एक आदर्श व वैज्ञानिक जीवन पद्धति है योगग्राम की प्राकृतिक चिकित्सा
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डॉ. नागेन्द्र कुमार 'नीरज’, निदेशक-पतंजलि, योगग्राम
प्राकृतिक चिकित्सा हमारी परम्परा, सभ्यता और हमारी संस्कृति की एक अद्भुत चिकित्सा पद्धति है। हमारी मान्यता रही है कि यदि हमारा आहार, विहार, विचार और व्यवहार सही है तो आप हर प्रकार के रोग ठीक कर सकते हैं। यही प्राकृतिक चिकित्सा का संदेश और मूल दर्शन है। प्राकृतिक चिकित्सा की विशेषता है कि इसमें हर रोग का निदान है, क्योंकि ये मानती है कि सारे रोग एक हैं, सारे रोगों का निदान एक है। प्राकृतिक चिकित्सा में हम पंच महाभूत जिससे हमारे शरीर का निर्माण हुआ है उसी को हम चिकित्सा में प्रयोग करते हैं।
प्राकृतिक चिकित्सा में स्वास्थ्य की परिभाषा कुछ इस प्रकार है कि-प्रकृति के नियमों का अनुसरण और प्राकृतिक तत्वों का उपयोग कर हम स्वस्थ होते हैं। यदि प्रकृति के नियमों का अनुसरण हम करेंगे तो कोई भी ताकत हमको स्वस्थ होने से रोक नहीं सकती और यदि हम प्रकृति के नियमों का उल्लंघन करते हैं तो हम बीमार होते हैं। योग-आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा चूंकि प्रकृति पर आधारित चिकित्सा है, ऐसे में प्रकृति ठीक नहीं होगी तो विकृति तो होगी ही। इस लेख में हम कुछ रोगों को लेकर पतंजलि योगग्राम में अपनाई जाने वाली प्राकृतिक चिकित्सा संबंधी प्रयोगों का विश्लेषण करेंगे। प्रस्तुत है गैस-कब्ज, हड्डियों में विटामिन्स की कमी, अल्सर-एसीडिटी आदि पर प्राकृतिक प्रयोग:-
गैस व कब्ज की प्राकृतिक चिकित्सा:
गेंहू का पानी पीने से गैस व कब्ज की समस्या दूर होगी ही, इसमें सौंफ का भी प्रयोग करें। सौंफ को आधा घण्टा भिगो दीजिए और उसमें मिश्री डालकर शर्बत बनाकर सेवन करने से गैस व पेट की समस्याएं खत्म होती हैं।
कब्ज के लिए रात को सौंफ को पानी में उबालकर पी सकते हैं। रात्रि को त्रिफला का भी सेवन कर सकते हैं।
यदि कब्ज ज्यादा है तो हरड़ का भी सेवन कर सकते हैं। लेकिन इन सबका लगातार सेवन नहीं करना चाहिए। इसके बदले शाम को खाना खाने के १ घण्टे बाद ४ चम्मच आंवला का रस व ४ चम्मच एलोवेरा के जूस के सेवन से पेट साफ रहता है। ज्यादा कब्ज हो तो १ गिलास गर्म पानी में ४ चम्मच आंवला और ४ चम्मच एलोवेरा मिलाकर सेवन करें। अम्लपित्त हो तो आंवले की मात्रा कम करें। कब्ज, मधुमेह, अर्थराइटिस आदि के लिए ५० ग्राम आंवला, ५० से १०० ग्राम चुकंदर, २५०-३०० ग्राम गाजर और २० ग्राम कच्ची हल्दी इन सबका जूस मिलाकर प्रयोग करें। इसमें गेंहू के ज्वारे व जौ के ज्वारे का प्रयोग कर सकते हैं। क्योंकि यह शरीर के हर रोगों, जुकाम से लेकर कैंसर तक को ठीक कर सकता है ।
कब्ज का नाश करने के लिए नाशपाती के रस का सेवन करें। इससे पूरे पेट की ऐसी धुलाई होगी जैसे ऐनिमा से होती है। यह हृदय के लिए भी बहुत अच्छा है।
