प्राकृतिक चिकित्सा, योग एवं पी.सी.ओ.एस.
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डॉ. कनक सोनी, एम.डी. पतंजलि निरामयम्,
प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र, पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार
पी.सी.ओ.एस. का मुख्य कारण वयस्क महिलाओं में जागरुकता की कमी, उचित जीवनशैली की अनदेखी तथा भोजन करने के तरीके हैं। पी.सी.ओ.एस. के सम्बन्ध में क्षेत्रीय आँकड़ा (प्रतिशत में)-
पी.सी.ओ.एस. से ग्रसित 60 प्रतिशत महिलाओं में प्रतिमाह सामान्य से अधिक मात्रा में शुगर एवं इंसुलिन एंड्रोजन उत्पादन को बढ़ाता है तथा सामान्य अण्डे के विकास को प्रभावित करता है। शेष 40 प्रतिशत महिलाएँ, जिनमें पी.सी.ओ.एस. के लक्षण पाए जाते हैं, उनमें कई अन्य कारक मौजूद होते हैं। ये नियमित अण्डोत्सर्ग जैसे उच्च प्रोलैक्टिन, निम्र इस्ट्राडियोल, निम्र शारीरिक वजन, एनोरेक्सिया इत्यादि को प्रभावित करते हैं। अविकसित अण्डे सिस्ट के रूप में ओवरी पर रहते हैं। चूँकि अण्डोत्सर्ग में विलम्ब हो जाता है या फिर नहीं होता है तथा प्रोजेस्टेरोन हार्मोन या तो कम हो जाता है या फिर उस चक्र में अनुपस्थित हो जाता है, फलस्वरूप पी.सी.ओ.एस. के कई लक्षण परिलक्षित होने लगते हैं। प्रोजेस्टोरोन की कमी के कारण ओस्ट्रोजेन एवं प्रोजेस्टोरोन के बीच असन्तुलन पैदा हो जाता है, जिससे प्रोजेस्टोरोन के द्वारा इस्ट्रोजन की सक्रियता ठीक तरह से नहीं हो पाती है। इसे ओस्ट्रोजेन डोमिनेंश के रूप में जाना जाता है। दोनों हार्मोन के समान एवं एक-दूसरे के विरुद्ध कार्य हैं। ओस्ट्रोजेन के कारण गर्भाशय की लाइनिंग में वृद्धि होती है, जबकि प्रोजेस्टोरोन इसे बनाए रखने में मदद करता है। ओस्ट्रोजेन स्तन के ऊतक बढ़ाता है जबकि प्रोजेस्टोरोन उसे स्वस्थ रखता है। ओस्ट्रोजेन दु:ख जैसी भावनाओं को उत्तेजित करता है, वहीं प्रोजेस्टोरोन में इसके ठीक विपरीत गुण हैं। प्रोजेस्टोरोन माँसपेशियों की ऐंठन में कमी करता है, थक्का एवं वैस्कुलर क्षमता को सामान्य करता है तथा थायरॉइड के कार्य को सन्तुलित करता है। यह हड्डी निर्माण में सहायक है तथा इंडोमैट्रियल कैंसर को रोकने में मदद करता है। पी.सी.ओ.एस. से ग्रसित कुछ महिलाओं में टेस्टोस्टेरोन की अधिकता पाई जाती है, जिसकी वजह से खुजली, शरीर एवं चेहरे पर बालों में अत्यधिक वृद्धि, अण्डोत्सर्ग का न होना, बाँझपन तथा गंजापन जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो जाती हैं। प्राकृतिक चिकित्सक की देखरेख में भोजन में स्टार्च तथा शुगर नियंत्रण से बाँझपन, बालों का झडऩा, मोटापा, अनियमित पीरियड, अण्डोत्सर्ग की कमी, चेहरे पर बालों के उगने सहित पी.सी.ओ.एस. का प्रभाव कम होता है। पी.सी.ओ.एस. को भोजन, योग, आसन एवं प्राणायाम के जरिए प्राकृतिक रूप से ठीक किया जा सकता है। कई महिलाएँ औषधि के दुष्परिणाम को सहन नहीं कर सकती। उनके लिए प्राकृतिक चिकित्सा एक कारगर उपाय है।

पी.सी.ओ.एस. के लक्षण
पी.सी.ओ.एस. से सम्बंधित हार्मोन अनियमितताओं के कारण महिलाओं में निम्रांकित लक्षण परिलक्षित हो सकते हैं-
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चेहरे एवं शरीर पर बालों का अधिक उगना (अतिरोमता), ठोडी पर बाल, छाती पर बाल, हाथ एवं पेट पर बाल।
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खुजली, तैलीय चमड़ी या रूसी।
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दर्दनाक मासिक धर्म (पीरियड)।
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अण्डोत्सर्ग की कमी या अनियमित अण्डोत्सर्ग।
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ओवेरीज़ में कई छोटे सिस्ट का होना।
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पुरुष हार्मोन एन्ड्रोजेन्स की अधिकता।
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अनियमित मासिक धर्म या मासिक धर्म का रुक जाना।
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बालों का झडऩा या पतला होना।
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पेट दर्द (एब्डोमन पेन)।
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मोटापा- 60 प्रतिशत पी.सी.ओ.एस. महिलाएँ मोटापे से जूझ रही हैं।
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ग्लूकोज इंटोलरेंस, हाइपोग्लाइसीमिया।
