माँ बहनों को मिलना पूरा सम्मान चाहिए
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डॉ. सुमन, मुख्य (महिला), केन्द्रीय प्रभारी, पतंजलि योग समिति
माँ बहनों को मिलना पूरा सम्मान चाहिए
नारी को पूजा करता वो हिन्दुस्तान चाहिए।
1. पृथ्वी से भारी नारी, रही सोच सनातन हमारी।
सुर नर की यह महतारी, सृजन की एकाधिकारी
माता की महिमा भारी, होना गुणगान चाहिए। ...
2. यह श्रद्धा प्रेम की देवी, तपत्याग की भोली सूरत
आत्मदान स्वभावी, करूणा ममता की मूरत
मा साकार ब्रह्म धरती पे, ये होना ज्ञान चाहिये। ...
3. वाणी में अमृत सरिता, नयनों में करुणा सागर
सब जग पीड़ा मिट जाती, मुस्कान एक तेरी पा कर
तेरे हृदय की छाया में आकर, लेना विश्राम चाहिए। ...
4. है स्वार्थ भाव से चलता, इस जग का सब व्यवहारा
तेरा निष्काम कर्म में बीते, उत्सर्ग का जीवन सारा
इस संस्कृति की पावन धारा को ना व्यवधान चाहिए। ...
5. सब खोकर पाना सीखे, कोई माता मेरी तुझसे
सम्मान प्रेम पिपासु नर की, तृप्ति एक तुझ से
तू सृष्टि का चक्र चलाये, आत्म अभिमान चाहिए। ...
6. मां प्रथम गुरू बालक की, सदाचार का पाठ पढा दे
निर्माता भवति माता, मन चाही औलाद बना दे
उस आद्य: शक्ति की अब तो होनी पहचान चाहिए। ...
7. धरती माता की बेटी, मर्यादा कुल की उचारे
कोई करे अहसान एक कण का, उसे मण देकर के उतारे
इस कामधेनु, कल्पवृक्ष की ऊंची शान चाहिए। ...
8. बिन पत्नी नहीं सुरसता, सौहार्द नहीं बिन बहना
बिन मां के प्र्रेत है मानव, बेटी बिन स्नेह मिले ना,
नजरें पसार कर देखो गर प्रमाण चाहिए। ...
9. गृहस्थ बनाती चलाती, रखती है उसे सजाकर
अपने ही आकर्षण से, रखती है सबको जंचाकर
खिले मुदित कलि हर और वह उद्यान चाहिए। ...
10. प्रेम प्रसून खिलाती, सेवा सौरभ फैलाती,
तप-त्याग की बनकर देवी, सृजन पोषण करपाती
मानव तू ही बनाती धन्य निर्माण चाहिए। ...
11. वधु होती घर की शोभा, दो कुल की लाज इसी से,
कटवा दे नाक कुटुंब की, प्रतिष्ठा का नाज इसी से
सब पूर्ण काज इसी से देना ध्यान चाहिए। ...
12. मणि पारस अन्नपूर्णा, जगती की ऋद्धि-सिद्धि
यह सोम बेल तुलसी है, इस सत्य की हो प्रसिद्धि
नारी दुर्लभ रतन जहां का, होना ज्ञान चाहिए। ...
13. यह धर्मपत्नी कहलाती, सदा माने धर्म पति का
पति भी तो ऐसा चाहिए, जो पाले धर्म सती का
गुण गाता ऐसी मति का सकल जहान चाहिए। ...
14. कैयट कालीदास तुलसी को, पत्नी ने आगे बढ़ाया
शिवा गांधी इब्राहिम को माता ने महान बनाया
पद्मिनियों ने जौहर दिखाया वो राजस्थान चाहिए। ...
15. हर सफल मर्द के पीछे, पावोगे छुपी एक नारी
पत्नी-मां-बेटी-बहना, स्तन कामधेनु के चारी
स्वर्ग से ऊंचा तेरे चरणों का स्थान चाहिए। ...