मधुमेह के रोगी नाशपाती का सेवन न करें। मधुमेह के रोगी कोई भी मीठी चीज का सेवन करना चाहते हों, तो उसमें बिना मीठा वाली चीजें डालें जैसे ककड़ी, खीरा, टमाटर आदि। चावल खाना चाहते हैं, तो उसमें खूब सारी सब्जियां डालकर खायें। इसी प्रकार गेंहू के साथ चना, जौ, ज्वार, बाजरा, कुलथी, मटर, सोयाबीन, मोठ, मसूर आदि अनाजों के मिश्रण से बनी हुई रोटी का सेवन करें । साथ ही प्रतिदिन ५-६ किमी पैदल चलें और कपालभाति व मण्डूक आसन करें। जो भी खाना हो उसे चबा-चबा कर खाना चाहिए। सेब, अमरूद व पपीता ये तीनों पेट साफ करते हैं। जितनी भी हरी सब्जियां हैं, भिण्डी को छोड़कर सभी पेट के लिए लाभकारी हैं। करेले का रस पीने से भी पेट साफ होता है। कुछ दिनों तक इन चीजों का प्रयोग करने से कब्ज तो समाप्त होगा ही, आंतें भी ताकतवर हो जायेंगी। क्योंकि आंतें जितनी कमजोर होंगी, कब्ज उतनी ज्यादा होगी।

पत्तेदार सब्जियों का सेवन भी लाभकारी है। पेट का गर्म व ठंडा सेंक कब्ज का रामबाण इलाज है। अंजीर व मुनक्का भी कब्ज में लाभकारी है। मुनक्का और अंजीर को सेवन करने से १-२ घण्टे पहले भिगों लें।
गैस में अंकुरित मेथी एवं छाछ का प्रयोग लाभकारी है। छाछ में लवण भास्कर चूर्ण डालकर सेवन करें। गर्म ठंडा सेंक पेट पर देने से भी गैस में लाभदायक सिद्ध होता है। पवनमुक्तासन और मण्डूक आसन भी गैस में बहुत कारगर है। कटि स्नान भी लाभकारी है। अत: टब में गर्म पानी डालकर धीरे-धीरे पेट पर गीला तौलियां फेरें। इससे आंतों की ताकत बढ़ेगी और गैस बनने की प्रक्रिया भी कम होगी। खाने में दालों का प्रयोग कम करें और छिलके वाली दाल का ही सेवन करें।
हड्डियों में विटामिन्स की कमी :
Osteoporosis (हड्डियों की कमजोरी), Vitamin-D Deficiency जैसे रोगों में रोग ४५ मिनट तक सूर्य स्नान (सुबह उगते सूर्य की किरणों में) से बहुत लाभ मिलता है। चौलाई व काला तिल कैल्शियम का खजाना है। समस्त अनाजों में सबसे ज्यादा ऑयरन कैल्शियम और काले तिल में होता है। इसकी कमी पूरी करने के लिए काले तिल को अंकुरित करके भी सेवन करें। इसके अतिरिक्त मूंग, मटर, मसूर, मोठ, मूंगफली, मेथी, चना, गेहूं आदि को भी अंकुरित कर सेवन किया जा सकता है। ऐसी महिलाएं जिनको गर्भधारण करने में कठिनाई होती है या गर्भ धारण करने के बाद गर्भपात (Miscarriage) हो जाता है, उनके लिए अंकुरित गेहूं व गेहूं का दलिया खिलाने से काफी लाभ मिलता है।
विटामिन्स विशेषकर विटामिन बी-12 की कमी से भी हड्डियों से सम्बंधित समस्यायें पैदा होती हैं। वास्तव में अनुसंधान से स्पष्ट हुआ कि जितने भी अंकुरित अनाज हैं, वो Vitamin b-12 का खजाना हैं। अत: विटामिन बी-१२ के लिए अंकुरित अन्न का प्रयोग करें। इसके अतिरिक्त सोयाबीन व दही का प्रयोग कर सकते हैं।
जितने भी milk Products हैं, उनमें विटामिन बी-12 होता है । जबकि विटामिन डी-3 के लिए सबसे अच्छा स्रोत धूप है।
