अनुभूति आपकी
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Negative Symptoms of Schizophrenia
हेतु सारस्वतारिष्ट श्रेष्ठ औषधि साबित हुई
मुझे डिप्रेशन था, मैं पढ़ नहीं पा रहा था। तब मैंने डॉ. से बोला कि मैं ढंग से पढ़ नहीं पाया, मुझे डिप्रेशन है। डॉ. जोएल को लगा मुझे ''Schizophrenia" है? उन्होंने मुझे Risperidone नामक गोली दी जो मेरे लिए अत्यन्त पीड़ादायक साबित हुई।
पुन: Amisulpride 200mg sustained टेबलेट लिया तो उससे भी मुझे अत्यन्त पीड़ा हुई। ऐसा लगा की कोई तेज़ाब मेरे मस्तिष्क में चला गया है एवं मेरी नाड़ियों को दूषित कर रहा है। मुझे लगा कि sucide कर लेना चाहिए। एक अन्य डॉक्टर ने मुझे कहा था की Amisulpride से ही मेरा यह रोग ठीक हुआ था। अत: मैंने बार-बार Amisulpride लिया। हर बार मुझे सन्निपातज उन्माद जैसा लगा। Suicidal लगा। इस गोली को खाने पर अत्यन्त भयावह दशा हो जाती। अत्यन्त तीक्ष्ण द्वेषपूर्ण मन:स्थिति बनने लगी। तब चिकित्सकों के निर्देश पर इस अत्यन्त पीड़ादायक, सन्निपातज उन्माद जैसी अवस्था को प्राप्त कराने वाली Amisulpride को लेने के साथ-साथ हमने पतंजलि की सारस्वतारिष्ट भी लेना प्रारम्भ किया। सारस्वतारिष्ट इतनी अद्भुत औषधि साबित हुई कि Amisulpride जैसी अत्यन्त पीड़ादायक ड्रग के प्रभाव को भी इसने न्यून कर दिया। अर्थात् दोनों - ड्रग और औषधि लेने पर, औषधि अर्थात् सारस्वतारिष्ट का सकारात्मक प्रभाव दिखने लगा। दिव्य पतंजलि 'सारस्वतारिष्ट’ सन्निपातज उन्माद को भी ठीक करने में अत्यन्त लाभदायक औषधि सिद्ध हुई। आज मैं अपने प्रत्यक्ष अनुभव से कहता हूँ कि सारस्वतारिष्ट औषध का सेवन सर्वश्रेष्ठ है।
जिन केमिकल से कभी परमाणु प्रक्षेपास्त्र बनाए जाते थे, उन्हीं का उपयोग ''Schizophrenia " में होते हैं। जैसे Atom Bomb विध्वंस करता है, वैसे ही इनके Dopamine Antagonist करते हैं, मस्तिष्क में विस्फोट करते हैं। Atom Bomb और Atom Bomb और Dopamine Antagonist दोनों में केमिकल होता है।
मैं बार-बार मूल्यांकन के पश्चात कह रहा हूँ कि इसका सेवन करने एवं श्रेष्ठ आचरण से लाभ होता है। मैं आयुर्वेद के महान आचार्य धन्वन्तरि जी महाराज को कोटि-कोटि प्रणाम करता हूँ, जिन्होंने अपने पुरुषार्थ से यह अत्यन्त दिव्य एवं अत्यंत अद्भुत औषधि का निर्माण किया। मैं वर्तमान समय अर्थात् विक्रम सम्वत २०७२ के अग्रणी आयुर्वेदाचार्य 'आचार्य बालकृष्ण जी’ एवं स्वामी रामदेव जी महाराज का कोटि-कोटि धन्यवाद करता हूँ, जिन्होंने अपने पुरुषार्थ से इस औषधि का ठीक-ठीक निर्माण कराया और जन-जन तक पहुँचाया। मैं सभी लोगों से इस औषधि का सेवन करने एवं लाभ प्राप्त करने की अभिलाषा भी रखता हूँ।
इसी भाव से शत्-शत् प्रणाम।
भवदीय,
डॉ. विवेक आर्य
आँखों के लिए रामबाण बनी 'दृष्टि'
मैं देवन, उम्र ६४ वर्ष, रिटायर्ड प्र. अधिकारी, युनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस हूँ। मैं इस पत्र के माध्यम से आपको ढेरोंढेर धन्यवाद देना चाहता हूँ। कारण कि लगभग दो महीने पहले अचानक मुझे बांई आंख में अज़ीब तकलीफ हुई, सोचा चश्मा खराब हो गया है। इसलिए पुन: जाँच कराया, नया चश्मा लिया पर तकलीफ बरकरार रही। चूंकि घर का मुखिया हूँ, सोचा अगर घर में बात खोली तो आंखों के डॉक्टर के पास जाना पड़ेगा और अड़ोस-पड़ोस, मित्र, सहयोगी बंधुओं से उनका अनुभव सुन चुका था कि आंखों का डॉक्टर दस-बीस हजार साफ करने में एक दिन भी नहीं लगाता और मेरी इच्छा नहीं थी कि मेडिक्लेम के दस-बीस हज़ार बर्बाद करूं। ख्याल आया आपकी नन्हीं सी शीशी 'दृष्टि’ का और उसे २५ रुपये में ले आया। रोज़ रात को सोते समय एक-एक बूंद आंख में डालने लगा, आज भी डाल रहा हूँ। आश्चर्य कि मैं अब काफी अच्छा महसूस कर रहा हूँ। मेरे लिए आंख की इससे अधिक रामबाण दवा नहीं दिखी।
भवदीय,
देवन
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01 Mar 2025 17:58:05
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