16. दश लक्षण धर्म के पीकर, बना करती है एक माता
सुने पूत कपूत हजारों, ना माता सुनी कुमाता
अब जगदम्बे पूजन का बड़ा अनुष्ठान चाहिए। ...
17. उत्सर्ग स्वभाव है तेरा- सेवा सहयोग धर्म है
निष्काम कर्म का तूने, लिया सीख बखूबी मर्म है
तेरा कवच शील व शर्म है, तुझे प्रणाम चाहिए। ...
18. बेटी कैसे पाई थी, कोई पूछे-जनक से जाकर
द्रुपद व अश्वपति भी हुये, धन्य सुता को पाकर
बेटी को बचाओ पढ़ाओ, स्वर गुंजान चाहिए। ...
19. हो समझ सुनयना जनक सी, तो जन्मेगी उर्मिला सीता
तप तारावती के कारण, सत्य हरिश्चन्द्र का जीता
बिन नारी जगत फजीता प्रकट फरमान चाहिए। ...
20. मति मारी गई जगत की, पूज्या को भोग्या बनाया
जी भर के किया है शोषण, कृतज्ञता भाव बिसराया
इस पतित सोच का अब होना उत्थान चाहिए। ...
21. इस दिव्य शक्ति को जग ने, दी बना चीज बाजारी
कहीं दहेज रेप से पीड़ित, कहीं गर्भ में जा रही मारी
ये सब कलमश धुल जाऐं वो गंगा स्नान चाहिए। ...
22. यह पुरुष बड़ा जाहिल है, मेाहक पाशों में फंसाता
तेरी योग्यता व क्षमता को, चतुराई के साथ दबाता
कुत्सित चालों को अब तो मिलना विराम चाहिए। ...
23. रोटी कपड़ों के मूल्य पर नौकरानी आठ पहर की
क्रिड़ा विनोद मुफ्त में, सहे अहंकार सोहर की
औलाद भी पड़े बनानी, पीड़ा को ब्यान चाहिए। ...
24. बन करके भाग्य विधाता, उम्र कैद कर डाली
पोषक का पहन कर बाणा, तुने बोटी-बोटी निकाली
नहीं रक्षण अब सामन्तों के समान चाहिए। ...
25. कोई बन के चतुर बहकाये, तो आतंक से कोई डराये
न्यौछावर तुझ पर जीवन, कोई सभ्य मनुहार लगाये
तो कोई उज्जड़ तुझे सताये, होनी पहचान चाहिए। ...
26. अनमेल विपद झेले हैं, सही पीड़ा बाल विवाह की
जीवित अभिशाप बने जब, मृत्यु हो जाए पति की
सती प्रथा कारज सती को ना नुकसान चाहिए। ...
27. दिन लद गये स्वयंवर के, शादी करती बरबादी
दहेज की महामारी ने, वधु को जीवित ही मारी
ना सहनी पड़े दुस्वारी, राह आसान चाहिए। ...
28. अपराध करे सजा पाता, यह न्याय समझ में आता
निरपराध बेटी के भ्रूण को, फिर काहे मारा जाता
सुनकर भी रूह कंपाता, पाप से त्राण चाहिए। ...
29. नारी तू नहीं सुरक्षित, ना गर्भ में ना ही जग में
हर ओर क्रूर दृष्टि ही, पसरी है रग-रग में
जगत पति से जग में, तुझे अभयदान चाहिए। ...
30. तेरे अपने ही सद्गुण, बने है तुझ पर भारी
सांडों के युद्ध में झाड़ी, नाहक ही कुचली जा रही
तितली के पंख, कोयल की क्या बंद जुबान चाहिए। ...
31. जब जन्मा घर में भाई, जम कर के बटी बधाई
बेटी की सुन किलकारी, सबने भौ-नाक चढ़ाई
बेटा-बेटी का दर्जा एक समान चाहिए। ...
32. बेटा तो माना अपना, कुल वंश बढ़ाने वाला
बेटी तो धन है पराया, क्यों जाए इसे संभाला
है पूरा गड़बड़ झाला, होना निदान चाहिए। ...
