जीवन पथ के कुछ प्ररेक पाथेय

जीवन पथ के कुछ प्ररेक पाथेय

आचार्या डा. सुमना,
मुख्य महिला केन्द्रीय प्रभारी-पतंजलि योग समिति

  • हम इस समय फिर पृथ्वी के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ पर हैं। सर्वत्र तीव्र व्यथा, प्रतीक्षा और भय की स्थिति है। अब क्या होने वाला है? इसका उत्तर बस एक ही है- ‘‘कि बस अब मानव आध्यात्मिक होने के लिए तैयार हो जायें।’’
  • वह साहस और वीरता जिसकी भगवान् हमसे अपेक्षा रखते हैं, उसका उपयोग हम अपनी कठिनाईयों, अपूर्णताओं और मलीनताओं के विरुद्ध लडऩे में क्यों करें, ताकि फिर कभी उस भयानक और आसुरिक विनाश में से गुजरने की आवश्यकता ही पड़े। यही समस्या आज हमारे सामने है। हममे से प्रत्येक को इसे अपने ढंग से हल करना है।
  • एक ऐसे परिवार को बनाना मेरा उद्देश्य है, जिसमें हर एक के लिए अपनी क्षमताओं को पूरी तरह विकसित करना और प्रकट करना संभव हो।
  • हम सब पिछले जन्मों में मिल चुके हैं, वरना इस जन्म में इक्कटठे होते। हम सब एक ही परिवार के हैं और युग-युग से भगवान् की विजय और धरती पर उनकी अभिव्यक्ति के लिए काम करते आये हैं।
  • जीवन को एक फूल की तरह खिलना चाहिए। जो अपने आपको भगवान् के प्रति अर्पित करता है।
  • कामना को तृप्त करने की अपेक्षा उसे जीतने और उसका परित्याग करने में अपार रूप से अधिक महान् आनन्द है।
  • अपने सुख के लिए व्यस्त हो जाना दु:खी होने का अचूक उपाय है।
  • भौतिक स्तर पर भगवान् अपने आप को सौन्दर्य द्वारा, मानसिक स्तर पर ज्ञान द्वारा, प्राणिक स्तर पर शक्ति द्वारा और चैत्य स्तर पर प्रेम द्वारा अभिव्यक्त करते हैं।
  • जो भगवान् को चुनता है, भगवान् ने उसे पहले से ही चुन लिया है।
  • मानव प्रेम के पीछे हमेशा एक कटु स्वाद होता है। भागवत् प्रेम ही है जो कभी निराश नहीं करता।
  • भगवान् से अलग जीवन मिथ्या है झूठ है, एक भ्रम है, भगवान् के बिना जीवन दु:खद निरानन्द है, भगवान् में ही जीवन है, प्रकाश है और आनन्द है, भगवान् में ही अचल शान्ति का वास है।
  • केवल भगवान् ही पूर्ण सुरक्षा दे सकते हैं।
  • भगवान् उनके साथी होते हैं, जो उत्साही और सच्चे हैं।
  • अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति किसी विशेष से मत चाहो, वरन् भगवान में प्राप्त करो, क्योंकि वास्तव में वह कहीं उपलब्ध् नहीं होगी, केवल भगवान् ही उनकी पूर्ति के उपाय करते हैं।
  • आध्यात्मिक दृष्टिकोण से सुप्रसिद्ध और अनभिज्ञ का कोई मूल्य नहीं है। जबकि गम्भीरता पूर्वक योग करने वाला एक व्यक्ति हजार प्रसिद्ध लोगों से अधिक मूल्यवान् है।
  • पूर्णता से काम करने का प्रचण्ड आग्रह ही आध्यात्मिकता है।
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  • सच्ची आध्यात्मिकता जीवन का त्याग नहीं, बल्कि दिव्य परिपूर्णता के साथ जीवन को पूर्ण बनाना है।
