अनुभूति आपकी
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योग प्राणायाम से जीवन में आश्चर्यजनक बदलाव
परम पूज्य स्वामी जी मैं सुनीता जैन कोटा, कलकत्ता से हूँ। मुझे बचपन से ही अस्थमा था मैंने काफी इलाज करवाया, मैंने इन्दोर में भी काफी डॉक्टर्स को दिखया, पर मुझे कुछ आराम नहीं मिला। दवाइयां लेने की वजह से मेरी जुबान भी तुतलाने लगी थी तथा थोड़ा सा चलने में ही साँस फूल जाती थी व बार-बार पानी की प्यास लगती थी, इनहेलर भी दिन में 3-4 बार लेती थी। अभी कुछ महीने पहले ही मैंने सायंकाल पतंजलि महिला योग कक्षा में जाना प्रारम्भ किया। मात्र कुछ माह योगाभ्यास करने के बाद ही मुझमें आश्चर्य जनक परिवर्तन आया है तथा अब मुझे इनहेलर भी कमी महीने में एक आधा बार ही लेना पड़ता है। मुझे ५० प्रतिशत फायदा हुआ है। अब मैंने प्रण ले लिया है कि आजीवन योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाऊंगी। स्वामी जी आपको बहुत-बहुत धन्यवाद कि आपने मेरे जैसे कई लोगों के लिये जीने की नई राह खोल दी है तथा मैं पतंजलि की योगसाधिका बहन उषा सपरा जी व बहन मधु मेहता जी का भी धन्यवाद करती हूँ, जिन्होंने मुझे योगाभ्यास के लिये प्रेरित किया।
योग-आयुर्वेद से ठीक हुआ राइट थाइराइड फोसा के मेटासिस कंडीसन का कैंसर
मै 47 वर्षीय उषा जयसवारा, 103-01 जवपुर रोड कोलकाता-74 पश्चिम बंगाल से हूं। मैं छ: वर्ष से कैंसर रोग से पीडि़त थी। काफी इलाज कराने के बाद एलोपैथी डाक्टरों ने हाथ खड़े कर दिये। तो लोगों की सलाह पर पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के चिकित्सालय का रुख किया, परिणामत: जिंदगी आशाओं से भर उठी। वहां के चिकित्सकों के सुझाव व आयुर्वेदिक चिकित्सा उपचार व योगाभ्यास से आज मैं कैंसर से 70 प्रतिशत मुक्त हूं। इसी के साथ अन्य रोगों से जंग जीतने में भी मैं सफल हूं।
स्वामी जी व आचार्यश्री मैं आपको बताती चलूं कि जांच के बाद पता चला कि मेरे कैंसर है, तो इसके उपचार हेतु काफी रुपया ईलाज में खर्च कर दिया , पर आराम न के बराबर था। हमारे परिजन पतंजलि योगपीठ ले गये, जहां डॉ एस सी मिश्रा ने हमारी रिपोर्टें देखीं और कुछ आयुर्वेदिक औषधियां खाने के लिए दीं। जिसमें पतंजलि निर्मित गिलोय घनवटी, मेदोहर वटी, संजीवनी वटी, सिलासिंदूर, ताम्र भस्म, अश्वगंधा चूर्ण, अभ्रकभस्म, हीरक भस्म, स्वर्णभस्म, मोतीपिस्टी, प्रवाल पंचामृत, बृद्धिवाधिका वटी, कांचनार गुग्गुल, कैशोर्यगुग्गुल आदि को निर्धारित अनुपान के साथ सेवन करने का निर्देश दिया। इसके अतिरिक्त गिलोय रस, घृतकुमारी रस, गौमूत्र, नीम का रस, तुलसी का पत्ता आदि लेने को कहा। साथ-साथ कुछ योगाभ्यास करने की सलाह दी, जिसे हमने आस्था चैनल के माध्यम से योगऋषि पूज्य स्वामी रामदेव जी द्वारा निर्देशित योगाभ्यास से सीख लिया और करना प्रारम्भ किया। कुछ ही दिनों में आराम मिलने लगा। 28 जून, 2014 से लेकर 13 जनवरी 2015 तक यथावत इलाज चला, तदोपरान्त उपचार में बदलाव किया गया। लगभग एक वर्ष बाद पुन: अस्पताल में जाकर जाँच कराई तो सकारात्मक परिणाम सामने आये। अर्थात अब मैं लगभग 70 प्रतिशत रोगमुक्त व स्वस्थ हॅूं। पर उपचार व योगाभ्यास अभी भी चल रहा है। पूज्य स्वामी जी व श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज के योग-आयुर्वेद अभियान का ही प्रभाव है कि हम जैसे लाखों लोगों को ऐसी कठिन बीमारियों से लाभ मिल रहा है।
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01 Mar 2025 17:58:05
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