पेट सम्बंधी बीमारियों के कारण भी हड्डियां प्रभावित होती हैं। अत: पेट को सर्वप्रथम ठीक करें। इस स्थिति में गेहूं का पानी भी अत्यंत उपयोगी होता है। पेट की अन्य बीमारी के लिए गेहूं का पानी भी बहुत लाभ करता है। जैसे सुबह आधा कप गेहूं लीजिए और २ कप पानी उसमें डाल दीजिए। 24 घण्टे बाद उस पानी को पी लीजिए। फिर उसी गेहूं को भिगो दीजिए और फिर उसके 24 घंटे बाद पी लीजिए। फिर उसी गेहूं को भिगो दीजिए और 24 घण्टे बाद पी लीजिए। यानी 1 ही गेहूं ३ दिन तक चलेगा। यह प्रयोग सुबह-सुबह खाली पेट करें।
अगर पानी बेस्वाद लगे तो उसमें नींबू और शहद मिलाकर प्रयोग करें। यह प्रयोग मुंह के छाले, पेट की गर्मी, कब्ज, डायरिया, यूटरस की गड़बड़ी, गैस, गर्भपात (miscarriage) व शरीर में Vitamin-b Complex की कमी में लाभ करेगा।
अल्सर और एसिडिटी में प्राकृतिक चिकित्सा:
एसिडिटी जैसी बीमारी के लिए योग बहुत ही अच्छा होता है। कुंजल क्रिया एसिडिटी में बहुत ही उपयोगी होती है। पेट संबंधी बीमारियों जैसे भूख ना लगना, गैस और कफ जैसी बीमारियों में भी कुंजल क्रिया बहुत ही लाभकारी है। अल्सर और एसिडिटी बीमारियों की चिकित्सा के लिए मिट्टी की पट्टी का प्रयोग लाभकारी होता है। Antaacid वाले आहार, गाजर का रस, सौंफ का पानी, लौकी, टिण्डा, तोरी, परवल अल्सर और एसिडिटी जैसी बीमारियों में बहुत ही उपयोगी होती हैं। पत्तों वाली सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए। Antaacid वाले आहार के अतिरिक्त मुनक्का भी काफी फायदा करता है। मुनक्के खाने नहीं हैं, चूसने हैं। मुनक्के के साथ ही ऐलोविरा जूस भी एसिडिटी में बहुत लाभ करता है। ऐलोविरा और Wheat Grass अल्सर और एसिडिटी जैसी बीमारियों का नाश करता है।
पंचकर्म और षट्कर्म द्वारा योगग्राम चिकित्सा:
हमारे शरीर में Toxic, oxidant, Negative energy से शरीर के कुछ अंग शिथिल पड़ जाते हैं और जो अंग कमजोर पड़ा उसे ही बीमारी आ जाती है। अत: सर्वप्रथम आवश्यक है कि शरीर के अंगों को शक्ति देने के लिए विजातीय तत्व बाहर निकालें। इसके लिए प्रथम है आहार की शुद्धि और दूसरा मन-मस्तिष्क में बैठे अशुद्ध विचारों का निकलना जरूरी है। इसीलिए योगग्राम में शरीर को शुद्ध करने के लिए मुख्य रूप से धौति करायी जाती है।
धौति एक तो कपड़े से करायी जाती है और दूसरी वमन धौति। पानी पिलाया और निकाल दिया। धौति कफ और श्वास रोगों में बड़ी उपयोगी है। धैति के अलावा शरीर शुद्धि के लिए नेति का भी प्रावधान षटकर्म में है।
नेति में जलनेति, सूत्रनेति, तेलनेति, घृतनेति प्रमुख हैं। एक नाक से पानी भरना और मुंह से सांस लेकर दूसरी तरफ से निकाल देना ये जलनेति हो गई। सूत्रनेति में पहले दिन सरसों का तेल, बादाम रोगन या गाय का घी नाक में डालें। थोड़ा सा सरसों का तेल गर्म करके डालना बहुत अच्छा होता है, यह नाक एकदम खोल देता है। जुकाम एकदम दूर हो जाता है। जिनको बलगम है, सायनस है वे थोड़ा सा बादाम रोगन या गाय का घी ड्रापर से डाल लें। दिमाग भी तरोताजा रहता है।
