जननायकों व संतों की दृष्टि में पतंजलि योगपीठ का दिव्य अभियान

जननायकों व संतों की दृष्टि में पतंजलि योगपीठ का दिव्य अभियान

श्री रामनाइक, राज्यपाल, उत्तर प्रदेश सरकार
अगर स्वस्थ रहना है, तो योग जरूरी है। आज मैं 83 वर्ष की उम्र में खड़ा हूँ तो उसके पीछे योग और  सूर्य नमस्कार ही है। योगऋषि स्वामी रामदेव जी ने देश और विश्व में योग को प्रतिष्ठित कर सम्पूर्ण मानवता को भारत के प्राचीन ऋषियों की ऐसी विधा से जोड़ा है, जिससे न केवल लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी, अपितु सम्पूर्ण विश्व योगाभ्यास के माध्यम से अहर्निश स्वस्थ और समर्थ बन रहे भारत का अनुगमन करने लगा है।
श्री देवव्रत आचार्य, राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश सरकार
भारत विद्या के आधार पर ही विश्व गुरु था, यहां के ऋषि, महर्षि एवं योगियों की ज्ञान-विज्ञान से समुन्नत शिक्षा को देखकर ही सम्पूर्ण विश्व की प्रतिभायें इस देश में ज्ञान संवर्धन हेतु खिंची चली आती थीं। कालान्तर में यह प्रवाह अवरुद्ध अवश्य हुआ पर अब पुन: उसके प्रवाहित होने का समय आ गया है। श्रद्धेय स्वामी जी के नेतृत्व में भारत पुन: शैक्षिक शिखर पर पहुंचेगा, ऐसा विश्वास है। श्रद्धेय स्वामी रामदेव जी  व आचार्य श्री करोड़ों देशवासियों के स्वाभिमान और गौरव के लिए अहनिश पुरुषार्थरत रहने वाले इक्कीसवीं सदी के विलक्षण महान संतों में हैं। इनके पतंजलि अभियान से न केवल देश के अध्यात्म के प्रति समर्पित संतगण, अपितु देश के करोड़ों चिकित्सकों, किसानों, युवाओं, देश के वंचित असंख्य लोगों तक को आशा बंधी है। आशा हम यह भी करते हैं कि पतंजलि के अनुसंधानात्मक अभियान से हिमाचल प्रदेश को भी लाभान्वित होने का अवसर मिलेगा तथा पतंजलि हिमाचल के सांस्कृतिक व प्राकृतिक गौरव को भी पुन: स्थापित कर प्रदेश को समृद्धि से जोडऩे में सहायक बनेगा।
योगी आदित्य नाथ, मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार
पहले योग के कार्यक्रम सांप्रदायिक माने जाते थे, अब ऐसा नहीं है। इसमें स्वामी रामदेव जी महाराज का प्रमुख पुरुषार्थ है, स्वामी रामदेव के प्रयास से योग को जन-जन में प्रतिष्ठित करना सम्भव हुआ।  मोदी की पहल पर पहले योग दिवस पर १७२ देश साथ में खड़े हुए, तो दूसरी बार अंतरराष्ट्रीय पटल पर यह संख्या बढ़कर १९२ हो गई। मोदी के साथ ही बाबा रामदेव ने योग को देश-दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान किया। आगे भी हम सबको मिलकर योग को जन-जन तक पहुंचाना है और देश दुनियां के अधिक से अधिक लोगों को स्वस्थ व समर्थ बनाना है।
श्री केशव प्रसाद मौर्य, उप मुख्य मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार
योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज की पतंजलि के प्रोडक्ट्स ने मल्टीनेशनल कंपनियों को मात देकर स्वदेशी को बड़ी पहचान दिलाई है। साथ ही उनकी फैक्ट्रियों से हजारों लोगों को नौकरियां मिली हैं। ऐसे में यूपी सरकार भी पतंजलि के पुरुषार्थ के साथ मिल जाए तो प्रदेश के लाखों युवाओं को रोजगार का मौका मिलेगा और उप्र से हो रहा पलायन रोका जा सकेगा। आज लाखों युवकों को रोजगार देकर देश की प्रगति में योगदान देने वाले स्वामी रामदेव बधाई के पात्र हैं। हम चाहते हैं कि  वे यूपी में भी अपने प्लांट लगाएं और प्रदेश के गरीब, मजदूर, किसानों को स्वाभिमान दिलायें। अभी यूपी की पहचान फिसड्डी राज्यों में होती है, लेकिन हमारा मकसद प्रदेश को पहले नंबर पर लाना है, इसके लिए सरकार प्रयासरत है।
