बच्चों के स्मरण शक्ति बढ़ाने में सहायक प्रयोग
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डॉ प्रत्यूष कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर, पतंजलि आयुर्वेद कालेज, हरिद्वार
परीक्षा का याद्दाश्त से गहरा संबंध है। 'मार्च से अप्रेल’ लगभग सम्पूर्ण भारत में परीक्षाओं का माह माना जाता है। हर अभिभावक यही चाहता है कि मेरे लाड़ले ने वर्ष भर पढ़ाई की है, परीक्षा परिणाम भी श्रेष्ठतम आये। विद्यार्थी की परिकल्पना भी कुछ ऐसी ही रहती है। मनचाही सफलता तभी संभव हो सकती है जब स्मरण शक्ति भी साथ दे क्योंकि स्मरण शक्ति का परीक्षा के साथ गहरा संबंध जो है। प्रस्तुत है 'स्मरण शक्ति बढ़ाने में आयुर्वेद आधारित कारगर प्रयोग परक सूत्र पुर्नप्रकाशित किये जा रहे हैं, जिन्हें आजमा कर केवल विद्यार्थी ही नहीं, हर कोई भरपूर लाभ उठा सकता है।
कि सी भी रोग का उपचार आयुर्वेद में है। आयुर्वेद एक संपूर्ण और कारगर चिकित्सा पद्धति का नाम है। पेड़-पौधों के रस, छाल, फल और जड़ी-बूटियों से बनी औषधियां देखने में तो अविश्वसनीय लगती हैं, लेकिन इनमें बड़े से बड़े रोगों को जड़ से खत्म करने की क्षमता होती है।
भारतीय ग्रंथों के महत्वपूर्ण योग:
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ब्राह्मी चूर्ण को 240 मि-ग्रा- से 500 म-ग्रा- तक प्रतिदिन सुबह दूध के साथ सेवन करने वाला व्यक्ति दीर्घायु होता है।ब्राह्मी के सेवन से मास्तिष्क की स्मरण-शक्ति भी बढ़ती है। ऐसा ग्रन्थों में वर्णन है।
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चरक और सुश्रुत रचित आयुर्वेदिक ग्रंथों में लिखा है कि ब्राह्मी की हरी ताजी पत्तियों का रस तीन ग्राम- की मात्रा में सेवन करने से स्मरण-शक्ति में वृद्धि होती है। ब्राह्मी की पत्तियां इमली की पत्तियों की तरह स्वाद वाली होती हैं।
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भाव प्रकाश नामक अति प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथ के अनुसार शंखपुष्पी स्मरण-शक्ति बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देती है। शंखपुष्पी का तीन से छ: ग्राम का चूर्ण दूध के साथ सेवन करने से स्मरण-शक्ति में वृद्धि होती है। भाव प्रकाश में लिखा है कि शंखपुष्पी कल्प का सेवन करने से स्मरण शक्ति में वृद्धि तो होती ही है साथ ही मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में भी समुचित विकास होता है।
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भेषज्य रत्नावली आयुर्वेद का सुप्रसिद्ध ग्रंथ है। इसमें लिखा है कि ब्राह्मी, शंखपुष्पी, अश्वगंधा, बादाम आदि का नियमित सेवन करने से मस्तिष्क-तंत्रिकाओं को बल मिलता है, साथ ही मस्तिष्क को ठंडक पहुंचती है और इनके सेवन से स्मरण-शक्ति भी बढ़ती है तथा स्नायु के विकार नष्ट होते हैं।
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चिकित्सा चंद्रोदय नामक आयुर्वेदिक ग्रंथ में है-ब्राह्मी एक उत्तम कोटि की रसायन है। इसके नियमित सेवन से सोचने-समझने की शक्ति बढ़ती है और स्मरण-शक्ति बढ़ती है। चिकित्सा चंद्रोदय ग्रंथ में स्मरण-शक्ति बढ़ाने का एक सरल योग भी है-बादाम और मिश्री का हलुवा बनाकर नियमित रूप से खाने से मस्तिष्क की तंत्रिकाएं मजबूत होती हैं और साथ ही स्मरण-शक्ति भी बढ़ती है।