पंचकर्म में दूसरी तरह की क्रियाएं भी होती हैं उसमें स्नेहन शिरोधारा, स्वेदन, विरेचन, वमन, बस्ति आंखों के लिए अक्षय तर्पण करवाते हैं। शरीर में बहुत ज्यादा अशुद्धि बढ़ गई है तो उसे फिर मसाज भी कराते हैं। ड्राई मसाज, तेलों से मसाज, पोटली का सेंक कराते हैं, फिर अलग- अलग जड़ी-बूटियों से भाप (स्टीम) देते हैं। जैसे चमड़ी के रोगों के लिए अलग औषधियां होंगी। जोड़ों के दर्द के लिए अलग और सूजन के लिए अलग औषधियां हैं। उनका भाप (स्टीम) व वाष्प देते हैं और औषधियों से स्नान भी कराते हैं। यह प्रक्रियाएं जिनको बहुत ज्यादा Critical प्रॉब्लम होती है, उनके लिए बहुत लाभदायक होती है।
प्राकृतिक चिकित्सा में शंख प्रक्षालन बहुत जर्बदस्त प्रक्रिया है। जिनको पुराना कब्ज, मोटापा, शुगर, स्किन डिजीज व पेट की बीमारियां हैं, उनके लिए शंख प्रक्षालन लाभकारी है। शंख प्रक्षालन के तहत पानी पीते हैं फिर पांच आसन करवाते हैं। जिनको अस्थमा है, नींबू से दिक्कत है, तो खाली गर्म पानी पिला देते हैं। जिसको बी.पी. हो उसको नमक नहीं देते, उसे गर्म पानी से भी करवाते हैं। गर्म पानी पिलाते हैं, आसन करवाते हैं तो पेट साफ होना शुरू हो जाता है। शाम को थोड़ा हल्का खाना खिचड़ी, फल आदि देते हैं। जिनको बहुत ज्यादा कब्ज रहता है उसको त्रिफला या अरहर चूर्ण देते हैं जिससे पेट जल्दी साफ हो जाता है।
माइग्रेन के लिए अनुलोम-विलोम प्राणायाम से जर्बदस्त फायदा होता है और इसमें जलनेति और सूत्रनेति से भी लाभ होता है। मेधावटी से विशेष लाभ मिलता है। बादाम रोगन, अनुलोम-विलोम प्राणायाम से १०० प्रतिशत आराम हो जाता है। Heart enlarge हो गया है तो प्राणायाम से १०० परसेंट अच्छा हो जायेगा। हृदयामृत और अर्जुन की छाल का प्रयोग भी अति उत्तम है।
एक-एक जड़ी-बूटी में अपरिमित शक्ति है। अन्नों, फलों, औषधियों, वनस्पतियों पर यहाँ अनुसंधान किये जाते हैं। चूंकि सारे रस जल से आते हैं। सारे रूप अग्नि से आते हैं। ऋषियों ने अलग-अलग तत्वों की अन्वेषणा की कि सारी चीजें आ कहां से आ रही हैं। सारी शक्तियां कहां से आ रही हैं। हर एक चीज में एक शक्ति है, एनर्जी है, पावर है, Strength है और ऊर्जा के सिद्धांत से ही ये ब्रह्मांड काम कर रहा है, तो सारी शक्तियां वनस्पतियों वाली औषधियों में मिलेंगी ही। इसी अवधारणा पर यहाँ दिमाग की बीमारी में ब्राह्मी, शंखपुष्पी, अश्वगंधा और आंखों के लिए आँवला और तमाम तरह की औषधियां, प्रयोग में लाते हैं। इसी प्रकार दांतों के लिए, चमड़ी के लिए एलोवेरा, तुलसी और नीम आदि औषधियों से लाभ का प्रयास होता है।
वस्तुत: कह सकते हैं कि योगग्राम सम्पूर्ण विश्व के रोगियों के लिए विश्वसनीय प्राकृतिक उपचार केन्द्र है। जहां रोगियों का पहले आएं, पहले उपचार करायें का समुचित पालन होता है।
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01 Mar 2025 17:58:05
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