श्री दिनेश शर्मा, उप मुख्य मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार
योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज संकल्प के धनी व्यक्तित्व हैं। श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज एवं श्रद्धेय  स्वामी जी के संकल्प अपूर्व परिवर्तनकारी होते हैं, ऐसा मैं अहसास करता हूँ। योग-आयुर्वेद के माध्यम से स्वामी जी ने देश के गांव-गांव को जगाया, हर भारतवासी में स्वदेशी की लहर पैदा की, अब देश के हजारों युवाओं को रोजगार से जोडऩे में ये अपनी शक्ति लगा रहे हैं, पतंजलि का यह योग महोत्सव इसी दिशा का आगाज है।
त्रिवेन्द्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड सरकार
देश का जागरण कर देश की संस्कृति को समृद्ध करता है एक संन्यासी। सन्यासी जगत कल्याण के प्रति समर्पित होता है और पतंजलि योगपीठ उसी संन्यास परम्परा को अनवरत गढ़ रहा है। राष्ट्र में पतंजलि के स्वदेशी अभियान की गौरवपूर्ण भूमिका है। क्योंकि पतंजलि स्वदेशी के लिए प्रेक्टिकल एप्रोच दे रहा है। योगऋषि का यह स्वदेशी केवल उत्तराखण्ड का विषय नहीं, स्वदेशी देश की अर्थव्यवस्था का मूल मंत्र है, यह एक-एक कर संपूर्ण विश्व तक बढ़ता चलेगा, ऐसा विश्वास है। आज देश एवं प्रदेश का युवा अपने रोजगार परक समुन्नत भविष्य को लेकर पतंजलि के योग, आयुर्वेद एवं स्वदेशी परक अभियान की ओर बड़ी आशा भरी निगाहों से देख रहा है।
योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज, परमाध्यक्ष, पतंजलि योगपीठ
अवैध बूचडख़ाने अगर चल रहे हैं, तो यह अपने आप में अपराध है। ऐसा अपराध एक संत ही खत्म कर सकता है। मुख्यमंत्री बने एक योगी ने यही किया, लोगों को यह संकेत समझ लेना चाहिए कि शायद यह इतिहास में पहली बार होगा जब किसी सूबे का मुख्यमंत्री जमीन पर सोता हो। ऐसा योगी जो अपना पिंडदान पहले ही कर चुका हो, उसका कोई क्या बिगाड़ेगा। मेरा तो लोगों से यह भी कहना कि कपालभाति करना शुरू कर दो, क्योंकि अगला नंबर दारू बंद होने का है। कपालभाति करोगे तो दारू की तलब नहीं लगेगी। योग और योगी के सहारे ही कलयुग में सतयुग आता है, देश में रामराज्य भी अब निश्चित आने वाला है।
स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज, जूनापीठाधीश्वर
श्रद्धेय स्वामी रामदेव जी का अभियान कोई यौगिक, शारीरिक व्यायाम का अभियान नहीं है। ये केवल आर्थिक सुचिता और व्यवस्था परिवर्तन या केवल स्वाभिमान जागरण का ही अभियान नहीं है। यह दिव्य आध्यात्मिक अभियान है। मैं बहुत ही विश्वास के साथ ये बात कहना चाहूंगा कि इस धरती पर जितनी भी समस्याएं हैं अथवा संकट हैं। जैसे माओवाद, नक्सलवाद या आतंकवाद आदि, उसका अगर कोई समाधान है तो यही अध्यात्म है।  इनका समाधान किसी और तरह से नहीं ठीक किया जा सकता। जब कभी पूरे विश्व को एक परिवार के बोध से एकता के सूत्र में जोड़ा जा सकेगा, तो वो सूत्र पतंजलि योगपीठ से ही निकलेंगे।
पद्मश्री भारत भूषण महाराज, संस्थापक, मोक्षायतन
‘’योगी के आने के बाद भोगी भागते  हैं। योगियों ने सदा ही देश को बदला, स्वामी रामदेव जी भी उन्हीं में एक हैं। जनता योग और योगी के लाभों से काफी हद तक परिचित हो चुकी है, इसीलिए देश के शीर्ष पदों पर अब योगियों की प्रतिष्ठा हो रही है, २१ वीं सदी अब योगियों की सदी होगी। एक योगी को यूपी का मुख्यमंत्री बनाया गया है, तो बदलाव भी देखने को मिलेगा ही। इसका असर सरकारी कार्यालयों में दिखने लगा है, हर तरफ सफाई होने लगी है और एक अन्य योगी स्वामी रामदेव के प्रयास से देश-विदेश के करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य में चमत्कारी बदलाव आया है।’’
