राष्ट्र-निर्णायकों की दृष्टि में पूज्य स्वामी जी महाराज की दिव्य योगयात्रा
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माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
आप कल्पना कर सकते हैं कि एक व्यक्तित्व जो अहर्निश, एकनिष्ठ, अखंड, अविरल, वन लाइफ वन मिशन, चरैवेति-चरैवेति इस देश में लगातार भ्रमण करते रहे। प्रतिदिन डेढ़-डेढ़, ढाई-ढाई लाख लोगों को योग के माध्यम से प्रेरित करते रहे।
मैंने बाबा जी से पूछा कि योग से उर्जा प्राप्त होती है, स्वास्थ्य प्राप्त होता है, उमंग रहती है, वह सब तो है, लेकिन चारों तरफ से इतनी यातनायें आती हों, उसको झेलने की ताकत उनमें कहां से आती है।
बाबा रामदेव निकले थे नागरिकों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए, वह निकले थे, ताकि योग के माध्यम से गरीब व्यक्ति अपने आपको स्वस्थ रख सके। वह निकले थे, क्योंकि जो महंगी दवा गरीब को बचा नहीं सकती है, उसे योग
बचा सकता है।
अरुण जेटली, सूचना एवं प्रसारण मंत्री, भारत सरकार
महात्मागांधी ने संघर्ष कर देश को आजाद कराया और खुद बड़ा त्याग करते हुए सत्ता से दूर रहे। इसी तरह वर्ष 1977 में जय प्रकाश नारायण ने आंदोलन किया जिसके बाद सत्ता परिवर्तित हुई। जय प्रकाश भी सत्ता से दूर रहे थे। वर्तमान में बाबा रामदेव ने भी व्यवस्था परिवर्तन के लिए संघर्ष किया, लेकिन खुद राजनीति व सत्ता से दूर रहे।
नितिन गडकरी, केन्द्रीय सड़क परिवहन राजमार्ग व जहाजरानी मंत्री, भारत सरकार
भारत में हमेशा ही राजसत्ता का मार्गदर्शन अध्यात्म सत्ता ने किया है। उसी अवधारणा का निर्वाह किया है स्वामी रामदेव जी महाराज ने। उनकी नीतियां वर्तमान भारत की प्रतिष्ठा के लिए महत्वपूर्ण हैं। हम उसी दिशा में कदम बढ़ाएंगे। स्वामी जी ने राष्ट्र के इस ऐतिहासिक चुनाव को लेकर पहले ही पार्टी को विजय आशीर्वाद दे दिया था जो पूर्ण हुआ।
डॉ एच आर नगेन्द्र, चांसलर, एस-व्यासा विश्वविद्यालय
स्वामी रामदेव जी के महान कर्म से योग दुनियां के कोने-कोने में प्रसारित हो रहा है। इसी प्रकार योग विश्वकोश भौतिक विश्व के आगे कहां और कैसे जाना है, यह विश्वकोश उस दिशा के लिए महत्वपूर्ण देन है, इसे निश्चित ही विश्व भर में मान्यता मिलेगी।
डॉ प्रणव पण्ड्या, कुलाधिपति देवसंस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार
योग को जन-जन तक पहुंचाने का श्रेय एक अकेले व्यक्ति स्वामी रामदेव जी को जाता है। आपने उत्तर, दक्षिण, पूरब, पश्चिम को योग के माध्यम से एक कर दिया। स्वस्थ शरीर, स्वच्छ मन और सभ्य समाज की रचना इसी योग से होगी, वस्तुत: स्वामी जी युग के पतंजलि हैं। अब भारतीय संस्कृति को कोई हिला नहीं सकता, आचार्य बालकृष्ण जी के पुरूषार्थ से उपजा यह विश्वकोश निश्चित ही विश्व के विश्वविद्यालयों के अध्ययन का विषय बनेगा।
डॉ बीरेन्द्र हेगडे, धर्माधिकारी धर्मस्थला
मै टेलीविजन द्वारा स्वामी जी के साथ-साथ योग करता हूं, स्वामी जी ने दुनियां के लिए अमरता भरा कार्य करके स्वयं अमर हो चुके हैं, अब स्वामी जी शाश्वत रहेंगे। स्वामी जी के कारण ही यह योग अब केवल अमीरों का नहीं रहा, अपितु गरीबों के लिए खुल गया है। आचार्य बालकृष्ण जी के कारण आयुर्वेद के प्रति लोगों की दृष्टि बदली है। हमारी चाहत है कि भारत सरकार इस योग को दुनियां भर में निर्यात करे।
राष्ट्रसंत मोरारी बापू
