सर्दी और खांसी

सर्दी और खांसी

स्वामी समग्रदेव

पतंजलि संन्यासाश्रम, पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार

   सर्दी और खांसी ऐसी संक्रामक रोग हैं, जो एक वयस्क व्यक्ति को एक साल में दो से तीन बार हो जाते हैं। वहीं बच्चों में यह रोग और भी तेजी से फैलता है और साल में तीन बार से भी अधिक समय तक हो सकता है। सर्दी और खांसी आमतौर पर संक्रमण का एक प्रकार होते हैं, जो आपकी नाक व गले में मौजूद कई अलग-अलग प्रकार के वायरस के कारण होते हैं। राइनोवायरस इसका कारण बनने वाले सबसे मुख्य वायरस हैं, जो सर्दी और खांसी के लक्षण पैदा करते हैं। हालांकि, इस संक्रमण से होने वाली सर्दी, जुकाम और खांसी के लक्षण काफी परेशान कर देते हैं। अगर सर्दी और खांसी लम्बे समय तक रहती है तो व्यक्ति को गम्भीर समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
खांसी के प्रकार
खांसी मुख्यत: दो प्रकार की होती है:-
सूखी खांसी (Dry cough)
बलगम युक्त खांसी (Wet cough)
खांसी के अन्य प्रकार
खांसी के ये अन्य प्रकार हैं:-
तेज खांसी (Acute cough)
      यह थोड़े समय के लिए, तथा या ज्यादातर ऊपरी श्वासनली के संक्रमण के कारण होती है। यह फ्लू या कॉमन कोल्ड के कारण होती है।
पुरानी खांसी (chronic cough)
      यह 6-8 सप्ताह तक रह सकती है। यह Allergic rhinitis, T.B. या Lung cancer और Lung infection के कारण होती है।
सर्दी-खांसी के लक्षण
ज्यादातर लोगों को वसंत और सर्दियों के मौसम में सर्दी-खांसी जैसी समस्याएं होती हैं। हालांकि, किसी भी व्यक्ति को साल के किसी भी मौसम में यह संक्रमण हो सकता है। सर्दी-खांसी के साथ विकसित होने वाले लक्षण आमतौर पर एकदम से विकसित होने लगते हैं। सर्दी-खांसी से ग्रसित व्यक्ति इस बीमारी को 6 फीट से भी ज्यादा दूरी पर खड़े लोगों तक फैला सकता है। सर्दी-खांसी से होने वाले सामान्य लक्षणों में आमतौर पर निम्न को शामिल किया जा सकता है -
·         गले में दर्द होना
·         नाक बहना
·         गले, नाक व छाती में बलगम जमना
·         सूखी खांसी होना
·         ठंड लगना
·         थकान रहना
·         छींक आना
·         सिरदर्द होना
·         मांसपेशियों में दर्द रहना
·         जोड़ों में दर्द महसूस होना
·         हल्का बुखार होना
सर्दी-खांसी होने का खतरा वयस्कों से ज्यादा बच्चों में है और यह रोग बच्चों को ज्यादा प्रभावित कर सकता है। सर्दी-खांसी होने वाले कुछ लक्षणों के बारे में नीचे बताया गया है, जो वयस्कों से ज्यादा बच्चों में दिखाई देते हैं -
·         जी मिचलाना या मतली
·         उल्टी आना
·         दस्त लगना
·         चिड़चिड़ापन होना
वैसे तो अधिकतर मामलों में सर्दी-खांसी का इलाज कराने की जरूरी नहीं होती है, क्योंकि यह उचित देखभाल के साथ घर पर अपने आप ही ठीक हो जाता है। हालांकि, सर्दी-खांसी होने के बाद डॉक्टर से जांच कराने से काफी मदद मिल सकती है अगर आपको सर्दी-खांसी से जुड़ी लक्षण लगातार गंभीर होते महसूस हो रहे हैं, तो ऐसे में जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए क्योंकि ऐसे में कई बार यह किसी अन्य बीमारी का संकेत भी हो दे सकता है।
सर्दी-खांसी के कारण
