विद्यार्थियों के परीक्षाकाल में जरूरी है अभिभावकों की सहानुभूति
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डॉ. नरेन्द्र कुमार
दुश्चिंता एक ऐसी मन:स्थिति है, जो आजकल बच्चों में परीक्षा में बैठते समय या उससे पूर्व आ धमकती है, जिसके कारण उनमें बेचैनी और मानसिक तनाव की स्थिति पैदा हो जाती है। आत्मविश्वास कमज़ोर पड़ता है तथा हीनता के कारण परिणाम के प्रति आशंका जन्म लेती है और वे परीक्षा में अच्छी प्रकार से कार्य-निष्पादन (performance) नहीं कर पाते। दुश्चिन्ता के कारण बालक में निराशा, हतोत्साह (Nervousness) की संभावना भी देखने में आती है। छात्रों को चक्कर आने, साँस उखड़ने, नब्ज के तेज होने, रक्तदबाव (Blood Pressure) अधिक होने, अत्यधिक पसीना आने, मूर्छित हो जाने, सिर में दर्द होने जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है। इससे बचाव के लिए अध्यापक एवं माता-पिता द्वारा जागरूक रहकर पता लगाना आवश्यक है कि कहीं परीक्षा के दिनों में मानसिक तनाव, भय, आशंका के कारण उनके बच्चों को परीक्षा देने में बाधा तो नहीं आ रही। परीक्षा में औचित्यपूर्ण सफलता लाने एवं मानसिक तनाव को दूर करने हेतु अभिभावकों को अपने बच्चों के साथ सहानुभूतिपूर्वक निम्रलिखित प्रयास भी अवश्य करना चाहिए-
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परीक्षा में जाने से पूर्व बच्चों का माँ-बाप के साथ बराबर संवाद बना रहना आवश्यक है और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करते रहना चाहिए। साथ ही घर में हँसी-खुशी का माहौल रखें, बच्चों को अपनी क्षमताओं का अहसास कराते रहें और इस बात की चिन्ता से अपने बच्चों को मुक्त रखें कि उनके मित्र ने कितना अधिक कर लिया है।
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बच्चे भी परीक्षा के पूर्व तक बातचीत करके यदि कुछ तनाव अनुभव कर रहे हैं, तो उसे दूर करें।
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अभिभावकों को यह भी ध्यान रखना है कि परीक्षा के दिनों में छात्रों को पौष्टिक आहार एवं पेय पदार्थ उपलब्ध होता रहे।
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इस दौरान बच्चे यदि विधिवत् रूप से (Systematically) प्रतिदिन समय सारणी बनाकर अपना अध्ययन करें तो वे तनाव से बच सकते हैं।
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इसी प्रकार विद्यालयों में परीक्षा से कुछ दिन पूर्व काउंसिलिंग होनी चाहिए, जिसमें तनावभरी स्थिति न बने। छात्रों को अपनी प्राथमिकताएँ (Priorities) तय करने की सलाह दी जाय।
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परीक्षाओं के दौरान बैठने, पंखे आदि, पीने के पानी की ठीक व्यवस्था होनी चाहिए।
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अभिभावक मिल-बैठकर बनायें दिनचर्या:
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अधिकांश छात्र परीक्षा के दिनों में बहुत कम सोते हैं और परीक्षा के दिन से पूर्व की रात्रि बिना सोए हुए व्यतीत करते हैं। वे नींद न लेना अच्छा समझते हैं, जबकि यह बात ठीक नहीं है। बालक की अध्ययनशीलता की अभिभावकों को प्रशंसा करनी चाहिए और परीक्षा के दौरान उसे रात्रि में अधिक जागने, देर तक सोने के लिए हतोत्साहित करना चाहिए।
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नियमित योग के अंतर्गत प्राणायाम और व्यायाम करने से निश्चय ही अवसाद दूर होता है। नियमानुसार विधिवत सर्वांग आसन और अनुलोम-विलोम प्राणायाम का अभ्यास छात्रों के मानसिक तनाव को दूर करने में काफी हद तक सहायक सिद्ध होता है।
अभिभावक शिक्षक एवं छात्र तीनों को अध्ययन-दिनचर्या या समयचक्र बनाने में परस्पर सहायता करनी चाहिए।
साधारणतया परीक्षा के दौरान रात्रि में नींद न आने की बालक शिकायत करते हैं। इससे उनमें लगातार थकान एवं एकाग्रता का अभाव देखने में आता है। अत: छात्रों को परामर्श दिया जाना चाहिए कि वे निश्चिन्त होकर अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करें।
अनापेक्षित परिणाम का दबाव न दें:
परीक्षाएँ ही नहीं, बल्कि परीक्षा का अनपेक्षित परिणाम भी विद्यार्थियों में मानसिक तनाव उत्पन्न कर देता है। अच्छा परिणाम न पाने के कारण बच्चों को ताने और व्यंग सुनने का डर सताने लगता है। ऐसी स्थिति में अभिभावक यह ध्यान दें कि उनकी भूमिका बच्चे को दिलासा देकर अवसाद (Depression) एवं ऐसे डर से बाहर लाने की होनी चाहिए, न कि अवसाद बढ़ाने की। बच्चे को डाँटने-डपटने और आलोचना करने से उसका मनोबल कमजोर होता है। बच्चे को यह भी एहसास दिलाना चाहिए कि परीक्षा-परिणाम के ठीक न होने के कारण माता-पिता का रवैया नकारात्मक नहीं होगा, जिससे वह निराशा एवं हीन भावना से ग्रसित न हों।
परीक्षा-परिणाम को लेकर अभिभावक भी बच्चों के सामने तनावग्रस्त न हों। ध्यान रहे ऐसे समय बच्चों को सहानुभूति और दिलासा देने की जरूरत होती है।
विषय चुनाव की स्वतंत्रता:
परीक्षा समुचित परिणाम के साथ संपन्न हो, इसके लिए प्रवेश के समय ही बच्चों को अपनी अभिरुचि एवं रुझान के अनुरूप विषय चुनने की स्वतंत्रता देनी चाहिए। जहाँ इससे उसकी एकाग्रता बढ़ेगी, वहीं वे मानसिक तनाव एवं मनोरोगों से दूर रहेंगे। विषय महत्वपूर्ण नहीं होता, अपितु उसके प्रति छात्रों का समर्पण माने रखता है। अत: अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें, बल्कि उन्हें अध्ययन का समुचित वातावरण दें और उनके साथ प्यार से पेश आएँ।
अपनी महत्वाकांक्षा बच्चों पर न थोपें:
देखा गया है अभिभावकों की बच्चों से अत्यधिक महत्वाकांक्षा होती है। यदि बच्चा उनकी आकांक्षा के अनुरूप खरा नहीं उतरा तो उसकी आलोचना की जाती है। जो उसे अवसाद (डिप्रेशन) की ओर ले जाती है और वह हताशा से घिरता रहता है। ऐसे में बच्चे पलायनवादी प्रवृत्ति अपना लेते हैं। उच्च रक्तचाप, भूख न लगना आदि लक्षण दिखाई पड़ने लगते हैं।
अधिक गृहकार्य देने के कारण भी तनाव आता है, जिसके कारण बच्चे अनिद्रा, चिड़चिड़ेपन, भूख न लगने आदि समस्याओं से घिरते जाते हैं। ऐसे अवसाद के शिकार बच्चों को परामर्श (काउंसलिंग) की विशेष आवश्यकता होती है। ऐसे मामलों में परिवार में माता-पिता या भाई-बहन का उनके प्रति मित्रवत व्यवहार ही बच्चे की सहायता कर सकेगा।
बच्चों में योग-प्राणायाम, परमात्म सत्ता के प्रति यथासंभव आस्था जगाएँ। प्रोत्साहित करें। बच्चे के स्वभाव के अनुरूप किसी विषय में असफल होने पर अन्य संभावनाएँ भी खोजें। केवल एक असफलता के कारण बच्चे को निरुत्साहित न करें। क्योंकि यही उसकी प्रतिभा के मूल्यांकन का अंतिम मापदंड नहीं है। उसे प्रेमपूर्वक असफलता के कारणों को समझाएँ ताकि बच्चा किसी भी असफलता का साहसपूर्वक सामना करना सीख सके और भविष्य में असफल होने पर अवसाद के कारण हार मानकर बैठ न जाए।
वस्तुत: माता-पिता एवं शिक्षक का संतुलित एवं मनोवैज्ञानिक सहानुभूतिपरक व्यवहार जहां बच्चे में सुधार ला सकता है वही योग-प्राणायाम उसके विकास में सहायक सिद्ध हो सकता है। तब उत्तम परिणाम के लिए किसी को चिंतित होना नहीं पड़ेगा।
बच्चों की चिड़चिड़ाहट को समझें:
बच्चे परीक्षाकाल में मानसिक तनाव की स्थिति में होते हैं, तो उनका मन पढ़ाई से उचट जाता है। कई घण्टों तक सिर में दर्द रहना, छोटी-छोटी बातों पर नाराज होना, अत्यधिक पसीना आना, बेचैनी अनुभव करना, किसी काम में रुचि न होना, हतोत्साहित या चिड़चिड़ापन और नकारात्मक सोच रखना आदि लक्षण पाए जाने पर उसे मनोचिकित्सक के पास ले जाना चाहिए। यदि उपर्युक्त लक्षणों के पाए जाने पर उचित निदान न किया जाए तो छात्र के गलत रास्ते पर जाने का भय रहता है। छात्रों से जरूरत से ज्यादा आशा करने के कारण भी वे मानसिक तनाव के कारण अवसाद की स्थिति में आ सकते हैं। अत: अभिभावक जब भी बच्चों में लगातार तनाव के कारण चिड़चिड़ापन, छोटी-छोटी बातों में बहुत क्रोध करना, नींद न आना, भूख-प्यास न लगना, खोया-खोया सा रहना, अकेलापन, गुमसुम बैठे रहना आदि लक्षणों को देखें, तो उन्हें बच्चों की भावनाओं एवं मानसिकता को समझने की कोशिश करनी चाहिए।
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01 Mar 2025 17:58:05
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