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बाँझपन या गर्भवती न हो पाना।
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चिड़चिड़ापन या तनाव।
पी.सी.ओ.एस. के प्राकृतिक उपचार
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स्वस्थ भोजन एवं योग के जरिए ब्लड शुगर तथा इंसुलिन नियंत्रण करना।
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अत्यधिक पुरुष हार्मोन एवं हार्मोन सक्रियता को कम करना।
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मैग्नीशियम की प्रचुरता वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से प्रोजेस्टेरोन उत्पादन में वृद्धि, नियमित अण्डोत्सर्ग तथा मासिक धर्म की सुनिश्चितता एवं एक्यूपंक्चर, उचित भोजन व हाइड्रोथेरेपी उपचार के जरिए बाँझपन दूर करना।
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द्य नियमित योग, प्राणायाम एवं उचित भोजन से मोटापा नियंत्रण करना।
पी.सी.ओ.एस. को लेकर कुछ भ्रम अक्सर होते रहते हैं, जैसे-
पी.सी.ओ.एस. भ्रम-1: मुझे नियमित पीरियड होता है, अत: मैं निश्चित रूप से अंडोत्सर्ग कर रही होऊँगी।
वास्तविकता : नियमित पीरियड होने का यह मतलब कतई नहीं है कि आप अंडोत्सर्ग कर रही हैं। इसका अर्थ सिर्फ यह है कि प्रत्येक माह ओस्ट्रोजेन उत्पादन बढ़ता एवं घटता है जिससे पता चलता है कि यूटेराइन लाइनिंग एवं शेडिंग में वृद्धि हो रही है। नियमित अंडोत्सर्ग पितृत्व योजना को छोड़कर स्वस्थ हार्मोन संतुलन के लिए आवश्यक है।
पी.सी.ओ.एस. भ्रम-2: मेरी सन्तानोत्पत्ति की कोई योजना नहीं है, अत: यह मेरे लिए कोई मुद्दा नहीं है, चाहे मैं अण्डोत्सर्ग करूँ या नहीं।
वास्तविकता : सन्तानोत्पत्ति करना या नहीं करना कोई मुद्दा नहीं है। सच तो यह है कि अगर आप प्रत्येक माह अण्डोत्सर्ग नहीं करती हैं, तो आपका शरीर एक जीवनदायी हार्मोन प्रोजेस्टेरोन से वंचित रह जाता है। इसका अर्थ है कि आपमें फाइबरॉइड्स, स्तन कैंसर तथा इंडोमेट्रिओसिस जैसी ओस्ट्रोजेन डोमिनेंस से ग्रसित होने की आशंका बढ़ जाती है।
पी.सी.ओ.एस. भ्रम-3: अगर मुझे इंडोमेट्रिओसिस, पी.सी.ओ.एस. या फाइबरॉइड्स है तो मैं गर्भाधान नहीं कर सकती या फिर गर्भाधान करने के लिए मुझे आई.वी.एफ. जैसा प्रजनन उपचार लेना पड़ेगा।
वास्तविकता: आप किसी भी स्थिति में गर्भाधान कर सकती हैं। स्थिति को देखते हुए, औषधि, शल्य क्रिया, प्राकृतिक चिकित्सा के साथ ही आई.वी.एफ. या फिर केवल प्राकृतिक चिकित्सा भी इस समस्या से निजात दिलाने में सहायक सिद्ध हो सकती है।
पी.सी.ओ.एस. भ्रम-4: मैं अन्य लोगों की तरह भोजन कर सकती हूँ और पी.सी.ओ.एस. को नियंत्रित कर सकती हूँ।
वास्तविकता: भोजन एवं जीवनशैली में बदलाव से ही पी.सी.ओ.एस. को नियंत्रण में रखा जा सकता है। वैसे लोग जो इस बदलाव को प्रभावी बनाते हैं, वे स्वस्थ रहते हैं तथा हृदय रोग, उदर रोग एवं प्रजनन समस्या से मुक्त रहते हैं।
पी.सी.ओ.एस. भ्रम-5: अल्ट्रासाउंड से पता चला कि मेरे अण्डाशय (ओवरी) में सिस्ट नहीं है। अत: मुझे पी.सी.ओ.एस. नहीं हो सकता।
वास्तविकता : नाम दिग्भ्रमित करता है पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिन्ड्रोम से ग्रसित महिला के ओवरीज़ पर सिस्ट नहीं होती है। शरीर टूटता है तथा सिस्ट को नियमित रूप से रिजॉल्व करता है। अत: सिस्ट आ एवं जा सकती है। बालों का झडऩा, चेहरे एवं शरीर पर अत्यधिक बालों का होना, मोटापा, इंसुलिन प्रतिरोध, खुजली, अनियमितता, बाँझपन तथा तैलीय चमड़ी जैसे लक्षणों के आधार पर इस सिण्ड्रोम का उपचार किया जाता है।
पी.सी.ओ.एस. भ्रम-6 : खून जाँच सही है, इसलिए हार्मोन में कोई समस्या नहीं है।
वास्तविकता: हार्मोन खून जाँच स्वास्थ्य या रोग के लिए कोई प्रभावकारी प्रक्रिया नहीं है। यह अस्वस्थ व्यक्तियों से लिया गया औसत होता है। फाइबरॉयड, स्तन कैंसर, इंडोमेट्रिओसिस, पी.सी.ओ.एस., अनियंत्रित पीरियड, बाँझपन, अण्डोत्सर्ग में समस्या जैसी प्रजनन विकार को ध्यान में रखते हुए यह जाँच होनी चाहिए और औसत निकालना चाहिए। वैसे लोगों का चयन करना चाहिए जिनको नियमित पीरियड होता हो, जो प्रत्येक माह मध्य चक्र में अण्डोत्सर्ग करते हों, उनका फाइबरॉयड्स, इंडोमेट्रिओसिस जैसे कोई साक्ष्य न हो तथा प्रजनन अंगों में कोई समस्या न हो। तब जाकर प्रामाणिक जाँच हो पाती है। आमतौर पर ऐसा नहीं होता है।
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