भागवत कथा को छोटे से कमरे के अंदर से मैदान में उतारने का श्रेय डोगरे जी महाराज को है, उसी तरह योग को विश्व भर में स्थापित करने का श्रेय स्वमी रामदेव जी को जाता है। वास्तव में विश्वयोग दिवस की स्थापना में इस फकीर का सबसे बड़ा योगदान है। मैं इस बाबा जी का साप्ताहिक चिंतन करके अपना योग पूर्ण करता हॅूँ। यह योग विश्वकोश मात्र एक ग्रंथ नहीं, अपितु यह एक योगी का मस्तक, विचार और प्रज्ञा है, उसके बोध का मंगलमय स्वरूप है।
गुरु शरणानंद जी महाराज, अध्यक्ष मानव सेवा संघ, वृंदावन
स्वामी रामदेव जी और बालकृष्ण दोनों का समुच्चय है पतंजलि योग पीठ का यह योग आंदोलन। जैसे दवायें नास्तिक-आस्तिक सभी के लिए उपयोगी होती हैं, वैसे ही योग है, जिससे आधि, व्याधि का शमन एवं उपाधि का पाना सम्भव है। विश्व में वैमनस्य जैसे दोष का मूल कारण अज्ञान है, योग विश्वकोश उसी अज्ञान को दूर करने का शक्ति ग्रंथ है। यह शोध परक ग्रंथ हर योग क्षेत्र के शोधार्थी के लिए उपयोगी होगा।
स्वामी चिदानंद मुनि सरस्वती, अध्यक्ष, परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश
साइकिल चलाने वाला, संत परम्परा की भिक्षा से निर्वाह करने वाला यह ऋषि आज दुनियां को योग दे रहा है, जिस देश में ऐसा लाल होगा, उस देश की संस्कृति विश्व भर में प्रतिष्ठित ही होगी। विश्व को अच्छा सोचने व स्वस्थ होने के लिए योग चाहिए ही, आज भारत करवट बदल रहा है, नया इतिहास लिख रहा है, योग इसमें भी महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा।
जैन मुनि रूपचंद्र जी महाराज संस्थापक मानव मंदिर गुरुकुल, नई दिल्ली
योग की वर्तमान प्रसिद्धि के पीछे प्रमुख कारण स्वामी रामदेव जी द्वारा योग को स्वास्थ्य से जोड़ना है,
वस्तुत: विज्ञान हमें शक्ति से जोड़ता है, जबकि योग शिव से। भविष्य में विज्ञान और धर्म के मिलन का पर्याय होगा योग।
जैन मनीषी विवेक जी महाराज, इंटरनेशनल महावीर जैन मिशन
सत्य, अहिंसा, शांति के लिए आचार्य श्री द्वारा योग विश्वकोश का निर्माण व संग्रह करने का भागीरथ पुरूषार्थ विश्व को योग की ज्ञानगंगा के रूप में प्राप्त हो रहा है, जिसके लिए विश्व उनका ऋणी रहेगा।
मौलाना कल्वे रिजवी
जो लोगों के पापों को धुलती है वह गंगा है, जो करोड़ों लोगों के दिलों को जोड़े वह है स्वामी रामदेव। इन्होंने दुनियां के लिए योग के द्वार खोले हैं इससे दुनियां की सेहत ठीक होगी और रोगों में फंसी दुनियां की तरक्की का मार्ग खुलेगा। मक्का की रोटी, सरसों के साग व पराठे पर किसी हिन्दू, मुश्लिम या ईसाई का नहीं केवल भूखे का नाम लिखा होता है, योग ठीक वैसे ही है।
मुफ्ती शमून काज़मी
पतंजलि में दो संत हैं जिन्हें देखकर हमें ईश्वर याद आते हैं, स्वामी जी व आचार्य श्री ये दोनों ने मिलकर योग के माध्यम से विदेशी का बहिष्कार किया है, जिससे देश में एकता व नेकता आयेगी, इसलिए जरूरत है हम सब भी योग करें। जैसे लोग कभी पोलियों ड्राप के प्रति भ्रांति फैला रहे थे, वैसे ही योग के प्रति भ्रम फैला रहे हैं। जिससे कि हम बीमारियों में पड़े रहें और हमाारा विकास रुक जाय। वस्तुत: विकास चाहिए तो योग करो।
मुफ्ती शमून काज़मी
पतंजलि में दो संत हैं जिन्हें देखकर हमें ईश्वर याद आते हैं, स्वामी जी व आचार्य श्री ये दोनों ने मिलकर योग के माध्यम से विदेशी का बहिष्कार किया है, जिससे देश में एकता व नेकता आयेगी, इसलिए जरूरत है हम सब भी योग करें। जैसे लोग कभी पोलियों ड्राप के प्रति भ्रांति फैला रहे थे, वैसे ही योग के प्रति भ्रम फैला रहे हैं। जिससे कि हम बीमारियों में पड़े रहें और हमाारा विकास रुक जाय। वस्तुत: विकास चाहिए तो योग करो।
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01 Mar 2025 17:58:05
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