सर्दी-खांसी की यह समस्या आमतौर पर संक्रमण के कारण होती है, जिसके पीछे का कारण कई अलग-अलग प्रकार के वायरस हो सकते हैं। ये इन्फ्लूएंजा वायरस संक्रमित व्यक्ति के बोलने, खांसने या छींक मारने के दौरान दूसरे व्यक्ति तक फैल जाते हैं। अगर सरल शब्दों में कहें तो छींकने, खांसने और बोलने के दौरान संक्रमित व्यक्ति के मुंह से द्रव की बेहद सूक्ष्म बूंदे निकल कर हवा में तैरने लगती हैं, इन बूंदों में सर्दी-खांसी का कारण बनने वाले वायरस होते हैं। इसके बाद जब कोई व्यक्ति सांस लेने के माध्यम से हवा में तैर रही इन बूंदों को अपने शरीर में ले जाते हैं, तो वे भी संक्रमित हो जाते हैं। इसके अलावा अगर ये द्रव की बूंदें किसी सतह पर जा टिकी हैं, तो उस सतह को छूने पर और फिर उसी हाथ से मुंह, नाक या आंख को छूने पर भी आप संक्रमित हो सकते हैं।
सर्दी-खांसी के जोखिम कारक
सर्दी-खांसी आमतौर पर उन लोगों को लिए ज्यादा जोखिम भरी हो सकती है, जो आमतौर पर पहले से ही निम्न बीमारियों से ग्रसित हैं -
·         अस्थमा
·         सीओपीडी
·         ब्रोन्किइक्टेसिस
·         सिस्टिक फाइब्रोसिस
·         क्रोनिक किडनी डिजीज
·         हार्ट डिजीज
·         डायबिटीज
·         गंभीर एनीमिया (सिकल सेल एनीमिया)
·         मोटापा
·         एचआईवी
·         लिवर डिसऑर्डर
सर्दी-खांसी का निदान
सर्दी-खांसी के निदान के लिए आमतौर पर आपको डॉक्टर के पास जाने की जरूरत नहीं होती है। ऊपर बताए गए लक्षणों के आधार पर आप खुद सर्दी-खांसी की समस्या का निदान कर सकते हैं। अगर आपको निम्न लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो ऐसे में डॉक्टर से बात कर लेनी चाहिए।
·         लक्षणों में सुधार न होना या लगातार बढऩा
·         कान में दर्द होना
·         सांस फूलना
·         सांस लेने में दिक्कत
·         निगलने में कठिनाई या दर्द
·         घरघराहट होना
·         त्वचा पर चकत्ते बनने लगना
·         खांसी के साथ गंभीर दर्द होना
·         ठंड लगना व कंपन होना
·         बुखार लगातार दो दिन से अधिक समय तक रहना
·         कई दिनों तक सिरदर्द होना
·         होठ, नाखून या त्वचा नीली पड़ जाना
·         भूख न लगना
·         उलझन महसूस हो
सर्दी-खांसी की रोकथाम
सर्दी-खांसी एक से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैलती है, तो उसकी रोकथाम निम्न तरीके से की जा सकती है -
·         अपने हाथों को बार-बार साबुन से धोने की आदत डालें, साबुन न होने पर हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।
·         अपनी आँख, नाक और मुंह को छूने से पहले हाथों को अच्छे से धो लें।
·         जिन लोगों को सर्दी-खांसी के लक्षण हो रहे हैं, उनसे उचित दूरी बनाकर रखें।
·         अगर आप खुद सर्दी-खांसी से ग्रसित हो गए हैं, तो अन्य लोगों को संक्रमित होने से बचाने के लिए आप निम्न नियमों का पालन कर सकते हैं -
·         जब तक आप पूरी तरह से ठीक न हों घर पर ही रहें।
·         बीमार बच्चों को स्कूल या दूसरे बच्चों के साथ खेलने न दें।
·         दूसरे व्यक्ति से कोई भी शारीरिक संबंध न बनाएं।
·         छींकने, खांसने व बोलने के दौरान मुंह पर रुमाल या टिशू रख लें।
·         छींकने, खांसने या नाक साफ करने के तुरंत बाद अपने हाथों को अच्छे से साफ करें।
·         दरवाजे की कुंडी, खिलौने और मोबाइल आदि को समय-समय पर साफ करते रहें।
पतंजलि वेलनेस में सर्दी-खांसी की चिकित्सा
पतंजलि वेलनेस में समग्र चिकित्सा के द्वारा सर्दी-खांसी की समस्या का निदान किया जाता है-
आहार चिकित्सा :
प्रात: कालीन औषधि जल- अदरक, हल्दी, शहद, पानी, श्वासारि का पानी
नाश्ता - भीगे हुए 5 बादाम, 5 अखरोट, 5 खजूर
दोपहर का भोजन- उबली हुई सब्जी, सब्जी का सूप, बेसन रोटी।
दोपहर भोजन उपरांत- अदरक, हल्दी, शहद, पानी
शाम का नाश्ता- भूना चना, हर्बल चाय
रात्रि भोजन - मूंगदाल खिचड़ी, मूंगदाल सूप, खजूर-10
रात्रि भोजन के उपरांत - श्वासारि क्वाथ का पानी
 
