्पिटल का रख-रखाव और बाकि व्यवस्था को देखें तो वह बहुत बड़ी राशि होती है। इसके अतिरिक्त यदि आप उसको रोगियों के डाटा कलेक्शन की दृष्टि से देखें तो आयुर्वेद में पतंजलि द्वारा पहली बार ईएमआर सिस्टम के तहत रोगियों का सम्पूर्ण डिजिटल डाटा एकत्र किया गया है। सभी रोगियों का डाटा व सम्पूर्ण डाक्यूमेंटेशन आज हमारे पास उपलब्ध है। मैं बहुत ही भावपूर्ण हृदय से मुम्बई के हमारे आयुवृद्ध आदरणीय गुप्ता जी को स्मरण करता हूँ, उन्होंने करोड़ों रुपए का सॉफ्टवेयर डेवलप करके हमें नि:शुल्क प्रदान किया और हमको नाम तक भी नहीं बताया, इतना नि:स्पृह भी कोई दानी हो सकता है, यह एक उदाहरण है। उनकी पूरी संस्था इस डिजिटलाइजेशन के कार्य को मेंटेन करती है। हमको यह कहते हुए प्रसन्नता है कि आज उस ईएमआर के तहत हमारे पास लगभग 1 करोड़ रोगियों का डाटा उपलब्ध है, जो सरकार के पास अभी तक नहीं है। यदि आँकलन करें तो पतंजलि ने लगभग 10 करोड़ रोगियों को आयुर्वेद चिकित्सा के द्वारा लाभ पहुँचाया है। पतंजलि योगपीठ, योगग्राम, निरामयम् के एक दिन का आँकड़ा देखें तो लगभग 70 देशों के लोगों ने यहाँ आकर चिकित्सा लाभ लिया है। यानि भारत को, भारतीय संस्कृति को, भारत की गरिमा को, भारत के वैभव को, भारत की ऋषि परम्परा को दुनिया में पहुँचाने में पतंजलि का जो योगदान है, वह अप्रतिम है, उसकी तुलना नहीं हो सकती। उसके उदाहरण हैं पतंजलि के द्वारा किए जा रहे सेवा कार्य। नेचुरोपैथी की बात करें तो आज योगग्राम ऐसी संस्था बनकर उभरी है जहाँ अत्यधिक ठण्ड होने पर भी अभी बहुत से रोगी चिकित्सा लाभ ले रहे हैं। यानि ठण्ड में भी ऐसी स्थिति आ गई कि वह खाली रहता ही नहीं और गरीब से गरीब रोगी भी चिकित्सा कर सकता है, इस तरह की पूरी व्यवस्था वहाँ पर की गई है। हमने रिसर्च के लिए सरकार की ओर से प्रदान किया जाने वाला NABL Accreditation जो अपने आप में एक बड़ी बात माना जाता है, प्राप्त किया है। इसके अलावा हमारे पास तीन विश्वस्तरीय रिसर्च लैब हैं जिनमें सैकड़ों साइंटिस्ट काम कर रहे हैं। यह अनुसंधान कोई धनार्जन के लिए नहीं अपितु राष्ट्रसेवा के लिए हैं। पतंजलि से जुड़े सभी कर्मयोगी पतंजलि के सेवा संकल्प, श्रद्धेय स्वामी जी के संकल्प को पूरा करने का काम अहर्निश कर रहे हैं। पतंजलि के पास जो भी साधन होंगे, पतंजलि उसका सदुपयोग राष्ट्र सेवा के संकल्प के लिए ही करेगी। यदि हमारे पास एक भी रुपया होता है तो हम प्रयत्नशील रहते हैं कि उससे 100 रुपए का सेवा कार्य किया जा सके। इसलिए आप हमेशा देखते हैं कि मैं और श्रद्धेय स्वामी जी स्वयं मितव्ययता से रहते हुए समाज सेवा में अहर्निश संलग्र रहते हैं। क्योंकि साधन न होने पर साधन त्याग की बात, वैराग्य की बात अच्छी लगती है। साधन होने के बावजूद त्याग करना, एक अनुकरणीय उदाहरण है। वह भी दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी शिक्षा है। इसी तरह जीवन जीते हुए हम उन साधनों का समाज के