वनौषधियों में स्वास्थ्य
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Read More... प्रजनन सस्थान, उदर व वात रोग निवारक आयुर्वेदिक घटक एरण्ड
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By योग संदेश विभाग
एरण्ड कृषिजन्य या वन्यज भूमि में 2000 मी की ऊंचाई तक पाए जाते हैं। इसके बीजों की मींगी से जो तेल प्राप्त होता है वह एक निरापद रेचक है। कोष्ठशुद्धि के लिए यह एक परमोपयोगी औषधि है। इसके साथ... वनौषधियों में स्वास्थ्य
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आयुर्वेद मनीषी आचार्य बालकृष्ण जी महाराज उदर व प्रजनन संस्थान सम्बन्धी रोग निवारक आयुर्वेदिक घटक चिरौंजी
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आयुर्वेद मनीषी आचार्य बालकृष्ण जी महाराज वनौषधियों में स्वास्थ्य
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बाकुची के छोटे-छोटे पादप, वर्षा-ऋतु में समस्त भारतवर्ष में अपने आप उगते हैं तथा जगह-जगह इसकी खेती भी की जाती है। साधारणतया बाकुची के पौधे वर्षायु होते हैं, परन्तु उचित देखभाल करने से 4-5 वर्ष तक जीवित... वनौषधियों में स्वास्थ्य
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भारतीय आयुर्वेद में औषधि वह है जो रोगी में आरोग्य का विश्वास पैदा करे और रोग से निजात दिलाये। चूँकि शरीर का सीधा संबंध प्रकृति से है, अत: रोग भी प्रकृतिगत असंतुलन से ही पैदा होते हैं। ऐसे में... वनौषधियों में स्वास्थ्य
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यह पौधा विश्व के उष्णकटिबंधीय तथा समशीतोष्ण क्षेत्रों के साथ समस्त श्रीलंका तथा भारत में 750 से 2100 मी. की ऊँचाई तक सर्वत्र पाया जाता है। इसमें पूरे वर्ष पर्यन्त फूल और फल देखे जा सकते हैं। आचार्य चरक काकमाची... वनौषधियों में स्वास्थ्य
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भारतीय शास्त्रों में वर्णित पीपल केवल वृक्ष नहीं, स्वास्थ्य, संस्कृति का महत्वपूर्ण अंग है। यह शुद्ध सात्विक, 24 प्रहर प्राणवायु छोड़ने वाला और विषैली कार्बन डाइआक्साईड सोखने में समर्थ वृक्ष है। इसकी छाया बहुत शीतल होती... वनौषधियों में स्वास्थ्य
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प्राणी मात्र के लिए प्रकृति का बहुमूल्य उपहार है। चिकित्सक इस पर नंगे पांव चलने पर नेत्र ज्योति बढ़ने व शरीर के अनेक विकार शांत होने की बात कहते हैं। निघंटुओं में श्वेत, नील एवं गंड दूर्वा का... विशिष्ट आयुर्वेदिक स्वास्थ्यवर्धक घटक गिलोय
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आचार्य बालकृष्ण 

आचार्य बालकृष्ण
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