हृदय रोग में 'लौकी रस’ रामबाण
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लौकी (घीया) का रस दिन में दो बार या एक बार लगातार 6 माह लेने से हृदय की धमनियों में आये अवरोध (ब्लॉकेज) खुल जाते हैं, घबराहट दूर होती है, हृदयशूल (एनजाइनापेन) से मुक्तिमिलती है, कोलेस्ट्रोल व ट्रग्लिजराइड्स निंयत्रित होता है, हृदय की कार्यशीलता (हार्ट वर्किंग) बढ़ती है, अम्लपित व आंत्रव्रण (अलसर) भी पूरी तरह ठीक हो जाता हैं। आंत, यकृत, आमाशय, पक्वाशन, प्लीहा को शक्तिमिलती है, हीमोग्लोबिन, रक्ताणुओं की कमी दूर होती है, अतिमासिक स्त्राव, अर्श (बवासीर), मन्दाग्नि, गैस व पाचन तन्त्र के रोग दूर होते हैं।
लौकी को गरम पानी से अच्छी तरह धोकर, बिना छिलका उतारें कद्दूकश करके सूती कपड़े से छानकर उसका 100 ग्राम रस निकाल लें। इस रस में सात पत्ते तुलसी व सात ही पत्ते पुदीना के पीस कर डालें। यह मिश्रण प्रात: खाली पेट व सायं को भोजन से एक या दो घंटे पहले लें। इसका कोई साईड इफैक्ट नहीं है। जिनको लौकी रस पीने पर पतला दस्त हो वे 50 ग्राम मात्रा से प्रारम्भ करें।
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01 Mar 2025 17:58:05
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