लिए कैसे प्रयोग हो सकता है, उस पर काम कर रहे हैं। आज NABH से मान्यता प्राप्त दो-दो हास्पिटल हैं। यदि चिकित्सा की दृष्टि से देखें तो जितने भी मॉर्डन और अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित जाँच प्रक्रियाएँ हैं उनका प्रयोग करते हुए हमने आयुर्वेद व योग को विज्ञानसम्मत पैरामीटर पर स्थापित कर दिया है। सारे मापदण्ड आधुनिक हैं पर चिकित्सा योग और आयुर्वेद के माध्यम से की जा रही है। पतंजलि में बहुत विशाल पंचकर्म, षट्कर्म सेंटर, ओपीडी व आईपीडी है, जहाँ मात्र 50 रुपए में आईपीडी की व्यवस्था है और उसमें भी गरीब रोगियों की नि:शुल्क चिकित्सा व्यवस्था है। इस तरह की व्यवस्था वाला पतंजलि एकमात्र हॉस्पिटल है। यह सेवा का पूरा प्रकल्प है।



गौसंवर्धन तथा जैविक कृषि के क्षेत्र में देखें तो पतंजलि ने जैविक अनुसंधान पर भी बड़ा काम किया है। बॉयो कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, नेडप से लेकर कृषि अनुसंधान के लिए हमारी परम्परागत चीजों जैसे कोल्हू के बैल से तेल निकालने तक का काम भी पतंजलि के द्वारा किया जा रहा है। एक अनुसंधान के तहत हमने देखा कि कोल्हू के बैल से निकाले गए तेल से कोई भी कम्पाउण्ड का नाश नहीं होता। इस तरह से लोगों को शुद्ध और सात्विक मार्ग पर ले जाएँ, इस मॉडल पर हम काम कर रहे हैं। हमारा प्रयास है कि जितने भी समृद्धशाली लोग हैं, वे कोल्हू के बैल से निकाले गए सरसों के तेल का प्रयोग करें तथा बहुत सी बीमारियों से बचें। गाँव के लोग कोल्हू तथा बैल के प्रयोग से तेल निकालने का कार्य शुरु कर दें, इससे गोवंश की भी वृद्धि होगी। गोवंश का प्रयोग करने से वह कत्लखानों में जाने से बचेंगे। हमने ऐसे कई प्रयोग किए जिनमें गोवंश का प्रयोग किया जा सकता है। बैलों से आटा चक्की चलाना, इलेक्ट्रिसिटी बनाना, कोल्हू चलाना, हल चलाना, बुग्गी चलाना आदि काम तो हमने किया है। पतंजलि ही एक ऐसी संस्था है जो गोमूत्र के द्वारा गोनाइल बनाकर एक बॉयोप्रोडक्ट के रूप में उपलब्ध करा रही है। हम प्रतिदिन लगभग 50 टन गोधन अर्क बनाते हैं। प्रोसेसिंग के बाद लगभग 20 प्रतिशत अर्क ही हम बना पाते हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितनी गायों के संरक्षण का काम पतंजलि के द्वारा किया जा रहा है। गाय का दूध व घी की बात करें तो पहले हिन्दुस्तान में दूध व घी का मूल्य कम था। लोग गाय के घी को भैंस का बनाकर बेचने के लिए उसे प्रोसेस कर सफेद करके बेचते थे, क्योंकि गाय के घी की डिमाण्ड उतनी नहीं थी। श्रद्धेय स्वामी जी के पुरुषार्थ और पतंजलि के प्रयासों से गाय के घी व दूध का प्रयोग दोगुना हो चुका है इसलिए गोवंश का पालन भी बढ़ा है। किसानों ने गाय पालना शुरू कर दिया है, यह पतंजलि के सेवा कार्यों का ही प्रताप है। इतना ही नहीं, अभी हम गायों की डीएनए मैपिंग कर रहे हैं। इनके अलग-अलग जीन का पूरे वर्गीकरण तथा डाटा के साथ एक व्यवस्थित जीन बैंक बना रहे हैं। कृषि