आयुर्वेद में औषधि
श्वासारि गोल्ड, श्वासारि वटी, ब्रोंकोम वटी, चित्रकादि वटी, स्वासारि अवलेह व त्रिकटु चूर्ण अत्यंत गुणकारी औषधि हैं जिनका प्रयोग सर्दी-खांसी में किया जाता है।
आयुर्वेद की चिकित्सा
·         लंगबस्ती
·         अभ्यंग
·         नस्यम
प्राकृतिक चिकित्सा
·         एन्टी कोल्ड मसाज।
·         अदरक, प्याज, हल्दी, लहसुन की पेस्ट की लपेट छाती पर।
योग चिकित्सा
·         षट्कर्म
·         जलनेति
·         रबरनेति
·         प्राणायाम
·         अनुलोम-विलोम
·         भस्त्रिका
·         आसन
·         सूर्यनमस्कार
·         उष्ट्रासन
·         सेतुबन्धासन
·         बालासन
·         उत्तानासन
 
पतंजलि वेलनेस में आये सर्दी-खांसी समस्या में लाभ प्राप्त करने वाले स्वास्थ्य साधकों के अनुभव
1)    मुझे साइनस व क्रॉनिक एलर्जी की समस्या थी, बहुत छींक आती थी। पतंजलि वेलनेस में 5 दिन के उपचार के बाद बिल्कुल ठीक हूँ।
रोगी  का नाम : एकता सिंह
आयु ३७ वर्ष, हरिद्वार, उत्तराखण्ड, सम्पर्क सूत्र : 9990129865
2)    काफी लंबे समय से साइनस की समस्या थी चार बार ऑपरेशन करने के बाद भी ठीक नहीं हुआ लेकिन यहां के योग व उपचार से बिल्कुल ठीक है।
रोगी का नाम : वंदना अग्रवाल, आयु ५० वर्ष, छत्तीसगढ़
3)    2 साल से साइनस की समस्या थी। 6 बार ऑपरेशन कराना पड़ा, फिर भी ठीक नहीं हुआ। यहाँ 5 दिन के षट्कर्म व पंचकर्म उपचार से बिल्कुल ठीक हूँ।
रोगी  का नाम : सागर
आयु २३ वर्ष, छत्तीसगढ़, सम्पर्क सूत्र : 9053858494
 
पतंजलि वेलनेस में सर्दी-खांसी के समस्त रोगों की चिकित्सा संभव है। यदि आपको या आपके किसी परिचित को सर्दी-खांसी के किसी रोग की कोई समस्या है तो वो पतंजलि वेलनेस हरिद्वार में आकर चिकित्सा लाभ ले सकता है।

Related Posts

Advertisment

Latest News

शाश्वत प्रज्ञा शाश्वत प्रज्ञा
ओ३म हमारे सपनों का भारत 1.  सच्चे सनातनी बनें - हम सभी ऋषि-ऋषिकाओं की सन्तानें वंशधर सनातन धर्म के मूल...
सनातन संस्कृति मानवता की पोषक
प्राणविद्या
पतंजलि योगपीठ (ट्रस्ट) तथा भारतीय शिक्षा बोर्ड के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित सम्मान समारोह में युग पुरुष प्रो. रामदरश मिश्र को ‘पतंजलि शिक्षा गौरव सम्मान’
रेनोग्रिट
गीता का ज्ञान पाने की अभीप्सा का स्वरूप क्या है?
थायरॉइड
सर्दी और खांसी
नेशन स्टेट का संकुचन तथा अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं और निकायों का उभार
संपूर्ण पोषण प्राप्ति का मुख्य आधार ‘पतंजलि ‘न्यूट्रीशन बार’