योग की शिष्य-परम्परा
योग संदेश  योग एवं आयुर्वेद  2015  जुलाई 

योग की गौरवशाली परम्परा एवं इतिहास

योग की गौरवशाली परम्परा एवं इतिहास       योग स्वचेतना, स्वशक्ति, स्वबल अर्थात् आत्मबल इत्यादि को पूर्णत: जाग्रत् करने का विशुद्ध विज्ञान हैै। उसकी प्रसुप्त शक्ति जाग्रत् होती है, तब वह अपरिमित शक्तियों का स्वामी बन जाता है। योग मूलत: पूर्णतया सत्यबोध कराने वाली अध्यात्म-विद्या...
Read More...

Advertisement