में भी हम बीज पर बड़ा काम कर रहे हैं। शायद लोगों को पता भी नहीं है कि हम बीज पैदा कर किसानों को उपलब्ध कराते हैं। हमें गर्व है कि देश में इतनी बड़ी-बड़ी मल्टीनेशन्स कम्पनियों के होते हुए फॉर्टिफिकेशन के क्षेत्र में पतंजलि ने पहल की है तथा हिन्दुस्तान में फूड फोर्टिफाइड कान्सेप्ट पतंजलि के द्वारा शुरू किया गया। फोर्टिफिकेशन का शाब्दिक अर्थ खाद्य पदार्थ के स्वाद में परिवर्तन किए बगैर उसमें पौषक तत्वों का समावेश करना है। पतंजलि की फोर्टिफाइडप्रोडक्ट के उत्पादन की प्रक्रिया पूर्ण रूप से एफ.एस.एस.ए.आई. के मानदण्डों पर आधारित एवं क्वालिटी व फूड सेफटी मैनेजमेंट सिस्टम के मानकों के अनुसार है। हमारी सभी निर्माण इकाइयों में फोर्टिफिकेशन की प्रक्रिया अत्यन्त वैज्ञानिक तरीके से जाँची एवं वैलिडेट की गई है। पतंजलि ऑर्गेनिक बायो फोर्टिफिकेशन पर भी कार्य कर रही है। जिससे तहत बीज में ही आवश्यक तत्त्वों जैसे- जींक, आयरन, विटामिन्स, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स का समावेश कर बायो फोर्टिफाईड सीड तैयार किये जा रहे हैं। हमें प्रसन्नता है कि यह कार्य धीरे-धीरे देशव्यापी स्वरूप ले रहा है। आईसीआर द्वारा शुरू किया गया कार्य जो उन्होंने बीच में ही छोड़ दिया था, आज पतंजलि उसे पूर्णता की ओर ले जा रहा है। जैविक खाद, जैविक कम्पोस्ट, जैविक ऑर्गेनिक सीड के उत्पादन का कार्य पतंजलि के द्वारा हो रहा है। किसानों की आय दोगुनी करने के लिए एक स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत हमने 18 प्रान्तों में सफलतापूर्वक जैविक कृषि प्रशिक्षण का कार्य प्रारंभ किया है। इससे हजारों किसान खुशहाली का जीवन जी रहे हैं और यदि सरकार का थोड़ा सा सहयोग मिलेगा तो हम इसे लाखों किसानों तक पहुँचाने वाले हैं।


आयुर्वेद के क्षेत्र में दिव्य फार्मेसी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। विदेशी कम्पनियाँ मात्र लाभ के विषय में सोचती हैं लेकिन हम सेवा के दृष्टिकोण से औषधियों का निर्माण करते हैं। हमारी कई सारी औषधियाँ दिव्य हैं, इनमें से एक महत्वपूर्ण औषधि है ‘डेंगूनिल वटी’। हमने क्लिनिकल कंट्रोल ट्रायल, प्री-क्लिनिकल ट्रायल, इनव्हिट्रो टॉक्सोकोलॉजी, फार्माकोलॉजी सब कुछ करने के बाद इसका 1850 रोगियों पर इसका सफलता पूर्वक क्लिनिकल ट्रायल कर लिया है। इसके प्रयोग से रोगी पूर्ण रूप से ठीक भी हुए हैं। जब डेंगू का प्रभाव चल रहा था तो कई एलोपैथिक चिकित्सकों ने एक-एक लाख का बिल बनाकर लोगों को ठगा, वहीं पतंजलि ने पूरे देश में नि:शुल्क डेंगुनिल वटी का वितरण किया। हमें प्रसन्नता है डेंगुनिल वटी के प्रयोग से ठीक हुए रोगियों का पूरा डाटा हमारे पास सुरक्षित है। डायबिटीज में मधुनाशिनी तथा हाइपरटेंशन में मुक्तावटी का प्रयोग कर लाखों लोगों ने मधुमेह तथा ब्लड प्रेशर पर नियंत्रण कर लिया। वैसे तो ये व्याधियाँ योग से भी ठीक हो जाती हैं परन्तु आलस्य व प्रमाद के कारण लोगों को औषधीय प्रयोग करना पड़ता है। हम कब कहते हैं कि आप रोग को औषधि से ठीक करें, यह तो योग से भी ठीक हो सकते हैं किन्तु यदि औषधि का सेवन करना ही पड़े तो कम से कम वह आयुर्वेदिक तो होनी ही चाहिए।