  • योग का अर्थ भगवान् से एकता और यह एकता आत्मोत्सर्गं द्वारा आती है, इसका आधार है अपने आपको भगवान् के हाथों में दे देना। तुम्हें यह बात अपने  जीवन में प्रत्येक क्षण याद रखनी होगी और इसे अपने प्रत्येक ब्यौरे में चरितार्थ करना होगा। तुम्हें प्रत्येक पग पर यह अनुभव करना चाहिए कि तुम भगवान् के हो, तुम्हें हमेशा यह अनुभूति होनी चाहिए कि तुम जो कुछ सोचते या करते हो, उसमें हमेशा भागवत् चेतना ही तुम्हारे द्वारा कार्य करती है। तुम्हारे पास ऐसी कोई चीज होनी चाहिए, जिसे तुम अपनी कह सको, जो कुछ तुम्हारे पास आये तुम उसे भगवान् के यहाँ से आया हुआ अनुभव करो और उसे उसके मूलस्रोत को भेंट कर दो।
  • जानना अच्छा है, करना और भी अच्छा है, वही हो जाना परिपूर्णता है।
  • अपने ऊपर संयम करने से बड़ी विजय और कोई नहीं है।
  • तनिक सा सच्चा प्रेम सुन्दर भाषणों की अपेक्षा अधिक काम कर जाता है।
  • अच्छी तरह हुकम देना जानने से पहले अच्छी तरह आज्ञा पालन करना आना चाहिए।
  • अपनी समस्याओं को भगवान् को सौंप दो और वे तुम्हें कठिनाईयों से बाहर निकाल लेंगे।
  • जब तुम चुप रहते हो तो कोई गलत चीज करने का खतरा नहीं रहता, जबकि बोलने पर दस मे से नौ बार कोई मूढ़ता भरी बात करने की संभावना रहती है।
  • चिन्ता इस बात की अचूक निशानी है कि अपना समर्पण सम्पूर्ण नहीं है।
  • जब तुम्हारे पास कुछ नहीं बचा रहता तब तुम्हें सब कुछ दिया जाता है। क्योंकि जो लोग सच्चे और निष्कपट हैं, उनके लिए निकृष्टतम में से सर्वोत्तम निकल आता है।
  • भगवान् की गोद में विश्राम लेने से सब कष्ट दूर हो जाते हैं, कारण ये गोद हमें आश्रय देने के लिए सदा खुली रहती है।
  • यह कभी भूलो की कठिनाईयाँ जितनी बड़ी होती हैं, हमारी सम्भावनायें भी उतनी ही बड़ी होती हैं। जिनमें बहुत क्षमतायें हैं, जिनके आगे बड़ा भविष्य है, उन्हें ही अधिक बाधाओं और कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है।
  • जब कभी तुम्हें अपने जीवन में कठिनाई का सामना करना पड़े तो उसे प्रभु की कृपा वरदान के रूप में लो और वह वही बन जायेगा।
  • अपनी कठिनाईयों को भूल जाओ, हमेशा भगवान् का कार्य करने के लिए अधिकाधिक पूर्ण यन्त्र बनने की कोशिश करो और भगवान् तुम्हारी सभी  कठिनाईयों पर विजय पा लेंगे और तुम्हारा रूपान्तर कर देंगे।
  • कठिनाइयाँ हमेशा प्रगति करवाने के लिए आती हैं। कठिनाईयाँ जितनी बड़ी होंगी, प्रगति उतनी ही बड़ी हो सकती है। अत: विश्वास रखो और उसे सहन करो।
  • सभी अग्नि परीक्षाओं के लिए कृतज्ञ हो जाओ, वे भगवान् की ओर ले जाने वाले सबसे छोटे मार्ग हैं।
  • तुम्हारे रास्ते में कठिनाईयाँ आती हैं इससे पता चलता है कि तुम्हारे अन्दर सम्भावनायें हैं, डरो मत, चलते चलो।
  • कठिनाईयों को जीतने के लिए आह की अपेक्षा मुस्कान में बहुत अधिक शक्ति है।
(साभार श्रीअरविन्द)

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