अनुभूति आपकी
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किडनी के दर्द से मिली राहत
मैं बाबुलु मुण्डा गाँव जगपुर, उड़ीसा का रहने वाला हूँ। मुझे किडनी में परेशानी के कारण 6 वर्ष से दौडऩे, चलने व काम करने से हाथ-पैर में दर्द होता था, चक्कर आता था। भुवनेश्वर कलिंगा चिकित्सालय में दिखाने के बाद पता चला कि किडनी में खराबी आ गयी। अंग्रेजी दवा करायी पर कोई लाभ नहीं हुआ, दिन पर दिन परेशानी बढ़ती चली गयी। 3 वर्ष अंग्रेजी इलाज कराने के बाद, उसे छोड़कर आयुर्वेद चिकित्सालय पतंजलि, हरिद्वार में उपचार हेतु सम्पर्क किया। अभी कुछ ही माह हुए हैं, यहां की चिकित्सा लेने पर पहले से काफी हद तक आराम महसूस हो रहा है। क्रिटनीन व यूरिया भी काफी कम हुई है। वहां के चिकित्सक महोदय ने मुझे नित्य सर्वकल्प क्वाथ, वृक्कदोषहर क्वाथ, वसंतकुसमाकर रस, अमृतासत्, हजरूल यहूद भस्म, पुनर्नवादि मण्डूर, श्वेत पर्पटी, मुक्तावटी, वृक्कदोषहर वटी, चन्द्रप्रभा वटी, गोक्षुरादि गुग्गुल आदि लेने व योग-प्राणायाम सहित कुछ अन्य अनुशासन पालन हेतु कहा। जिसका मुझे सकारात्मक लाभ मिल रहा है। मैं डॉक्टर साहब, पूज्यवर व श्रद्धेय आचार्यश्री का हृदय से आभारी हूँ जिनके इस योग-आयुर्वेद अभियान से हमारे जैसे असंख्य लोग स्वास्थ्य लाभ पा रहे हैं।
छाती के कैंसर से मिली निजात
मैं हेमा शर्मा, पत्नी श्री रामकेश शर्मा निवासी चूरु, राजस्थान। मुझे छाती में गांठ थी, जाँच कराने पर पता चला की यह कैंसर है। हम पतंजलि आयुर्वेद चिकित्सालय पहुँचे। वहाँ हमने चिकित्सक से परामर्श कर ईलाज प्रारम्भ करवाया। दवायी लेते एक महीना ही हुआ, 60-65 प्रतिशत तक सुधार है। इसके लिए चिकित्सक डॉ. एस.सी. मिश्रा ने मुझे औषधियों में सर्वकल्प क्वाथ, कायाकल्प क्वाथ, संजीवनी वटी, शिला सिन्दूर, ताम्र भस्म, अभ्रक भस्म, हीरक भस्म, स्वर्ण वसंतमालती, प्रवाल पंचामृत, गिलोय घन वटी, कैशोर गुग्गुल, वृद्धिवाधिका वटी, काचंनार गुग्गुल, आरोग्यवर्धनी वटी तथा साथ ही 30 मिली. गेहूँ के ज्वारे का रस, 25 मिली. गिलोय रस, २५ मिली. घृतकुमारी स्वरस, 25 मिली. गोधन अर्क, 7 नीम के पत्ते का रस तथा 20 तुलसी पत्र स्वरस मिलाकर लेने के लिए कहा। इसके अतिरिक्त प्राणायाम में भस्त्रिका, कपालभाति, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, उद्गीथ आदि करने की भी सलाह दी। मैं उनके निर्देशानुसार आज भी औषधि ले रहा हूँ। पूर्ण लाभ सुनिश्चित दिख रहा है।
गले का कैंसर हुआ पस्त
मुझे यह कहते हुए हर्ष हो रहा है कि तीन महीने लगातार दवाई खाने के पश्चात मेरा गले का कैंसर ठीक हो रहा है, मैं सम्पूर्ण पतंजलि परिवार का दिल से आभार प्रकट करता हूँ और प्रभु की अपार कृपा से ही यह ठीक हो पाया है। मैंने इससे पूर्व अनेक चिकित्सकों व बड़े हास्पिटलों में उपचार कराया, पर ऑपरेशन जैसे महंगे उपचार से नीचे कहीं बात ही नहीं हो रही थी। तब किसी ने मुझे पतंजलि चिकित्सालय से संपर्क के लिए कहा। मैंने यहां आकर चिकित्सक डॉ. एस.सी. मिश्रा जी से संपर्क किया। उन्होंने मुझे भरोसा दिलाया और औषधियों के क्रम में सर्वकल्प क्वाथ, कायाकल्प क्वाथ, अभ्रक भस्म, स्वर्ण वसंत मालती, प्रवाल पंचामृत, ताम्र भस्म, हीरक भस्म, मुक्ता पिष्टी, संजीवनी वटी, शिला सिन्दूर, गिलोय सत्व, गिलोय घनवटी, कांचनार गुग्गुल, वृद्धिवाधिका वटी, आरोग्यवर्धनी वटी आदि अपने निर्देशानुसार लेने को कहा। साथ ही 30 मिली. गेहूँ के ज्वारे का रस, 25 मिली. गिलोय रस, 25 मिली. घृतकुमारी स्वरस, 25 मिली. गोधन अर्क, 7 नीम के पत्ते का रस तथा २० तुलसी पत्र स्वरस मिलाकर लेने का परामर्श दिया। अब हमें काफी राहत है, आशा है कि मैं पूर्ण स्वस्थ हो जाऊँगा। इसके लिए मैं पूज्य स्वामी रामदेव जी व श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी को हृदय से धन्यवाद देता हूँ।
लेखक
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01 Mar 2025 17:58:05
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