गांधी के समान बहुआयामी ज्ञान के धनी स्वामी रामदेव
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श्रद्धेय संत समाज, स्वामी बाबा रामदेव जी, आचार्य श्री बालकृष्ण जी, मेरे मित्र श्री रजत जी और योगग्राम में आये हुए मित्रों। स्वामी जी के न्यौते पर रजत जी और मैं आज योगग्राम देखने आए और यहाँ उसके एक विंग में एक नई सुविधा बनी है। एक अवसर और एक मौका मिला। जैसा रजत जी ने कहा कि पूरे विश्व में एक महोत्सव बन गया है कि प्राकृतिक तरीकों से चिकित्सा करायी जाय। भारत में सैकड़ों वर्षों से जो ज्ञान समाज ने इक्कठा किया, उसके माध्यम से लोगों का इलाज किया जाए, ऐसी आवश्यकता बन रही है। दवाई और ऑपरेशन के साथ तो इलाज होते ही हैं, पर इस प्रकार की सुविधाएँ अब दुनियाँ में बहुत विकसित हो रही हैं। हमारे यहाँ भी दक्षिण भारत में और कई अन्य स्थानों पर व एक-आध स्थान पर उत्तर भारत में भी ऐसी सुविधायें हैं, लेकिन योगग्राम में ये नया जोड़ अपने में अनुपम है। आने वाले कल में इसका बड़ा विस्तार होने वाला है। मुझे लगता है योगग्राम अपने आप में बहुत अद्भुत व सुविधा जनक है। दवाई और सर्जरी की आवश्यकता न पड़े, व्यक्ति अपना स्वास्थ्य ठीक रखे और इस माध्यम से कुछ समय निकाल कर अपने ऊपर भी खर्च करे। यही यहाँ का संकल्प है। वैसे हमारे समाज में एक परम्परा है कि जो लोग एक चीज के विशेषज्ञ होते हैं, वो अपना ध्यान केवल उसी दिशा में देते हैं। बहुत कम लोग होते हैं, जिनको जीवन में बहुत अन्य-अन्य विषयों के बारे में चिंता होती है, अगर हम हाल का इतिहास देखें तो एक नाम गांधी जी का आता है, शायद ही जीवन का कोई पक्ष था जिसके संबंध में वो नहीं लिखते थे। उन्होंने अर्थव्यवस्था पर भी लिख दिया, स्वास्थ्य पर भी लिख दिया, राजनीति पर लिखते ही थे। आज के युग में भी शायद ऐसे बहुत कम लोग हैं और शायद ये भी मानना पड़ेगा कि स्वामी बाबा रामदेव जी महाराज उनमें से एक हैं। मुझे मालूम नहीं कि इन्हें यह औपचारिक ज्ञान किसी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय से मिला। स्वामी जी के गुरू जी बैठे हैं यहाँ, जहाँ से इन्हें ज्ञान मिला, वे ही बतायेंगे।
इस देश में 25 प्रतिशत जो पैदावार होती है, वह खेत से ही व्यर्थ जाती है। उसका नुकसान किसान को भी होता है, देश को भी होता है। वो सारा सामान प्रोसेस हो जाए और महीनों तक चले इसके बहुत सफल उदाहरण नहीं हैं। पिछले 20-30 साल से हम बजट उठाकर देख लें, तो कहा जाता है कि कोल्ड स्टोरेज बनेंगे, फूड प्रोसेस को प्रोत्साहन देंगे। लेकिन यह बहुत ज्यादा सफल नहीं हो पाया। जबकि इतने बड़े पैमाने पर पहला फूड पार्क देश का यह पतंजलि हर्बल फूडपार्क है। और कहें तो एक प्रकार से दुनियाँ की बड़ी से बड़ी कम्पनी इसके प्रोडक्ट के मुकाबले में कुछ नहीं है। स्वामी जी व आचार्य जी ने ये प्रयोग करके दिखाया। इसी प्रकार हेल्थ टूरिज्म एक शब्द होता है, योगग्राम जैसी संस्था आने वाले दिन में उसका एक केन्द्र बन जाए तो आश्चर्य नहीं।
जब कभी देश हित, देश की सुरक्षा का विषय आता है, तो स्वामी जी के क्या विचार हैं, ये सब सुनने की प्रतीक्षा करते हैं। इन्होंने समाज में आंतरिक स्वच्छता आए इसके लिए योग को घर-घर पहुंचाने का काम किया। इतनी पुरानी हमारी सैंकड़ों सालों की विरासत थी, लेकिन उसे घर-घर तक पहुंचाने का काम स्वामी जी ने किया।
