अनिद्रा और उसका प्राकृतिक-यौगिक समाधान
On
डॉ. शरली टेल्लस
पतंजलि अनुसंधान विभाग, पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार
हमें जीवन पर्यंत स्वस्थ रहने के लिए नींद अति आवश्यक है। राष्ट्रीय निद्रा संस्थान के अनुसार एक व्यक्ति के शरीर के विभिन्न कार्यों को सुचारु रूप से चलाने के लिए निद्रा की भूमिका महत्वपूर्ण है।
-
निद्रा हमारे हदय को स्वस्थ रखती है।
-
तनाव घटाती है।
-
शरीर की उत्तेजना को कम करती है।
-
हमें सक्रिय बनाती है।
-
हमारी याद्दाश्त को बढाती है।
-
वजन को नियंत्रित करने में मदद करती है।
-
रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।
-
अवसाद के खतरे को कम करती है
-
हमारे शरीर को पुन: ऊर्जान्वित करती है।
निद्रा की पांच अवस्थायें हैं, इसके दो चरणों में प्रथम चरण को NREM (Non Rapid Eye Movement) कहते हैं तथा द्वितीय को REM (Rapid Eye Movement) कहा जाता है, निद्रा की पांच अवस्थाओं में से चार अवस्थायें हृक्रश्वरू के अंतर्गत आती हैं व पॉचवी अवस्था क्रश्वरू के अंतर्गत आती है।
क) प्रथम अवस्था: यह निद्रा की प्रांरभिक अवस्था है। इस अवस्था में अपेक्षाकृत हल्की नींद शामिल है तथा निद्रा की इस अवस्था को जाग्रत अवस्था व निद्रा अवस्था के बीच की स्थिति भी माना जाता है। इस अवस्था का काल 5-10 मिनट तक का होता है।
ख) द्वितीय अवस्था: निद्रा की इस अवस्था में शरीर का तापमान घटना शुरू हो जाता है तथा हदय गति कम होनी प्रारम्भ हो जाती है। यह काल लगभग 20 मिनट तक का होता है।
ग) तृतीय अवस्था: हल्की नींद से गहरी नींद में परिवर्तित होने की अवस्था ही तृतीय अवस्था है।
घ) चतुर्थ अवस्था: इस काल में व्यक्ति गहरी निद्रा में होता है। यह लगभग ३० मिनट तक की हो सकती है। निद्रा की इस अवस्था में ही सोते समय बिस्तर पर ही पेशाब करना तथा नींद में चलना आदि प्रक्रियायें होती है।
ड) क्रश्वरू (Rapid eye movement): यह निद्रा की पाँचवी अवस्था है, अधिकांश स्वप्न इसी अवस्था में दिखाई देते हैं। निद्रा की इस अवस्था में श्वसन दर और मस्तिष्क की क्रियाशीलता बढ़ जाती है तथा मांसपेशियाँ और अधिक शांत।
अनिद्रा की अवस्था में
बहुत से लोग पर्याप्त नींद न आने की शिकायत करते है। नींद की कमी से आपके दिन भर की कार्यशीलता, संतुलन, भूख तथा रोग प्रतिरोधक तंत्रो पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। जो कि कई बीमारियों के होने के खतरे को और भी बढ़ा देता है। अधिक मात्रा में नींद भी हदय संबंधित बीमारीयों, मधुमेह, मोटापा और स्मृति संबंधित रोगों के होने के खतरे को बढ़ा देती है। इसलिए हमे अपने स्वास्थ्य को बनाये रखने के लिए पर्याप्त नींद की आवश्यकता होती है। उम्र के अनुसार कितनी नींद आवश्यक है इसका विवरण तालिका में दिया गया है।
आयु और निद्रा का अनुपात
