पतंजलि परिसर में धूमधाम से मना गुरुपर्व हजारों साधकों ने लिया पूज्यवर से आशीर्वाद

पतंजलि परिसर में धूमधाम से मना गुरुपर्व हजारों साधकों ने लिया पूज्यवर से आशीर्वाद

हरिद्वार, 09 जुलाई, 2017 : पतंजलि योगपीठ में गुरुपर्व हर्षोल्लास पूर्ण वातावरण में मनाया गया। इस अवसर पर आचार्यकुलम के छात्र-छात्राओं, उनके शिक्षकगण, पतंजलि विश्वविद्यालय के शिक्षक, प्रतिकुलपति एवं अधिकारियों ने अपने छात्र-छात्राओं सहित पूज्यवर का आशीर्वाद लिया तथा पतंजलि की सेवाव्रती बहिनों एवं भाईयों तथा पतंजलि वैदिक कन्या गुरुकुलम्, पतंजलि गुरुकुलम् के छात्र-छात्राओं ने अपने पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज को अपने-अपने श्रद्धासुमन अर्पित किये तथा जीवन उत्थान का आशीर्वाद लिया। इसके अतिरिक्त पतंजलि में सेवारत कर्मयोगियों ने भी पूज्यवर का आशीर्वाद लिया।
गुरुपर्व का कार्यक्रम प्रात:वेला में योगाभ्यास एवं दिव्य यज्ञाहुतियों से प्रारम्भ हुआ, तत्पश्चात पूज्यवर ने देश भर से गुरुपर्व पर पधारे हजारों साधकों को गुरुपर्व की शुभकामनायें दीं तथा अपने उद्बोधन में कहा संत, आचार्य या गुरु दिव्य चेतना के जिस उच्च स्तर पर जीते हैं या जीवन मुक्त अवस्था में रहते हुए जो उपदेश देते हैं, यदि जीवन चेतना के उसी स्तर से हम स्वयं को जोड़ दें, तो हम उन्हीं का अनुसरण करके वही करने लगेंगे जो संत कर रहे हैं और हमारा जीवन भी संतों की तरह पूर्ण रूप से रुपान्तरित हो जायेगा।
पतंजलि योगपीठ-2 स्थित योगभवन में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर उन्होंने कहा कि गुरु या साधु-संत के साथ मन, बुद्धि, वाणी, व्यवहार एवं संकल्प से एकाकार हो दिव्य चेतना के साथ जीवन जीना ही उनके सच्चे दर्शन को आत्मसात करना है। इस अवसर पर पूज्य स्वामी जी ने अपने गुरुवर के साथ तीन दिन से चल रहे हाम्रो स्वाभिमान न्यास के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में भागीदार शिविरार्थियों को विदाई आशीर्वाद देकर सम्मेलन का समापन किया।
गुरुपर्व पर स्वामी जी महाराज ने भी अपने गुरुवर आचार्य प्रद्युम्न जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके उपरान्त स्वामी जी महाराज ने शिविरार्थियों को गुरु की महिमा से परिचित कराते हुए कहा कि गुरु मात्र एक व्यक्ति नहीं, अपितु जीवन की पूर्णता की दिशा में बहने वाले व्यक्तित्व का प्रवाह है। उन्होंने गुरुपर्व पर व्यक्तित्व के दिव्यकर्म की ओर जीवन के रूपांतरण हेतु अपने चरित्र, चिंतन व व्यवहार को श्रेष्ठ बनाने तथा समाज कल्याण की दिशा में जीवन लगाने का संकल्प दिलाते हुए कहा कि अपने कर्म को दिव्य बनाकर सभी नागरिक भावी राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।
स्वामी जी ने कहा कि पतंजलि योगपीठ ऋषियों की प्राचीन व्यवस्था का अनुसरण करते हुए आचार्यकुलम् के माध्यम से छात्र-छात्राओं की बाल्यावस्था से ही उन्हें गुरुकुलीय व्यवस्था में ढाल रही है। आचार्यकुलम् न केवल छात्र-छात्राओं को आधुनिक शिक्षा में पारंगत कर रहा है, अपितु ऋषि परम्परा से उन्हें बौद्धिक, मानसिक व आध्यात्मिक रूप से भी सुदृढ़ बना रहा है।
आचार्यकुलम् के छात्र-छात्रओं ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से गुरुवर के प्रति अपनी श्रद्धा भावनायें प्रेषित कीं।
जबकि पतंजलि योगपीठ के महामंत्री श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने देवप्रयाग के पतंजलि सेवाश्रम मूल्यागांव में पहुंचकर वहां पढ़ रहे आपदा प्रभावित अनाथ बच्चों के बीच गुरुपर्व मनाया।

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