गीत
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प्रकृति
ये प्रकृति है स्वर्ग समान
इसने दिया है जीवन दान
सबके लिए यह है वरदान
इससे मिलता सबको प्राण
तितली उड़ती है रंगीले
कहीं-कहीं पर सुन्दर झीलें
लाल-गुलाबी और पीले
जगह-जगह पर पुष्प खिले
चाँदी सा चमकता गगन
शीतल बहती है पवन
हरियाली से भरे हैं वन
ये प्रकृति अनमोल रतन
नदियाँ मिटाती प्यास हैं
नीला यह आकाश है
सभी फलों में बहुत मिठास है
ईश्वर की रचना यह खास है
वन ये सारे हरे हैं
उपवन फूलों से भरे हैं
ये पर्वत अडिग खड़े हैं
आसमान में तारे जड़े हैं।
ईश्वर
ईश्वर तो निराकार है
वही सृष्टि का आधार है
हम पर उसका ही अधिकार है
यह जीवन उसका उपहार है
जो मिटाता अंधकार है
सच्चा जिसका दरबार है
सृष्टि जिसका परिवार है
वही हमारा करतार है
ब्रह्माण्ड को वही रचता है
वही सृष्टि को चलाता है
हम सबकी रक्षा करता है
प्राण हममें वही भरता है
प्राणियों के प्राण हैं
हर एक कण में विद्यमान हैं
यह जीवन उसका वरदान है
हम उस ईश्वर की संतान हैं
दीपक का वह प्रकाश है
वाणी में छिपा मिठास है
मन में बसा विश्वाास है
उससे चलते हमारे श्वास हैं
वही रक्षक हमारा है
बहाता प्रेम की धारा है
चलता उससे जगत् सारा है
वही एकमात्र हमारा है
उसने सूरज-चाँद बनाया
उसी ने है तारों को चमकाया
उसी ने इस पृथ्वी को सजाया
उससे ही मिली यह सुन्दर काया
ईश्वर की अदृश्य काया है
हर एक कण में समाया है
उसी ने जगत बनाया है
अद्भुत उसकी माया है।
स्वामी जी का जीवन
स्वामी जी का जीवन महान्
करते वे सबका कल्याण
सबको देते योग का ज्ञान
उनका जीवन दयानंद समान
गुरुकुल का महत्त्व बताते हैं
वेदों का ज्ञान पढ़ाते हैं
घर-घर में आरोग्य पहुँचाते हैं
योग का दीपक जलाते हैं
गुरुकुल में वे पढ़े हैं
सफलता की ओर बढ़े हैं
स्वदेशी के लिए खड़े हैं
विदेशी कम्पनियों से लड़े हैं
इतिहास के गौरव गढ़े हैं
देश के सम्मान के लिए अड़े हैं
कामयाबी की मंजिल चढ़े हैं
आज चट्टान बनकर खड़े हैं
देश के लिए जीवन लुटाया
वेदों का हमें महत्त्व बताया
वैदिक परम्परा को फैलाया
एक नया इतिहास बनाया
जग का हर एक बंधन छोड़ा
सबके जीवन का रुख मोड़ा
देश-द्रोहियों का इरादा तोड़ा
योग हमारे जीवन से जोड़ा
सत्यांजलि, पतंजलि गुरुकुलम्
लेखक
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