हर्षोल्लास के साथ मनाया गया पतंजलि योगपीठ का 23वां स्थापना दिवस
On
पतंजलि योगपीठ का 23वां स्थापना दिवस पतंजलि योगपीठ परिसर स्थित नवनिर्मित सभागार में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ किया गया। इस अवसर पर पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज ने कहा कि पतंजलि ने नैपथ्य में पहुँच चुकी प्राचीन विधाओं योग व आयुर्वेद को नया आकार देकर विश्वपटल पर पुन: स्थापित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। |
5 जनवरी को संस्थान के स्थापना दिवस के अवसर पर पूज्य स्वामी जी महाराज ने पतंजलि के 23 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा को बताते हुए कहा कि अभावों तथा विषमताओं के मध्य हमारा आंदोलन एक आदर्श बनकर पूरे विश्व के समक्ष खड़ा है। जब अखण्ड पुरुषार्थ तथा विकल्प रहित संकल्प हमारे अंतस से निकलता है तो असंभव शब्द का कोई अस्तित्व ही नहीं रह जाता। योग, आयुर्वेद के उत्थान तथा इस सम्पूर्ण राष्ट्रयज्ञ के मूल स्तम्भ श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज का अखण्ड तप सदैव हमारे साथ रहा है। स्वप्न सभी देखते हैं किन्तु उन्हें साकार करने की क्षमता हर किसी में नहीं है। पूज्य महाराजश्री ने इस अनुष्ठान में कार्य करने वाले उन करोड़ों कार्यकत्र्ताओं, साधकों तथा कर्मचारियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जिन्होंने इस अनुष्ठान को इस मुकाम तक पहुँचाने में अपनी-अपनी आहुतियाँ दी हैं। पतंजलि के साथ ट्रस्ट का दूसरा अर्थ 'भरोसा’ है। हमने लोगों के भरोसे के साथ विज्ञान व पुरातन संस्कृति को जोड़ा है। हमने विदेशी कम्पनियों की जड़ें हिला दी हैं और वह दिन दूर नहीं जब विदेशी कम्पनियाँ देश छोड़कर भागने को मजबूर हो जायेंगी। जो स्वदेशी को हीन दृष्टि से देखते थे, वे आज स्वदेशी कहलाने में गौरव अनुभव करते हैं। स्वामी जी ने कहा कि केन्द्र सरकार ने 50 फूड पार्क को सब्सिडी दी थी किन्तु उनमें से आज एक का भी नामोनिशान नहीं है। हमें गर्व है कि दुनिया का सबसे बड़ा फूड पार्क पतंजलि योगपीठ ने स्थापित किया है। यही कारण है कि पतंजलि को एफएमसीजी वर्ग की 11000 कम्पनियों में इण्डियाज मोस्ट ट्रस्टेड एफएमसीजी ब्राण्ड से नवाजा गया। पतंजलि स्वदेशी आंदोलन के विषय में स्वामी जी ने बताया कि 15 अगस्त को हमने सवा करोड़ लोगों को पूर्ण स्वदेशी का संकल्प दिलाया तथा आगे लगभग 5 करोड़ लोगों को यह संकल्प दिलायेंगे। स्वामी जी ने सभी देशभक्त भारतीयों से आह्वान किया कि स्वदेशी का संकल्प लेकर देश को विदेशी कम्पनियों की आर्थिक गुलामी से मुक्ति के आन्दोलन में सहयोग देवें। उन्होंने बताया कि पतंजलि 11 हजार करोड़ की चैरिटी कर चुका है तथा भविष्य में एक लाख करोड़ की चैरिटी करने का लक्ष्य है।

स्वामी जी ने कहा कि हम वर्षों से शिक्षा व चिकित्सा की पराधीनता में जी रहे थे। दोनों ही क्षेत्रों में पतंजलि देश को स्वतंत्र बनाने के लिए संकल्पित है। आज देश की पूरी जीडीपी (100 लाख करोड़) के बराबर चिकित्सा में खर्च हो रहा है। योग के माध्यम से यह खर्च पूर्ण रूप से खत्म किया जा सकता है। जो आयुर्वेद दम तोड़ रहा था पतंजलि ने उसे विश्व में नई पहचान दी है। पतंजलि गुुरुकुलम् तथा आचार्यकुलम् के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में भी हम देश को स्वतंत्र बना रहे हैं। मैकाले की शिक्षा पद्धति की दासता को पूर्ण रूप से समाप्त कर वैदिक शिक्षा पद्धति से श्रेष्ठ व्यक्तित्व निर्माण का कार्य भी पतंजलि कर रहा है। आगामी 10 से 15 वर्षों में पतंजलि नालंदा व तक्षशिला से बड़ा शिक्षा केन्द्र बनेगा जहाँ एक लाख विद्यार्थी एक साथ शिक्षा पा सकेंगे।


