राष्ट्र व विश्व के वर्तमान व भविष्य के संकटों, संघर्षों के बीच हमारी भूमिका या कर्तव्य

राष्ट्र व विश्व के वर्तमान व भविष्य के संकटों, संघर्षों के बीच हमारी भूमिका या कर्तव्य

आचार्य बालकृष्ण

हमें यह तय करना है, निर्णय लेना है कि हमें जाति, प्रान्त, भाषा, क्षेत्र या महत्व के नाम पर कोई वाद-विवाद या उन्माद खड़ा करके देश को तोडऩा नहीं है...
 ... अपितु एक राष्ट्र, एक ईश्वर की सन्तान, सभी एक समान, सभी महान् हैं और हम सभी को मिलकर सबको ऊँचा उठाना है, सभी को शारीरिक, वैचारिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक राजनैतिक दृष्टि से सबको ऊँचा उठाकर एक स्वस्थ, सुखी, समृद्ध, संस्कारवान, व्यक्ति, परिवार, समाज, राष्ट्र विश्व का निर्माण करना है जहाँ सभी सुखी, समृद्ध प्रसन्न हों।
किसी भी समाज राष्ट्र में मूलत: दो बड़े समूह होते हैं- एक मुख्य धारा का समूह होता है जो सबको साथ लेकर चलने की बात करता है और उसके मूल सिद्धान्त होते हैं एकता, समानता, न्याय, प्रीति, करुणा, मैत्री, सहनशीलता, अहिंसा, सत्य, सेवा, एकत्व, सहअस्तित्व, सामंजस्य, स्वाधीनता, लोकतंत्र शान्ति आदि, हिंसा, छूआछूत, अन्याय, शोषण आदि का कोई स्थान नहीं होता।
दूसरी ओर एक समूह में होते हैं अतिवादी, चरमपंथी, उग्रवादी, आतंकवादी सोच के लोग जो डर, भय, प्रलोभन, काल्पनिक खुशियों के झूठे सपने दिखाकर अपनी सत्ता, स्वार्थसिद्धि या अपनी झूठी अहमियत को स्थापित करने में अपना सर्वस्व झोंक देते हैं और कभी-कभी सफल भी हो जाते हैं। अपने स्वार्थ की सिद्धि हेतु ऐसे लोग कानून नैतिकता को नैपथ्य में रखकर हिंसा, क्रूरता दुस्साहस पूर्वक अपने लक्ष्य को पाने से हिचकिचाते नहीं।
भारत में भी राइट, लैफ्ट सेन्टर की मुख्य विचारधाराओं के साथ-साथ यह एक अतिवादी विचार भी बहुत ही खतरनाक तरीके से देश में उभर रहा है। इसे ही हम वैचारिक आतंकवाद या सैद्धान्तिक आतंकवाद या उन्माद भी कह सकते हैं।
इन सबके बीच में हमें यह तय करना है, निर्णय लेना है कि हमें जाति, प्रान्त, भाषा, क्षेत्र या महत्व के नाम पर कोई वाद-विवाद या उन्माद खड़ा करके देश को तोडऩा नहीं है अपितु एक राष्ट्र, एक ईश्वर की सन्तान, सभी एक समान, सभी महान् हैं और हम सभी को मिलकर सबको ऊँचा उठाना है, सभी को शारीरिक, वैचारिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक राजनैतिक दृष्टि से सबको ऊँचा उठाकर एक स्वस्थ, सुखी, समृद्ध, संस्कारवान, व्यक्ति, परिवार, समाज, राष्ट्र विश्व का निर्माण करना है जहाँ सभी सुखी, समृद्ध प्रसन्न हों। ऐसा राष्ट्र विश्व बनाने हेतु हमें अपने-अपने हिस्से की जिम्मेदारी, भूमिका या उत्तरदायित्व लेना ही पड़ेगा और इसे समयबद्ध चरणबद्ध रूप में पूरा करना होगा। इसी में हमारे जीवन का बड़ा प्रयोजन पूरा होगा अन्यथा खाना-पीना थोड़े बहुत दुनियां के सुख, भोग-विलास भोगना  या मात्र कुछ ऐश्वर्य, सत्ता, पैसा, प्रतिष्ठा, प्रतिभा या कुशलता मात्र अर्जित करने में जीवन की पूर्ण सार्थकता नहीं है।

