अनुभूति आपकी
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नियमित योगाभ्यास ने दिया जीवन दान
योग की महिमा अपरमपार है। इसका जीता-जागता सबूत मैं स्वयं हूँ। 8 मई 2014 को मेरा मोटरसाईकिल से एक्सिडेंट हो गया था। मेरे दाहिने ललाट पर गहरी चोट आई, जिसकी वजह से नाक-कान और मुँह से खूब अधिक खून बहा और ललाट की दाहिनी ओर की नसे डेमेज होने पर बायें पाव व बायें हाथ में पक्षाघात हो गया एवं दाहिनी आँख की ज्योति चली गई। मुझे मरणासन्न स्थिति में इंदौर गोकुलदान अस्पताल में भर्ती कराया गया। मेरे जीने की आशा डॉक्टरों ने, परिवार वालों व शुभचिन्तकों ने बिल्कुल छोड़ दी थी, मेरे शरीर की स्थिति ही कुछ ऐसी हो गयी थी। मैं तीन दिनों तक बेहोश रहा और चौथे दिन मुझे होश आया, तो डाक्टर निस्यान्त जी खरे के आश्चर्य का ठिकाना ना रहा। उन्होंने मेरे पुत्र से पूछा कि क्या ये योग करते थे, मेरे पुत्र ने जवाब दिया कि मेरे पिताजी नित्य प्रात:काल दो घंटे योग करते थे। चार बार हरिद्वार बाबा रामदेव जी के शिविर में योग करने एवं सीखने के लिए गये। तीन-तीन दिन का शिविर लगाकर लोगों को योग भी सिखाते थे। तब डॉ. निस्यान्त जी खरे ने जो बात कही वह योग की महानता की पराकाष्ठा थी। उन्होंने कहा कि ये योग करते थे तभी इनका शरीर इतना सब कुछ झेल गया, वरना और कोई होता तो मर जाता।
मैं पतंजलि और बाबा रामदेव जी महाराज को साष्टांग प्रणाम करते हुए हार्दिक अभिनन्दन करता हूँ कि योग की वजह से ही मेरी जान बच गई और अभी भी मैं नित्य १ घंटे योग करता हूँ और धीर-धीरे ठीक हो रहा हूँ। मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि मैं योग करने का समय और बढ़ाऊगा एवं शीघ्र ही पुन: अन्य लोगों को योग सिखाने में सक्षम हो जाऊंगा।
आपका सेवक- चन्द्रपाल सिंह डोडिया, मध्यप्रदेश
दांतो को मिला नया जीवन
परम पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज एवं श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी का मैं जीवन भर अभारी रहूँगी, जिनके मार्गदर्शन एवं औषधीय उपचार से मेरे दांतों को नया जीवन मिला। मैं लगभग 6 साल पहले से मसूडों के दर्द से काफी परेशान था। जिसके चलते दांत चिकित्सकों की सलाह पर मैंने 2 दांतों को भी निकलवा दिया। उसके काफी समय के बाद मेरे कुछ दांतों में पुन: परेशानी आने लगी, मैंने चिकित्सकों से पुन: सलाह ली, तो चिकित्सक ने मुझे 4 दांतों को निकलवाने की सलाह दी। मैं काफी परेशान थी क्योंकि दांतों के बिना खाना खाने में काफी दिक्कतें आ रही थीं। फिर मैंने सोचा कि क्यों न मैं पतंजलि के उत्पादों को अपनाना शुरू करूँ। मैं तभी पतंजलि के ‘दंतकान्ति’ पेस्ट एवं दंत मंजन लेकर आयी एवं उसे करना शुरू किया। मैं आपको यह बताते हुये बड़ा हर्ष महसूस कर रही हूँ कि कुछ समय बाद ही लगातार दंतकान्ति एवं दिव्य दंत मंजन करने से मेरे दांतों को नया जीवन मिला, जो दांत निकलवाने की राह पर थे आज वे पूर्ण रूप से स्वस्थ हैं।
मैंअब लोगों को नि:शुल्क योग एवं प्राणायाम सिखाती हूँ और पतंजलि दंतकांति व दिव्य दंत मंजन से लोगों को जोड़ रही हूँ। जिससे सभी व्यक्ति को इसका लाभ मिल सके।
सुश्री मियाली दास, ग्राम-उमापति, जिला- करीमगंज (असम)
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01 Mar 2025 17:58:05
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