33. जन बेटा और बेटी में, करते हैं भेद बड़ा भारी
भोजन हो चाहे शिक्षा, या देनी हो जिम्मेवारी
यह समझ की है अंधियारी होना उदय भान चाहिए। ...
34. नवरात्र काल में कन्या, की कर पूजा हर्षाते
पर कन्या भ्रूण गिराकर, ना हिचकाते ना शर्माते
देख नेक झुंझलाते, सोच गतिमान चाहिए। ...
35. भ्रूण कन्या की हत्या, रही होती परवश छुपकर
आजाद वतन में शिक्षित मां का हिय हुआ पत्थर
स्वर्ग से उतरी परी को क्या यही ईनाम चाहिए। ...
36. नित्य बहुत बड़ी संख्या में, करते हैं शिकार दरिन्दे
कहां सब हो पाते उजागर, कूकर्म पापियों के गन्दे
कोई काटे सारे फन्दे, वीर बलवान चाहिए। ...
37. कानून नियम पड़े बौने, ना अत्याचार रुक पाया
समाज और शासन ने नारी को खूब बहकाया
उस निरीह का क्या होना ऐसा अपमान चाहिए। ...
38. कहा रमणी कामिनी भोग्या, यह चित भड़काने वाली
इसने भी खोया साहस, सुन सुनकर गंदी गाली
अब फिर से जगना इसका स्वाभिमान चाहिए। ...
39. बना दासी खरीदा-बेचा, इतिहास कहें इसे काला
सत्यमेव जयते है, पर यहां सत्य गयी हारा
सहा दोयम दर्जे का कुठारा अब छुटनी जान चाहिए। ...
40. काया से दुर्बल राखी, मन से कमजोर बना दी
शिक्षा से वंचित करके, उन्नति की आश मिटा दी।
पाबंदी लाख लगा दी, अब मिलना त्राण चाहिए। ...
41. बेटी तो धन है पराया, क्यों उस पर धन फूंका
पढ़ लिखकर वो क्या करेगी, करना है चूल्हा चौका
धी उत्तम दो गर तुम्हें वधु गुणवान चाहिए। ...
42. अभिशप्त रही सदियों से, ली गई छिन सब शिक्षा
कलहनी अभागी कर्कशा, मिली लड़ने-झगड़ने की दीक्षा
नहीं रहना जीवन तपता रेगिस्तान चाहिए। ...
43. उन्नत पश्चिम की नारी, यह भी भ्रम है भारी
ठगते हैं जिस्म के प्रेमी, बदलें जो वस्त्र बेकारी
गृहलक्ष्मी जीवन संगिनी का होना मान चाहिए। ...
44. माना वो काम करती है, नर के कन्धे से कन्धा मिलाकर
अधिकार भी कुछ छीने है, लम्बी लड़ाई लड़कर
जो पुरखे देते थे झुककर, वो सलाम चाहिए। ...
45. सज-धजकर घर से निकली, पढ़ने जा रही दुलारी
बच्चों को इधर-उधर कर, दफ्तर में हाजिरी लगा रही
अपनी भूमिका समझे नारी वो बुद्धिमान चाहिए। ...
46. हुआ शोषण दमन निरन्तर, घुटी रही त्रस्त अपमानित
निष्ठुर निर्मम धूर्त ने, सदा रखा उसे अभिशापित
जो मिटा दे व्याधि सारी वैद्य लुकमान चाहिए। ...
47. लोभ-लाभ की खातिर, पशुवंत है जीवित नारी
सोने का अण्डा देती, मति हीन ने मूर्गी मारी
नर नादान को अब तो कुछ होना ज्ञान चाहिए। ...
48. बड़े महारथियों ने घेरा, मारा अभिमन्यु अकेला
सासु, ननद, जेठानी, देवर, रिश्तेदारों का मेला
क्रूर कत्ल से वधु की बचनी जान चाहिए। ...
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