19

अन्त में मैं देश दुनिया के विवेकशील, समर्थ शक्तिशाली ऐश्वर्य सम्पन्न लोगों से विनम्र प्रार्थना करता हूँ कि आईये! पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ हम संकल्पित हों कि शिक्षा, स्वास्थ्य, अनुसंधान, खेती, व्यापार, धर्म, अध्यात्म, राजनीति समाजिक जीवन के विभिन्न सन्दर्भों में हम अपने-अपने हिस्से की जिम्मेदारी को पूर्ण पवित्रता दिव्यता से निभायेंगे और अतिवादी लोगों से भी अधिक तीव्र वेग के साथ अपने स्वधर्म, योगधर्म, वेदधर्म, ऋषिधर्म, राष्ट्रधर्म, मानवधर्म विश्वधर्म (धर्म माने अपना दिव्य कत्र्तव्य) का प्रामाणिकता के साथ निर्वहन करेंगे और विकल्प रहित संकल्प अखंड-प्रचण्ड पुरुषार्थ के साथ हम अपने लक्ष्य में पूर्ण विजयी होंगे। हमारी विजय में भारत माता की विजय, सत्य, धर्म, न्याय मानवता की विजय होगी और सम्पूर्ण विश्व सुखमय शान्तिमय होगा।
तालिबान की हिंसक मजहबी क्रान्ति हो, चीन का विस्तारवाद, एकाधिकारवाद मूलक साम्राज्यवाद हो, अमेरिका का अहंकारवादी पूंजीवाद हो, जापान या अन्य कुछ देशों का बौद्धिक सामन्तवाद हो, यहूदियों का आर्थिक राजनैतिक सैन्य शक्तिवाद हो, इस्लाम ईसाइयत का मजहबी उन्माद हो, भारत का वैचारिक सैद्धान्तिक उन्माद या फिर दुनियां की कुछ रहस्यमयी ताकतों का विध्वंसवाद हो। विश्व के कॉर्पोरेट माफिया, हथियार माफिया, दवा माफिया, सैन्य माफिया, राजनैतिक माफिया मजहबी माफियोंकी सांठगांठ हो, माना कि ये लोग वर्तमान में बड़े शक्तिशाली दिख रहे हैं फिर भी इनका अन्त बहुत ही बुरा होगा, थोड़ा समय जरूर लगेगा। राष्ट्र विश्व की सात्त्विक आध्यात्मिक मानवतावादी दिव्य शक्तियों को संगठित परम शक्तिशाली होकर इन सबको ध्वस्त करना होगा। पतंजलि अपनी भूमिका निभा रहा है, आप भी अपनी भूमिका को निभाने के लिए प्रतिबद्ध संकल्पित होकर पूर्ण वेग पूर्ण पुरुषार्थ से विजय पथ पर आगे बढि़ए।
 
 

Related Posts

Advertisment

Latest News

Eternal wisdom Eternal wisdom
          With divine inspiration, I want to draw your attention towards 11 important facts. I am sure that you will
Patanjali's Yoga, Ayurveda and Swadeshi Movement
Address by Hon'ble Union Education Minister Shri Dharmendra Pradhan at the Annual function of Patanjali University "Abhyudaya 2024-25"
Realistic view of Life
Anti-aging, the modern science of staying young forever
Fevogrit
Who has the right over the fruits of actions?
Nasal disease Sinusitis
Patanjali Nutrela Collagenprash Skin Super Food for Taste and Beauty
Changing face of treatment of women in Europe