इस अवसर पर श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने वैदिक गुरुकुलम्, वैदिक कन्या गुरुकुलम्, आचार्यकुलम्, पतंजलि विश्वविद्यालय तथा पतंजलि आयुर्वेद कॉलेज के छात्र-छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि यह स्थापना दिवस आप सबके लिए प्रेरणा दिवस बन सकता है। आचार्यश्री ने कहा कि हमने गुफाओं व कन्दराओं में रहकर, अल्प साधनों में कठिनाई का जीवन व्यतीत किया तब आदर्श व उदाहरण के रूप में कोई नहीं था। आज आपके पास साधन भी हैं और स्वामी जी के रूप में एक आदर्श भी है। साइकिल पर चलते हुए हमने देश को बदलने, योग व आयुर्वेद को पुन: जीवित करने के स्वप्न देखे तथा उन्हें साकार भी किया। जिस परमात्मा ने हमें सफलताओं के शिखर पर पहुँचाया वह आपका भी मार्ग प्रशस्त करेगा। आवश्यकता है पूर्ण निष्ठा, संकल्प व पुरुषार्थ की। हमारा जीवन केवल निर्वहन के लिए न हो अपितु कुछ विशेष करने के लिए हो। हमें बनी हुई लकीरों पर न चलकर नई राहें खोजनी चाहिए। मन में ये विश्वास हो कि परमात्मा ने हमें कुछ विशेष करने के लिए धरती पर भेजा है। जो स्वयं को दीन, हीन, संकुचित महसूस करता है परमात्मा भी उसे उसके हाल पर छोड़ देता है। यह आपके जीवन का स्वर्णिम क्षण है। बाह्य परिस्थितियों, विकारों से विचलित हुए बिना अपनी शक्ति का पूर्ण उपयोग करते हुए सफलता के शिखर पर चढ़ते जाना है। आचार्यश्री ने पतंजलि द्वारा किये जा रहे कार्यों को बताते हुए कहा कि पतंजलि के माध्यम से नार्थ-ईस्ट जैसे असम, मणिपुर, नागालैण्ड, अरुणाचल के साथ-साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखण्ड, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडू, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान व जम्मू-कश्मीर आदि राज्यों में कृषि, औषधीय पौधों एवं गौ अनुसंधान को लेकर वृहत् स्तर पर कार्य किया जा रहा है। साथ ही पड़ोसी देश भूटान व म्यांमार भी हमसे आशा बांधे है।
कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध कवि हरिओम पंवार ने कहा कि पतंजलि का स्वदेशी आंदोलन कोई व्यापार नहीं बल्कि भारतमाता का प्यार है। श्री पंवार ने कहा कि मेरे सामने लघु भारत बैठा है जो अपने तप: पूर्ण जीवन से राष्ट्र को प्रेरित कर रहा है। उन्होंने देश के सैनिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए देशभक्ति से ओतप्रोत कविता प्रस्तुत कर समा बांध दिया।
कार्यक्रम का संचालन ट्रस्ट के मुख्य महाप्रबंधक श्री ललित मोहन जी ने किया। कार्यक्रम में नार्थ-ईस्ट के विधायक श्री पद्म हजारिका जी, फिल्म डायरेक्टर श्री तरुण राठी, आचार्यकुलम् के डायरेक्टर श्री एल.आर. सैनी, पतंजलि आयुर्वेद कॉलेज के प्राचार्य डॉ. डी.एन. शर्मा, मुख्य महिला केन्द्रीय प्रभारी डॉ. सुमन, मुख्य केन्द्रीय प्रभारी डॉ. जयदीप आर्य तथा प.वि.वि. के प्रतिकुलपति श्री कुलवंत वाचस्पति आदि उपस्थित रहे।
लेखक
Related Posts
Latest News
01 Mar 2025 17:58:05
With divine inspiration, I want to draw your attention towards 11 important facts. I am sure that you will


