कैसे होगी गो रक्षा
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आचार्य बालकृष्ण
1. गो रक्षा आज राष्ट्र के सामने एक बहुत बड़ा यक्ष प्रश्न है। सरकार के पशु गणना के आंकड़ों के अनुसार देश में लगभग 9 करोड़ देसी नस्ल की तथा 4 करोड़ संकर नस्ल की गायें हैं। कुल लगभग 13 करोड़ गोवंश हैं।
2. खेती तथा खेती से जुड़े कार्य जुताई व फसलों की ढुलाई आदि से लेकर अन्य परिवहन आदि कार्यों में बैल या नन्दी की यान्त्रिक कृषि के आधिक्य व आधुनिक वाहनादि के कारण बैलों की उपयोगिता कम हो गई है।
3. साम्प्रदायिक मान्यताओं जैसे कि गोमांस न खाना तो हमारे लिए धर्म है तथा कुछ वर्गों के लिए गाय काटना एवं गाय का चमड़ा आदि उतारना आदि उनकी रोजी-रोटी से भी जुड़ा हुआ है, आदि गाय को लेकर ऐसे कुछ विवादित तथा कुछ अनसुलझे गहरे प्रश्न हैं?
4. देसी नस्ल की गायों की गुणवत्ता में निरन्तर हो रही गिरावट तथा भारतीय नस्ल की अंग्रेजों के समय तक उपलब्ध सौ से अधिक प्रजातियों में मात्र ४२ देसी नस्ल की गायें ही बच पायीं हैं, शेष का गोभक्षकों ने नामोनिशान ही मिटा दिया है। मनुष्य इस धरती का सबसे विवेकशील प्राणी है। अत: इस धरती ही नहीं पूरे ब्रह्माण्ड में जैव विविधता से लेकर पूरे अस्तित्व की दिव्यता व विविधता की रक्षा का भी बहुत बड़ा कर्त्तव्य मनुष्य मात्र का है।
5. गाय की रक्षा साथ ही गो की उपयोगिता दूध, घी तथा दूध से निर्मित विविध उत्पादों के साथ-साथ गोमूत्र, गोबर तथा बैलों की व्यवसायिक व आर्थिक उपयोगिता आदि प्रश्नों का युगानुकूल समाधान खोजना तथा गो को श्रद्धा का केन्द्र बनाने के साथ समृद्धि का भी आधार बनाना होगा।

समाधान:
1. हम देश व दुनियां का आधुनिकतम गो-अनुसंधान एवं गो संवर्धन केन्द्र का निर्माण कर रहे हैं। हम इसमें केवल भारतीय नस्ल की गायों पर ही कार्य कर रहे हैं। अगले वर्ष तक यह केन्द्र मूत्र्तरूप ले लेगा, वैसे अभी भी देश की श्रेष्ठतम गोशाला का हम संचालन कर रहे हैं।
2. इसमें तीन बड़े कार्य होंगे। पहला-सीमन सलैक्शन। इसके द्वारा २५ से ५० किलो दूध देने वाली ९९% भारतीय नस्ल की गायों की ही वृद्धि होगी, बछड़ों एवं बैलों की समस्या नहीं रहेगी।
3. दूसरा-ब्रीड सलैक्शन। ब्राजील आदि देशों से हम उन्नत नस्ल की भारतीय गायों का सीमन लायेंगे तथा भारत में उपलब्ध २० से ३० किलो दूध देने वाली गायों का गर्भाधान करवाकर उन्नत नस्ल तैयार करेंगे।
4. तीसरा- भू्रण प्रत्यारोपण के माध्यम से हम श्रेष्ठ गोशालाओं का चयन करके कम दूध देने वाली गायों की कोख को सैरोगेट मदर की तरह प्रयोग करके २५ से ६० किलो दूध देने वाली गाय व उनके द्वारा पैदा हुए नन्दियों का भ्रूण लेकर पहले ही ब्यांत में २५ से ६० किलो दूध देने वाली गायें तैयार करेंगे।
5. बैलों का कृषि के साथ व्यवसायिक उपयोगिता की दिशा में हमने बैल संचालित एक यन्त्र का निर्माण किया है। इससे एक बैल से एक किसान अपने ट्यूबवैल से लेकर घर की जरुरत की पूरी बिजली पैदा कर सकेगा और यह विद्युत कोयला, पानी, सोलर तथा विन्ड एनर्जी से भी अधिक पर्यावरण की दृष्टि से उपयोगी होगी।
6. गाय सहित किसी भी प्राणी की हत्या, उसका जीवन समाप्त करना यह एक क्रूर हिंसा है। किसी भी धर्म, मत, पन्थ या सम्प्रदाय में हिंसा को उचित नहीं माना गया है। अत: मजहबों के नाम पर गाय की हिंसा धर्म के नाम पर अधर्म है।
7. हम भारतीय नस्ल की गायों की उपलब्ध सभी प्रजातियों की पूर्ण सुरक्षा करेंगे। मनुष्य धरती पर भगवान् की सर्वश्रेष्ठ रचना तथा विवेकशील प्राणी है, अत: जैव विविधता से लेकर इस सृष्टि की विविध प्रकार दिव्यता व भव्यता या यूँ कहें कि भगवान् की रचना को संजोकर रखने का भी सबसे बड़ा उत्तरदायित्व मनुष्य का ही है। हम अपने सम्पूर्ण सामर्थ्य का उपयोग इस गो सेवा को ईश्वरीय सेवा मानकर करेंगे।
8. हम सब विवेकशील व जागरूक भारतीय नागरिकों, ऋषि संतानों से भी यह दृढ़तापूर्वक आग्रह करेंगे कि गोव्रती, स्वदेशीव्रती, योगव्रती व सेवाव्रती बनकर यदि पूर्ण दृढ़ता से इस संकल्प के साथ जुड़ जायेंगे, तो गो सेवा के यक्ष प्रश्न का हम बहुत शीघ्र ही पूर्ण समाधान करने में समर्थ हो जायेंगे।
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01 Mar 2025 17:58:05
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