एक किस्सा स्वामी जी को याद होगा। आज से 5-6 साल पहले स्वामी जी की अर्थशास्त्र में भी रुचि हो गई और आपने एक दर्शन बनाया कुछ साथियों के साथ और सबसे अधिक बहस मेरे साथ इनकी हुई, हम लोग तब विपक्ष में थे, तब एक दिन अपना झोला लेकर रजत जी के घर घंटों तक मुझे समझाते रहे और मैं इनसे तर्क करता रहा, फिर इन्होंने कहा कि हम इस पर सार्वजनिक बहस करेंगे। तो हम दोनों दिल्ली के एक बड़े फिक्की ऑडिटोरियम में लगभग एक से डेढ़ हजार चार्टेड अकाउंटेट के बीच चर्चा प्रारम्भ की। वे सब स्वामी जी से और मुझसे घंटों प्रश्न पूछते रहे और बड़ी अच्छी बहस चलती रही । मैं इनको बताता रहा कि इसमें क्या कमजोरियां हैं और ये मुझे बताते रहे कि इसमें क्या ताकत है। मैं आज केवल इतना बता सकता हूँ कि उस बहस में से जो विचार निकले वो पूरे तो संभव नहीं थे, आज भी संभव नहीं हैं, लेकिन 3 चीजें इतनी महत्वपूर्ण आयीं कि उसने देश की दिशा बदल दी। उससे पहले इस पर कोई बहस नहीं करता था, वो उस चर्चा से आरंभ हुई थी । इनका आग्रह होता था कि बड़े नोट, पेपर करंसी को बिलकुल बंद कर दो। और ये तर्क दिया करते थे कि समाज में जितनी भी तकलीफें आती हैं, जैसे भ्रष्टाचार से लेकर कालाधन तक आदि आर्थिक तकलीफें, वो उसी में से उत्पन्न होती हैं, उसे समाप्त तो नहीं, लेकिन कम किया जा सकता है। अंतत: इस विचार ने स्वीकृति पकड़ी।
दूसरा तर्क होता था कि सारे टैक्स समाप्त करके केवल एक टैक्स रखो, एक आदमी के ऊपर एक टैक्स रहे। उससे आपका कलेक्शन भी ज्यादा होगा और टैक्स की चोरी भी नहीं होगी। व्यक्ति को तकलीफ भी नहीं होगी, वह सब पूरा तो लागू नहीं हो पाया। जैसे कुछ डायरेक्ट टैक्सिस है, कुछ इनडायरेक्ट टैक्सिस हैं, लेकिन आगामी पहली जुलाई से सारे इन्डायरेक्ट टैक्स समाप्त होकर केवल एक बचेगा और वही एण्ड में लगेगा, जिसे ट्रॉन्जेक्शन टैक्स आप कहा करते थे। ये ट्रॉन्जेक्शन टैक्स नहीं है, लेकिन दूसरे स्वरूप में आया है। मैं एक दिन इनको कह रहा था कि उस वक्त बड़ा हम लोगों का मतभेद रहता था, और स्वामी जी बार-बार कहते थे कि समाज में ऐसा प्रचार करें कि पेपर करेन्सी के स्थान पर प्लास्टिक करेन्सी की तरफ लोग चले जाए। मुझे लगता है कि जैसा मैंने आरम्भ में कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा, स्वच्छता, देश हित, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, फूड पार्क, इन्डस्ट्री खेती तो मुझे आज तक समझ नहीं आ पायी, पर स्वामी जी के साथ इन सब विषयों पर चर्चा करने में आनंद जरूर आता था और आज भी आता है। यही नहीं इस समाज के अंदर जो भीतरी ताकत थी, इन्होंने पतंजलि के माध्यम से विश्व के सामने रख दिया, जिसके लिए बड़ी-बड़ी दुनिया की कम्पनियां लग जाती है। जिस ताकत का परिचय स्वामी जी, आचार्य जी ने दिया है, हम सबके लिए ये श्रद्धा के पात्र हैं और मैं अपनी ओर से भी और पूरे समाज की ओर से आप दोनों का इस विशेष काम के लिए बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूँ।
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01 Mar 2025 17:58:05
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