गर्मियों में कैसे करे पशुओं की देखभाल
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डॉ. बी.आर.जे. माथुर पशु चिकित्सक
पतंजलि ग्रामोद्योग (न्यास), हरिद्वार
वर्ष भर में जलवायु परिवर्तन होता रहता है और जलवायु के परिवर्तन के अनुसार ही ऋतु परिवर्तन भी होता है जैसे ग्रीष्म, शरद, हेमंत और वर्षाकाल। इन दिनों में प्रत्येक जीव को वायुमंडल का तापमान इसमें आद्रता, सूर्य का प्रकाश इत्यादि के अनुरूप अपने जीवन की दिनचर्या, खानपान, रहन-सहन इत्यादि में भी परिवर्तन करना पड़ता है। विभिन्न ऋत काल में विभिन्न प्रकार की बीमारियों का प्रकोप भी बढ़ता घटता है। उनसे बचने के लिए भी प्रत्येक जीव को अपनी दिनचर्या व रहन-सहन में परिवर्तन करना पड़ता है।
अभी ग्रीष्म ऋतु प्रारंभ हो गई है और इस ऋतु में जिस प्रकार मानव अपने आहार, रहन-सहन, वस्त्र इत्यादि में परिवर्तन करता है। ठीक उसी प्रकार पशुओं की भी ग्रीष्म काल में विशेष देखभाल करनी पड़ती है क्योंकि ग्रीष्म काल में जलवायु परिवर्तन होकर वायुमंडल के तापमान में बहुत वृद्धि हो जाती है, इसलिए पशुओं को गर्मी से बचाव हेतु खुले छायादार स्थान पर रखना चाहिए ताकि गर्मी एवं लू से उनको बचाया जा सके। पशुओं के पीने के पानी का विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता रहती है। इस ऋतु में पशुओं को स्वच्छ ठंडा पानी प्रचुर मात्रा में पीने के लिए उपलब्ध कराना कराया जाना आवश्यक है क्योंकि वायुमंडल का तापमान अधिक होने के कारण शरीर में से पानी का वाष्पीकरण तीव्रता से होता है। अत: शरीर में पानी की कमी डिहाइड्रेशन होने का खतरा बना रहता है। ऐसी स्थिति में कब्ज/ दस्त, रक्त में पानी की कमी और इलेक्ट्रोलाइट इंबैलेंस से ज्वर की संभावना रहती है। शरीर का तापमान बहुत बढ़ जाने के फलस्वरूप मस्तिष्क ज्वर एवं हीट स्ट्रोक होने का खतरा बना रहता है। हीटस्ट्रोक में पशुओं के शरीर का तापमान 104 से 105 डिग्री फारेनहाइट से भी अधिक हो जाता है और पशु में पागलपन के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। अंतत: पशु को मिर्गी जैसे दौरे पड़ने लगते हैं और उचित उपचार नहीं दिया जाय तो पशु की मृत्यु हो सकती है। सूर्य की तेज गर्मी से भी पशुओं का बचाव कर पशु को छायादार वृक्ष अथवा किसी हवादार पशु गृह में रखना चाहिए तथा आवश्यकता अनुसार पंखे एवं कूलर का भी प्रबंध किया जाना चाहिए।
गर्मी के कारण पशु तनाव में रहता है अत: तनाव कम करने के लिए पशु की शक्ति (एनर्जी) ज्यादा व्यय होती है इसलिए ज्यादा एनर्जी (कार्बोहाइड्रेट) युक्त पशु आहार खिलाना चाहिए। ठंडे पानी में घोल कर लवण एवं ग्लुकोजयुक्त पेय पदार्थ भी पिलाये जा सकते हैं। ठंडे पानी में गुड़ घोल कर भी पिलाया जा सकता है।
पतंजलि का शक्ति धारा नामक पशु पूरक आहार गर्मियों में पशुओं का तनाव कम करने के लिए रामबाण उपाय है। जैसा कि नाम से ही प्रतीत होता है यह शक्ति वर्धक तरल/ लिक्विड है। अत: बड़े दूध देने वाले तथा ग्याभिन पशुओं को भी लंबे समय तक पिलाया जा सकता है।
इसको पिलाने से ग्याभिन पशुओं में गर्भस्थ बच्चे का समुचित विकास होने के साथ-साथ अयन / गादी (स्रस्रद्गह्म्) का समुचित विकास होता है जिससे प्रसव के पश्चात् दूध उत्पादन अधिक होता है।
दुधारू पशुओं को गर्मियों में शक्तिधारा पिलाने से गर्मी के तनाव के कारण जो दुग्ध उत्पादन में कमी होती है वह रोकी जा सकती है। इतना ही नहीं पतंजलि का शक्ति धारा और पतंजलि मल्टीविटामिन पिलाने से दुग्ध उत्पादन में वृद्धि भी होती है।
पतंजलि मल्टीविटामिन भी दुधारू पशुओं में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि करता है तथा पशु को तनाव से बाहर निकाल कर स्वस्थ रखने में उपयोगी है। पतंजलि ग्रामोद्योग न्यास पशुओं को स्वस्थ एवं उत्पादनशील रखने के लिए निरंतर प्रयासरत है और गर्मी के तनाव को कम करने के लिए एक नया उत्पाद भी जल्द ही बाजार में उपलब्ध करवाने जा रहा है।
इस प्रकार गर्मियों में पशुओं को स्वस्थ एवं उत्पादनशील रखने के लिए पतंजलि दुग्धामृत पशु आहार आवश्यकतानुसार खिलाना चाहिए तथा पशुओं को तनाव रहित रखने के लिए शक्तिधारा, मल्टीविटामिन जैसे पशु पूरक आहार का उपयोग लाभप्रद रहता हैं।
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01 Mar 2025 17:58:05
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