लम्बी बीमारी से पीड़ित अवसादग्रस्त लोगों में सहायक है 'योग’

लम्बी बीमारी से पीड़ित अवसादग्रस्त लोगों में सहायक है 'योग’

डॉ. शरली टेल्लस, निर्देशिका, पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन व ठ्ठ शिवांगी पाठक, रिसर्च फैलो

   हर रोग जीवन के लिए घातक है, पर अवसाद की अवस्था खतरनाक मानी जाती है। यह व्यक्ति के जीवन को तोड़कर रख देती है। अवसाद का मूल कारण है लम्बी बीमारी। इस संदर्भ में हम 48 वर्षीय पुरुष एवं 40 व 60 वर्षीय दो महिलाओं की दशा पर दृष्टि डालेंगे, जो बाद में लम्बी बीमारियों के कारण अवसाद के शिकार बने।
48 वर्ष के श्री 'अपने कार्य में व्यस्त रहते हैं और अपने दोनों बच्चों को अच्छी से अच्छी शिक्षा दिलाना चाहते हैं। इसके अलावा वह अपनी पत्नी को सभी आरामदायक सुविधायें उपलब्ध कराना चाहते हैं, जिनकी वे निरन्तर मांग करती रहती हैं। इन कारणों से ही श्री क तनाव ग्रस्त रहते हैं। वे शारीरिक व्यायाम और समय पर भोजन करने के लिए भी मुश्किल से ही समय निकाल पाते हैं। वह Type-II -II diabetes or boarderline hypertension से पीड़ित हो चुके हैं, जिससे उनका तनाव और भी बढ़ जाता है। वह निरन्तर यह चिन्ता करते रहते हैं कि 'यदि वह बीमार हो गये तो उनके परिवार का जीवन यापन व जीवन प्रबंध किस प्रकार से होगा।
श्रीमति '60 वर्षीया हैं। पिछले कई वर्षों से उनका वजन बढ़ रहा है। उन्हें घुटनों में तीव्र दर्द की भी शिकायत रहती है। चिकित्सकीय परीक्षण कराने पर पता चला कि उन्हें Osteo-Arthritis नामक बीमारी है। वह अपना वजन कम करने के लिए व्यायाम करना चाहती हैं, परन्तु घुटनों में तीव्र दर्द होने के कारण ऐसा नहीं कर पाती। यहाँ तक कि वे अपने पड़ोसी के साथ बाजार भी नहीं जा पातीं, जिसमें अक्सर आनंदित महसूस करती थी। अब वह मंदिर जाने में भी पीड़ा का अनुभव करती हैं। अब सभी कार्य उनके लिए पीड़ादायक हो गये हैं।  इसी वजह से मिजेस 'अवसाद (Depression) का अनुभव करने लगी हैं।
कु० 'चालीस वर्षीय स्वतंत्र महिला हैं। वह अपने कार्यक्षेत्र में बहुत सफल हैं। यद्यपि उन्हें तीव्र अस्थमा है और जब भी मौसम बदलता है, उन्हें छींके सहित बुखार आता है तथा आंख और नाक से निरन्तर पानी बहने लगता है। वह Antihistamine नहीं लेना चाहतीं, क्योंकि इसकी वजह से वह निद्रालु अनुभव करती हैं। ऐसी परिस्थितियों में वह तनाव ग्रस्त महसूस करने लगी हैं।
जीर्ण रोग भी एक कारण:
जीर्ण बीमारी भी लम्बे समय तक चलने वाली स्थिति है, जिसे हम नियंत्रित कर सकते हैं, परन्तु पूर्ण रूप से इसका इलाज कठिन है। जीर्ण बीमारी पूरे विश्व में एक बड़ी जनसंख्या को प्रभावित कर रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े के अनुसार जीर्ण बीमारियाँ समय से पूर्व मृत्यु का एक बहुत बड़ा कारण भी बन रही है।