पहले योग के कार्यक्रम सांप्रदायिक माने जाते थे, अब ऐसा नहीं है। इसमें स्वामी रामदेव जी महाराज का प्रमुख पुरुषार्थ है, स्वामी रामदेव के प्रयास से योग को जन-जन में प्रतिष्ठित करना सम्भव हुआ।  मोदी की पहल पर पहले योग दिवस पर 172 देश साथ में खड़े हुए, तो दूसरी बार अंतरराष्ट्रीय पटल पर यह संख्या बढ़कर 192 हो गई। मोदी के साथ ही बाबा रामदेव ने योग को देश-दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान किया।
साध्वी ऋतम्भरा, परमाध्यक्ष, वात्सल्य ग्राम, मथुरा
हम सब महान ऋषि-ऋषिकाओं की महान संताने हैं। हम जीवन में सर्वप्रथम योगी बनें यही हमारा संकल्प होना चाहिए। क्योंकि हम सभी भारतीय स्वभावत: योगी आत्मायें ही हैं। श्रद्धेय स्वामी जी की तरह जीवन में शुद्धता, सरलता एवं सात्विकता को स्थान देने से योग फलित होता है। श्रद्धेय योगऋषि स्वामी रामदेव जी ने अपने  संदेश में जिन ग्यारह सूत्रों की बात कही, वे युग की आवश्यकता हैं। आने वाले वर्षों में राष्ट्र को विश्व के सर्वोच्च आध्यात्मिक व आर्थिक महाशक्ति के रूप में खड़ा करने के लिए हमें एक साथ स्वामी जी के बताये इन ग्यारह सूत्रों योग, आयुर्वेद, स्वदेशी, नेचुरोपैथी, वैदिक परम्पराओं की पुन: प्रतिष्ठा, शिक्षा, स्वास्थ्य, अनुसंधान, गो-अनुसंधान एवं संबर्धन, कुदरती खेती, विश्वनिर्माण व आध्यात्मिक राष्ट्र जैसे अभियानात्मक चरण पर कार्य करना ही होगा।
श्री सुधांशु जी महाराज, विश्वजाग्रति मिशन, दिल्ली
पतंजलि योगपीठ के योग, आयुर्वेद, स्वदेशी एवं भारतीय वैदिक संस्कृति से जुड़े इस आंदोलन से देश एवं विश्वभर में श्रेष्ठता एवं दिव्यता का वातावरण निर्मित हुआ है। बहुआयामी व्यक्तित्व के धारक आचार्य बालकृष्ण एवं पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज इक्कीसवीं सदी के भारत को विकसित करने में दो सशक्त स्तम्भ साबित हो रहे हैं। पतंजलि केवल एक संस्था भर नहीं है, इसने न केवल भारत अपितु सम्पूर्ण विश्व को स्वास्थ्य, समृद्धि एवं जीवन के उत्थान की दिशा दी है। यही नहीं स्वामी जी के आचार्यकुलम से देश की शिक्षा व्यवस्था को देश की भावी पीढ़ी गढऩे के लिए भारतीय ज्ञान-विज्ञान से समुन्नत शिक्षा की प्रेरणा मिलती है।
डॉ. एस सी मनचन्दा, कार्डियोलोजिस्ट, सर गंगाराम हास्पिटल, दिल्ली
आज बदलती जीवनशैली से हृदय रोग बढ़ रहे हैं। हाई कोलेस्ट्राल को लेकर सौ लोगों पर अनुसंधान किया गया, इसमें आसन, ध्यान व प्राणायाम कराया गया। ऐसे मरीजों पर भी शोध किया गया, जिनके लिए बाईपास सर्जरी जरूरी बताई जा रही थी, लेकिन योग कराने के बाद सर्जरी टाल दी गई। इन केसों में मैं पूज्य स्वामी रामदेव के योग-प्राणायाम अभियान के प्रति जागरूकता को महत्वपूर्ण मानता हॅू।
श्री धर्मपाल सिंह, मंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार
हिन्दुस्तान को ऋषि-मुनियों का देश यूं ही नहीं कहा जाता है, अपितु यह योग, आयुर्वेद, वैदिक संस्कृति का स्वरूप है।  योग को विश्व पटल पर लाने का काम स्वामी रामदेव जी महाराज ने किया है। योग-आयुर्वेद हमारे बीच धरोहर के रूप में है, जिसे सहेजने की जरूरत है। ऋषि-मुनियों का देश हिन्दुस्तान अपनी इन्हीं आध्यात्मिक शक्तियों के सहारे विश्व का नेतृत्व देने में सफल होगा। विगत वर्षों सें २१ जून को मनाए जाने वाले विश्व योग दिवस में स्वामी रामदेव के सहयोग की मैं सराहना करता हूँ।
 
 

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