पतंजलि न्यूट्रेला विटामिन बी-12 (100% वेजेटेरियन एवं बायोफर्मेंटेड विटामिन)

पतंजलि न्यूट्रेला विटामिन बी-12 (100% वेजेटेरियन  एवं बायोफर्मेंटेड विटामिन)

डॉ. राम गुप्ता, पतंजलि फूड्स लि.

आप और हम सभी पौष्टिक आहार को जीवन में अपनाने की कोशिश करते हैं, लेकिन फिर भी थोड़ी बहुत गुंजाइश हमेशा रह ही जाती है। आजकल की अति व्यस्त जीवनशैली की वजह से हमारे खानपान का ढंग बदल गया है जिससे स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएँ हमें रोज परेशान करने लगती हैं।

विटामिन प्राकृतिक रूप से भोज्य पदार्थों में उपलब्ध कार्बनिक, एसेंशियल माइक्रोन्यूट्रीएन्ट, तत्वों का समूह है, जो सभी जीवित प्राणियों के वृद्धि एवं पोषण के लिए अत्यंत आवश्यक है। इनकी कमी होने पर रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी होने के साथ-साथ कई तरह की बीमारियां होने की सम्भावना बढ़ जाती है।

वैसे तो सभी विटामिन्स और माइक्रोन्यूट्रीएंट्स हमारी अच्छी सेहत के लिए जरूरी होते हैं, पर विटामिन बी-12 एक ऐसा विटामिन है जिसकी कमी सेहत के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदेह साबित होती है।

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विटामिन बी-12 वैसे तो हमारी कोशिकाओं में पाए जाने वाले जीन डीएनए को बनाने और उनकी मरम्मत में सहायता प्रदान करता है। यह ब्रेन, स्पाइनल कॉर्ड और नव्र्स के कुछ तत्वों की रचना में भी सहायक होता है। यही वह विटामिन है जो हमारी लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है। यही शरीर के सभी हिस्सों के लिए अलग-अलग तरह के प्रोटीन बनाने का काम करता है। यह ऐसा विटामिन है जिसका अवशोषण हमारी आंतों में होता है। उसके बाद शरीर के जिन हिस्सों को इसकी जरूरत होती है, लिवर इसे वहां भेजने का काम करता है।

सामान्यत: मानव शरीर में विटामिनों का संश्लेषण नहीं होता है एवं सभी मनुष्य विटामिन हेतु प्रमुख रूप से पादपों पे निर्भर रहते हैं। विटामिन-ए, बी-कॉम्प्लेक्स, सी, डी एवं ई विटामिनों के प्रमुख प्रकार है (Azzini et al., 2021; Watanabe et al., 2014) घुलनशीलता के आधार पर विटामिनों का वर्गीकरण दो प्रकार में किया गया है।

क)    जल में घुलनशील :  विटामिन बी एवं विटामिन सी पानी में घुलनशील होते है।

ख)    वसा में घुलनशील : विटामिन ए, डी, ई और विटामिन के वसा में घुलनशील होते हैं।

विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स मानव शरीर में अत्यंत आवश्यक विटामिनों का समूह है एवं कई अवयवों से मिलकर बना हुआ है। बी-1 (थियामिन), बी-2 (राइबोफ्लेविन), बी-3 (नियासिन), बी-5 (पैंटोथेनिक एसिड), बी-6 (पायरोडोक्सिन), बी-7 (बायोटिन), बी-9 (फोलेट), बी-12 (कोबालामिन)। (Godswill et al., 2020)

बी-12, कोबालामिन, कोबाल्ट संलग्न विटामिन है एवं मानव शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं (Red Blood cells) के निर्माण हेतु आवश्यक होता है, इसकी कमी से शरीर में निम्नलिखित विकार उत्पन्न हो सकते हैं-

1.         एनीमिया (रक्त की कमी) नामक बीमारी होती है।

2.         गर्भवती महिलाओ में विटामिन बी-12 भ्रूण में मस्तिस्क एवं रीढ़ की हड्डी के निर्माण हेतु आवश्यक होता है।

3.         विटामिन बी-12 मानव शरीर की तंत्रिका प्रणाली को सक्षम बनाता है, शरीर में फोलिक एसिड के अवशोषण हेतु आवश्यक होता है, शरीर की रोग प्रतिकार क्षमता को बढ़ाता है।

4.         विटामिन बी-12 तनाव से निपटने में मदद करता है अत: हृदय रोग से भी बचाता है।

एक प्रतिष्ठित अनुसन्धान पत्रिका के आकड़ों के अनुसार भारत एवं विश्व में लगभग सभी आयु वर्ग विटामिन बी-12 की कमी से ग्रसित हैं, हाल के अध्ययनों में ये भी पता चला है कि भारत की लगभग 50त्न जनसंख्या विटामिन बी-12 की कमी से ग्रसित है, जबकि 40-60 वर्ष का आयु वर्ग में सबसे ज्यादा इसकी कमी है। इसका विवरण निम्नाकित है- (Awasthi et al., 2022)