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सुबह-सुबह एक ग्राम- काली मिर्च का चूर्ण दस ग्राम शहद के साथ चाटने पर भी स्मरण-शक्ति बढ़ती है। इसके साथ ही असमय बाल सफेद नहीं होते हैं और आंखों की ज्योति में वृद्धि होती है।
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इजाजुल गुब्रा यूनानी ग्रंथ है। इसमें लिखा है-उचित मात्रा में तरी दिमाग के लिए उत्तम होती है। तरावट के लिए ठंडाई, अनार के शर्बत या बादाम के शर्बत बनाकर पीने चाहिए। इनमें से जो भी नुस्खा सूट करे, उसका गर्मी के मौसम में अवश्य ही सेवन करना चाहिए। इजाजुल गुब्रा में हिदायत दी गई है-याद्दाश्त बढ़ाने के लिए सिर को ठंडा तथा पांवों को गर्म रखना चाहिए
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आयुर्वेदिक ग्रंथों में सिर की मालिश पर भी जोर दिया गया है-सिर की मालिश और पैरों के तलुओं पर सरसों तेल की मालिश याद्यास्त को बढ़ाती है। रोजाना सिर की मालिश करने से सिर में खून का संचार ठीक रहता है और स्मरण-शक्ति भी बढ़ती है। इससे सिरदर्द भी दूर होता है। आंखों की ज्योति भी ठीक रहती है।
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स्मरण-शक्ति में वृद्धि के लिए रात को सोते समय अपनी आंखों को बंद करके लेटे-लेटे ही सुबह उठने से लेकर सोने के समय तक दिन भर के सारे क्रिया-कलापों को सिलसिलेवार याद करें। यह प्रयोग प्रतिदिन करते रहने पर स्मरण-शक्ति में वृद्धि होती है।
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शयनकक्ष में दक्षिण या पूर्व दिशा में सिर करके सोने वालों की स्मरण-शक्ति तेज होती है।
मस्तिष्क के पोषक आहार:
मस्तिष्क के लिए आवश्यक विटामिन्स:
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विटामीन बी-1 दिमाग के लिए जरूरी है और इसके मुख्य स्रोत हैं-अंकुरित अनाज, हरी-सब्जियां, मूंगफली।
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विटामिन बी-2 दिमाग के लिए आवश्यक है और इसके प्रमुख स्रोत हैं- दूध, पनीर, हरी-सब्जियां, टमाटर, खूबानी।
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विटामिन बी-6 दिमाग को स्वस्थ रखता है और इसके मुख्य स्रोत हैं- साबुत अनाज, यीस्ट, सूखी फलियां, आलू, फल, हरी-सब्जियां।
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विटामिन बी-12 मस्तिष्क के लिए जरूरी है और इसके मुख्य स्रोत हैं- दूध, दही, पनीर।
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विटामिन-सी भी दिमाग को स्वस्थ रखता है और इसके प्रमुख स्रोत हैं- टमाटर, मौसंबी, आंवला, नींबू, हरे पत्ते वाली सब्जियां, शलजम, बंद गोभी, स्ट्राबेरी।
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विटामिन-ई भी दिमाग को ताकत देता है और इसके मुख्य स्रोत हैं- टमाटर, सूखी फलियां, दालें, अनाज, पालक, हरी-सब्जियां।
खनिज लवण दिमाग को ताकत देते हैं :
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कैल्शियम दिमाग को तंदुरुस्त रखता है और यह फलियां,अनाज, दालें, काष्ठ-फल में पाया जाता है।
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सोडियम मस्तिष्क के लिए जरूरी है और यह दालें, पनीर में पाया जाता है। वैसे यह सभी खाद्य पदार्थों में मिलाया जाता है। सोडियम नमक ही है।