योग, आयुर्वेद व स्वदेशी के बाद अब पतंजलि ने शिक्षा के क्षेत्र में नवीन क्रान्ति का सूत्रपात किया है। पतंजलि बाल गुरुकुलम्, वैदिक गुरुकुलम् तथा वैदिक कन्या गुरुकुलम् में राष्ट्रसेवा के लिए जितने साधु-साध्वी, ब्रह्मचारी-ब्रह्मचारिणी तैयार हो रहे हैं, उनकी भी व्यवस्था पतंजलि संस्थान कर रहा है। वहीं प्राच्य संस्कृति तथा आधुनिक शिक्षा का अभिनव प्रयोग ‘आचार्यकुलम्’ भी नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। पतंजलि विश्वविद्यालय तथा पतंजलि आयुर्वेद कॉलेज का सफल संचालन भी पतंजलि के माध्यम से किया जा रहा है। पूज्य स्वामी जी की संकल्पना से नालंदा, तक्षशिला तथा उज्जैनी विश्वविद्यालय के मॉडल पर आधुनिक शिक्षा के समावेश से लगभग 1 लाख विद्यार्थियों की क्षमता वाला पतंजलि विश्वविद्यालय आने वाले 4-5 वर्षों में तैयार करने का लक्ष्य है, जो निश्चित ही पूर्ण होगा। राष्ट्रसेवा के लिए तैयार करना भी बड़ी बात है, परमात्मा की व्यवस्था के बिना यह संभव नहीं है। संन्यासी बनकर अपने जैसा संन्यासी बनाना, यह भी एक बहुत बड़ा कठिन कार्य है लेकिन श्रद्धेय स्वामी जी के तप एवं पुरुषार्थ से सैकड़ों भाई-बहन संन्यासी बने हैं और हजारों बनने के लिए तैयार हैं। बड़ा सोचोगे तभी बड़े बनोगे। यो भूमा तत्सुखम् न अल्पे सुखमास्ति। पतंजलि की प्रत्यक्ष सेवाओं का लाभ लगभग 10 हजार से ज्यादा लोग प्रतिदिन पतंजलि योगपीठ-। व ।।, योगग्राम, निरामयम् आदि पहुँचकर ले रहे हैं। मैं पतंजलि फूड पार्क, पदार्था की व्यवस्थाओं को देख रहा था जहाँ हमारे सप्लायर्स व डिस्ट्रीब्यूटर्स की संख्या हजारों में है। यदि आप आँकलन करें कि कितने लोग पतंजलि से लाभान्वित हो रहे हैं तो मोटे तौर पर बता देना चाहता हूँ कि भारत की आबादी का लगभग 1 प्रतिशत यानि लगभग 1.5 करोड़ लोग पतंजलि से प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से पतंजलि से लाभ ले रहे हैं। यदि पतंजलि जैसी 100 संस्थाएँ हो जाएँ तो देश एक ही दिन में स्वर्ग बन जाएगा। उसके लिए कितने लोग चाहिए? यहाँ तो दो लोग तपस्या कर रहे हैं, तो 100 संस्थाओं के लिए 200 लोगों की आवश्यकता है। स्वामी विवेकानंद जी कहकर चले गए कि मेरे जैसे 100 संन्यासी मिलें और यहाँ तो 100 की जगह कई सौ संन्यासी श्रद्धेय स्वामी जी को मिले हैं। परन्तु हमें अपनी सोच व सामर्थ्य को विकसित करना होगा। कई बार हम अपनी छोटी सोच के कारण बड़े कार्यों से विमुख हो जाते हैं। बड़े दायित्वों से वंचित हो जाते हैं। हमें यह नहीं होने देना है। देश के लोगों को भी मैं यह कहना चाहता हूँ कि यदि आप पतंजलि के साथ खड़े हैं तो आपका सौभाग्य देश व संस्कृति का भी सौभाग्य है क्योंकि यहाँ से