सभी भारतीयों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने शरीर के लिए सभी आवश्यक विटामिनों की प्रतिदिन हेतु एक अनुशंसित मात्रा निर्धारित की है, जिसमें से विटामिन बी-12 की निर्धारित मात्रा का (स्त्री, पुरुष एवं विभिन्न आयु वर्ग हेतु) विवरण नीचे दिए गए टेबल में दर्शान्कित है-

सारणी संख्या 01. FSSAI File No. SS-T017/1/2022-Standarad-FSSAI [E4478].

विटामिन बी-12 के स्त्रोत-

विटामिन बी-12 प्राकृतिक रूप से विभिन्न स्त्रोतों में उपलब्ध है, इनमें से वनस्पति स्त्रोत का विवरण निम्नांकित है-

1. प्लांट सोर्स : यद्यपि पौधों में विटामिन बी 12 अल्प मात्रा में पाया जाता है, फिर भी खाने योग्य मशरुम, शैवाल, एवं गाय के गोबर से उपजाए पौधे जैसे पालक में विटामिन बी-12 पाया जाता है (Mozafar., 1994; Watanabe et al., 2014)

2. बायोफर्मेटेड फूड : चीज़, पनीर, योगर्ट, फर्मेटेड कॉर्न, दूध एवं दूध से बने उत्पाद में विटामिन बी-12 प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। उपर्युक्त प्राकृतिक स्रोंतो में विटामिन बी 12 अधिकतम मात्रा में एनिमल सौर्स में पाया जाता है एवं पौधों द्वारा परिष्कृत विटामिन बी12 की मार्केट में उपलब्धता की कमी है। (Watanabe et al., 2014) अत: भारतीय जनमानस को ध्यान में रखकर एवं विटामिन बी-12 के स्त्रोतों को देखते हुए पतंजलि ने बायोफर्मेटेड (कॉर्न/मक्के) विटामिन बी-12 को मोरिंगा (ड्रमस्टिक/सहजन) एवं अलोएवेरा एक्सट्रेक्ट के साथ विकसित किया है। यह प्रोडक्ट पूर्ण रूप से वेजेटेरियन एवं प्राकृतिक है।

सेवनविधि : एक कैप्सूल प्रतिदिन या चिकित्सकीय सलाह से सेवन करें।
पतंजलि न्यूट्रेला विटामिन बी-12 एवं अन्य मार्केट ब्रांड में तुलनात्मक अध्ययन :

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सारणी संख्या 02. मार्केट में उपलब्ध अन्य उत्पादों से तुलनात्मक अध्ययन

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निष्कर्ष : तुलनात्मक अध्ययनों के आधार ओर पतंजलि न्यूट्रेला विटामिन बी-12, एक वेजीटेरियन एवं नेचुरल प्रोडक्ट है।
प्रमाणीकरण (Certifications):

1. Allen, L.H., 2018. Efficacy and safety of vitamin B12 fortification. In Food Fortification in a Globalized World (pp. 255-261). Academic Press.

2. Awasthi, S., Kumar, D., Mahdi, A.A., Agarwal, G.G., Pandey, A.K., Parveen, H., Singh, S., Awasthi, R., Pande, H., TS, A. and Mahanta, B.N., 2022. Prevalence of specific micronutrient deficiencies in urban school going children and adolescence of India: A multicenter cross-sectional study. PloS one, 17(5), p.e0267003.

3. Azzini, E., Raguzzini, A. and Polito, A., 2021. A Brief Review on Vitamin B12 Deficiency Looking at Some Case Study Reports in Adults. International Journal of Molecular Sciences, 22(18), p.9694.

4. FSSAI File No. SS-T017/1/2022-Standarad-FSSAI [E4478}.

5. Godswill, A.G., Somtochukwu, I.V., Ikechukwu, A.O. and Kate, E.C., 2020. Health benefits of micronutrients (vitamins and minerals) and their associated deficiency diseases: A systematic review. International Journal of Food Sciences, 3(1), pp.1-32.

6. https://speciality.medicaldialogues.in/20-of-indian-population-is-deficient-in-vitamin-b12-metropolis-healthcare-study.

7. Mozafar, A., 1994. Enrichment of some B-vitamins in plants with application of organic fertilizers. Plant and Soil, 167(2), pp.305-311.

8.  Watanabe, F., Yabuta, Y., Bito, T. and Teng, F., 2014. Vitamin B12-containing plant food sources for vegetarians. Nutrients, 6(5), pp.1861-1873.

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