मौसमी बुखार कहीं बन न जाये डेंगू
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डॉ. आर.के. भटनागर,
पतंजलि योगपीठ
वर्षा ऋतु जिससे सभी पेड़-पौधे व प्रकृति में हरियाली का समावेश होता है। इसके साथ-साथ यह मौसम छोटी-छोटी बीमारियों के आगमन का कारक भी बनता है। इसी मौसम में एक बीमारी है वायरल फीवर, जिसे यदि नजरंदाज किया गया तो कुछ मच्छरों के प्रकोप से यह डेंगू का रूप धर सकता है। डेंगू खतरनाक ज्वर है, जो मच्छर के काटने से प्रारम्भ होता है, पर यदि वायरल है तो खतरा अधिक बढ़ जाता है। आइये इनसे बचाव के लिए वर्षा ऋतु से जुड़ी कुछ उपयोगी बातों पर ध्यान दें। |
डेंगू एक वायरस है, जो बरसात और फिर गर्मी की उमस में मच्छरों द्वारा फैलता हैं। डेंगू ज्वर (aedes) नाम के मच्छर द्वारा फैलता है। यह मच्छर साफ पानी में पनपता है, जैसे- कूलर के पानी में, खाली बर्तन में, खाली पड़े टायर में व अन्य वे सभी चीजें जिनमें पानी के भरने का स्थान हो। इस मच्छर की पहचान व रंग चितकबरा, सफेद व काला होता है। यह प्राय: शाम के समय काटता है, जिस कारण से मनुष्य को जलन व खुजली होती रहती है।
डेंगू मच्छर के काटने से मरीज को तेज बुखार, ठंड, कपकपी, सिरदर्द, कमर दर्द एवं शरीर पर लाल दाने व कमजोरी अनुभव होने लगती है, ये इसके प्रमुख लक्षण है । इसके उपचार के लिए मरीज को तुरन्त डाक्टर के यहां ले जाये। डेंगू ज्वर के होने से मनुष्य की ब्लड प्लेट्स भी कम हो सकती है। जिससे रोगी को काफी कमजोरी महसूस होती है।
इसके बचाव के लिए साफ-सुथरा पानी इक्टठा न होने दे, उस स्थान को साफ रखें, जिसमें पानी इक्टठा होने की सम्भावना है। साथ ही पूरी बांहों की कमीज व पूरी पैंट को पहने, जिससे मच्छर के काटने से बचा जा सके। अपने कमरो में खिड़कियों एवं दरवाजे पर जाली वाली फे्रम लगवायें, जिससे मच्छर को आपके घर में आने का मौका न मिले और डेंगू से बचा जा सके। इसके साथ-साथ वायरल बुखार से बचाव पर ध्यान दें, वर्षा ऋतु में उपर्युक्त अन्य प्रयोगों के साथ ही गरम पानी का प्रयोग करें।
पूज्य स्वामी जी के अनुसार वायरल फीवर से बचने में नित्य पांच तुलसी के पत्ते तथा दो नीम की कोपलें खाली पेट लें, साथ ही अदरक का अवश्य सेवन करते रहें। प्राणायाम को अपनी दिनचर्या का अंग बनायें तथा नियमित अल्प मात्रा में सलाद व अंकुरित अन्न का प्रयोग करें, साथ ही ज्वर नाशक, गिलोय घनवटी का सेवन करें।
इसके साथ-साथ यदि डेंगू ज्वर होने पर डेंगू ज्वर की रोकथाम के लिए पतंजलि योगपीठ द्वारा तैयार स्वदेशी उपचार से पूर्णत: आराम मिलता है। जिसमें प्रमुख हैं-
1. गेंहू के ज्वारे का रस
2. गिलोय रस व गिलोय क्वाथ का काढ़ा
3. गिलोय घनवटी
4. एलोविरा का जूस
5. पपीते के पत्ते का रस
6. ज्वर नाशक वटी या क्वाथ
इन औषधियों के नित्य सेवन से वर्षाऋतु जन्य ज्वर के साथ-साथ डेंगू से भी सहज बचा जा सकता है। पर रोगी को चिकित्सकीय परामर्श लेकर ही इनका सेवन कराना उचित होगा।
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01 Mar 2025 17:58:05
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