यदि हम नियमित रूप से रात्रि में अच्छी व पर्याप्त नींद नहीं ले पाते, तो उम्र के तेजी से बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है। तथा व्यक्ति इसके साथ-साथ घबराहट व बेचैनी का अनुभव करता है, जबकि नींद के दौरान हमारा शरीर कोशिकाओं की मरम्मत करता है तथा जहरीले पदार्थों को शरीर से बाहर निकालता है। इस प्रकार हमें 6-8 घटे की नींद आवश्यक रूप से लेनी चाहिए।
योगाभ्यास एक समाधान
यदि आप निद्रा संबधी समस्याओं से पीड़ित है जैसे: नींद की कमी (sleepless ness) तथा नींद का ना आना आदि (Insomnia) तो योगाभ्यास इसके समाधान के लिए एक साधन हो सकता है। योगाभ्यास रक्त परिसंचरण को बढ़ाता है। हमारे तंत्रिका तंत्र को संतुलित करता है तथा शरीर से जहरीले पदार्थों को निकालकर शरीर को ऊर्जान्वित करता है । नियमित योगाभ्यास कई बीमारीयों जैसे नींद का न आना तथा असमय नींद जैसी परेशानियों को ठीक करने में उपयोगी है योग दिन भर के तनाव से मुक्ति दिलाकर रात्रि में अच्छी नींद दिलाने में सहायक है। जो योगासन गहरी शिथिलता तथा जागरूकता के साथ किये जाते हैं, वे मस्तिष्क को शांत करने वाले रसायनों को स्थाापित करने में सहायक होते है यह अति आवश्यक है कि अपनी क्षमतानुसार किसी भी आसन की पूर्ण स्थिति में पहुंचकर गहरी श्वास-प्रश्वास तथा शिथिलता से आप को उसी अवस्था में बनाये रखना चाहिए । प्राणायाम को अभ्यास भी Insomnia के लिए बहुत उपयोगी है। योग का अभ्यास हमेशा अनुभवी शिक्षक के देख-रेख में ही करें।
संतुलित जीवन शैली
जीवनशैली तथा निद्रा एक दूसरे पर निर्भर है, खराब जीवनशैली आपकी निद्रा की गुणवक्ता को प्रभावित करती है तथा खराब निद्रा आपकी जीवनशैली को प्रभावित करती है।
जीवनशैली में परिवर्तन एक प्रक्रिया है जिसमें समय लगता है। यदि एक बार हम परिवर्तन के लिए तैयार भी हो जाते है, फिर भी इसका निरन्तर अनुसरण करना मुश्किल होता है। नीचे जीवनशैली में कुछ परिवर्तन की सलाह दी गयी है जोकि अच्छी नींद के लिए आवश्यक है।
-
सोने का समय सुनिश्चित करें।
-
सोने के अनुकूल शांतिपूर्ण वातावरण बनायें
-
यह सुनिश्चित करें कि बिस्तर आरामदायक हो
-
नियमित रूप से व्यायाम करें।
-
सोने के पूर्व कॉफी, चाय या ऊर्जा प्रदान करने वाले पेय पदार्थों के सेवन से बचें।
-
रात्रि के समय हल्का भोजन लें
-
धुम्रपान से बचे।
-
बिस्तर पर सोने के लिए जाने से पहले अपने शरीर को शिथिल करें।
-
अपनी चिंताओं से अपने आपको दूर रखें।
-
बिस्तर पर चिंताओं से बचें तथा मन व शरीर को शांत रखें।
संतुलित आहार जरूरी -भोजन की भी एक बहुत बड़ी भूमिका है-अच्छी नींद लेने में स्वास्थ्यवर्धक भोजन शरीर की स्वस्थ कोशिका के निर्माण में और उनके र्यों को सुचारू रूप से करने में मदद करता है। नीचे कुछ आहार दिये गये हैं, जो अच्छी नींद के लिए सहायक है।
Complex Carbohydrate:
पूर्ण अनाज की रोटियाँ: अन्न brownraice साधारण carbohydrade से बचें जैसे मिष्ठान cake, cookies, pastries तथा अन्य चीनी से बना भोज्य पदार्थ serotorin level को घटाता है तथा निद्रा में बाधक है।
Heart healthy foods: Unsaturated fats जैसे अलसी का तेल, सोयाबीन, अखरोट तथा सूर्यमुखी का तेल ना केवल हदय को स्वस्थ बनाता है, बल्कि यह serotorim level के स्तर को भी बढ़ाता है। हमें saturated तथा Transfats से निर्मित भोज्य पदार्थों को खाने से बचना चाहिए। जैसे french fries potato chips और विभिन्न प्रकार के उच्च वसा से निर्मित Snach foods आदि।
Beverages: कुछ पेय पदार्थ निद्रा को बढ़ा भी सकते हैं तथा इसे घटा भी सकते हैं, सोने से पूर्व दूध या हर्बल टी अच्छा पेय हो सकता है।
Fresh herbs: स्वस्थ औषधियाँ शरीर को शांत रखने में सहायक होती है। उदाहरण के तौर पर sage एक प्रकार की सुगन्धित वनस्पति है। जबकि हमें काली मिर्च या लाल मिर्च के सेवन से रात्रि में बचना चाहिए क्योंकि ये शरीर को उत्तेजित करते है।
अच्छी नींद के अन्य तरीके
-
कुछ अन्य तरीके जो हमें अच्छी नींद लाने मे सहायक हो सकते हैं।
-
हमें देर शाम के वक्त भस्त्रिका प्राणायाम का अभ्यास नहीं करना चाहिए। इस प्राणायाम के अभ्यास से बहुत अधिक ऊर्जा उत्पन्न होती है, जो कि निद्रा के आने में बाधक होती है।
-
हमें रात्रि के समय उत्तेजक व डराने वाले टी.वी कार्यक्रमों को देखने से बचना चाहिए, क्योंकि इनका विचार पूरे रात भर दिमाग में घूमता रहता है। इसके स्थान पर हल्का संगीत जैसे मंत्रोच्चारण सुनना या किताब पढ़ना नींद को लाने में सहायक हो सकता है।
-
हमें अपने सोने की एक शैली बनानी चाहिए। दिन में किसी भी समय सोना उपयुक्त नहीं हैं। यह हमारे बायोलॉजिकल क्लॉक को अव्यवस्थित करता है। आदर्श रूप से दोपहर में आधे घंटे सोना और रात्रि में 8 घटे सोना एक अच्छा अभ्यास है।
-
हमें रात्रि में सोने से पहले अपने दिन भर किये गये कार्यों का आत्मनिरीक्षण करना चाहिए तथा संतुष्टि स्तर तक बिस्तर को साफ कर लेना चाहिए।
-
हमें 8.30 पर रात्रि का भोजन ग्रहण कर लेना चाहिए तथा रात्रि के भोजन व सोने के बीच में २ घंटे का अन्तर रखना चाहिए।
-
यदि आपका अपने परिवार में किसी से भी वाद-विवाद हो गया हो तो सोने के पूर्व इसे सुलझा लेना चाहिए।
-
हमें रात्रि में उत्तेजक पदार्थों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। विशेषकर तब जब आप नींद न आने जैसी बीमारी से ग्रासित हों।
-
इस प्रकार हम नियमित योगाभ्यास जीवनशैली व भोजन की आदतों में परिवर्तन लाकर नींद की गुणवत्ता व परिमाण में वृद्धि कर सकते हैं तथा स्वस्थ, शांतिप्रद, क्रियाशील जीवन के अधिकारी बन सकते हैं।
लेखक
Related Posts
Latest News
01 Dec 2024 18:59:48
योग प्रज्ञा योग - योग जीवन का प्रयोजन, उपयोगिता, उपलब्धि, साधन-साधना-साध्य, सिद्धान्त, कत्र्तव्य, मंतव्य, गंतव्य, लक्ष्य, संकल्प, सिद्धि, कर्म धर्म,...