संस्कृति संरक्षण व राष्ट्र निर्माण का जो कार्य हो रहा है, वह सदियों में कभी-कभी होता है। इतिहास रचने का ऐसा सुनहरा अवसर आपके पास है। इस पावन अवसर पर भगवान् ने आपको जो भी निमित्त बनाकर भेजा है, आप अपने कर्तव्य कर्म को पूरा करें। पतंजलि योगपीठ तपस्थली, साधनास्थली व कर्मस्थली है। आप अपने को तैयार करने के लिए यहाँ आए हो। कई लोग हमसे पूछते हैं कि हम रात-दिन क्यों लगे हैं? लोगों के चेहरों पर प्रसन्नता देखकर हमें प्रसन्नता होती है। इस प्रसन्नता को पाने के लिए हम पागलों की तरह रात-दिन पुरुषार्थ करते हैं। आज करोड़ों-करोड़ों लोगों का हित हो रहा है। यदि हम यह सोचें कि हमें तो सकून से, शांति से जीवन यापन करना है, हमें इससे ज्यादा क्या चाहिए? फिर भी इतनी मेहनत व पुरुषार्थ क्यों? इसका जवाब आप लोग ही हमें दे सकते हैं। हमें आरामदायक जीवन जीना होता तो हम नॉर्थ इस्ट में जाकर आदिवासियों, वनवासियों और जनजातियों के लोगों के लिए नि:शुल्क चिकित्सालय व शिक्षण संस्थान क्यों स्थापित करते? हमने सोचा कि हम जो भी कुछ करें समाज के लिए करें। हमें यह कार्य निरन्तर करना है, कब तक करना है, यह सोचना ही नहीं है। स्वयं स्फूर्ति से कार्य को करते रहना है। सेवा कार्यों में ही अपने को आनंदित अनुभव करें। इस प्रकार के कार्यों को करने से शक्ति व ऊर्जा ज्यादा मिलती है। यहाँ जो संन्यासी/संन्यासिनी व ब्रह्मचारी/ब्रह्मचारिणी बनाने का कार्य बड़े स्तर पर किया जा रहा है, साधन होने पर भी देश के किसी अन्य संस्थान में ऐसा नहीं किया जा रहा। आप लोग अत्यंत तप और पुरुषार्थ के साथ जितना अपने आप को लगा सकते हैं, जितना अपने आपको ठीक कर सकते हैं, पूर्ण पुरुषार्थ करें और राष्ट्र सेवा के लिए स्वयं को तैयार करें।


इस एक वर्ष को रजत वर्ष, तप वर्ष, सेवा वर्ष व साधना वर्ष के रूप में पूरे साल भर मनाना है। पूरे देश के लोगों को अपने कार्यों और गतिविधियों को और सुन्दर बनाने के लिए हर तरह से प्रयास करना है। जीवन की विविध गतिविधियों में सुन्दरता और विविधता को बढ़ाते हुए हम इस वर्ष को मनाएँगे। आज से देशवासियों के लिए जितने भी सेवा कार्य हैं- योग कक्षा, वृक्षारोपण, रक्तदान तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम आदि जो भी सेवाएँ हैं, उन्हें अच्छी तरह करें। हमारा रजत वर्ष पूरे साल भर सेवा कार्य करके मनाया जाएगा। रजत वर्ष का समापन कुम्भ के समय होगा। हम जो भी गतिविधियाँ करते हैं, सेवा कार्य करते हैं, उसकी झाँकियाँ या प्रदर्शनी कुम्भ में देखने को मिलेंगी। पूरे विश्व को सेवा की प्रेरणा मिले इसलिए हम प्रदर्शनियाँ प्रस्तुत करेंगे। हमारा तप, पुरुषार्थ, हमारी कर्मठता समाज, देश व ऋषि परम्परा के लिए होगी, इन्हीं शुभकामनाओं के साथ कृतज्ञता, वंदन व नमन करता हूँ।
धन्यवाद।
लेखक
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01 Mar 2025 17:58:05
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