मेरे लिए दृष्टि आई ड्रॉप एक चमत्कारी औषधि बनी
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मैं रक्षा मंत्रालय ऑर्डनेन्स फैक्ट्री अम्बाझारी नागपुर का आई.ओ.एस.एस. एण्ड सं. महा प्रबंधक सेवानिवृत अधिकारी हूँ। मैं 50 वर्ष की उम्र से पढ़ने का चश्मा प्रयोग करता आ रहा हूँ किन्तु कोई आँखों की बीमारी नहीं थी।
मैं अपनी आँखों के रूटीन चेकअप के लिए नागपुर के प्रमुख आँख अस्पताल 'माहात्मे आई बैंक एण्ड आई हॉस्पिटल नागपुर में 28 मई 2011 (रजिस्ट्रेशन, 303519) को दिखाया। पूरी तरह चेक करने के बाद डॉक्टर ने बताया कि आपके आँख में कैट्रेक्ट/ मोतियाबिंद शुरू हुआ है। अत: 5-6 माह के अन्दर आप को मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराना पड़ेगा। उन्होंने मुझे पुराने चश्मा पहनने की सलाह दी तथा कई प्रकार की दवाईयाँ-आई ड्रॉप लिखे और बाद में पुन: दिखाने को कहा।
मैंने इन अंग्रेजी/ एलोपैथी दवाओं का प्रयोग न कर पतंजलि का 'दृष्टि आई ड्रॉप डालना शुरू किया। चार महीने तक पतंजलि की 'दृष्टि’ दवा डालने के बाद पुन: उसी आई हॉस्पिटल में 26 सितम्बर 2011 को दिखाया। डॉक्टर ने फिर से पूरी तरह देखा पर उन्हें मोतियाबिंद नहीं मिला। उन्होंने 2-3 बार चेक करने के बाद बताया कि अब आपको मोतिया नहीं है। मैंने उन्हें दृष्टि आई ड्रॉप के विषय में बताया।
मेरा पुराना चश्मा फरवरी 2015 में मेरे गांव मीरगंज, गोपालगंज बिहार में भूल से छूट गया। मैंने 23 फरवरी 2015 को पटना में आई.जो.जी.आई.एम.एस. हॉस्पिटल में अपनी आँख चेक कराया। चेकअप के बाद डॉक्टर ने बताया कि आपकी आँख में मोतिया शुरू हुआ है। उन्होंने चश्मा का नम्बर देकर मुझे सस्ता चश्मा बनवाने की राय दी और कहा कि ६ माह के अन्दर आपको मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराना पड़ेगा।
मैंने फिर से पटना के पतंजलि चिकित्सालय से 'दृष्टि’ ड्रॉप खरीद कर डालना शुरू किया। बिहार से भेरावल गुजरात मार्च में आने पर यहाँ के पतंजलि चिकित्सालय के वैद्य ने दृष्टि डालने के साथ-साथ महात्रिफलादि घृत लेने का सुझाव भी दिया तथा मैंने २ अप्रैल 2015 से इसको लेना भी शुरू कर दिया। मुझे उम्मीद है कि मुझे पुन: ऑपरेशन की जरूरत नहीं पड़ेगी। मेंरी दृष्टि में पतंजलि की 'दृष्टि’ आई ड्रॉप आंखों के लिए पूर्ण प्रमाणिक औषधि बनकर उभर रही है।
भवदीय,
जी.एन. सिंह
आई.ओ.एफ.एस. (भू.पू.)
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