अनुभूति आपकी

अनुभूति आपकी

योग-प्राणायाम ने किया रोगमुक्त, पाया स्वस्थ जीवन

रम पूज्य स्वामी जी महाराज, मैं शशि परियानी हूँ। मुझे एक वर्ष पहले चिकनगुनिया हुआ था, जिसकी वजह से मेरे पूरे जोड़ों में अत्यधिक दर्द था। मुझे पलंग से नीचे उतरने में भी दिक्कत होती थी तथा आटा तक नहीं गूँथ पाती थी। सभी कार्य मेरे पति को करने पड़ते थे। अभी कुछ माह पहले ही मैंने पतंजलि की योग कक्षा में योग व प्राणायाम सीखा तथा अब मैं इसे प्रात: नियमित करती हूँ। साथ ही मैं सायंकालीन योग कक्षा जो कि महिलाओं की कक्षा है वहाँ पर बहनों के सानिध्य में प्रतिदिन सायंकाल योग-प्राणायाम करने भी जाती हूँ। अब मैं पूर्णरूप से स्वस्थ हूँ। स्वामी जी आपने योग के माध्यम से रोगमुक्ति की नई दिशा दिखाई है, इसके लिये बहुत-बहुत धन्यवाद व आभार।
भवदीय,
शशिपरियानी, २ क्र २८, तलवंडी, कोटा (राजस्थान)

असाध्य रोग ग्रेनुलोमा अब लाईलाज नहीं

तंजलि स्वरूप परम पूज्य योगऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज और युग धन्वन्तरि पूज्य आचार्य बालकृष्ण जी महाराज को शत्-शत् नमन। मैं रूपराज उपाध्याय, कैलाली, नेपाल का निवासी हूँ। मेरी बेटी निरञ्जना उपाध्याय को ग्रेनुलोमा (कैल्सिफाइड लीजन इन राइट फ्रंटर लो) नाम की असाध्य बीमारी थी। इसकी पुष्टि नेपाल में एमआरआई से हुई। वह दो वर्ष से समय-असमय बेहोश हो जाती थी। बेहोशी से पहले तेज आवाज (चिल्लाहट के साथ) देती थी। बेटी के सिर में 24 घण्टे तीव्र वेदना होती रहती थी। बहुत से डॉक्टरों के पास गया किन्तु निराशा ही हाथ लगी। हम पतंजलि योगपीठ में 10 फरवरी 2016 को पहली बार आये और आशा की किरण के साथ प्रवेश किया। मैंने दुसाध्य रोग से ग्रसित अपनी बेटी को डॉ. एस.सी. मिश्रा को दिखाया। डॉ. साहब ने जांच करके स्वस्थ होने का विश्वास दिलाया, साथ ही कुछ औषधियां लेने को कहा। मैं चिकित्सक के निर्देशानुसार कायाकल्प क्वाथ, सर्वकल्प क्वाथ, हीरक भस्म, ताम्र भस्म, अभ्रक भस्म, शिला सिन्दूर, गिलोय सत्, गोदंती भस्म, मुक्ता पिष्टी, प्रवाल पंचामृत, स्वर्ण वसन्तमालती रस, मेधावटी, आरोग्यवर्धनी वटी, कांचनार गुग्गुल, वृद्धि वाधिका वटी, कैशोर गुग्गुल आदि औषधियों को निर्धारित क्रम में सेवन कराने लगा।
साथ ही उन्होंने बादाम रोगन तेल दोनों नासिका पुट में डालने की सलाह दी। हमारी पुत्री ने इसका पूर्ण पालन किया। दूसरी बार लगभग तीन माह बाद पुन: आया, तो रोग में 90 प्रतिशत आराम था। इसके बाद एमआरआई में 17 सितम्बर 2016 को चेकप कराया। पुन: तीसरी बार पतंजलि आया, तब तक सिर दर्द में 100 प्रतिशत फायदा मिल चुका था तथा चिल्लाहट आदि की कोई शिकायत नहीं बची थी। रिपोर्ट के अनुसार भी मेरी पुत्री की स्थिति सामान्य दिखाई दी, अब वह पूर्णत: स्वस्थ है। 
भवदीय,
रूपराज उपाध्याय, कैलाली, नेपाल
 

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