हृदय संबंधी बीमारी (Heart Diseases), कैंसर (Cancer), स्ट्रोक (Stroke), मधुमेह (Diabetes), अर्थराइटिस (Arthritis) तथा मोटापा जीर्ण बीमारियों की परिणति भी है। जो इन बीमारियों से पीड़ित होते हैं वह अवसाद ग्रस्त भी हो जाते हैं। यहाँ तक कि अवसाद जीर्ण बीमारियों से होने वाली परेशानियों में से एक है। जीर्ण बीमारियों के कारण होने वाला अवसाद Reactive अवसाद के नाम से जाना जाता है।
अधिकांशत: जीर्ण बीमारियों से ग्रसित होने वाले लोग निराशावादी और दु:खी होते हैं। कुछ परिस्थितियों में तो जीर्ण बीमारियों के कारण शरीर पर होने वाले प्रभाव या जीर्ण बीमारियों के उपचार के लिए प्रयोग किये जाने वाली दवाईयाँ भी अवसाद का कारण बनती हैं।
'अवसादहोने के कई अन्य कारण भी होते हैं जैसे दर्द, गतिशीलता में कमी, आय में कमी, खर्च में अधिकता, बेरोजगारी, अपमान जनक संबंध, लम्बे समय तक कार्यस्थल पर तनाव आदि। यदि आप अवसाद ग्रस्त होते हैं, तो इस प्रकार का अनुभव आपके दैनिक जीवन को प्रभावित करता है और आपके दर्द का कारण भी बनता है।
अवसाद के अन्य कारण :
  • निराशावादी भावनायें।
  • लगातार उदास, चिंतित या खाली रहने की भावना।
  • अपराध या लाचारी की भावनायें।
  • चिड़चिड़ापन, बेचैनी।
  • दर्द, सिरदर्द, ऐंठन या पाचन संबंधी समस्यायें, जो इलाज उपचार के बाद भी ठीक नहीं हो पाते।
  • सरल निर्णय लेने में भी असमर्थता जैसे कि दुकान पर समान लेने जाऊँ या ना जाऊँ वाली मनोदशा।
  • जो आदतें खुशी महसूस कराती थीं उनमें भी अरुचि आना।
  • थकान व ऊर्जा का अभाव।
  • एकाग्रता में मुश्किल, विवरणों को याद करने में मुश्किल तथा निर्णय लेने में कठिनाई।
  • अनिद्रा, सुबह जल्दी जगना या अत्यधिक नींद का आना।
  • भूख की कमी या भूख का ज्यादा लगना।
  • आत्महत्या का विचार तथा प्रयास।
उपर्युक्तलक्षणों के आधार पर अवसाद के दो प्रकार स्पष्ट होते हैं-
1.     मानसिक अवसाद (Psychotic Depression): इस प्रकार की स्थिति में व्यक्तिविभ्रम का अनुभव करने लगता है तथा वास्तविकता से दूर हो जाता है। साथ ही व्यक्ति इस बात से भी अनभिज्ञ रहता है कि वह किसी समस्या से पीड़ित है। विभ्रम, भ्रांति व Latatoni जीर्ण जैसे विचार संबंधी रोग इसी श्रेणी में आते हैं।
2.     न्यूरोटिक अवसाद (Neurotic Depression): अवसाद की इस स्थिति में व्यक्ति चिंता या किसी विशेष स्थिति से भय आदि का अनुभव करता है। इस प्रकार के व्यक्ति को यह ज्ञात रहता है कि वे अमुक समस्या से पीड़ित है। चिंता, उदासी, गुस्सा, चिड़चिड़ापन न्यूरोटिक अवसाद के ही लक्षण हैं।
अवसाद निवारण में योगपरक उपाय:
'योगस्वास्थ्य संबंधी जीर्ण समस्याओं जैसे चिंता और अवसाद के लिए एक सुरक्षित और असरकारक समाधान है। योगाभ्यास करने से हमारी ग्रंथियों (Glands) और शरीर को ऊर्जा प्रदान करने वाले अंगों पर दबाव पड़ता है, जो उन्हें सुचारु रूप से चलाने और उनसे स्रावित होने वाले रसायनों को नियंत्रित करने में मदद करता है और हम अच्छा अनुभव करते हैं, हमारा शरीर स्वस्थ बनता है। योगाभ्यास हमारे परिसंचरण तंत्र को भी सशक्त करता है, जिससे हमारे मस्तिष्क और मांसपेशियों में ऑक्सीजन भली प्रकार से पहुँचती है।