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आयरन भी दिमाग को चाहिए और यह हरी-सब्जियां, दालें, फलियां, मूंगफली आदि में पाया जाता है।
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पोटैशियम भी दिमाग को ताकत देता है और यह दालें, हरे पत्ते वाली सब्जियां, फलियां, अनाज, दूध, फलों में विशेष रूप से केला और संतरा।
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जिंक मस्तिष्क को सही रखता है और यह फलियां, दालें, अनाज, काष्ठ-फल में पाया जाता है। इन चीजों का नियमित रूप से सेवन करना चाहिए।
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मैग्नीशियम भी दिमाग को शक्तिशाली बनाता है और यह सोयाबीन, दूध, हरी-सब्जियां, अनाज, कुएं का पानी, काष्ठ-फल आदि में होता है।
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फ्लोराइड दिमाग को सोचने-समझने लायक बनाता है और यह चाय, कॉफी, सोयाबीन और पीने के पानी में मिलता है।
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कॉपर दिमाग के लिए बहुत जरूरी है और यह अनाज, मशरूम, मटर, फलियां, आदि में पाया जाता है।
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सेलेनियम भी दिमाग को तरोताजा और शक्तिशाली बनाए रखने के लिए जरूरी है और यह साबुत अनाज, दूध, पनीर, दही, सब्जियां आदि में पाया जाता है।
पतंजलि पाक, रसायन व तेल :
पतंजलि निर्मित कई प्रकार के तेल, पाक एवं अन्य पोषकीय रसायन हैं जिनसे मस्तिष्क के रोगों से मुक्ति मिलती है, साथ ही स्नायुतंत्र को भी पोषण मिलता है। जैसे पतंजलि केशकांति, पतंजलि नारियल तेल, सरसों का तेल आदि। इसके अतिरिक्त पतंजलि बादाम पाक, पतंजलि च्यवनप्रास, पतंजलि पावरवीटा, दिव्य मेधावटी आदि। इनसे स्मरण शक्ति बढ़ती है, पतंजलि बादाम रोगन भी निम्र प्रकार से सहायक बनते हैं:-
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मस्तिष्क संबंधी सभी रोगों में यह काम करता है। इससे सिर की मालिश करने से दिमाग की शक्ति बढ़ती है।
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इसके प्रयोग से आंख की जलन, स्नायुविक-कमजोरी हाथ पावो की जलन आदि दूर होती है।
मस्तिष्क अर्थात मन के तीन भाग हैं। चेतन मन, अद्र्धचेतन मन और अचेतन मन। ये तीनों ही भाग स्मृति से जुड़े हुए हैं। चेतन मन समकालीन स्मृति का भाग है, जो बातें बहुत कोशिश के बाद याद आती हैं, उनका भाग व्यक्ति का अद्र्धचेतन मन है। जो बातें व्यक्ति भूल चुका है और कोशिश करने के बाद भी याद नहीं आ रही हैं, वे सब अचेतन मन में समाविष्ट हो गई होती हैं।
अचेतन मन में संचित बातें भी यदि सकारात्मक दिशा न पा सकीं, तो स्मरण शक्ति के लोप या मंदता का कारण बनती हैं। इससे उबरने के लिए योग, ध्यान, प्राणायाम के साथ प्रस्तुत आयुर्वेद के औषधीय अनुपान इसमें पतंजलि आयुर्वेद के स्मरण शक्ति वर्धक अनुपान आदि तथा सकारात्मक चिंतन, प्रेरक प्रसंग, सेवाकार्य को दिनचर्या में सामिल किया जा सके तो स्मरण शक्ति विकसित होगी ही, व्यक्तित्व भी मेधावान बनेगा। तब कैसी भी परीक्षा हो परिणाम अनुकूल ही आयेगा।
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