जब जीर्ण बीमारी हृदय संबंधी हो, तब हमें तीव्र यौगिक क्रियाओं से बचना चाहिए या फिर किसी कुशल योग चिकित्सक के परामर्शानुसार ही उपचार करना चाहिए।
यहाँ हम कुछ यौगिक क्रियायें प्रस्तुत हैं जोकि न्यूरोटिक अवसाद को नियंत्रित करने के लिए उपयोगी हैं।
आसन:
अर्द्धकटिचक्रासन, पाद्हस्तासन, अर्द्धचक्रासन, भुजंगासन, शलभासन, विपरीतकरणी, शशांकासन, वक्रासन, अर्द्धउष्ट्रासन, मत्सस्यासन, श्वासन तथा योग निद्रा।
प्राणायाम:
लंबी गहरी श्वास, कपालभाति (४० राउंड प्रति मिनट, भस्त्रिका, भ्रामरी और उद्गीथ)।
योगाभ्यास के अन्त में श्वासन में लेटकर, योगनिद्रा का अभ्यास जरूर करना चाहिए, इससे हमारे मन तथा शरीर में आनन्द का अनुभव होता है। योगाभ्यास हमारे शरीर से विषैले तत्वों को भी बाहर निकालता है।
अवसाद निवारण में घरेलू उपाय:
अवसाद से आराम पाने के लिए हमें पर्याप्त मात्रा में नींद लेना बहुत आवश्यक है। अनिद्रा या नींद की कमी अवसाद का एक मुख्य कारण है। इसके अलावा व्यक्ति को अपने मित्रों के साथ भ्रमण पर जाना चाहिए। बहुत लंबे समय तक अकेले नहीं बैठना चाहिए। व्यक्ति को किसी मनोरंजन में व्यस्त रहना चाहिए, ताकि वह आनन्दित अनुभव करे। सुबह टहलने से भी मस्तिष्क में ऑक्सीजन प्रचुर मात्रा में पहुँचती है, जो कि अवसाद के लक्षणों को कम करने में सहायता करती है। अवसाद से मुक्ति पाने के लिए स्वस्थ आहार भी बहुत आवश्यक है। कुछ भोज्य पदार्थ जैसे- सोयाबीन, प्रोटीन, विटामिन 'सीसे युक्त फल, हरी पत्तेदार सब्जियाँ अवसाद से लड़ने और उससे छुटकारा दिलाने में प्राकृतिक रूप से सहायक होते हैं। इसके अलावा शराब के सेवन तथा धूम्रपान से भी बचना चाहिए। क्योंकि इसका सेवन मस्तिष्क को अवसाद की स्थिति में ले जाता है। व्यक्ति को पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करना चाहिए क्योंकि पानी व्यर्थ रासायनिक पदार्थों को शरीर से निकालने में मदद करता है।
अवसाद निवारण के अन्य प्राकृतिक उपाय:
  • दिव्य मेधावटी: यह अवसाद के इलाज के लिए सर्वोत्तम प्राकृतिक समाधान है जो मस्तिष्क को शांत रखता है तथा दु:ख और उदासी से छुटकारा पाने में सहायता प्रदान करता है। इसके अलावा यह व्यक्ति को सामान्य मानसिक अवस्था में लाने में भी मदद करता है।
  • दिव्य मोती पिष्टी: यह दु:ख और उदासी में तुरन्त लाभ पहुँचाता है।
  • दिव्य प्रवाल पिष्टी: यह मस्तिष्क को पौष्टिकता प्रदान करता है तथा मस्तिष्क में रक्त की पूर्ति को बढ़ाता है। क्रोध व अवसाद से मुक्ति दिलाता है।
  • दिव्य गोदन्ती भस्म: यह अवसाद के लक्षणों से मुक्ति दिलाती है तथा एकाग्रता को बढ़ाती है। यह मस्तिष्क के लिए एक टॉनिक का काम करती है तथा मस्तिष्क संबंधी रोगों को जड़ से खत्म करती है।
  • दिव्य मेधा वटी: यह मस्तिष्क को आवश्यक पोषण उपलब्ध कराने में सहायक है। अवसाद की स्थिति में मस्तिष्क में ऑक्सीजन की पूर्ति को बढ़ाकर तुरन्त लाभ करने में भी सहायता करती है। यह स्मृति और एकाग्रता को बढ़ाने के लिए सर्वोत्तम उपाय है।

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